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25/03/2021
11/02/2021

कम्प्यूटर नेटवर्क
एक नेटवर्क , कम्प्यूटर्स तथा उपकरणों का समूह होता है , जो एक - दूसरे से इस तरह से जुड़े हुए होते हैं कि वे आपस में स्रोतों तथा सूचनाओं का आदान - प्रदान कर सकें ।

कम्प्यूटर्स के संसार में , नेटवर्किंग आपस में डेटा की साझेदारी के उद्देश्य के लिये , दो या दो से अधिक कम्प्यूटिंग उपकरणों को आपस में जोड़ना है । नेटवर्क , कम्प्यूटर हार्डवेयर तथा कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर के सम्मिश्रण के साथ बनता है ।

टेक्नोलॉजी तथा घिरे हुये क्षेत्र के आधार पर नेटवर्क को सात श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है - पर्सनल नेटवर्क , लोकल एरिया नेटवर्क , कैम्पस एरिया नेटवर्क , मैट्रोपोलिटिन एरिया नेटवर्क , वाइड एरिया नेटवर्क , ग्लोबल एरिया नेटवर्क और वर्चुअल प्राइवेट एरिया नेटवर्क ।
कम्प्यूटर्स के कनेक्शन का भौतिक अध्ययन ' टोपोलॉजी ' के नाम से जाना जाता है । किसी नेटवर्क की टोपोलॉजी कम्प्यूटर्स तथा अन्य उपकरणों को केबल या अन्य नेटवर्क माध्यम के द्वारा कनेक्ट करने का तरीका है । LAN को बनाने में तीन प्राथमिक टोपोलॉजी प्रयोग होती हैं — बस , स्टार तथा रिंग ।

नेटवर्क का परिचय
नेटवर्क कम्प्यूटर्स तथा उपकरणों का समूह है , जो एक - दूसरे से इस तरह जुड़े होते हैं कि वे साधनों तथा सूचनाओं को आपस में बाँट सकें । नेटवर्क में दो या दो से ज्यादा कम्प्यूटर होते हैं , जो आपस में साधनों को बाँटने , जैसे कि प्रिन्टर तथा सीडी , फाइल्स को बाँटने या इलैक्ट्रोनिक कम्यूनिकेश के लिये जुड़े होते हैं ।
जब हम दो या दो से ज्यादा कम्प्यूटर्स को इस प्रकार जोड़ते हैं कि वह एक - दूसरे से कम्यूनिकेशन कर सकें , तो हम ' डेटा नेटवर्क ' बनाते हैं । नेटवर्क में कम्प्यूटर केबल , टेलीफोन लाइन , रेडियो येव , सेटेलाइट , या इन्फ्रारेड प्रकाश बीम से जुड़े हो सकते हैं । ये कनेक्शन तार के द्वारा या बिना तार के भी हो सकते हैं । यदि हम नेटवर्क बिना तार के प्रयोग के बना रहे हैं , तो इस प्रकार के नेटवर्क को वायरलेस नेटवर्क ( Wireless Network ) के नाम से जाना जाता है ।

टेक्नोलॉजी जो कम्प्यूटर्म को एक साथ जोड़ती है , जहाँ वह किसी भी स्वरूप में जोड़ा गया हो , नेटवर्क मीडियम कहालाता है । कॉपर पर आधारित बाल सबसे सामान्य नेटवर्क मीडियम है , और यही वजह है कि किसी भी प्रकार के नेटवर्क मीडियम के लिये भेटा केबल ' शब्द का प्रयोग किया जाता है ।

कम्प्यूटर्स के संसार में नेटवर्किंग , डेटा की साझेदारी के उद्देश्य के लिये , दो अथवा दो से अधिक कम्प्यूटिंग उपकरणों को आपस में जोड़ना है । नेटवर्क , कम्प्यूटर हार्डवेयर और कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर के सम्मिश्रण है।

किसी नेटवर्क को कार्यान्वित करने की प्रक्रिया नेटवर्किंग ( Networking ) के नाम से जानी जाती है ।

कम्प्यूटर नेटवर्क के लाम

बहुत बड़ी संख्या में प्रयोगकर्ता , जो समान क्षेत्र या समान संस्थान के हों , लेकिन अलग - अलग जगहों में फैले हुये हों , वे बात कर सकते हैं और उपयोगी फाइल्स को , साफ्टवेयर तथा सूचनाओं को भी कम्प्यूटर्स के नेटवर्क के द्वारा बौट सकते हैं ।

कम्प्यूटर्स को एक साथ जोड़कर , कम्प्यूटर नेटवर्क बनाने के निम्नलिखित लाभ हो सकते हैं

( 1 ) डेटा को बाँटना - जब हम एक से ज्यादा कम्प्यूटर को जोड़ते हैं , तो हमें हमारे डेटा को स्थूल रूप से अर्थात् द्वितीयक मैमोरी की सहायता से अन्य कम्प्यूटर तक ले जाने की आवश्यकता नहीं है । यह आसानी से नेटवर्क की सहायता से स्थानान्तरित किया जा सकता है , जो हमारे समय और धन को बचाता है ।

( 2 ) साधनों को बाँटना नेटवर्क की अनुपस्थिति में , यदि हमें , अपने कम्प्यूटर से कोई बाह्य उपकरणों को जोड़ना है , जैसे कि एक प्रिन्टर , हमें हर कम्प्यूटर के लिये या तो अलग - अलग उपकरणों की आवश्यकता होगी या हमें उस कम्प्यूटर तक अपने डेटा को ले कर जाना पड़ेगा , जिससे प्रिन्टर जुड़ा कर सकते हैं । हुआ होगा , जो बहुत समय लेगा । जबकि नेटवर्किंग के साथ सभी कम्प्यूटर एक साथ प्रिन्टर का प्रयोग

( 3 ) केन्द्रीकृत प्रशासन नेटवर्क का प्रयोग करके हम अपने डेटा को सेन्ट्रलाइज़ कर सकते हैं , जो कि हमारे डेटा को एक कम्प्यूटर पर सुरक्षित करना है , जो अन्य कम्प्यूटर्स द्वारा भी एक्सेस किया जा सकता है । यह डेटा की एक सुरक्षित कॉपी बनाने में मदद करता है ।

( 4 ) समाचार समूह या बुलेटिन बोर्ड कम्प्यूटर नेटवर्क का एक प्रसिद्ध लाभ , समाचार समूह या बुलेटिन बोर्ड ( Bulletin Board ) की सुविधा है , जहाँ लोग अपने सन्देश प्रवुद्ध लोगों की तरह बदल सकते हैं ।

( 5 ) सन्देश - उच्च विभेदन कॉब ( High Resolution Cob ) या तस्वीरें और यहाँ तक कि छोटी वीडियो क्लिप सन्देशों को भेजने का अवसर देता है । अब हम आसानी से कम्प्यूटर नेटवर्क द्वारा भेज / स्थानान्तरित कर सकते हैं । कम्प्यूटर नेटवर्क बहुत सारे कम मूल्य पर सूचनायें एकत्र की जा सकती हैं ।

एक संस्थान या एक Public Enterprise में कम्प्यूटर्स को एक साथ जोड़कर , बहुत बड़ी मात्रा में , बहुत कम मूल्य पर सूचनाये एकत्र की जा सकती है ।

एक Interconnected कम्प्यूटर्स के नेटवर्क में , यहाँ तक कि एक या दो रिमोट टर्मिनल या कम्प्यूटर सही प्रकार से कार्य नहीं कर रहे हों तब भी शेष कम्प्यूटर्स के साथ सफलता से डेटा का स्थानान्तरण किया जा सकता है । इस तरह , एक सौ प्रतिशत कम्युनिकेशन हर समय प्राप्त किया जा सकता है ।

संक्षेप में , कम्प्यूटर नेटवर्क सामान्य जनता को उनके विचार अलग - अलग प्रकार से और अलग - अलग शांकों तक पहुंचाने की अनुमति प्रदान करता है , जो पहले सम्भव नहीं था ।

