Rashtra Nirman Academy by JDS

Rashtra Nirman Academy by JDS Ignite your future
“मुनाफा का तो पता नहीं लेकिन बेचने वाले तो यादों को भी कारोबार बना कर बेच देते है।”
जीवन एक यात्रा है, मंजिल नहीं।” – ..

"शिक्षा हमें वह पंख देती है, जो हमें ऊँचाइयों तक उड़ने की क्षमता देता है।" -

14/02/2026
14/02/2026

आँख फाड़ दिमाग़ 🧠को हिला देने वाला सच, पढ़ कर आप भी आश्चर्य चकित रह जायेंगे 🤔
भारत में कुल 4120 MLA और 462 MLC हैं अर्थात कुल 4,582 विधायक...!!
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प्रति विधायक वेतन भत्ता मिला कर प्रति माह 2 लाख का खर्च होता है। अर्थात,
91 करोड़ 64 लाख रुपया प्रति माह। इस हिसाब से प्रति वर्ष लगभ 1100 करोड़ रूपये।
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भारत में लोकसभा और राज्यसभा को मिलाकर कुल 776 सांसद है..!!
इन सांसदों को वेतन भत्ता मिला कर प्रति माह 5 लाख दिया जाता है।
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अर्थात कुल सांसदों का वेतन प्रति माह 38 करोड़ 80 लाख है। और हर वर्ष इन सांसदों को 465 करोड़ 60 लाख रुपया वेतन भत्ता में दिया जाता है..!!
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अर्थात भारत के विधायकों और सांसदों के पीछे भारत का प्रति वर्ष 15 अरब 65 करोड़ 60 लाख रूपये खर्च होता है।
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ये तो सिर्फ इनके मूल वेतन भत्ते की बात हुई। इनके आवास, रहने, खाने, यात्रा भत्ता, इलाज, विदेशी सैर सपाटा आदि का का खर्च भी लगभग इतना ही है..!!
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अर्थात लगभग 30 अरब रूपये खर्च होता है इन विधायकों और सांसदों पर..!!
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अब गौर कीजिए इनके सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों के वेतन पर।
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एक विधायक को दो बॉडीगार्ड और एक सेक्शन हाउस गार्ड यानी कम से कम 5 पुलिसकर्मी और यानी कुल 7 पुलिसकर्मी की सुरक्षा मिलती है..!!
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7 पुलिस का वेतन लगभग (25,000 रूपये प्रति माह की दर से) 1 लाख 75 हजार रूपये होता है।
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इस हिसाब से 4582 विधायकों की सुरक्षा का सालाना खर्च 9 अरब 62 करोड़ 22 लाख प्रति वर्ष है..!!
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इसी प्रकार सांसदों के सुरक्षा पर प्रति वर्ष 164 करोड़ रूपये खर्च होते हैं..!!
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Z श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त नेता, मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों, प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए लगभग 16000 जवान अलग से तैनात हैं।
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जिन पर सालाना कुल खर्च लगभग 776 करोड़ रुपया बैठता है।
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इस प्रकार सत्ताधीन नेताओं की सुरक्षा पर हर वर्ष लगभग 20 अरब रूपये खर्च होते हैं।
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*अर्थात हर वर्ष नेताओं पर कम से कम 50 अरब रूपये खर्च होते हैं।*
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इन खर्चों में राज्यपाल, भूतपूर्व नेताओं के पेंशन, पार्टी के नेता, पार्टी अध्यक्ष , उनकी सुरक्षा आदि का खर्च शामिल नहीं है।
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यदि उसे भी जोड़ा जाए तो कुल खर्च लगभग 100 अरब रुपया हो जायेगा।
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अब सोचिये हम प्रति वर्ष नेताओं पर 100 अरब रूपये से भी अधिक खर्च करते हैं, बदले में गरीब लोगों को क्या मिलता है ?
*क्या यही है लोकतंत्र ?*
*(यह 100 अरब रुपया हम भारत वासियों से ही टैक्स के रूप में वसूला गया होता है।)*
⏺️ _एक सर्जिकल स्ट्राइक यहाँ भी बनती है...
◆ भारत में दो कानून अवश्य बनना चाहिए
⏺️→पहला - चुनाव प्रचार पर प्रतिबंध
नेता केवल टेलीविजन ( टी वी) के माध्यम से प्रचार करें
⏺️→दूसरा - नेताओं के वेतन भत्तो पर प्रतिबंध । तब दिखाओ देशभक्ति...
प्रत्येक भारतवासी को जागरूक होना ही पड़ेगा और इस फिजूल खर्ची के खिलाफ बोलना पड़ेगा...??
♦️ इस मेसेज़ को जितना हो सके फेसबुक और व्हाट्सअप ग्रुप में फॉरवर्ड कर अपनी देश भक्ति का परिचय दें।*
सादर निवेदन
#माननीय and जी,
कृपया सारी *योजना बंद कर दीजिये।*
सिर्फ
*सांसद भवन जैसी कैन्टीन हर दस किलोमीटर पर खुलवा दीजिये ।*
सारे झगड़े ख़त्म।
*29 रूपये में भरपेट खाना मिलेगा..*
80% लोगों को घर चलाने का झगड़ा ख़त्म।
*ना सिलेंडर लाना, ना राशन*
और घर वाली भी खुश...!!
*चारों तरफ खुशियाँ ही रहेगी...!!
फिर हम कहेंगे सबका साथ सबका विकास
*सबसे बड़ा फायदा 1र् किलो गेहूँ नहीं देना पड़ेगा* और
जी को ये ना कहना पड़ेगा कि मिडिल क्लास के लोग अपने हिसाब से घर चलाएँ ...!!
इस पे गौर करें
कृपया कड़ी मेहनत से प्राप्त हुई ये जानकारी देश के हर एक नागरिक तक पहुँचाने की कोशिश करे ...!!
शान है या छलावा..!!
पूरे भारत में एक ही जगह ऐसी है जहाँ खाने की चीजें सबसे सस्ती है...!!
चाय = 1.00
सुप = 5.50
दाल= 1.50
खाना =2.00
चपाती =1.00
चिकन= 24.50
डोसा = 4.00
बिरयानी=8.00
मच्छी= 13.00
ये *सब चीज़ें सिर्फ गरीबों के लिए है और ये सब Available है Indian Parliament Canteen में..!!
और उन *गरीबों की पगार है 80,000 रूपये महीना वो भी बिना income tax के आदमी 30 या 32 रूपये रोज़ कमाता है वो ग़रीब नहीं है...!!
इस पर तो उँगली करो jawan मूवी, नायक यही तो बयां करती है फिर चुनाव आने पर हर जन प्रतिनिधि रिश्तेदार निकलता है और देखिये जीत के बाद जन प्रतिनिधि की यादाश्त चली जाती है सिर अपने सगे संबंधीयों को पहचान पाता है l

