मैं पुण्य, पाप, सुख और दुख से विलग हूं! मैं न मंत्र हूं, न तिर्थ, न ज्ञान न ही यज्ञ !..
मैं पुण्य, पाप, सुख और दुख से विलग हूं! मैं न मंत्र हूं, न तिर्थ, न ज्ञान न ही यज्ञ !..