कम्प्यूटर नेटवर्क की हानियाँ

यद्यापि कम्प्यूटर नेटवर्क के बहुत सारे लाभ हैं , लेकिन कुछ हानियाँ भी हैं । मुख्यतः सभी यूजर कम्प्यूटर पर निर्भर हो जाते हैं । यदि नेटवर्क में कोई परेशानी उत्पन्न हो गई तो अनेक यूजर्स अपना कार्य नहीं कर पायेंगे । इस परेशानी से उभरने के लिये एक बैकअप सर्वर की आवश्यकता होती है । यदि नेटवर्क में कोई त्रुटि है तो यह बाह्य उपकरणों का प्रयोग बन्द कर देगा । नेटवकों का खंडीकरण ( Segmentation ) , सम्पूर्ण ऑफिस तथा कार्य के ब्रेकडाउन ( Brakedown ) को घटा देता है ।

कम्प्यूटर नेटवर्क की कार्यकुशलता , सिस्टम मैनेजर की निपुणता पर निर्भर करती है । बिना कुशलता से Manage किया गया कम्प्यूटर नेटवर्क , बिना नेटवर्क के कम्प्यूटर्स से भी बुरा है ।

कम्प्यूटर नेटवर्क की मुख्य हानियाँ निम्नलिखित हैं :

* यदि सर्वर कोई त्रुटि उत्पन करता है तो यूजर किसी एप्लीकेशन प्रोग्राम को रन करने में समर्थ नहीं होगा ।

* नेटवर्क में त्रुटि , यूज़र के डेटा खोने का कारण बन सकता है ।

* यदि नेटवर्क ऑपरेट करना बन्द कर देता है , तो बहुत सारे कम्प्यूटर्स को Access करना सम्भव नहीं होगा ।

* सिस्टम को Hackers से सुरक्षित रखना कठिन है ।

* स्रोतों की Planning पर निर्णय Centralized कर सकता है ।

* जैसे कम्प्यूटर की संख्या बढ़ेगी , नेटवर्क का प्रदर्शन घटेगा , चाहे नेटवर्क अच्छी तरह से बना हो ।

* जितना बड़ा नेटवर्क होगा , उसे सम्भालना उतना ही मुश्किल होगा ।

नेटवर्क के प्रकार

प्रयुक्त टेक्नोलॉजी तथा घिरे हुये क्षेत्र के आधार पर , नेटवर्क निम्नलिखित श्रेणियों में बाँटा जा सकता है-

पर्सनल एरिया नेटवर्क
पर्सनल एरिया नेटवर्क ( Personal Area Network - PAN ) एक ऐसा कम्प्यूटर नेटवर्क है , जिसका प्रयोग किसी एक मनुष्य के नजदीकी कम्प्यूटर उपकरणों के बीच कम्यूनिकेशन के लिये किया जाता है । यह नेटवर्क स्थायी नहीं होता है ; बल्कि जब हम नेटवर्क पर डेटा को बाँटना चाहते हैं , तो बन जाता है , अन्यथा हर सिस्टम स्वतन्त्रता से अपना कार्य करता है । पेन ( PAN ) की रेंज ज्यादातर 20-30 फीट ( लगभग 6-9 मीटर ) होती है , लेकिन , टैक्नोलॉजी में बदलाव के साथ यह बढ़ती जाती है । ब्लूटूथ ( Bluetooth ) , पेन ( PAN ) का एक उदाहरण है ।

लोकल एरिया नेटवर्क

लोकल एरिया नेटवर्क ( Local Area Network - LAN ) एक ऐसा कम्प्यूटर नेटवर्क है , जो एक छोटे भौतिक क्षेत्र , जैसे कि घर , ऑफिस या इमारतों का बहुत छोटा समूह , स्कूल या एक हवाई अड्डा आदि में होता है ।

दूसरे शब्दों में , कम्प्यूटर्स का समूह जो एक कमरे , या एक फ्लोर या एक इमारत में एक अकेला नेटवर्क बनाने के लिये कनेक्ट किया जाता है , लोकल एरिया नेटवर्क कहलाता है । लोकल एरिया नेटवर्क ( Local Area Network - LAN ) यूजर्स को स्टोरेज उपकरणों , प्रिन्टर , एप्लीकेशन , डेटा और अन्य नेटवर्क स्रोतों को आपस में बाँटने की सुविधा प्रदान करता है ।

यह एक विशेष भौगोलिक क्षेत्र तक सीमित है ; सामान्यतः 2 किमी ० से कम त्रिज्या में । यह 100 मीटर तक फैलाया जा सकता है , यह डेटा के स्थानान्तरण को निकटस्थ लोकेशन तक पहुँचाना आसान बनाता है ।

लेन के मुख्य लक्षणों उच्च डेटा ट्रान्सफर रेट , छोटा भौगोलिक क्षेत्र तथा टीस्ड टेलीकम्यूनिकेशन लाइन की कम आवश्यकता होती है , जो कि टेलीफोन लाइन का प्रयोग करके डेटा का स्थानान्तरण करना है । वर्तमान इन्टरनेट लेन टेक्नोलॉजी 10Gbit / s की गति से आपरेट करता है ।

कैम्पस एरिया नेटवर्क

विभिन्न लेन का समूह कैम्पस एरिया नेटवर्क के नाम से जाना जाता है । अन्य शब्दों में , कैम्पस एरिया नेटवर्क , सीमित भौगोलिक एरिया में लोकल एरिया नेटवर्क के इन्टरनेट कनेक्शन से बना कम्प्यूटर नेटवर्क है । यह मेट्रोपोलिटन एरिया नेटवर्क का एक रूप माना जा सकता है , जो एक विशेष एकेडेमिक सैटिंग है ।

यूनिवर्सिटी कैम्पस पर आधारित कैम्पस एरिया नेटवर्क में नेटवर्क , बहुत सारी कैम्पस इमारतों , एकेडेमिक, डिपार्टमेन्टम मिलाकर, यूनिवर्सिटी लाइब्रेरी तथा विद्यार्थी रेसिडेन्ट हॉल को जोड़ता है । एक कैम्पस एरिया नेटवर्क, लोकल एरिया नेटवर्क से बडा , लेकिन वाइट एरिया नेटवर्क से छोटा है ।

जैसे कि इसका नाम दर्शाता है , कैम्पस एरिया नेटवर्क का प्रमुख उद्देश्य विद्यार्थियों को इन्टरनेट तथा यूनिवर्सिटी साधनों की सुविधा देना है । यह यह नेटवर्क है जो दो या दो से अधिक लेन को जोड़ता है . लेकिन यह एक विशेष तथा Contiguous भौगोलिक क्षेत्र जैसे कि कालेज कैम्पस , औद्योगिक काम्पलेक्स दार की इमारत या एक मिलिट्री बेस तक सीमित है । एक केन ( CAN ) , मेन ( MAN ) के प्रकार की तरह समझा जा सकता है , लेकिन सामान्यतः यह टिपिकल मेन से कम क्षेत्र में होता है । यह शब्द अधिकतर नेटवर्क की कार्यान्वति करने की प्रक्रिया का विवरण एक Contiguous क्षेत्र में करने के लिये किया जा सकता है ।

एक LAN नेटवर्क उपकरणों को छोटी दूरी तक जोड़ता है । एक नेटवर्क किये हुये अफिस इमारत , स्कूल , या घर एक अकेले LAN होते हैं , जबकि कुछ समय एक इमारत , कुछ छोटे लेन को रखती है ( हर एक कमरे को परिधि ) और एक साधारणतः एक लेन आस - पास की इमारतों का विस्तार है । TCP/IP नेटवर्किंग में , एक LAN कभी - कभी लेकिन हमेशा एक सिग्नल IP सबनेट की तरह कार्यान्वित नहीं हो सकता है ।

मेट्रोपोलिटव एरिया नेटवर्क

मेट्रोपोलिटन एरिया नेटवर्क ( मेन ) एक नेटवर्क है , जो दो या दो से अधिक लोकल एरिया नेटवर्क या कैम्पस एरिया नेटवर्क को जोड़ता है , लेकिन उस टाउन / सिटी की सीमाओं के बाहर नहीं जाता है । Routers , Switches तथा Hubs , मेट्रोपोलिटन एरिया नेटवर्क को बनाने में प्रयोग किये जाते हैं । एक कैम्पस एरिया नेटवर्क मेट्रोपोलिटन एरिया की तरह माना जा सकता है , लेकिन प्रतिक्रम पूर्णतया सच नहीं है ।

