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Hi

31/08/2014

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31/08/2014

.

17/03/2014

Happy holi friends.

How to Unlock Dongle:Do you want to know?HOW toUse any Sim in Modem (dongel) like airte,reliance gsm,aircel gsm withoutu...
14/03/2014

How to Unlock Dongle:

Do you want to know?HOW to
Use any Sim in Modem (dongel) like airte,reliance gsm,aircel gsm without
unlocking it.Tag your friends and let them also know.
We all know that, we cannot use
any sim in any modem without
unlocking the modem. But its now
possible by using Nokia PC suite.
Follow the Steps :
1) Insert the sim card inside the modem
and connect it to the PC.
2) It will display the message as
invalid sim,enter code or any thing else ignore that message
and Open the Nokia PC suite.
3) Click on Connect to Internet
option in PC suite.
4) Goto Configure. Select your
data card modem,and make operator apn setting as the same when
we use nokia mobile phone to connect.
5) Finish the set up and connect
to internet through PC suite.
6) You are done
without any unlocking.
Note: it may not be useful to some dongles
try and reply!

Internet speed across theworld..!!!
14/03/2014

Internet speed across the
world..!!!

पासर्वड को सेफ रखने का सबसे आसान तरीका है उसे समय समय पर बदलते रहें। लेकिन हैकरों को कोई भरोसा नहीं इसलिए आपको हमेशा सचे...
14/03/2014

पासर्वड को सेफ रखने का सबसे आसान तरीका है उसे समय समय पर बदलते रहें। लेकिन हैकरों को कोई भरोसा नहीं इसलिए आपको हमेशा सचेत रहना चाहिए। अक्‍सर लोग पासवर्ड डालते समय सावधानी नहीं बरतते जिससे कभी कभी उनका पासवर्ड हैक हो जाता है।

वैसे ज्‍यादातर साइटों जैसे फेसबुक, जीमेल के अलावा ट्विटर में कई प्राइवेसी सेंटिंग ऑप्‍शन रहते है जिन्‍हें आप अपनी सुविधा के अनुसार सेट कर सकते हैं। फिर भी किसी भी साइट में पासवर्ड सेट करते समय हमें थोड़ी सावधानी बरतनी चाहिए। हम आपको 5 ऐसी टिप्‍स देंगे जिन्‍हें फॉलो करके आप अपनी पासवर्ड को सुरक्षित रख सकते हैं।

पढ़ें: जीरों बैलेंस होने पर भी कैसे करें मैसेज और कॉल

लम्‍बा पासवर्ड चुनें: आपका पासवर्ड कम से कम 15 कैरेक्‍टर का होना चाहिए क्‍योंकि 15 शब्‍दों के पासवर्ड का हैक करना काफी मुश्‍किल होता है।

कभी भी नाम से पासवर्ड न रखें: पासवर्ड डालते समय कभी भी मोबाइल नंबर, लाइसेंस नंबर के अलावा जन्‍मदिन की तारीख का प्रयोग न करें क्‍योंक‍ि अक्‍सर लोग इसी तरह के पासवर्ड का प्रयोग करते हैं।

पासवर्ड में शब्‍दों के साथ नंबर भी प्रयोग करें: जब भी अपना पासवर्ड लिखें उसमें शब्‍दों के साथ नंबरों का प्रयोग भी करें जैस g2it4tk7 इस तरह से आप अपना पासवर्ड और मजबूत बना सकते हैं।

किसी से भी अपना पासवर्ड शेयर न करें: कभी भी अपना पासवर्ड शेयर न करें और अगर मजबूरी में आपको अपना पासवर्ड बताना भी पड़े तो उसे तुरंत बदल दें।

साथ रखें टेक्नो सेफ्टीदिल्ली समेत पूरे देश का दिल दहला देने वाली 16 दिसंबर, 2012 की घटना को एक साल हो गया है। इस हादसे क...
14/03/2014