11/02/2026

संसद में एक वक्ता ने भारत की व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि हमारे देश में इंजीनियर 👨‍💻 या डॉक्टर 👩‍⚕️ बनने के लिए कठिन परीक्षाएं पास करनी पड़ती हैं और वर्षों की पढ़ाई करनी होती है। क्योंकि इन पेशों से सीधे लोगों की ज़िंदगी जुड़ी होती है, इसलिए योग्यता की जांच अनिवार्य मानी जाती है।

लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक नेता 🏛️, जो कानून बनाते हैं और देश की दिशा तय करते हैं, उनके लिए ऐसी कोई अनिवार्य परीक्षा या योग्यता प्रणाली नहीं है। वक्ता के अनुसार, यह अंतर जवाबदेही और सुशासन पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।

उन्होंने तर्क दिया कि जब नेताओं के फैसले करोड़ों लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं 🇮🇳, तो उनके लिए न्यूनतम शैक्षणिक या ज्ञान आधारित मानक तय होना चाहिए। इसी मांग के साथ उन्होंने राजनीति में आने वालों के लिए एक अनिवार्य परीक्षा प्रणाली लागू करने की बात रखी।

इस पर भी चर्चा करिये मैंने पहले भी एक पोस्ट किया जहाँ किसी की कोई प्रतिक्रिया नही आई l

09/02/2026

यह_कुछ_हजम_नहीं_हो_रहा_बापू
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1. आप, एक काले आदमी, लंदन में रहकर बिना किसी परेशानी के गोरो के साथ पढ़ते हैं, होस्टल में एक ही कमरे में गोरों के साथ रहते हैं, एक ही मेस में खाते हैं फिर अचानक ट्रेन में एक साथ सफर करने में फेंक दिए जाते है?