वाइड एरिया नेटवर्क

एक वाइड एरिया नेटवर्क ( वेन ) एक कम्प्यूटर नेटवर्क है , जो एक बहुत बड़ा क्षेत्र घेरता है । जो कि कोई नेटवर्क जिसके कम्यूनिकेशन मेट्रोपोलिटन रीज़नल या नेशनल सीमाओं से बाहर तक जा सकता है । कम औपचारिक तरीके से , वेन एक नेटवर्क है जो रूटर्स तथा पब्लिक कम्यूनिकेशन लिंक का प्रयोग करता है । पर्सनल एरिया नेटवर्क ( पेन ) , लोकन एरिया नेटवर्क ( लेन ) , कैम्पस एरिया नेटवर्क , या मेट्रोपोलिटन एरिया , नेटवर्क जो कि रूम तक , इमारत , कैम्पस या विशेष मेट्रोपोलिटन एरिया ( उदाहरण ) तक सीमित है , की तुलना में , इन्टरनेट वेन का सबसे बड़ा और सबसे ज्यादा प्रयुक्त उदाहरण है । एक बेन एक डेटा कम्यूनिकेशन नेटवर्क है , जो एक बहुत बड़े भौगोलिक क्षेत्र को घेरता है ( जो कि एक सिटी से अन्य सिटी तथा एक देश से दूसरे देश तक ) तथा जो अधिकतर स्थानान्तरण सुविधा का प्रयोग करता है , जो कॉमन कैरियर्स , जैसे कि टेलीफोन कम्पनी के द्वारा प्रदान होते हैं ।

ग्लोबल एरिया नेटवर्क

एक ग्लोबल एरिया नेटवर्क ( गेन ) स्पेसिफिकेशन कुछ समूहों के द्वारा विकसित हो रहा है और अभी कुछ विशेष परिभाषा नहीं है । सामान्यतः यद्यपि एक गेन - मोबाइल कम्यूनिकेशन जो बहुत सारे वापरलैस LAN से जाता है , Satellite Coverage area आदि के सहारे के लिये एक मॉडल है ।

वर्चुअल प्राइवेट वेटवर्क

एक वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क एक कम्प्यूटर नेटवर्क है , जिसमें कुछ लिक , नोड के बीच में ओपन कनेक्शन या पर्युअल सर्किट्स में एक बड़े नेटवर्क में बनते हैं ( उदाहरण - नेटपका भौतिक रूप से वायरों की जगह VPN के मुख्य एप्लीकेशन कम्यूनिकेशन को पब्लिक इन्टरनेट के द्वारा सिक्योर करना है , लेकिन एक VPN को बाह्य सुरक्षा की आवश्यकता नहीं है , जैसे कि अथिन्टिकेशन या कन्टेन्ट इनक्रिशना VPN . उदाहरण के लिये कठिन सुरक्षा के लक्षणों के अलग - अलग यूज़र कम्यूनिटीज़ के ट्रैफिक को अलग - अलग करने के लिये प्रयोग किया जा सकता है ।

नेटवर्किंग के प्रकार
नेटवर्क कम्प्यूटरों के स्रोतों ( Sources ) प्रिन्टर , स्कैनर आदि को एक - दूसरे के साथ बाँटना है । दो भिन्न प्रकार के नेटवर्किग हैं , जिनके साथ कम्प्यूटर्स के बीच में नेटवर्क बनाया जा सकता है । हमें हमेशा किसी भी प्रकार के नेटवर्क को चुनने से पहले उसकी जरूरत तथा आवश्यकता को पढ़ लेना चाहिये । गलत नेटवर्क का विकल्प चुनना आपके समय तथा पैसे भी बेकार कर सकता है ।

दो प्रकार के नेटवर्क हैं- Peer - to - Peer नेटवर्क , जो P - 2 - P के नाम से भी जाना जाता है , अन्य Client और Server नेटवर्किग हैं ।

पीयर - टू - पीयर नेटवर्किंग
Peer to Peer या P.2.1 नेटवर्किग , कम्प्यूटर नेटवर्क के लिये सबसे ज्यादा प्रयोग की जाती है । इस प्रकार के नेटवर्क बहुत प्रभावी मूल्य के हैं , लेकिन नेटवर्क में कम्प्यूटर्स की संख्या कम होती है । दस से पन्द्रह कम्प्यूटर्स तक को 7-2.1 नेटवर्किग का प्रयोग करके एक - दूसरे से बिना किसी परेशानी के साथ जोड़ा जा सकता है । कम्प्यूटर्स की संख्या बढ़ाने से समस्या आ सकती है ।

नेटवर्क के अन्दर सभी कम्प्यूटर्स का समान स्टेटस होता है और कोई अन्य कम्प्यूटर , कम्प्यूटर को नियन्त्रित नहीं करता है , बल्कि वो अपने आप को स्वयं नियन्त्रित करते हैं । इस नेटवर्क में कोई सर्वर नियन्त्रण तथा देखने के लिये नहीं होता है । सुरक्षा का लेवल ज्यादा बड़ा नहीं होता है और हर एक वर्कस्टेशन अपनी सुरक्षा के लिये जिम्मेदार होता है । ]

P - 2 - P मॉडल फाइल प्रयोग करके सभी कम्प्यूटर्स में बाँटा जा सकता है । फाइलें , जैसे वीडियो , ऑडियो , पिक्चर , स्प्रेडशीट और सभी डिजिटल वीडियो नेटवर्क के अन्दर भेजी या प्राप्त की जा सकती हैं । प्रिन्टर , स्कैनर तथा इन्टरनेट भी सभी कम्प्यूटर्स के साथ बाँटा जा सकता है ।

उसमें तीन कम्प्यूटर्स को एक साथ हब तथा स्विचों के साथ तम्बौर में जुड़ा दिखाया गया है । सभी कम्प्यूटर हथ के द्वारा जुड़े होते हैं । नेटवर्क एडॉप्टर कार्ड केबल , और हब या स्विच का प्रयोग करके , कैथ इन्टरनेट के साथ जुड़े होते हैं । आप देख सकते हैं कि चित्र में कोई सर्वर जुड़ा हुआ नहीं है , लेकिन सभी कम्प्यूटर अलग - अलग हब से P - 2 - P नेटवर्क बनाने के लिये जुड़े होते हैं ।

एक पीयर - टू - पीयर नेटवर्किंग मॉडल के लाम

Peer - to - Peer नेटवर्किंग मॉडल के लाभ निम्नलिखित हैं

* कोई एडमिनिस्ट्रेशन की आवश्यकता नहीं होती है ।

* नेटवर्क तेज तथा कम महंगा होता है ।

* बनाने तथा सम्भालने में आसान होता है ।

पीयर - टू - पीयर नेटवर्किंग मॉडल की सीमायें

Peer - to - Peer नेटवर्किंग मॉडल को लगाने का निश्चय करने से पूर्व आपको इस प्रकार की नेटवर्किंग की सीमाओं को जान लेना चाहिये ।

Peer - to - Peer नेटवर्क बहुत आसान और काफी मूल्य प्रभावी तथा आकर्षक होता है , लेकिन यह बहुत सौमित प्रगति कर सकते हैं ।

* Peer - to - Peer नेटवर्क सीमित कम्प्यूटर की संख्या के लिये बनाया गया है , यह इश्यू बनाना शुरू कर देते हैं जब कम्प्यूटर 15 से ज्यादा बढ़ जाते हैं ।

* P - 2 - P नेटवर्क का प्रयोग करके उच्च सुरक्षा को प्राप्त नहीं किया जा सकता है , यदि संस्थान को ज्यादा सुरक्षा चाहिये तो P - 2 - P ज्यादा अच्छा नहीं हैं ।

