06/08/2022
है सुलगति सी ये धुप
पर तेरी छाया काफ़ी है ,
जितना देखूं तुम्हे
लगता है अभी भी कुछ बाक़ी है ,
रुस्वा तुम हो जाती हो ,
पर मनाने का रस्ता मेरा
अभी बाक़ी है ,
छिप जाती हो जल्द ही ,
पर पता देने के लिए
तुम्हारा साया ही काफी है ,
सावन की नाराजगी को
पतझड़ से मनाना अभी बाक़ी है ,
है तुम्हारे रंग ही वो ,
देख लो चाहे जिस तरफ़ ,
हर ज़रे पर ज़िक्र तुम्हारा बाकी है ,
लुटा दूँ मैं ये जहान भी ,
पर मेरे इज़हार का अभी किस्सा
बाकी है ,
कहानी है वो दफ़न कहीं इस
ख़िज़ाँ में ,
बस परत हटाकर देखना बाकी है ,
ना जाने क्यूँ ये लगता है
लौट के आओगे तुम कभी ,
क्यूंकि प्यार का किस्सा अभी बाकी है
Kishu❤️love