साथ रखें टेक्नो सेफ्टी

दिल्ली समेत पूरे देश का दिल दहला देने वाली 16 दिसंबर, 2012 की घटना को एक साल हो गया है। इस हादसे के बाद घर के बाहर लेडीज़ सेफ्टी को लेकर चिंताएं काफी बढ़ गईं। इस दिशा में सरकार और पुलिस की मदद के अलावा खुद कदम उठाने भी जरूरी हैं। इस काम में अगर तकनीक की मदद ली जाए, तो यह बहुत कारगर साबित हो सकती है। महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े कुछ ऐसे ही तकनीकी पहलुओं से रू-ब-रू करा रहे हैं अमित मिश्रा :

ऐप्स से सेफ्टी
मोबाइल ऐप्स सेफ्टी के मामले में बड़ी भूमिका अदा कर रहे हैं। बाजार में दो तरह के सेफ्टी ऐप्स मौजूद हैं :
1. जोरदार आवाज के साथ आस-पास वालों को अलर्ट कर देने वाले।
2. पहले से फीड नंबरों पर इमर्जेंसी में लोकेशन और मेसेज भेजने वाले।

सुपर सेफ्टी ऐप्स
Damini
यह ऐप 16 दिसंबर 2012 गैंगरेप की घटना के बाद डिवेलप किया गया। अगर यह ऐप आपके मोबाइल में है, तो किसी भी खतरे के वक्त इसके जरिए आपके रजिस्टर्ड नंबरों पर मेसेज चले जाएंगे। थोड़ी-थोड़ी देर में आपकी जीपीएस लोकेशन भी इन नंबरों तक जाती रहेगी। इतना ही नहीं, ऐप के एक बार ऐक्टिवेट होने के बाद यह जगह की फोटो खींचना भी शुरू कर देता है और इन्हें रजिस्टर्ड नंबरों पर तो भेजता है, साथ ही क्लाउड पर सेव भी करता जाता है। इसके बाद अगर मोबाइल फोन बंद हो जाए या तोड़ दिया जाए, तो भी मोबाइल से विडियो और कॉल डिटेल निकाली जा सकती है।
साइज : 1.1 MB
प्लैटफॉर्म : ऐंड्रॉयड
कीमत : फ्री

Circle of 6
यह वैसे तो खासतौर पर कॉलेज जाने वाली स्टूडेंट्स को ध्यान में रख कर डिजाइन किया गया है, लेकिन यह सभी महिलाओं के लिए यूजफुल साबित हो सकता है। किसी भी परेशानी की स्थिति में बस एक टैप करते ही आपके दोस्तों तक मदद का मेसेज चला जाएगा। यह ऐप हिंदी में भी उपलब्ध है और इसमें दिल्ली के हेल्पलाइन नंबर्स भी पहले से फीड हैं।
साइज : 12 MB
प्लैटफॉर्म : ऐंड्रॉयड
कीमत : फ्री

bSafe
इस ऐप की मदद से आप संकट की स्थिति में फैमिली मेंबर या करीबी लोगों को अलर्ट कर सकते हैं। इसमें फैमिली मेंबर्स या करीबी लोगों के नंबर्स फीड करने होते हैं, जिन्हें जरूरत पड़ने पर एक बटन दबाते ही मेसेज चला जाएगा। साथ ही, अपने आप कॉल भी चली जाएगी। इसका रिस्क मोड ऑन करके आप अपनी जीपीएस लोकेशन को दिए हुए नंबर से शेयर कर सकते हैं।
साइज : 5.9 MB
प्लैटफॉर्म : ऐंड्रॉयड, आईओएस और ब्लैकबेरी
कीमत : फ्री

Scream Alarm!
इस ऐप की सरलता ही इसकी खासियत है। यह तेज आवाज निकालने वाला ऐप है। किसी भी तरह का खतरा होने पर आप एक बटन दबाकर औरत की चीख जैसी तेज आवाज पैदा कर सकते हैं। यह आवाज आस-पास के लोगों को अलर्ट कर देती है।
साइज : 951 KB
प्लैटफॉर्म : ऐंड्रॉयड
कीमत : फ्री

SafetiPin
यह महिलाओं की सुरक्षा को एक खास तरीके से सुनिश्चित करने की कोशिश है। यह एक ऐसा प्लैटफॉर्म है, जहां लोग अपने इलाके की ऐसी जगहों के बारे में जानकारी देते हैं, जो महिलाओं के लिहाज से सेफ नहीं हैं। लोग इस ऐप पर उन जगहों की तस्वीरें शेयर कर सकते हैं और उन्हें सेफ्टी के लिहाज से रेट कर सकते हैं। ऐप यह भी जानने में मदद करता है कि कौन-सी जगह रात में या दिन के किसी पहर में सेफ नहीं है।
साइज : 6.4 MB - 20.3 MB
प्लैटफॉर्म : आईओएस, ऐंड्रॉयड
कीमत : फ्री