* संस्थान का बढ़ाना , P - 2 - P से बाहर जा सकते हैं , यह बढ़ती हुई कम्प्यूटर्स की संख्या को सपोर्ट नहीं करेगा , जब यह पन्द्रह से ज्यादा बढ़ने लगेगा ।

* P - 2 - P नेटवर्क के लिये नियमित ट्रेनिंग की जरूरत है । P - 2 - P नेटवर्क कम्प्यूटर्स के द्वारा नियन्वित किया जा सकता है , और कम्प्यूटर मनुष्य के द्वारा नियन्त्रित किया जाता है , छोटी सी गलती किसी एक यूज़र के द्वारा सभी अन्य यूजर्स का कार्य रोक सकती है ।

क्लाइंट - सर्वर नेटवर्किंग
क्लाइंट - सर्वर नेटवर्किंग एक वितरित एप्लीकेशन स्ट्रक्चर है , जो टॉस्क या कार्य को सर्विस या स्त्रोतों को देता है , उनके बीच में बाँटता है , जिसे सर्वर कहते हैं और सर्विस को माँगने वाले क्लाइंट कहलाते हैं ।

एक सर्वर वह कम्प्यूटर या कम्प्यूटर पर चल रही एप्लीकेशन है जो अन्य कम्प्यूटर्स को सर्विस प्रदान करता है । नेटवर्क का आधारभूत कार्य फाइलों को बौटना तथा प्रिन्टर्स को बाँटना है , वह मशीन जो यह कार्य करती है , वह फाइल सर्वर तथा प्रिन्ट सर्वर क्रमश : कहलाते हैं । कई और प्रकार के सर्वर भी हैं - एप्लीकेशन सर्वर , ई - मेल सर्वर , वेब सर्वर , डेटाबेस सर्वर इत्यादि ।

एक क्लाइंट कम्प्यूटर है जो सर्वर द्वारा दी गई सर्विसेस का लाभ उठाता है । क्लाइंट - सर्विस नेटवर्क को एक या एक से ज्यादा कम्प्यूटर्स को सर्वर तथा शेष कम्प्यूटर्स को क्लाइंट की तरह प्रयोग करके बनाया जा सकता है . यहाँ तक कि सभी कम्प्यूटर दोनों कार्य कर सकते हैं । सभी केसों में , सर्वर बेहतर इक्प्यूिड तथा सिस्टम अच्छे मैन्टेड होते हैं और एक बड़े नेटवर्क पर , बहुत सारे एडमिनिस्ट्रेटर्स बैकबोन से जुड़े होते हैं , जिससे कि सैग्मेन्ट सभी से समान एक्सेस किया जा सके । क्लाइंट - सर्वर नेटवर्किंग का सबसे बड़ा लाभ है कि सम्पूर्ण डेटा सर्वर पर सेन्टेलाइज़ होता है और हमें नेटवर्क पर यहाँ - वहाँ डेटा को ढूँढने की जरूरत नहीं पड़ती है ।
एक क्लाइंट - सर्वर नेटवर्क के लाम

क्लाइन्ट सर्वर नेटवर्किंग मॉडल के लाभ निम्नलिखित हैं

* सेन्ट्रेस्लाइड ( Centralized ) — साधनों तथा डेटा की सुरक्षा सर्वर के द्वारा नियन्त्रित की जाती है ।

* Scalability- जैसे जरूरत बढ़ती है , वैसे कोई भी या सभी उपकरणों को बदला जा सकता है ।

* Flexibility- नई टैक्नोलॉजी को सिस्टम में आसानी से समावेशित किया जा सकता है ।

* Interoperability- सभी हिस्से ( क्लाइंट / नेटवर्क सर्वर ) एक साथ कार्य करते हैं ।

* Accessibility- सर्वर रिमोटली एक्सेस किया जा सकता है और कई सारे प्लेटफार्म पर कार्य कर सकता है ।

एक क्लाइन्ट - सर्वर की हानि

एक क्लाइन्ट - सर्वर नेटवर्किंग मॉडल की हानियाँ निम्नलिखित है-

* खर्चा ( Expense ) , यानि समर्पित सर्वर में शुरुआती पर्याप्त इन्वेस्टमेन्ट की जरूरत होती है ।

* रख - रखाव ( Maintenance ) , यानि इस प्रभावी ऑपरेशन को सुनिश्चित करने के लिये एक बड़े नेटवर्क के लिये एक स्टॉफ को आवश्यकता होती है ।

* निर्भरता ( Dependence ) , यानि जब सर्वर बैठ जाता है तो सम्पूर्ण नेटवर्क में ऑपरेशन रुक जाता है ।

नेटवर्क हार्डवेयर
नेटवर्क तथा नेटवर्किंग के प्रकारों के बारे में जानकारी प्राप्त करने के बाद हमारा अगला चरण नेटवर्क के लिये हार्डवेयर को जानना है । नेटवर्किग के लिये निम्नलिखित प्रमुख हार्डवेयर हैं-

नेटवर्क इन्टरफेना कार्ड

नेटवर्क इन्टरफेस कार्ड या NIC एक बाह्य कार्ड है , जो उपलब्ध FCI स्लॉट्स में डाला गया होता है , लेकिन नये मदरबोर्ड में यह बना हुआ होता है ।

एन ० आई ० सी ० एक पोर्ट प्रदान करता है जिसके द्वारा हम कम्प्यूटा को नेटवर्क से जोड़ते हैं । हम कई सारे NIC , सी ० पी ० यू ० में डाल सकते हैं । हर एक NIC का अपना एक यूनिक एड्रेस होता है , जो कि लेन कार्ड के फिजिकल एड्रेस से जाना जाता है । NIC का फंक्शन निम्नलिखित है

* डेटा इनकैप्सुलेशन - ट्रांसमिशन के लिये , नेटवर्क लेयर प्रोटोकॉल के द्वारा जेनगेटेड डेटा के चारों ओर फ्रेम बनाने के लिये यह उत्तरदायी होता है ।

* सिग्नल इनकोडिंग और डिकोडिंग - यह भौतिक लेयर इनकोडिंग स्कीम को लागू करता है , जो बाइनरी डेटा को इलैक्ट्रिकल वोल्टेज , लाइट पल्लोस या अन्य किसी भी प्रकार के मिग्नल जो नेटवर्क मीडियम प्रयोग करता है , उसमें बदल देता है और प्राप्त सिग्नल को बाइनरी डेटा में बदल देता है ।

* डेटा ट्रांसमिशन तथा रिसेप्शन- NIC का प्रमुख कार्य नेटवर्क में हर जगह उचित तरह से सिग्नत को जेनरेट तथा ट्रांसमिट करना है और आने वाले सिग्नल को प्राप्त करना है ।

* डेटा बफरिंग -NIC एक समय पर एक फ्रेम में डेटा को भेजता तथा प्राप्त करना है , इसलिये ये बफर में बनते हैं , जो इन्हें कम्प्यूटर्ग या नेटवर्क से आने वाले डेटा को सुरक्षित करने की क्षमता प्रदान करता है , जब तक कि एक प्रेम पूरा नहीं हो जाता और प्रोसेसिंग के लिये तैयार होता है ।

नेटवर्क केबल

NIC को सेन से जोड़ने के लिये केवल की आवश्यकता होती है । नेटवर्क केबल दो कम्प्यूटर नेटापकों के बीच में रास्ते की तरह कार्य करता है । अधिकार लेन अपने नेटवर्क की तरह कुछ प्रकार के केवल प्रयोग करता है । यद्यपि बहुत सारे वायर रहित माध्यम हैं , केवल सबसे ज्यादा भरोसेमन्द है और अन्य मीडियम से ज्यादा तेज ट्रांसमिशन गति प्रदान करता है । तीन मुख्य प्रकार के केबल लेन में प्रयोग किये जाते हैं-

कोएक्सियल केबल

कोएकिमाल केवल में दो चालक एक ही शीट में ही होते हैं , इसलिये इसे ऐसा कहा जाता है । कोएक्सियल केबल में एक चालक , अन्य के अन्दर होता है , जैसे कि निग्न चित्र में दिखाया गया है ।

