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30/10/2024

श्री अंतरीक्ष पार्श्वनाथ दादा के आज के दर्शन
तारीख़ 30-10-2024

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🪔दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं 🪔
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🌹नव वर्ष की शुभकामनाएं🌹
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देखो नूतन वर्ष है आया,
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धरा पुलकित हुई गगन मुस्काया,'
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एक आकर्षक, एक सोच, एक नवीनीकृत,
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एक विश्वास एक सपना,'
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*एक सच्चाई एक कल्पना,'
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यही है एक नव वर्ष की प्रारंभ.
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*नव वर्ष की हार्दिक
शुभकामनाएं*
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💞सह परिवार 💕
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➡राजेश जैन⬅
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11/10/2024

11.10.2024
"जब व्यक्ति संसार में जन्म लेता है, तब उसके हाथ खाली होते हैं। उसके पास कोई धन संपत्ति रुपया पैसा आदि भौतिक वस्तुएं कुछ भी नहीं होता। और जब संसार से जाता है, तब भी यही स्थिति होती है। वह कुछ भी रुपया पैसा या बर्तन बिस्तर कपड़े आदि भौतिक वस्तुएं अपने साथ नहीं ले जाता।"
"हां, जब वह संसार में आता है, तो पूर्व जन्मों के कर्म और संस्कार अपने साथ लाता है। और जब संसार से जाता है, तब भी वह अपने कर्म और संस्कार साथ लेकर जाता है।"* इससे पता चलता है, कि *"वह जीवन भर जो भी अच्छे बुरे कर्म करता है, और उनके जो भी अच्छे बुरे संस्कार बनते हैं, बस वही उसकी अपनी और असली संपत्ति है। वही उसके साथ अगले जन्म में जाती है।"
जब व्यक्ति संसार में आता है, और यहां पुरुषार्थ करके बहुत सी विद्या धन संपत्ति बर्तन बिस्तर कपड़े आदि वस्तुएं प्राप्त कर लेता है, तो उसका यह कर्तव्य होता है, कि "उसकी आवश्यकतानुसार धन संपत्ति आदि वस्तुओं को अपने पास रख कर, जो उसके पास अपनी आवश्यकता से अधिक वस्तुएं हों, उनको वह योग्य पात्रों में बांट दे। प्रेम और सम्मान भी दूसरे योग्य व्यक्तियों को देते रहना चाहिए। वह जितना अधिक बांटेगा, उतना ही उसका पुण्य कर्म बढ़ेगा। और यही पुण्य कर्म उसकी असली संपत्ति है, जिसे वह अपने साथ अगले जन्म में भी ले जा सकेगा।"
यदि किसी व्यक्ति के पास, धन संपत्ति आदि वस्तुएं, उसकी आवश्यकता से जितनी मात्रा में अधिक हों, और वह उन्हें योग्य पात्रों में बांट दे, तो इसका एक और लाभ यह भी है, कि "ईश्वर की कृपा और उसकी कर्म फल व्यवस्था से उसे धन सम्पत्ति बर्तन बिस्तर आदि वस्तुओं की कोई कमी नहीं रहती। ये सब वस्तुएं उसे और अधिक अधिक वापस मिलती ही रहती हैं। बल्कि ऐसा करने से उसे समाज में आदर और सम्मान भी विशेष रूप से मिलता है। इसलिए बांटने में लाभ ही दिखाई देता है, कोई हानि नहीं दिखाई देती।"
एक और बात -- "धन संपत्ति आदि वस्तुएं अपनी आवश्यकता से अधिक मात्रा में संग्रह करने पर, उनकी रक्षा आदि करने संबंधी अनेक प्रकार के कष्ट और बढ़ जाते हैं। इसलिए उन कष्टों से बचने के लिए तथा पुण्य कर्म अपने साथ अगले जन्म में ले जाने के लिए, व्यक्ति को अपने पास विद्यमान आवश्यकता से अधिक धन संपत्ति आदि वस्तुएं और सम्मान योग्य पात्रों में बांटते रहना चाहिए। इसी में बुद्धिमत्ता और जीवन की सफलता है।"
---- "स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."

11/10/2024

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11 अक्टूबर 2024 शुक्रवार
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आज का अनमोल विचार
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एक चिंतन..................................
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जीवन में समय से अधिक महत्वपूर्ण कोई नहीं होता,
⊂⁠(⁠◉⁠‿⁠◉⁠)⁠つ" क्योंकि "⊂⁠(⁠◉⁠‿⁠◉⁠)⁠つ
समय ठीक हो तो सब अपने बन जाते हैं पर समय खराब हो तो अपने भी पराए हो जाते हैं..!!
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व्यक्ति अकेला पैदा होता है और अकेला ही मर जाता है,
⊂⁠(⁠◉⁠‿⁠◉⁠)⁠つ" लेकिन "⊂⁠(⁠◉⁠‿⁠◉⁠)⁠つ
अच्छे और बुरे कर्मों का फल खुद ही भुगतना पड़ता हैं, अकेले ही नरक या स्वर्ग जाता है..!!
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अपने हिस्से की खुशियों में से कुछ खुशियां बांट कर जो मुस्कुराता है,
⊂⁠(⁠◉⁠‿⁠◉⁠)⁠つ" यकीन मानिए "⊂⁠(⁠◉⁠‿⁠◉⁠)⁠つ
उसे परमात्मा ने समय-समय पर हर संकट से बचाया और बचाता है..!!
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‼ जयश्रीराम ‼
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11/10/2024

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जीवन के सात सच्चे मंत्र:-

1. दर्पण - झूठ नहीं बोलने देगा!