मोबाइल-टैब को बनाएं हथियार
अब मोबाइल ही नहीं, कॉलिंग टैब्स भी महिला सेफ्टी के हथियार साबित हो सकते हैं। वह जमाना और था, जब शौकीनों के लिए ही स्मार्टफोन हुआ करता था। जिन हाथों में फीचर फोन नजर होते थे, अब स्मार्टफोन नजर आने लगे हैं। इनका फायदा यह है कि महिलाएं कई तरह के ऐप्स के जरिए सुरक्षा की गुहार लगा सकती हैं।

कैसे तय करें टेक्नो सेफ्टी
तकनीक की मदद से सेफ्टी तय करने के कई उपाय हैं, जिन्हें अपनाकर महिलाएं सतर्क रह सकती हैं और मदद मांग सकती हैं। बस जरूरत इस बात की है कि इन तकनीकी टूल्स को बेहतर तरीके से इस्तेमाल करना सीखा जाए।

मैप को बनाएं फ्रेंड
तकनीक ने दुनिया को एक छोटे गांव में तब्दील कर दिया है। अब दुनिया भर का नक्शा आपके मोबाइल में है। वैसे तो मैप्स के कई तरह के ऐप मौजूद हैं लेकिन गूगल मैप से बढ़कर कुछ नहीं। महिलाओं के लिए बेहतर होगा कि अगर पहली बार किसी रास्ते पर जा रही हैं, तो गूगल मैप के जरिए रास्ते का अंदाजा ले लें। ऐसा करके लगने वाले वक्त का अंदाजा पहले से लगा सकते हैं। अगर रास्ते में कोई कंफ्यूजन हो तो ऑटो या टैक्सी वाले पर डिपेंड होने से अच्छा है कि अपने नैविगेशन ऐप का सहारा लें। गूगल मैप और नैविगेशन अब इतना स्मार्ट हो गया है कि आपको रूट मैप ट्रैफिक कंडिशन और कई ऑप्शंस के साथ दिखाता है।

सोशल मेसेजिंग से रहें कनेक्ट
वैसे तो सोशल मेसेजिंग ऐप्स गप-शप के काम ही आते हैं, लेकिन इनका बेहतर इस्तेमाल भी किया जा सकता है। सोशल मेसेजिंग ऐप्स खासतौर पर उस वक्त मददगार साबित हो सकते हैं, अगर आपके मोबाइल में बैलंस कम है और आप किसी खतरे में हैं। ऐसे में ये ऐप मदद मांगने का बेहतर साधन भी साबित हो सकते हैं।

करें लोकेशन शेयर
तकनीकी तेजी के मामले में आपको ब्राउज़र से भी मदद मिल सकती है। स्मार्टफोन और टैबलट्स के ब्राउजर आपको लोकेशन शेयर करने का ऑप्शन देते हैं। सेफ्टी के लिहाज से लोकेशन शेयर करना बेहतर ऑप्शन हो सकता है, कम-से-कम उस वक्त तो जरूर, जब आप अनजान माहौल में अकेले सफर कर रहे हों। ऐसे ऐप्स भी मौजूद हैं, जो आपकी लोकेशन को लगातार आपके चुने हुए दोस्तों और फैमिली मेंबर्स के साथ शेयर करते रहते हैं। याद रखें किसी परेशानी के हालात में ऐसा करना काफी कारगर साबित हो सकता है।

बैकअप रखें साथ
मोबाइल या दूसरे डिवाइस से मदद मिलने की भी सीमा है। ध्यान रहे कि पावर के बिना आपका मोबाइल किसी काम का नहीं है। स्मार्टफोन्स की बैटरी जल्दी खत्म हो जाती है और अगर आप उनका इस्तेमाल गाने सुनने या ऐसे ही किसी मनोरंजन के लिए करते हैं, तो इनकी बैटरी खत्म होना तय है। ऐसे में बेहतर होगा कि बैटरी बैंक साथ लेकर चलें। बाजार में पावर के हिसाब से 700 रुपये से 4000 रुपये के बैटरी बैंक मौजूद है, जिन्हें साथ लेकर चलने से बैटरी खत्म होने की टेंशन से बच सकते हैं।