केवल का मध्य कोर , कॉपर कोर होता है , जो वास्तव में इलेक्ट्रिकल सिग्नल कैरी करता है , यह Solia Corper या कॉपर का Branded strands होता है । बाह्य कोर कुचालक की बनी होती है तथा द्वितीय चालक से घिरी होती है . Branded कॉपर मेश से बना होता है । द्वितीय चालक का केवल के ग्राउंड की तरह कार्य करता है । अन्ततः पूरी एसेम्बली एक कुचालक शीट से घिरी होती है , जो PVC या टेफलान की बनी होती है ।

दो प्रकार के कोरकिाल केवल होते हैं , जो कि सेन में प्रयोग किये जाते हैं- RG - 8 , जिसे थिक इन्टरनेट भी जाना जाता है तथा RG - 58 , जिसे थिन इन्टरनेट के नाम से भी जाना जाता है । इन दोनों केबल की संरचना समान होती है , लेकिन मोटाई में अन्तर होता है ( 0.405 इन्च RG - 8 के लिये तथा 0.195 इन्च RG58 के लिये ) तथा इस प्रकार के कनेक्टर्स में ये प्रयोग किये जाते हैं ( RG - 8 के लिये N कनेक्टर तथा bayonet - Neill - Councilman [ BNC ] Connecters . RO - 58 के लिये दोनों केबलों के प्रकार , बस टोपोलॉजी का प्रयोग करके जोड़े जाते हैं ।

ट्रिवस्टेड पेयर केबल

ट्रिवस्टेड पेपर केवल वायरिंग से बना है , जिसमें दो चालक ( सिंगल सर्किट के फारवर्ड तच्या रिटर्न चालक ) इकडे ट्रिवस्ट किये जाते हैं । इलेक्ट्रोमेग्नेटिक इन्टरफेरेना ( EAI ) को बाह्य स्रोतों को कैंसल करने के लिये तथा पड़ोसी जोड़ों से क्रॉस टॉक करता है ।

निम्न चार प्रकार के ट्विस्टेड पेयर केबल का प्रमुखतया प्रयोग किया जाता है-

* यू ० टी ० पी ० ( Unshielded Twisted Pair ) - यह केवल छोटे लेकिन समान लढे में विभाजित किया जाता है । हर एक लढे में ट्विस्टेड पेयर होते हैं , जो विभिन्न दिवाट दर से ट्विस्ट होते हैं । लट्टे को केवल बनाने के लिये एक साथ दिवस्ट किया जाता है । केबस में पेयर में समान दिवाट हो सकते हैं , लेकिन ये कोई गारन्टी नहीं होती कि कासटीक पूरी तरह से रिजॉल्वड होगी । वायर पेयर , एक बड़े केबल के अन्तर्गत क्रास्टाक को घटाने के लिये बहुत सावधानीपूर्वक पुनने चाहिये । UTP केबल भी कम्प्यूटर नेटवर्किंग में बहुत ज्यादा प्रयोग किये जाते हैं । इन्टरनेट में सबसे कॉमन डेटा नेटवर्किंग स्टैंडर्ड , UTP केबल प्रयोग किये जाते हैं ।

* एस ० टी ० पी ( Shielded Twisted Pair ) -STP , युपिंग में समान होता है , लेकिन प्रमुख अन्तर यह है कि इसमें केबिल में धातु की शील्डिंग हर एक कॉपर वायर पर होती है । इस प्रकार की शील्डिंग केबल की बाह्य EMI ( इलैक्ट्रोमैग्नेटिक इन्टरफेरेन्स ) से सुरक्षा प्रदान करती है ।

फाइबर ऑप्टिक केबल

इसमें मध्य ग्लास कोर , क्लैडिंग से घिरी हुई होती है । यह डेटा को लाइट सिग्नल में ट्रांसमिट करता है , तथा इसके लिए इलैक्ट्रिक सिग्नल , लाइट सिग्नल में बदला जाता है । इसमें LED या लेज़र को , सिग्नल ट्रांसमिट करने के लिये प्रयोग किया जाता है । इसमें फाइबर का जोड़ा , जो कि केवल के दो स्ट्रेड्स से निर्मित होता है , एक मुख्य कलैटिन में होते हैं । Kevlar फाइबर का प्रयोग एक शीथिंग वस्तु की तरह किया जाता है , जो कि अच्छी सुरक्षा देता है । इसलिये यह ज्यादा सुरक्षित होता है , क्योंकि ये कोई सिग्नल उत्पन्न नहीं करते हैं । फाइबर आप्टिक दो और श्रेणियों में बाँया जा सकता है-

* सिंगल मोड फाइबर - यह एक फाइवर आप्टिक केबल का प्रकार है , जिसमें ग्लास फाइबर का सिंगल स्ट्रैड होता है , एक पतली प्रिया के अन्दर । फाइबर आप्टिक केबल , जो लेजर का प्रयोग करते है , सिंगल मोड फाइबर कहलाते हैं । यह डेटा को तेज गति से ट्रांसमिट करता है और ज्यादा दूरी तक ट्रांसमिट करता है ।

* मल्टी मोड फाइबर - यह एक प्रकार का केबल है जिसमें एक बड़ी त्रिज्या में ग्लास फाइबर होता है । यह 62.5 / 125 माइक्रोमीटर फाइबर केबल है । यह छोटी दूरी तक डेटा को ट्रांसमिट कर सकता है । यह LED का प्रयोग एक प्रकाश के स्रोत की तरह करता है । यह सिंगल फाइबर का प्रयोग करके दो या उससे ज्यादा सिग्नल ट्रांसमिट करता है । इसकी गति सिंगल मोड फाइबर आप्टिक केबल की तुलना में कम होती है , लेकिन आजकल यह बहुत ज्यादा प्रयोग किया जाता है ।

नेटवर्क टोपोलॉजी

नेटवर्किंग में , टोपोलॉजी शब्द नेटवर्क पर जुड़े हुये उपकरणों का लेआउट होता है । नेटवर्क टोपोलॉजी एक को - ऑर्डिनेशन है , जिसके द्वारा नेटवर्क में उपकरण एक - दूसरे के साथ , उनके लॉजिकल रिलेशन में रेंज होते हैं , भौतिक Arrangement से अलग । नेटवर्क को टोपोलॉजी कम्प्यूटर्स तथा उपकरणों को केवल या अन्य नेटवर्क माध्यम से जोड़ने का तरीका है । नेटवर्क टोपोलॉजी निम्न श्रेणियों में बाँटी गयी है-

* बस ( BUS ) टोपोलॉजी

* स्टार ( STAR ) टोपोलॉजी

* हिरारकिकल ( HIERARCHICAL ) स्टार टोपोलॉजी या ट्री ( TREE ) टोपोलॉजी

* रिंग ( RING ) टोपोलॉजी + मेश ( MESH ) टोपोलॉजी |

* वायरलैस ( WIRELESS ) टोपोलॉजी

11/02/2021

सॉफ्टवेयर का इतिहास - History of Software.