क्यूँ? ये बात कतई हजम नहीं हुई।

2. फिर आपको, उसी काले भारतीय को, उन्हीं गोरों की सेना में सार्जेंट मेजर बना दिया जाता हैं और दक्षिण अफ्रीका में ब्रिटिश बोर वार में आपकी तैनाती एम्बुलेंस यूनिट में होती है जहां आप लड़ाई में गोरों का कालों के विरुद्ध साथ देते हैं। मिलिट्री यूनिफॉर्म में आपकी फोटो पूरे इंटरनेट उपलब्ध है। सार्जेंट मेजर गांधी लिखकर कोई भी सर्च कर सकता है। यह बात भी कुछ हजम नहीं हो रही।

3. आप में 1915 में अचानक 46 वर्ष की उम्र में देशप्रेम जागा और मिलिट्री यूनिफार्म उतारकर आपको बैरिस्टर घोषित कर दिया गया। मैं ऐसा इसलिए बोल रहा क्योंकि रानी लक्ष्मी बाई, खुदीराम बोस, बिस्मिल, भगतसिंह और आजाद जैसे अनेकों देशभक्तों की 25 की उम्र आते आते तक शहादत हो गई थी।

4. इसके बाद आपको महात्मा बुद्ध की तरह शांति अहिंसा का दूत बनाकर दक्षिण अफ्रीका से सीधे चंपारण भेज दिया जाता है जहाँ नील उगाने वाले किसानों के आंदोलन को आप हैक कर लेते हैं। हिंसक होते आंदोलन को अहिंसा शांति के फुस्स आंदोलन में बदल देते हैं। आखिर क्यूँ?

5. आप महात्मा बुद्ध की तरह दिन में एक धोती लपेट कर शांति अहिंसा के नाम पर भारतीयों के आजादी के लिये होने वाले हर उग्र आंदोलन की हवा निकाल कर उसे बिना किसी परिणाम के अचानक समाप्त कर देते हैं और अंग्रेज चैन की सांस लेते रहते हैं। आखिर क्यूँ?

6. नंगा फकीर बनकर अपने साथ अपनी बेटी भतीजी के अलावा अनेक औरतों के साथ खुद पर परीक्षण करने के लिये नंगे सोते हैं और अपने सेल्फ़-कंट्रोल को टेस्ट करते हैं। कौनसा महात्मा ऐसा करता है?आपने अपनी पुस्तक "सत्य के साथ मेरे प्रयोग" में आपने खुद स्वीकार किया है।

7. आप अहिंसा के पुजारी कहलाते हैं पर प्रथम और द्वितीय विश्वयुद्ध में अंग्रेजों का खुला साथ देते हैं‌ अपने अहिंसा के सिध्दांतों को दरकिनार करके भारतीयों को कहते हैं सेना में भर्ती हो जाओ और युद्ध करो ताकि ब्रिटिश राज बचा रहे। तब आपकी अहिंसा आड़े नहीं आयी?

8. इसी अहिंसा की ख़ातिर नेताजी का कांग्रेस से इस्तीफ़ा दिला दिया? जब अंग्रेजों की तरफ से लड़ना अहिंसा है तो अपने देश के लिये लड़ना क्यों बुरा था?

9. दिल्ली के मंदिर में कुरान पढ़ने की जिद पूरी करने के लिए आप पुलिस बुला लेते हैं पर कभी मस्जिद में गीता या रामायण पढ़ने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। पाकिस्तान को 55 करोड़ और आज के बांग्लादेश जाने 15 KM चौड़ा कॉरिडोर जिसके दोनों तरफ 10 KM तक केवल मुस्लिम ही जमीन खरीद सके उसकी जिद पकड़कर अनशन करने की धमकी देकर सरकार को ब्लैकमेल करते हैं। यही अनशन आपने पाकिस्तान ना बनने के लिए क्यूँ नहीं किया?

बापूजी सत्य यह है कि आपके अहिंसा के पाठ सिर्फ़ हिंदुओ के ही लिए थे जिन्होंने हिंदुओ को नपुंसक बना दिया। वहाँ पंजाब, सिंध, केरल में हिंदू मरते रहे, भगत सिंह सूली चढ गया मगर आपने अनशन नहीं किये।

शुक्र है कि आप इजराइल नहीं गए और वहाँ अपने अहिंसा के भजन नहीं गाए, नहीं तो वहाँ के यहूदियों का अब तक अस्तित्व ख़त्म हो गया होता और वो बॉम्ब की जगह चरखे फेंक रहे होते। लिखने को तो बहुत कुछ है। अब सबको पता चल चुका है कि आपकी फकीरी कितनी महंगी थी। आप कैसे अंग्रेजों की लक्जरी कार में सवार होकर उनके ही विरूद्ध आंदोलन करने जाते थे। आगा खां पैलेस आपके जेल में रहने की कहानी खूब बयां करते हैं और देश यह भी जान गया है कि शांति प्रिय समुदाय को खुश करने के लिए गाय या भैंस की जगह आपने बकरी क्यूं पाली थी??