अच्छे स्पीकर्स के साथ लें म्यूजिक का मजामैं अच्छे स्पीकर्स खरीदना चाहता हूं। मुझे किन बातों का ख्याल रखना होगा?- एक पाठक...
14/03/2014

अच्छे स्पीकर्स के साथ लें म्यूजिक का मजा

मैं अच्छे स्पीकर्स खरीदना चाहता हूं। मुझे किन बातों का ख्याल रखना होगा?
- एक पाठक

स्पीकर खरीदने से पहले अगर आपको कुछ टेक्निकल बातों का ज्ञान होगा, तो अच्छे स्पीकर खरीदने में मदद मिलेगी। इन बातों का पता होने पर आप स्पीकर की क्वॉलिटी के बारे में पता लगा सकते हैं।

Peak Power - यह स्पीकर की मैक्सिमम पावर के बारे में बताता है। इससे यह पता लगता है कि स्पीकर का मैक्सिमम लिमिट कितनी है। हालांकि स्पीकर इस लेवल से नीचे ही ऑपरेट करता है।

RMS power - यह वह वेल्यू है जिस पावर पर एक एमप्लीफॉयर नॉर्मल आउटपुट देता है। स्पीकर लेते समय हमें पीक पावर की जगह आरएमएस पावर पर ही ज्यादा ध्यान देना चाहिए।

Frequency Response - इस वेल्यू से हमें यह पता लगता है कि स्पीकर किस तरह की फ्रिक्वेंसी रेंज में काम करता है। यह रेंज जितनी ज्यादा होगी स्पीकर से अलग-अलग इंस्ट्रूमेंट्स की आवाज उतने ही अच्छे से सुनाई देगी।

Signal-To-Noise Ratio - यह एक रेश्यो होती है जिससे पता चलता है कि मिलने वाले सिग्नल को स्पीकर कितना संकुचित करता है। यह रेश्यो 100 DB (डेसीबल) से ज्यादा होनी चाहिए।

No. Of Drivers - आजकल कंप्यूटर के स्पीकर्स सबवूफर और ट्वीटर के साथ भी आते हैं। अच्छे स्पीकर्स में इन दोनों के लिए अलग ड्राइवर होता है जिससे साउंड अच्छा आता है।

Headphone और Aux Port - इनके होने से आपको काफी सहूलियत होगी और आप हैडफोन लगाकर आराम से म्यूजिक सुन सकते हैं।

किस तरह के स्पीकर लेने चाहिए :
अगर आप पार्टीज के शौकीन नहीं हैं और अकेले ही म्यूजिक सुनना पसंद करते हैं तो दो स्पीकर सिस्टम अच्छे रहेंगे। अच्छी कंपनी के स्पीकर आपको 800 से 1,000 रुपये तक की रेंज में मिल जाएंगे। अगर म्यूजिक का ज्यादा शौक रखते हैं तो 2.1 स्पीकर सिस्टम यानी दो स्पीकर और एक सबवूफर वाला सिस्टम ले सकते हैं। सबवूफर को फ्लोर और सैटलाइट स्पीकर्स को अपने डेस्क पर रख सकते हैं। ये स्पीकर 1,500 से 2,000 रुपये की रेंज में मिलते हैं।

Altec Lansing, Logitech, Creative कंपनी के स्पीकर्स अच्छे हैं। गेमिंग और मूवीज का मजा लेना चाहते हैं, तो कम-से-कम 5.1 स्पीकर सिस्टम लें। Logitech Z सीरीज के स्पीकर्स ले सकते हैं जोकि आपको औसतन 5,000 रुपये में मिल जाएंगे। इन स्पीकर्स में आपको Dolby Pro Logic, Dolby Pro Logic II, DTS आदि कई तरह के सटिर्फिकेशंस भी मिलते हैं। ये सभी लेबोरट्रीज के सटिर्फिकेशंस होते हैं जिससे आप स्पीकर्स की साउंड क्वॉलिटी के बारे में बेफिक्र हो सकते हैं।