सॉफ्टवेयर क्या है ?
सॉफ्टवेयर , कम्प्यूटरों को ऑपरेट करने वाले प्रोग्रामों के प्रकार तथा उससे सम्बन्धित उपकरण को रूप से कहते हैं । सीधे शब्दों में हम सॉफ्टवेयर , विभिन्न कार्य को इलैक्ट्रिकल तरीके से करने के लिये प्रयोग करते हैं ।

हम जानते हैं कि कोई भी कम्प्यूटर सिस्टम का भाग जिसे देखा या छुआ जा सकता है , हार्डवेयर कहलाता है ।

हार्डवेयर , सॉफ्टवेयर से अलग है क्योंकि हार्डवेयर एक भौतिक उपकरण है जिसे छुआ और बनाया जा सकता है । इसमें मॉनीटर , की - बोर्ड , माउस , हार्ड ड्राइव , प्रोसेसर , डी ० वी ० डी ० ड्राइव तथा कोई भी चीज जो कम्प्यूटर का भौतिक भाग है , शामिल होते हैं ।

आई 0 ई ० ई ० ई ० की सॉफ्टवेयर की मानक परिभाषा
" सॉफ्टवेयर कम्प्यूटर प्रोग्रामों , कार्यप्रणाली तथा प्रलेखन का समूह है , जो ऑपरेटिंग सिस्टम पर कुछ कार्य करता है ।

🌑 " सॉफ्टवेयर उत्पाद एक निश्चित ग्राहक या एक सामान्य बाजार के लिये भी विकसित किया जा सकता है । "

🌑 सॉफ्टवेयर उत्पाद हो सकते हैं-

* विभिन्न ग्राहकों को बेचने के लिये किया गया जेनेरिक विकास । उदाहरण , DC सॉफ्टवेयर , जैसे कि एक्सेल या वर्ड ।

* किसी एक ग्राहक के लिये , उनके निर्देशों के अनुसार विकसित सॉफ्टवेयर ।

🌑 नये प्रोग्रामों का विकास करके , पुराने सॉफ्टवेयर सिस्टम को नया रूप देना या पुराने सॉफ्टवेयर को हटाकर नये सॉफ्टवेयर को बनाया जा सकता है ।

सॉफ्टवेयर तथा कम्प्यूटर हार्डवेयर में सम्बव्य कम्प्यूटर
हार्डवेयर भौतिक इन्टर - कोक्रान्स तथा उपकरणों को कवर करता है , जो सॉफ्टवेयर को सुरक्षित तथा चलाने ( रन ) करने के लिये चाहिये होते हैं । सबसे नीचे स्तर पर , सॉफ्टवेयर एक मशीनी भाषा का बना होता है , अकेले विशेष प्रोसेसर के लिये । एक मशीनी भाषा बाइनरी वैल्यू का समूह होती है जो प्रोसेसर के निर्देशों को अभिप्राय रखती है जो कम्प्यूटर की स्थिति को इसकी प्रोसीडिंग अवस्था से बदल देती है । सॉफ्टवेयर एक निर्देशों के क्रम का आदेश है , जो कम्प्यूटर हार्डवेयर की स्थिति एक निश्चित क्रम में बदलता है । यह अधिकांशत : उच्च स्तरीय प्रोग्रामिंग भाषा में लिखा होता है , जो कि मनुष्य के समझने और प्रयोग ( प्राकृतिक भाषा के नजदीक ) के लिये मशीनी भाषा से ज्यादा आसान और ज्यादा कुशल होता है । उच्च - स्तरीय भाषा , मशीनी भाषा विषय कोट में संग्रह या संकलित की जाती है । सॉफ्टवेयर असैम्बली भाषा ( Assembly Language ) में भी लिखा जा सकता है ।

सॉफ्टवेयर के प्रकार
सॉफ्टवेयर मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं -1 सिस्टम सॉफ्टवेयर , 2. एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर ।

सिस्टम सॉफ्टवेयर

यह कम्प्यूटर हार्डवेयर को संभालता तथा नियन्त्रित करता है , जिससे एप्लीकेशन सिस्टम कार्य कर सके । ऑपरेटिंग सिस्टम , जैसे कि Microsoft Windows , Mac Onx या Linux , सिस्टम सॉफ्टवेयर के प्रमुख उदाहरण हैं । सिस्टम सॉफ्टवेयर , वे सॉफ्टवेयर हैं जो मूलत : कम्प्यूटर को कार्यान्वित करते हैं । सिस्टम सॉफ्टवेयर का उद्देश्य , किसी निश्चित कम्प्यूटर उपकरण के विवरण से एप्लीकेशन प्रोग्रामर्स को अलग करना है और कम्प्यूटर के स्त्रोतों जैसे मैमोरी और प्रोसेसर समय को सुरक्षित और स्थायी तरीके में विभाजन करना भी है ।

सिस्टम सॉफ्टवेयर के प्रकार

१-ऑपरेटिंग सिस्टम -ऑपरेटिंग सिस्टम यूजर तथा हार्डवेयर के बीच का इन्टरफेस है , ये मैनेजमेंट तथा क्रियाओं के को - ऑर्डिनेशन तथा कम्प्यूटर के सीमित साधनों के साझे के लिये उत्तरदायी होता है ।

२-डिवाइस ड्राइवर - यह सॉफ्टवेयर कम्प्यूटर में हार्डवेयर डालने के लिये प्रयोग किये जाते हैं । यह सॉफ्टवेयर , हार्डवेयर को कार्यान्वित करता है । यह उसका प्रवेश करता है , जिसमें हार्डवेयर और कम्प्यूटर के बीच समाकलन बना रहता है ।

३-यूटिलिटी सॉफ्टवेयर - यूटिलिटी सॉफ्टवेयर ( सर्विस प्रोग्राम , सर्विस रूटिन , टूल या टूल रूटिन से भी जाना जाता है ) एक कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर , कम्प्यूटर हार्डवेयर , ऑपरेटिंग सिस्टम या एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर का संचालन तथा तालमेल में सहायता करने के लिये एक कार्य या एक छोटे क्रम के कार्य को करके बनाया जाता है । यूटिलिटी सॉफ्टवेयर लगभग सभी मुख्य ऑपरेटिंग सिस्टम का अंगभूत होता है ।

यूटिलिटी प्रोग्राम के उदाहरण

🌑 डिस्क डिफ्रेगमेंटर्स उन कम्प्यूटर फाइलों को जाँचता है जिनके कन्टेंट्स हार्डवेयर में अलग भाग को तरह सुरक्षित होते हैं और कार्यक्षमता को बढ़ाने के लिये भाग को एक साथ चलाती है ।

🌑 डिस्क चैकर हार्ड डिस्क के कन्टेंट्स को स्कैन कर उन फाइलों या क्षेत्रों को ढूंढता है जो किसी की तरह करप्टेड हों या सही तरीके से सुरक्षित ना की गई हों और उन्हें हटा कर ऑपरेटिंग हार्ड ड्राइव डिस्क कुशलता बढ़ाता है ।

🌑 डिस्क क्लीनर उन फाइलों को ढूंढता है जो कम्प्यूटर ऑपरेशन के लिये अनावश्यक होती हैं या जिन फाइलों ने बहुत ज्यादा जगह घेर रखी होती है । डिस्क क्लीनर यूजर की मदद करता है कि जब उसकी हार्ड डिस्क भर गयी हो , तो क्या हटाये ?

🌑 डिस्क पार्टीशनर्स एक ड्राइव को कई लॉजिकल ड्राइव में विभाजित करता है , हर एक का अपना फाइल सिस्टम होता है , जो ऑपरेटिंग सिस्टम द्वारा बना होता है । यह एक अकेली ड्राइव की तरह प्रयोग किया जाता है ।

🌑 डिस्क कम्प्रैशन जब एक स्ट्रीम या फाइल दी होती है तो उसका आउटपुट छोटी स्ट्रीम या छोटी फाइल में देने के लिए प्रयोग में आता है ।

🌑 एन्टी वायरस कम्प्यूटर के वायरस स्कैन करने के लिये प्रयोग किया जाता है ।

🌑 सिस्टम प्रोफाइलर्स , इन्स्टाल सॉफ्टवेयर तथा कम्प्यूटर से जुड़े हार्डवेयर की पूरी सूचना उपलब्ध कराता है ।

एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर

एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर किसी विशेष डेटा प्रोसेसिंग कार्य को हल करने के लिये कम्प्यूटर को समर्थ करता है । यहाँ एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर के दो प्रकार हैं

१-Pre - written Software Packages

२-User Application Program

बहुत सारे शक्तिशाली सॉफ्टवेयर पैकेज , जिनके लिये ज्यादा प्रोग्रामिंग की जानकारी नहीं चाहिये विकसित हो चुके हैं । ये समझने के लिये और प्रयोग के लिये प्रोग्रामिंग भाषा आसान होती है ।

यद्यपि ये पैकेज सामान्य और विशेष कार्य कर सकते हैं , कुछ ऐसे भी एप्लीकेशन हैं जहाँ ऐसे पैकेज प्रयोग नहीं किये जा सकते । ऐसे मामलों में एप्लीकेशन प्रोग्राम की बिल्कुल जैसी जरूरत हो , वैसा बनाना चाहिये । एक यूजर एप्लीकेशन प्रोग्राम , इनमें से एक प्रोग्रामिंग भाषा या पैकेज का प्रयोग करके बनाया जा सकता है । सबसे महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर पैकेज के वर्गीकरण उपलब्ध हैं-