2. ज्ञान - भयभीत नहीं होने देगा !

3. आध्यात्म – मोह नहीं करने देगा!

4. सत्य – कमज़ोर नहीं करने देगा!

5. प्रेम - ईर्ष्या नहीं करने देगा!

6. विश्वास – दुःखी नही करने देगा !

7. कर्म – असफल नहीं होने देगा !
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10/10/2024

कोई नहीं कह रहा कि एक अमीर आदमी चला गया, हर कोई कह रहा है कि एक अच्छा आदमी चला गया। जब आप अमीर होते हैं तो यह उपलब्धि हासिल करना बेहद दुर्लभ है।

अगर आपको उनसे सिर्फ़ एक चीज़ सीखनी है। तो एक अच्छा इंसान बनना सीखें।

10/10/2024

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10 अक्टूबर 2024 गुरुवार
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आज का अनमोल विचार
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एक चिंतन..................................
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सोने की कलम शायद विरासत में मिल जाए,
⊂⁠(⁠◉⁠‿⁠◉⁠)⁠つ" लेकिन "⊂⁠(⁠◉⁠‿⁠◉⁠)⁠つ
लिखना क्या है इसका ज्ञान न हो तो सब व्यर्थ है...!!!
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बदला लेने की नहीं बदलाव लाने की सोच रखिए,
⊂⁠(⁠◉⁠‿⁠◉⁠)⁠つ" क्योंकि "⊂⁠(⁠◉⁠‿⁠◉⁠)⁠つ
थोड़े से गुस्से से बहुत कुछ बिखर जाता है, और जब होश आता है तो समय निकल जाता है..!!
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अभिमान कहता है कि किसी की जरूरत नहीं,
⊂⁠(⁠◉⁠‿⁠◉⁠)⁠つ" लेकिन "⊂⁠(⁠◉⁠‿⁠◉⁠)⁠つ
अनुभव कहता है की धूल की भी जरूरत पड़ेगी..!!
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‼ जयश्रीराम ‼
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10/10/2024

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सुख की खोज संसार का हर मानुषया करता है। किसी को सुख धन संपत्ति में मिलता है। किसी को परिवार से किसी को ईश्वर से तो किसी को आध्यातमिक अपितु एक वास्तु एक भाव येसा भी है तो हर किसी को सुख देता है। चार समस्या का निवारण बनता है और वो है दूसरों के सुख का करण बन्ना जी हां तब हम किसी को सुख देते हैं किसी की मुस्कान का करण बनते हैं तब वाही सुख वाही संतुष्टि लौटकर हमारे पास भी आती ईसलिए सब का सुख सोचो शुभ करो और फिर देखिए कैसे यह संपूर्ण संसार आप के सुख का कारण बनता है
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09/10/2024
16/09/2024

[🌹🌹🌹🌹🙏🙏🙏🌹🌹🌹🌹
घर के बड़ो का सुझाव परिवार के सदस्यों को अप्रिय लगने लगें..और परायों का सुझाव अच्छा लगने लगें...
तो समझ लीजिए...घर का विनाश द्वार पर खड़ा हैं...
🌹🌹🙏 सुप्रभात🙏🌹🌹

16/09/2024

🔹1 आत्मा के सिवा कुछ और अपना न लगना आकिंचन्य धर्म है।
🔹2 परिग्रह पाप है और आकिंचन्य धर्म।
🔹3 मिथ्यात्व का त्याग ही प्रथम परिग्रह का त्याग है।
🔹4 परिग्रह के त्याग का नाम ही तो आकिंचन्य है।
🔹5 परी अर्थात चारो ओर से आत्मा का ग्रहण ही परिग्रह है।
🔹6 सार तो आकिंचन्य धर्म ही है।
🔹7 हास्य भी तो एक परिग्रह है।
🔹8 परिग्रह पाप भी है और कषाय भी है।
🔹9 मिथ्यात्व छूटे बिना कोई परिग्रह नही छूट सकता है।
🔹10 परिग्रह सबसे बड़ा पाप व आकिंचन्य सबसे बड़ा धर्म है।
🔹11 जगत में सब पापों की जड़ परिग्रह है।
🔹12 मूर्छा का नाम ही तो परिग्रह है।
🔹13 परिग्रही दुखी व निर्ग्रन्थ सुखी होता है।
🔹14 पहले अंतरंग परिग्रह छोड़िये बाह्य छूट जाएगा।
🔹15 परिग्रही निंदनीय और निर्ग्रन्थ पूज्य होता है।

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