अच्छे स्पीकर्स के साथ-साथ आपके कंप्यूटर में अच्छा साउंड कार्ड होना भी जरूरी है। अब पोर्टेबिलिटी का जमाना है जिसे देखते हुए Creative और Logitech हाई क्वॉलिटी पोर्टेबल ब्लूटूथ स्पीकर्स मार्केट में ला चुकी हैं। आप लैपटॉप, मोबाइल और टैब्लेट पीसी के साथ इनका भरपूर मजा ले सकते हैं। ये स्पीकर्स आपको 2,500 से 5,000 रुपये की रेंज में मिल जाएंगे।

इस साल गेम चेंजर बन सकती हैं ये 12 टेक्नॉलजीजवीइकल के रूप में कार का मतलब बदल देने से लेकर बीमारियों पर काबू पाने तक और ...
14/03/2014

इस साल गेम चेंजर बन सकती हैं ये 12 टेक्नॉलजीज

वीइकल के रूप में कार का मतलब बदल देने से लेकर बीमारियों पर काबू पाने तक और कंप्यूटर्स को मनुष्यों की तरह काम करने लायक बनाने से लेकर नए मटीरियल्स की खोज तक, टेक्नॉलजी लोगों की जिंदगी बदलती रहेगी और इकनॉमिक ग्रोथ को रफ्तार भी मुहैया कराती रहेगी। हरि पुलक्कत बता रहे हैं ऐसी 12 खास टेक्नॉलजीज के बारे में, जो साल 2014 के दौरान कुछ अहम इंडस्ट्रीज के काम-काज का ढर्रा बदल सकती हैं और लॉन्ग टर्म ग्रोथ की जमीन तैयार कर सकती हैं।

ज्यादातर इकनॉमिस्ट्स सोचते हैं कि लॉन्ग टर्म इकनॉमिक ग्रोथ के लिए टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन सबसे अहम चीज है। सोशल इंस्टिट्यूशंस की सोच और पॉलिसीज ऐसी होनी चाहिए, जिनसे ऐसे इनोवेशन को सहारा मिले। सुस्त इकनॉमिक ग्रोथ के साथ साल 2014 में कदम रखते हुए आइए उन टेक्नॉलजीज पर नजर डालें, जो दुनिया भर में तमाम अर्थव्यवस्थाओं को रफ्तार दे सकती हैं। ऐसी लिस्ट कभी भी संपूर्ण नहीं हो सकती और इस पर सवाल उठाए जा सकते हैं। हमारा मकसद संभावना और असर के लिहाज से अच्छी लिस्ट तैयार करना था। कुछ बातें तो किसी भी लिस्ट से छूट नहीं सकतीं। कुछ और ज्यादातर लिस्ट्स से बाहर ही रहेंगी। हालांकि कुछ टेक्नॉलजीज ऐसी हैं, जिनका दम-खम अभी साबित तो नहीं हो सका है, लेकिन अगर वे कामयाब हुईं, तो यकीनी तौर पर हालात बदल देंगी। तो इन सबको मिलाकर यह लिस्ट अगले एक दशक में कुछ अहम इंडस्ट्रीज की सूरत का अंदाजा दे सकती है, यानी छोटी अवधि में काम-काज में होने वाले बदलाव और लॉन्ग टर्म में ग्रोथ की पिक्चर। अपने असर के जरिए ये टेक्नॉलजीज एक और कहानी भी आपको बताती हैं। तकनीक की दुनिया के आपस में जुड़े होने की कहानी। तो देखिए कौन सी हैं ये 12 टेक्नीक...