🌑 Data Base Management Software

🌑 Spreadsheet Software

🌑 Word Processing Desktop Publishing ( DTP ) and Presentation Software

🌑Graphics Software

🌑 Data Communication Software

🌑 Statistical and Operational Research Software

डाटाबेस मैनेजमेन्ट सॉफ्टवेयर

सॉफ्टवेयर पैकेज जो डाटाबेस मैनेजमेन्ट सॉफ्टवेयर ( डी ० बी ० एम ० एस ० ) कहलाता है , माइक्रो कम्प्यूटर के आविष्कार से बहुत पहले विकसित हो चुका था । इसका उद्देश्य बड़े घनत्व के डेटा को बड़ी मशीन पर संचालन तथा समाकलन करने में होने वाली परेशानियों का हल करना था ।

डो ० बी ० एम ० एस ० पैकेज निम्न कारणों से बहुत प्रसिद्ध हो गये हैं

( 1 ) ये प्रयोग करने में आसान तथा सरल होते हैं ।

( 2 ) मूल लक्षण बहुत कम समय में समझे जा सकते हैं ।

( 3 ) इन पैकेजों को प्रयोग करके व्यवसाय की छोटी - छोटी सूचनाएँ बहुत जल्दी कुछ दिनों में ही लागू की जा सकती है ।

( 4 ) यह पैकेज बड़ी एप्लीकेशन के लिये एक साधन की तरह प्रयोग किया जा सकता है । प्रोटोटाइपिण , बड़ी एप्लीकेशन का संचालन कम मूल्य में करने के लिये बहुत उपयोगी होती है ।

डो ० बी ० एम ० एस ० निम्न सुविधाएं उपलब्ध कराता है

( 1 ) डेटा फाइल बनाता है ।

( 2 ) इन डेटा फाइलों को बहुत सारे फंक्शन जैसे , जोड़ना , हटाना , सम्पादन करना तथा एक दिये गये डेटा को अपडेट करके सुरक्षित रखती है ।

( 3 ) बनी हुई डेटा फाइलों पर आधारित रिपोर्ट बनाते हैं ।

( 4 ) इन डेटा फाइलों पर जानकारी लेता है ।

कुछ प्रसिद्ध डाटाबेस मैनजमेंट सिस्टम हैं- Foxpro , Oracle आदि ।

इलैक्ट्रॉविक स्प्रेडशीट सॉफ्टवेयर

इलैक्ट्रॉनिक स्प्रेडशीट मैनेजमेंट माइक्रोकम्प्यूटर में प्रयोग किया जाता है । ऐसे पैकेजों में मूल्य का मूलभूत अनुमान ' इलेक्ट्रॉनिक स्प्रेडशीट की धारणा है । एक स्प्रेडशीट पंक्तियों तथा स्तम्भ के साथ , मात्र एक पेपर है जिसमें डेटा संख्याओं या टैक्स्ट के रूप में भरा जाता है ।

एक बैलेंस शीट एक स्प्रेडशीट है , मूल्यों की सूची एक स्प्रेडशीट है । वास्तव में अधिकतर प्रबंधकीय रिपोर्ट , स्प्रेडशीट होती है । एक इलेक्ट्रॉनिक स्प्रेडशीट बिल्कुल पेपर स्प्रेडशीट की तरह होती है ।

इसकी मुख्य बातें हैं

1. यह संशोधन करने में बहुत तेज और आसान होती है ।

2. एक दिये गये समय में कोई भी पूरी शीट का केवल एक हिस्सा देख सकता है ।

स्प्रेडशीट का प्रतिरूप बहुत सरल होता है , जो इसे यूजर के लिये यूजर - फ्रेंडली बना देता है । ये बहुत सारी एप्लीकेशन में प्रयोग किया जाता है । इनका सबसे ज्यादा प्रयोग वित्त सम्बन्धी प्रतिरूप में होता है , ये कभी भी मार्केटिंग , प्रोडक्शन , लॉजिस्टिक्स तथा मनुष्य स्त्रोतों के क्षेत्र में भी प्रयोग किया जाता है ।

वर्ड प्रोसेसिंग , डी ० टी ० पी ० तथा प्रेजेन्टेशन सॉफ्टवेयर

बर्ड प्रोसेसिंग सॉफ्टवेयर यूजर को टाइप डाक्यूमेंट बनाने के लिये सक्षम करने के लिये बनाया गया है । डेटा पर होता है । इस तरह , भेद में डेटा प्रोसेसिंग में जहाँ सारा केन्द्र संख्या के डेटा पर होता है , यह प्रोसेसिंग में सारा केन्द्र टैक्स्ट डेटा पर होता है।

पब्लिशिंग गुण के डाक्यूमेंट Desk Thap Publishing ( DTP ) पैकेज को प्रयोग करके आसानी से बनाया जा सकता है । प्रेजेन्टेशन सॉफ्टवेयर का प्रयोग अच्छे प्रस्तुतिकरण के लिये किया जाता है ।

डाक्यूमेंट को वर्ड प्रोसेसिंग प्रयोग करके बनाने के लिये सबसे पहले इसे कम्प्यूटर में को - बोर्ड का प्रयोग करके टाइप किया जा सकता है । मुख्य उत्पादित सुधार आराम तथा शीघ्रता से आता है , जिसके साथ डेटा विरोधित हो जाता है । केवल तब जब फिनिश्ड वर्जन तैयार हो तो इसे पेपर पर रखना आवश्यक होता है । जब कुछ पत्रों के ड्राफ्ट या रिपोर्ट या पिछली रिपोर्ट में बहुत ज्यादा प्रयोग किये गये टेक्स्ट का प्रयोग होना होता है तो प्रोडक्टिविटी लाभ बहुत ज्यादा होता है ।

कुछ अवस्थायें जहाँ ज्यादा लाभ सम्भव है : ला फर्म , कॉन्ट्रेक्टर्म , अखबार , दफ्तर , बैंक तथा सरकारी दफ्तर ।

कुछ मुख्य डेटा प्रोसेसिंग पैकेज हैं । माइक्रोसॉफ्ट वर्ड , वर्डस्टार , वर्ड परफैक्ट आदि और कुछ प्रमुख डी ० टी ० पी ० पैकेज Ventura तथा Pagemaker है ।

बिजनेस ग्राफिक्स सॉफ्टवेयर

मनुष्य का मस्तिष्क चित्रात्मक प्रस्तुतिकरण प्रतिरूपों में से चुनने में बहुत ज्यादा निपुण है । जैसे कि पहले कहा गया है कि एक फोटो या चित्र में हजारों शब्द होते हैं , उसी तरह यह भी सच है कि एक पिा में हजारों संख्या होती है । कम्प्यूटर प्रभावनिय डेटा को शीघ्रता से , स्क्रीन पर ग्राफिक प्रतिरूप में बदलता है और साथ ही साथ डाटमैटिक्स या प्लॉटर की सहायता से पेपर पर भी दिखाता है । प्लॉटर के साथ यह सम्भव है कि ये पिभिन रंग की हों ( साधारण : चार रंगों की ) आदर्शरूप से बिजनेस ग्राफिक्स सॉफ्टवेयर डेटा को निम्न रूपों में प्लॉटेड करने में सक्षम करता है

1. लाइन चार्ट्स

2. बार पार्ट्स

3. पाई चाट्स

कुछ उच्च स्तरीय विजनेस ग्राफिक्स सॉफ्टवेयर श्री - टाइमेशनल डिस्प्ले तथा नक्शे भी देते हैं ।

डेटा कम्यूनिकेशन स्टोर

बड़े उद्योगों में , एक मध्य कम्प्यूटर , टेटा प्रोसेसिंग के लिये होता है , जो प्रतिदिन देटा प्रोसेसिंग करता है । कई बार एक मैनेजर यह डेटा अपने पसर्नल कम्प्यूटर पर प्रोसेसिंग के लिये लेना चाहता है ।

