13/10/2019
PMCH के ICU बेड पर लेटे इस शख्स का बॉयोडाटा पढ़ लीजिए।
नाम है :
#डॉ_वशिष्ठ_नारायण_सिंह.( विश्व के महान गणितज्ञ)
# 2 अप्रैल 1946 : #जन्म.
# 1958 : नेतरहाट की परीक्षा में #सर्वोच्च_स्थान.
# 1963 : हायर सेकेंड्री की परीक्षा में #सर्वोच्च_स्थान.
# 1964 : इनके लिए पटना विश्वविद्यालय का #कानून बदला। सीधे ऊपर के क्लास में दाखिला. बी.एस-सी.आनर्स में #सर्वोच्च_स्थान.
# 8 सितंबर 1965 : #बर्कले विश्वविद्यालय में आमंत्रण दाखिला.
# 1966 : #नासा में.
# 1967 : #कोलंबिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैथेमैटिक्स का #निदेशक.
# 1969 : ीस_आफ_स्पेस_थ्योरी विषयक तहलका मचा देने वाला शोध पत्र (पी.एच-डी.) दाखिल.
# बर्कले यूनिवर्सिटी ने उन्हें #जीनियसों_का_जीनियस" कहा.
# 1971 : #भारत_वापस देशभक्ति का कीड़ा काटा
# 1972-73: #आइआइटी कानपुर में #प्राध्यापक, टाटा इंस्टीट्यूट आफ फंडामेंटल रिसर्च (ट्रांबे) तथा स्टैटिक्स इंस्टीट्यूट के महत्वपूर्ण पदों पर आसीन.
# 8 जुलाई 1973 : #शादी
कहा जाता है औरत किसी के सफलता का कारण बनती है तो बर्बाद भी औरत ही करती है। इतिहास गवाह है
( इनकी पत्नी ने इनके शोधपत्र को चुल्है में जला दिया था जिसके कारण से ये अवसाद मे चले गए )
# जनवरी 1974 : #विक्षिप्त, रांची के मानसिक आरोग्यशाला में भर्ती.
#सिज़ोफ्रेनिया नामक मानसिक बीमारी से पीड़ित
# 1978: सरकारी इलाज शुरू.
# जून 1980 : सरकार द्वारा #इलाज_का_पैसा_बंद.
#1982 : डेविड #अस्पताल में #बंधक.
# नौ अगस्त 1989 : गढ़वारा (खंडवा) स्टेशन से लापता.
# 7 फरवरी 1993 : डोरीगंज (छपरा) में एक झोपड़ीनुमा होटल के बाहर #फेंके_गए_जूठन में #खाना तलाशते मिले.
# तब से रुक-रुक कर होती #इलाज #की सरकारी/प्राइवेट #नौटंकी.
# पिछले दो दिन से : पीएमसीएच के आईसीयू में.
(खबर है कि जान बची हुई है। जल्द रिलीज हो जाएंगे).
बहुत ही मामूली आदमी का बेटा वशिष्ठ से आखिर क्या गलती हुई कि आज इस सिचुएशन में हैं?
सिर्फ और सिर्फ यही कि उनके पोर-पोर में देशभक्ति घुसी थी। अमेरिका का बहुत बड़ा ऑफर ठुकरा कर अपनी मातृभूमि (भारत) की सेवा करने चले आए। और भारत माता की छाती पर पहले से बैठे सु (कु) पुत्रों ने उनको पागल बना दिया।
वह वशिष्ठ पागल हो गया, जिनका जमाना था; जो गणित में आर्यभट्ट व रामानुजम का विस्तार माना गया था;
वही वशिष्ठ, जिनके चलते पटना विश्वविद्यालय को अपना कानून बदलना पड़ा था। इस चमकीले तारे के खाक बनने की लम्बी दास्तान है।
डॉ.वशिष्ठ ने भारत आने पर इंडियन इन्स्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (कोलकाता) की सांख्यिकी संस्थान में शिक्षण का कार्य शुरू किया। कहते हैं यही वह वक्त था, जब उनका मानसिक संतुलन बिगड़ा। वे भाई-भतीजावाद वाली कार्यसंस्कृति में खुद को फिट नहीं कर पाए। कई और बातें हैं। #शोधपत्र की #चोरी, #पत्नी से #खराब #रिश्ते, पत्नी ने इनकी वर्षो की मेहनत इनके #शोधपत्र को #चूल्हे में #जला #दिया …, दिमाग पर बुरा असर पड़ा। फिर सरकार और सिस्टम की बारी आई। नतीजा सामने है।
खैर, उन तमाम लोगों को बहुत-बहुत धन्यवाद, जो अपने को अनाम/गुमनाम रखते हुए, डॉ.वशिष्ठ के भोजन, पटना में उनके रहने का इंतजाम, दवाई आदि का प्रबंध किए हुए हैं। वरना ...? यह वह जमात या मिजाज है, जो अपने दम पर दुनिया को यह बताए हुए है कि घिना देने वाली तमाम स्थितियों के बावजूद, आदमियों की दुनिया में, आदमी के पास, आदमी को जिंदा रखने की ताकत है। इन सबके प्रति फिर से आभार।
अरे, वशिष्ठ का क्या गया? गया तो इस देश-समाज का, जो उनका समाज कल्याण में सदुपयोग नहीं कर पाया।
मित्र अनूप नारायण सिंह ने लिखा है कि महान गणितज्ञ देश की शान बिहारी माटी की आन डॉक्टर वशिष्ठ नारायण सिंह की तबीयत में तेजी से सुधार हो रहा है. उनके भतीजे मुकेश कुमार सिंह ने जानकारी दी है कि कमजोरी के कारण फिलहाल में खड़ा नहीं हो पा रहे है इस कारण से डॉक्टरों द्वारा दबाव बनाए जाने के बाद भी आज उनह पीएमसीएच से डिस्चार्ज नहीं कराया गया है. बिहार के इस महान विभूति के स्वास्थ्य को लेकर जिस तरह से लोग चिंतित हैं उनके बारे में जानना चाहते हैं उसके लिए हम सभी आपके आभारी है. आशा करते हैं कि अगले दो-तीन दिनों में वे सामान्य रूप से हम लोगों के बीच में होगे.