इन 4 पर है पुख्ता यकीन
पहले हम 4 ऐसी टेक्नॉलजी के बारे में बता रहे हैं, जो हमारे दरवाजों पर दस्तक दे रही हैं और मार्केट में धूम मचाने को तैयार हैं। एक साथ मिलाकर इन चार तकनीक के चलते 10 से 20 लाख करोड़ डॉलर की इंडस्ट्रीज का हुलिया अगले एक दशक में बदल सकता है।

आईटी और कंप्यूटिंग: SCAM
आईटी इंडस्ट्री की हिस्ट्री में काम-काज का ढर्रा बदल सकने की कुव्वत रखने वाली इतनी बड़ी ताकत कभी महसूस नहीं की गई थी। यह है सोशल, क्लाउड, ऐनालिटिक्स और मोबाइल यानी SCAM की दुनिया। अलग-अलग तरह की तकनीकों की मिली-जुली ताकत। पिछले कुछ वर्षों में SCAM की अलग-अलग तकनीकों का विकास हुआ है और अब इनके कॉम्बिनेशन से बड़ा असर पड़ने वाला है। मोबाइल फोन बड़ी तादाद में बिक रहे हैं और मोबाइल नेटवर्क्स मच्योर हो गए हैं। क्लाउड कंप्यूटिंग अब एक आइडिया भर नहीं रही और ऐनालिटिक्स इन सभी को बेहतरीन ढंग से एक सूत्र में पिरोकर ताकतवर पैकेज बनाती है।

2014 में ऐसा हो सकता है असर
- हॉस्पिटल्स अपने मरीजों से उनके घर में कनेक्ट होने की शुरुआत कर सकते हैं।
- बैंक कई नई मोबाइल सेवाओं की शुरुआत कर सकते हैं।
- रिटेलर्स SCAM का इस्तेमाल अपने स्टोर में ऑनलाइन एक्स्पीरियंस देने में कर सकते हैं।
- कारों में आपके कंट्रोल में रहते हुए इंटेलिजेंस का पहलू जुड़ सकता है

लाइफ साइंसेज ऐंड हेल्थकेयर: जीनोम सिक्वेंसिंग
मानव के डीएनए की पूरी तरह से डिकोडिंग अब तक की सबसे तेजी से डिवेलप होने वाली टेक्नॉलजी रही है। यह अब बड़े पैमाने पर कमर्शल यूज के लिए तैयार है, क्योंकि लागत प्रति जीनोम कुछ हजार डॉलर के लेवल तक आ गई है। पूरे जीनोम की सिक्वेंसिंग दो हफ्तों में हो सकती है। जल्दी ही यह कई बीमारियों से बचाव और उनके इलाज का आधार बन सकती है। कैंसर के मरीजों के लिए तो यह जीवन रक्षक बन सकती है। इस तकनीक की मदद से उम्मीद है कि कैंसर रोगियों को ट्यूमर के जेनेटिक आधार पर सही दवा दी जा सकेगी। हो सकता है कि आगे चलकर जीनोम सिक्वेंसिंग नवजात बच्चों के वैक्सिनेशन जितनी आम बात हो जाए।

2014 में ऐसा हो सकता है असर
- एक सप्ताह में ही पूरे जीनोम की सिक्वेंसिंग हो सकेगी।
- जीनोम सिक्वेंसिंग की तकनीक भारत में कमर्शल बेसिस पर लॉन्च हो सकती है।
- कैंसर के इलाज में जीनोम सिक्वेंसिंग का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल शुरू हो जाए।
- लोग यह पता लगाने के लिए जीनोम सिक्वेंसिंग कराने लगें कि उन्हें किसी रोग का खतरा तो नहीं है।

एनर्जी/ ट्रांसपोर्ट : इलेक्ट्रिक कार
टेस्ला मॉडल एस की अगुवाई में इलेक्ट्रिक कारों ने साल 2013 में अमेरिका में अच्छा सफर पूरा किया। साल 2014 में टेस्ला दूसरे देशों में भी पहुंचेगी। उम्मीद है कि होंडा, बीएमडब्ल्यू, जीएम, फोक्सवैगन जैसी दूसरी कंपनियां नए मॉडल्स लॉन्च करें। साल 2020 तक इलेक्ट्रिक कारों का मार्केट सधी रफ्तार से बढ़ने की उम्मीद है और उसके बाद इनका दबदबा कायम हो सकता है। साल 2014 के दौरान कुछ कारों से गियर बॉक्स की विदाई हो सकती है, बैटरियों का आकार छोटा हो सकता है और सिंगल चार्ज पर ज्यादा दूरी तक जाने की सहूलियत मिल सकती है। हो सकता है कि चार्जिंग टाइम भी कम हो जाए।