यह सुविधा देने के लिये , डेटा कम्यूनिकेशन सॉफ्टवेयर विकसित किया गया है । यह सॉफ्टवेगर इनको दूसरे कम्प्यूटरों पर एक टर्मिनल की तरह दिखाने के लिये उपयुक्त है । यह पर्सनल कम्प्यूटर पर चलता है । इस ' टर्मिनल प्रतिस्पर्धा सुविधा का प्रयोग करके , मैनेजर होस्ट कम्प्यूटर से डेटा को ले सकता है ।

स्टैटिस्टिकल पैकेज

मानक सांख्यकीय विश्लेषण का प्रयोग करने के लिये , महुत सारे आसानी से प्रयोग किये जा सकने वाले पैकेज उपलब्ध है , जो मापको कम्यूटर पर पलते हैं । इसमें आदर्श मला आपूजि वितरण , प्रास - सारणीकरण , जनसंख्या पाच्य के लिये परीक्षा तथा समानुपात वेरिये । variance के विश्लेषण , कागिसो Continape my टेबल टेन्ट , गिरेशन तथा कोपिलेशप विश्लेषण हैं । ज्यादा गये पैकज पोरकास्टिंग मारल्ला राम सीरीज विश्लेषण तथा नॉन - पैरामेट्रिका विश्लेषण भी आते हैं ।

ऑपरेशन रिस पैकेज

कुछ मानक ऑपरेशन अनुसंधान प्रतिरूप , जैसे कि Linear Programming . Critical Path Analysis , Resuunces Scheslaling , Simulation , Decision free Analysis T था Networknow के लिये सस्ते पैकेज उपलब्ध है । जबकि ये पैकेज इतने शक्तिशाली नहीं होते जितने कि बड़ी मशीनों के सॉफ्टवेयर । ये यूजर - फ्रेडली भी होते हैं । ये मध्य प्रकार की परेशानी को हल करने में पर्याप्त शक्तिशाली होते हैं ।

इन्टीतोटेड सॉफ्टवेयर

सोफ्टवेयर पैकेज जो कई एप्लीकेशन को एक प्रोग्राम में जोड़ता है , इन्टीग्रेटेड सॉफ्टवेयर कहलाता है । पहले एक एकाउन्टेट को एक प्रोग्राम का प्रयोग डेटा का एक प्रोग्राम में से दूसरे प्रोग्राम में लोड करने के लिये करना पड़ता था । अब यहाँ इन्टीग्रेटेड प्रोग्रामर दो या उससे ज्यादा माँयूल्स होते हैं जो इन्ट्रैक्ट करते हैं । समान सूचनाओं के स्त्रोत बहुत सारे उद्देश्य और क्रियाओं के लिये एक इन्टीग्रेटेड पैकेज रिकमंड किया जाता है । उदाहरण के लिए Ms.office वर्ड प्रोसेसिंग करता है , आउटलाइनिंग करता है , टेलीकम्यूनिकेशन , ग्राफिक्स , डाटावेस तथा स्प्रेडशीट बनाता है तथा हर एक को एक फ्रेम की तरह सुरक्षित करता है , जो कि दूसरे प्रेम के साथ इन्टीग्रेटेड किया जा सकता है ।

इन्टीग्रेटेड सॉफ्टवेयर का लाभ है कि यूजर को बहुत स्वारे अलग - अलग पैकेज को प्रयोग करना नहीं सीखना पड़ता । अन्य लाभ यह है कि एक डेटा एक फंक्शन से अन्य फंक्शन तक आसानी से भेजा जा सकता है ।

इसका नुकसान यह है कि यह महंगा है और कम्प्यूटर साधनों की ज्यादा मांग करता है ।

यूजर इन्टरफेस के आधार पर एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर के प्रकार
🌑 कन्सोल आधारित - सी ० आई ० करेक्टर यूजर इन्टरफेस ) पर आधारित एप्लीकेशन कन्सोल एप्लीकेशन

🌑 डेस्कटॉप आधारित - ग्राफिकल यूजर इन्टरफेस पर आधारित एप्लीकेशन , डैस्कटॉप एप्लीकेशन कहलाती है । हम इन एप्लीकेशन के शार्टकट बना सकते हैं ।

🌑 वैब आधारित - वेव एप्लीकेशन वेब - एक्सेसिबल ( वेब ब्राउजर के द्वारा चलाई या एक्सेस की जा सकने बालो । वेब - कनेक्टेड ( सूचनाओं के रिट्रीवल व डिस्प्ले के लिये एच ० टी ० टी ० पी ० कनेक्शन का प्रयोग करके ) और यस्क - ओरियेन्रेड सॉफ्टवेयर है ।

सॉफ्टवेयर के विकास का जीवन - चक्र
सॉफ्टवेयर के विकास का जीवन - चक तथा साफ्टवेयर क्रिया का समानरूपी एवं सॉफ्टवेयर इंजीनियर , एक सक्पर्ड मेयोडालाजी structurel methodology है , जिसका प्रयोग साफ्टवेयर के प्रोडक्ट्स तथा पैकेजों को बनाने के लिये किया गया । यह तरीका कानोपान फेज conception phase से डिलीवरी के द्वारा तथा अन्तिम सॉफ्टवेयर प्रोडकर के जीवन के अन्त तक प्रयोग किया जाता है ।

एस डी ० एल ० सी ० सूचनाओं के सिस्टम को इन्वेस्टीगेशन , विश्लेषण डिजाइन , इम्प्लीमेंटेशन , मेंटीनेस के द्वारा विकसित करना है । यह इन्फारमेशन सिस्टमा डेवलपमेंट या ऐप्लीकेशन डेवलपमेन्ट के नाम से भी जाना जाता है । एस ० डी ० एल ० सी ० समस्या को हल करने की अप्रोच है तथा यह कई फेसेज़ की बनी होती है तथा हर एक में कई चरण होते हैं

1. Access Needs

2. Design Specifications

3. Design/Develop/Test Software

4. Implement Systems

5. Support Operations

6. Evaluation Performance

1. एक्सेस नीड्स आवश्यकता को नये सिस्टम के लिये पहचानती तथा परिभाषित करती है और अन्तिम यूजर के लिये सूचनाओं को आवश्यकता का विश्लेषण करती है । इस फेज़ में , क्या जरूरत है और नये सिस्टम की क्या आवश्यकता है . इसे पहचानती है ।

2. डिजाइन स्पेसिफिकेशन डिजाइन के लिये एक ब्लूप्रिन्ट बनाता है , आवश्यकता विशेषता के साथ हार्डवेयर , सॉफ्टवेयर , मनुष्य तथा डेटा स्त्रोतों के लिये ।

3. डिजाइन डबलप / टेस्ट सॉफ्टवेयर - इस चरण में डिजाइन के ब्लूप्रिन्ट पर कार्य शुरू होता है । अन्तिम डिजाइन निश्चित होता है और कोडिंग शुरू होती है । कोडिंग में हम अन्तिम सिस्टम को बनाते तथा प्रोग्राम करते हैं और टेस्टिंग में सिस्टम को असली कार्यक्षमता को , सोची गई कार्यक्षमता के सम्बन्ध में मूल्यांकन

4. इम्प्लीमेंट सिस्टम बना हुआ सिस्टम यूजर के लिये वर्क साइट पर implemented होता है ।

5. सपोर्ट ऑपरेशन - इस अवस्था में वर्क सिस्टम के लिये जो ऑपरेशन आवश्यक हैं , वे अच्छी तरह से किये जाते हैं ।

6. परफारमेंस का मूल्यांकन सोचे गये कार्य और असली कार्य की तुलना की जाती है , इस तुलना के आधार पर सिस्टम के परफारमेंस का मूल्यांकन होता है । अगर सिस्टम में किसी modification की आवश्यकता होती है , तो प्रथम चरण से अन्तिम तक एक्जिक्यूट होता है । यह क्रिया तब तक दोहराई जाती है जब तक सिस्टम बिल्कुल सही कार्य नहीं करता है ।

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