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13/10/2022

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104 साल की उम्र में भी पिछले 7 दशकों से बच्चों को निःशुल्क शिक्षा दे रहे ‘श्रीमान नंदा प्रस्थी’ को भारत सरकार ने पद्मश्र...
16/11/2021

104 साल की उम्र में भी पिछले 7 दशकों से बच्चों को निःशुल्क शिक्षा दे रहे ‘श्रीमान नंदा प्रस्थी’ को भारत सरकार ने पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया।
पढ़ने और पढ़ाने की कोई उम्र नहीं होती। इंसान अगर पूरी लगन से कुछ करना चाहे तो कोई उम्र उसके रास्ते की बाधा नहीं बनती। अपनी उम्र को भी मात देने वाले एक ऐसे ही शख्स हैं श्री नंदा प्रस्थी जी। जो 104 साल की उम्र में भी बच्चों को मुफ्त शिक्षा दे रहे हैं। जिस उम्र में लोगों को खुद की भी सुध नहीं रहती उस उम्र में पिछले 75 सालों से वो बच्चों को मुफ्त शिक्षा दे रहे हैं। श्री नंदा प्रस्थी जी सही मायने में लाखों लोगों के लिए प्रेरणास्त्रोत है। उनके इस जज्बे और लगन को देखकर भारत सरकार ने उन्हें देश के सर्वोच्च सम्मान में से एक पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया है। उम्र के इस पड़ाव में आकर भी बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देना और उनके जीवन को संवारने का कार्य करना श्री नंदा प्रस्थी जी के लिए आसान नहीं था। आइए जानते हैं उनके जीवन का प्रेरणादायी सफर।
खुद नहीं ले पाए उच्च शिक्षा लेकिन बच्चों को कर रहे हैं प्रेरित
ओडिशा के बारांटा गांव के रहने वाले श्री नंदा प्रस्थी बच्चों को शिक्षित करने का कार्य करते हैं। उन्होंने खुद 7वीं तक की ही पढ़ाई की थी क्योंकि उनके घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। इसलिए उन्हें अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ कर पिता का हाथ बंटाने को कहा गया। वो कटक में अपने मामा के घर आकर अच्छी नौकरी करना चाहते थे लेकिन घर की स्थिति को देखते हुए उन्होंने खेतों में अपने पिता के साथ काम करना ज़रूरी समझा।
ऐसे मिली बच्चों को शिक्षित करने की प्रेरणा
पढ़ाई बंद होने के बाद भी श्री नंदा प्रस्थी जी ने पढ़ने और काम करने की इच्छा को कभी खत्म नहीं होने दिया। उन्होंने देखा कि उनके गांव में बच्चें ऐसे ही घूमते रहते हैं। वे सभी अनपढ़ थे। नंदा प्रस्थी कहते हैं कि मेरे पास ज्यादा काम नहीं था, इसलिए मैंने उन्हें एक पेड़ के नीचे पढ़ाना शुरू कर दिया। जब नंदा प्रस्थी बच्चों को शिक्षा देते थे उस समय कोई स्कूल नहीं था। शुरुआत में बच्चों को पढ़ाने के लिए उन्हें बच्चों के पीछे भागना पड़ा, क्योंकि वो शिक्षा नहीं लेना चाहते थे। लेकिन नदां प्रस्थी की कोशिशों के बाद बच्चे खुद उनके पास शिक्षा प्राप्त करने के लिए आने लगे। यहीं से उन्हें बच्चों को शिक्षित करने की नई प्रेरणा मिल गई।
7 दशकों से बच्चों को कर रहे हैं शिक्षित
नंदा प्रस्थी कहते हैं कि जब तक मेरा स्वास्थ्य ठीक रहेगा, तब तक मैं बच्चों को पढ़ाता रहूंगा। नंदा प्रस्थी कक्षा 4 तक की कक्षाएं लेते हैं। वो बच्चों के साथ-साथ बुजुर्गों को भी शिक्षा देते हैं। 104 साल की उम्र में भी नंदा प्रस्थी बच्चों को ओडिया अक्षर और गणित सिखाते हैं। जिस उम्र में अक्सर शरीर साथ छोड़ देता है उस उम्र में भी श्री नंदा प्रस्थी जी –जान से बच्चों को शिक्षित करने में जुटे हुए हैं। बच्चे सुबह 7 से 9 बजे तक और फिर शाम 4 बजे से शाम 6 बजे तक उपस्थित रहते हैं। नंदा प्रस्थी के काम को देखकर गावं के सरपंच ने उन्हे बुनियादी ढाँचे की पेशकश की थी लेकिन नंदा प्रस्थी ने उन्हें मना कर दिया क्योंकि उन्हें पुराने पेड़ के नीचे बैठ कर पढ़ाना पसंद है।
सरकार ने किया पद्मश्री सम्मान से सम्मानित
श्री नंदा प्रस्थी जी सरकार के किसी भी समर्थन से इनकार करते हैं क्योंकि पढ़ाना उनका जुनून है। श्री नंदा प्रस्थी के शिक्षण के प्रति जुनून को देखते हुए उन्हें साल 2021 में भारत सरकार ने उन्हें देश के सर्वोच्च सम्मान में से एक पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया है। 104 साल की उम्र में, यह कोई आसान उपलब्धि नहीं है। नंदा प्रस्थी कहते हैं कि मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे पद्मश्री पुरस्कार दिया जाएगा। मैं इससे बहुत खुश हूं।
पढ़ने और पढ़ाने की सच में कोई उम्र नहीं होती। 104 साल की उम्र में पढ़ाने का जूनून सही मायने में श्री नंदा प्रस्थी जी को प्रेरणास्त्रोत (Inspiration) बनाता है। उनकी सफलता की कहानी (Success Story) सभी के अंदर मोटिवेशन (Motivation) की भावना पैदा करती है। Adify श्री नंदा प्रस्थी जी की मेहनत और उनके अद्भुत कार्यों की तहे दिल से सराहना करता है।

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