2014 में ऐसा हो सकता है असर
- लिथियम ऑयन बैटरी को चुनौती देने वाली तकनीक सामने आ सकती है।
- हो सकता है कि इलेक्ट्रिक कारें सिंगल चार्ज में 500 किलोमी़टर से ज्यादा की दूरी तय कर लें।
- भारत में नई इलेक्ट्रिक कारों की लॉन्चिंग होगी।
- इलेक्ट्रिक कारें अमेरिकी मार्केट में एक पर्सेंट से ज्यादा हिस्सेदारी हासिल कर लेंगी।

मैन्युफैक्चरिंग : इंटरनेट ऑफ थिंग्स यानी M2M
मशीनों के नेटवर्क के लिए एक शब्द इस्तेमाल किया जाता है M2M। यह एक-दूसरे से जुड़े सेंसर्स और मोटर्स का एक सेट होता है। एक का काम इन्फर्मेशन देना होता है और दूसरे का उस सूचना के आधार पर काम करना। M2M को लेकर काफी उत्साह है और साल 2014 में यह हकीकत की शक्ल लेनी शुरू कर देगी। इसका सबसे ज्यादा असर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में महसूस किया जाएगा। ग्लोबल सप्लाई चेंस में टाइमिंग का बेहद खास अहसास पैदा कर यह प्रॉडक्शन को बेहतर बना सकती है। यही वजह है कि इंटरनेट ऑफ थिंग्स को कभी-कभार इंडस्ट्री 4.0 भी कहा जाता है।

2014 में ऐसा हो सकता है असर
- SCAM का दायरा मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर तक फैल सकता है।
- सस्ते माइक्रोप्रोसेसर ्स तकरीबन हर चीज से जुड़ जाएं।
- मैन्युफैक्चरिंग कंपोनेंट्स में सेंसर लगने लगें।
- वेंडर्स एक साझा कम्यूनिकेशंस प्रोटोकॉल की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।

दमदार संभावना
अब हम चार ऐसी टेक्नॉलजीज के बारे में बता रहे हैं, जो कमर्शल मार्केट के लिए लगभग तैयार हैं और पूरी उम्मीद है कि साल 2014 में ये सामने आ जाएंगी।

आईटी एंड कंप्यूटिंग: कॉग्निटिव कंप्यूटिंग
कॉग्निटिव कंप्यूटिंग एक प्रोसेस है, जिसके जरिए कंप्यूटर्स टास्क पूरा करते हुए और मनुष्यों के साथ काम करते हुए मनुष्यों की तरह बर्ताव करना सीखते हैं। यह शब्द आईबीएम ने इससे कहीं ज्यादा पॉप्युलर शब्द आर्टिफिशल इंटेलिजेंस से इसे अलग दिखाने के लिए गढ़ा था। इसके पीछे सोच यह थी कि कॉग्निटिव कंप्यूटिंग में कुछ भी आर्टिफिशल नहीं है। आईबीएम का वॉटसन सबसे अडवांस्ड कॉग्निटिव कंप्यूटिंग प्लैटफॉर्म है। कुछ और को भी डिवेलप किया जा रहा है। इसमें मुख्यत: स्टार्ट-अप्स जुटी हुई हैं। लॉन्ग टर्म में असर डाल सकने वाले कुछ कदम सामने आ सकते हैं।

2014 में ऐसा हो सकता है असर
वॉटसन का इस्तेमाल कैंसर ट्रीटमेंट में ज्यादा होने लगे।
प्राइवेट कंपनियां वॉटसन प्लैटफॉर्म पर कुछ ऐप्लिकेशंस डिवेलप करें।
सही मायने में जो कॉग्निटिव कंप्यूटिंग हो सकती है, उससे पहले के चरण में कॉग्निटिव ऐनालिटिक्स का और विकास हो।
स्टार्ट-अप्स कुछ प्रॉडक्ट्स पेश करें, जो मुख्यत: कॉग्निटिव ऐनालिटिक्स पर आधारित हों।

