12/06/2026
“Mining ने लोगों को रोज़गार दिया है या उनके घर छीन लिए हैं?”
झारखंड और आदिवासी इलाकों की सबसे बड़ी बहसों में से एक यही है। एक तरफ़ खनन से विकास, उद्योग और रोजगार की बात होती है, तो दूसरी तरफ़ विस्थापन, जल-जंगल-जमीन और पहचान के सवाल खड़े होते हैं।
इसी महत्वपूर्ण विषय पर हमने KankeTalks में IRS अधिकारी Nesha Oraon जी से सीधा सवाल पूछा।
क्या विकास और विस्थापन साथ-साथ चल सकते हैं?
क्या खनन से स्थानीय लोगों का जीवन बेहतर हुआ है?
या इसकी सबसे बड़ी कीमत उन्हीं लोगों ने चुकाई है, जिनकी ज़मीन पर खनिज संपदा मौजूद है?
देखिए Nesha Oraon जी का बेबाक जवाब और कमेंट में बताइए कि आपकी राय क्या है।
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