11/10/2024
11.10.2024
"जब व्यक्ति संसार में जन्म लेता है, तब उसके हाथ खाली होते हैं। उसके पास कोई धन संपत्ति रुपया पैसा आदि भौतिक वस्तुएं कुछ भी नहीं होता। और जब संसार से जाता है, तब भी यही स्थिति होती है। वह कुछ भी रुपया पैसा या बर्तन बिस्तर कपड़े आदि भौतिक वस्तुएं अपने साथ नहीं ले जाता।"
"हां, जब वह संसार में आता है, तो पूर्व जन्मों के कर्म और संस्कार अपने साथ लाता है। और जब संसार से जाता है, तब भी वह अपने कर्म और संस्कार साथ लेकर जाता है।"* इससे पता चलता है, कि *"वह जीवन भर जो भी अच्छे बुरे कर्म करता है, और उनके जो भी अच्छे बुरे संस्कार बनते हैं, बस वही उसकी अपनी और असली संपत्ति है। वही उसके साथ अगले जन्म में जाती है।"
जब व्यक्ति संसार में आता है, और यहां पुरुषार्थ करके बहुत सी विद्या धन संपत्ति बर्तन बिस्तर कपड़े आदि वस्तुएं प्राप्त कर लेता है, तो उसका यह कर्तव्य होता है, कि "उसकी आवश्यकतानुसार धन संपत्ति आदि वस्तुओं को अपने पास रख कर, जो उसके पास अपनी आवश्यकता से अधिक वस्तुएं हों, उनको वह योग्य पात्रों में बांट दे। प्रेम और सम्मान भी दूसरे योग्य व्यक्तियों को देते रहना चाहिए। वह जितना अधिक बांटेगा, उतना ही उसका पुण्य कर्म बढ़ेगा। और यही पुण्य कर्म उसकी असली संपत्ति है, जिसे वह अपने साथ अगले जन्म में भी ले जा सकेगा।"
यदि किसी व्यक्ति के पास, धन संपत्ति आदि वस्तुएं, उसकी आवश्यकता से जितनी मात्रा में अधिक हों, और वह उन्हें योग्य पात्रों में बांट दे, तो इसका एक और लाभ यह भी है, कि "ईश्वर की कृपा और उसकी कर्म फल व्यवस्था से उसे धन सम्पत्ति बर्तन बिस्तर आदि वस्तुओं की कोई कमी नहीं रहती। ये सब वस्तुएं उसे और अधिक अधिक वापस मिलती ही रहती हैं। बल्कि ऐसा करने से उसे समाज में आदर और सम्मान भी विशेष रूप से मिलता है। इसलिए बांटने में लाभ ही दिखाई देता है, कोई हानि नहीं दिखाई देती।"
एक और बात -- "धन संपत्ति आदि वस्तुएं अपनी आवश्यकता से अधिक मात्रा में संग्रह करने पर, उनकी रक्षा आदि करने संबंधी अनेक प्रकार के कष्ट और बढ़ जाते हैं। इसलिए उन कष्टों से बचने के लिए तथा पुण्य कर्म अपने साथ अगले जन्म में ले जाने के लिए, व्यक्ति को अपने पास विद्यमान आवश्यकता से अधिक धन संपत्ति आदि वस्तुएं और सम्मान योग्य पात्रों में बांटते रहना चाहिए। इसी में बुद्धिमत्ता और जीवन की सफलता है।"
---- "स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."