लाइफसाइंसेज ऐंड हेल्थकेयर: पहने जा सकने वाले उपकरण
डिवेलप्ड मार्केट्स में पर्सनल हेल्थ मॉनिटिरंग का जोर बढ़ रहा है। भारत में भी अब लोग सोने, एक्सर्साइज के असर, हार्ट की हालत, प्रेग्नेंसी आदि पर नजर रखने लगे हैं। साल 2014 में इस दिशा में अहम प्रगति हो सकती है और हो सकता है कि पहने जा सकने वाले इन उपकरणों को अस्पतालों से जोड़ा जा सके। वियरेबल डिवाइसेज नेटवर्क को इंटरनेट ऑफ थिंग्स की तरह समझा जा सकता है। इस पर भी SCAM का असर होगा। इससे और साफ होता है कि आधुनिक तकनीकों की दुनिया किस तरह एक-दूसरे को प्रभावित कर रही है। वियरेबल डिवाइसेज सेहत पर नजर रखने के लिए ही नहीं हैं। मसलन, गूगल ग्लास।

2014 में ऐसा हो सकता है असर
जूनिपर रिसर्च के अनुसार, वियरेबल डिवाइसेज का मार्केट 1.5 अरब डॉलर का हो जाएगा।
अगर इन डिवाइसेज को अस्पतालों से जोड़ दिया गया तो हेल्थकेयर में नए दौर का आगाज होगा।
गूगल, ऐपल, माइक्रोसॉफ्ट और सैमसंग नॉन-मेडिकल वियरेबल डिवाइसेज लॉन्च करें।
वियरेबल डिवाइसेज में स्मार्टफोन के कुछ फंक्शंस शामिल किए जाएं।

एनर्जी ऐंड ट्रांसपोर्ट: न्यू बैटरीज
रिन्यूएबल एनर्जी का सेगमेंट तभी छलांग लगाएगा, जब बैटरी के मामले में बड़ी सफलता सामने आए। दुनिया इसकी लंबे समय से प्रतीक्षा कर रही है। हमें इलेक्ट्रिक कारों के लिए बेहतर बैटरीज चाहिए, रात में बिजली के लिए सोलर फार्म्स में बैटरीज चाहिए, लगातार बिजली हासिल करने के लिए विंड फार्म्स में भी इनकी जरूरत है। कुछ ऐसी टेक्नॉलजीज हैं, जो रिन्यूएबल एनर्जी की दुनिया बदल सकती हैं। कुछ तो कमर्शलाइजेशन के मुहाने पर हैं तो कुछ अन्य अभी प्रोटोटाइप स्टेज में हैं। कुछ दूसरी महज विचार के स्तर पर हैं। हो सकता है कि इनमें से कोई खुद को सिकंदर साबित करे।

2014 में ऐसा हो सकता है असर
कई तरह की बैटरीज पर काम कर रहीं 100 से ज्यादा स्टार्ट-अप्स की ओर से किसी बड़ी सफलता का ऐलान।
MIT की स्टार्ट-अप एंब्री अपनी लिक्विड मेटल बैटरीज (इलेक्ट्रिसिटी ग्रिड के लिए अहम) को बाजार में उतार सकती है।
अमेरिकी स्टार्ट-अप इंप्रिंट एनर्जी की नॉन-टॉक्सिक, फ्लेक्सिबल, रिचार्जेबल, प्रिंटेबल जिंक बैटरीज सामने आ सकती हैं।
लिथियम एयर बैटरी के मामले में प्रगति (इलेक्ट्रिक कारों के लिए ज्यादा रेंज) हो सकती है।

मैन्युफैक्चरिंग : 3D प्रिंटिंग
3D प्रिंटिंग के लिए साल 2013 दिलचस्प साल रहा। इस टेक्नॉलजी ने तेजी से पांव बढ़ाए। प्रिंटिंग के लिए गन मॉडल्स की एक लाख से ज्यादा बार डाउनलोडिंग हुई। 3D प्रिंटिंग से मैन्युफैक्चरिंग की दुनिया बदल जाएगी। दुनिया भर में बड़ी कंपनियां इस तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाने का ऐलान कर रही हैं। जो कंपनियां इस तकनीक का उपयोग कर रही हैं, उनकी आमदनी और मुनाफे में बढ़ोतरी दिख रही है। उनके शेयर ऊंचाई पर हैं। इस टेक्नॉलजी के दायरे में लाइफसाइंसेज सेक्टर भी आ रहा है। बायोटेक कंपनियां शरीर के अंगों की प्रिंटिंग पर काम कर रही हैं।

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