जब आपके लिए राष्ट्रपिता का संबोधन सुनता हूं तो मन वितृष्णा से भर उठता है। आप राष्ट्र पिता जरूर थे मगर पाकिस्तान के। देश का बेटा होता है, पिता नहीं। भारत का नये देश के रूप में तो जन्म हुआ नहीं था कि आप राष्ट्र पिता बन गये??आपका क्या विचार है??🙏🏼

01/02/2026
31/01/2026

कृतघ्नता
UGC गाइडलाइंस में कोई विसंगति है तो वो दूर होना आवश्यक है। असमानता का विरोध करना हमारा हक भी है लेकिन UGC गाइडलाइंस का विरोध करते - करते हमारे ही लोग किस स्तर पर आ गये ... देखिये

:- तेली को सबक सिखाएंगे। सुबह तेली का मुँह देखने से दिन खराब हो जाता है।

:- मणिशंकर अय्यर ने तब ठीक ही बोला था इसके लिये ( कहने का मतलब 'नीच' बोला वो सही था। )

:- मर चुकी माँ को गालियां दी गई , एकाकी जीवन व्यतीत कर रही पत्नी को गंदी गालियाँ लिखी गई।

:- पोस्टर लेकर मुँह पर चप्पल मारी गयी।

:- पुतला जलाया गया।

:- कब्र खुदने की मनोकामना की गयी।

खासकर उन लोगों ने अपनी भड़ास दिल खोलकर निकाली जो पिछले 15 साल से हर दो-चार महीनें में मोदी विरोध में पागल हो जाते थे , जो हमेशा ही मौके की तलाश में रहते थे।

'हमने वोट दिया है तो हम चूड़ी टाईट करेंगे'... के नाम पर जो मन में आया वो लिखा .. गंदा - अश्लील तक।

ये सब देखकर - पढ़कर बुरा लगा .. #कृतज्ञ और #कृतघ्नता में क्या अंतर होता है ये सोचने पर विवश होना पड़ा।

खैर .. हमारी व्यक्तिगत राय कोई मायने भी नही रखती । आप सबने जो किया बहुत अच्छा ही किया होगा । ना किसी से कोई शिकायत .. ना शिकवा।

हाँ ... मैं और मेरे जैसे लाखों लोग अभी भी इस बुजुर्ग के #कृतज्ञ है ... इस बूढ़े आदमी ने निजी तौर पर हमारे बैंक खाते में तो एक भी रुपया नही दिया लेकिन देश को और हिंदुत्व को इतना कुछ दिया है जिसकी तुलना किसी भी नेता या प्रधानमंत्री से नही की जा सकती। यहाँ काम बताने और गिनाने की आवश्यकता भी नही है।

इनको गिराने और मिटाने की ख्वाहिश तो पिछले पच्चीस सालों से अनगिनत ताकतें कर ही रही हैं ...

पता होना चाहिए मुँह क्यों देखने से दिन खराब होता था ये समाज साहूकार था जिसके पास पैसा रुपया भर भर कर था तो सबको उधार भी देता होगा अगर उधार को माँग लिया इसलिए उधार लेने वाले मुँह बांधकर छिपकर निकल ते थे ताकि कहीं देख न लें टॉक न दे इसलिए चलन बना दिया कि मुँह देखने से दिन खराब baahare बुद्धि जीवियों क्या बुद्धि दी है l

23/01/2026
22/01/2026

New play school for children

22/01/2026

....छोटी छोटी बच्चियों को पीरियड्स....!

आठ साल की उम्र में 'पैड' संभालती हुई आपकी बेटी
ये तरक़्क़ी है या अंत?
माँ-बाप अपनी आठ साला बेटी को लेकर परेशान हैं। बच्ची के एक हाथ में अब भी उसकी पसंदीदा गुड़िया हैं। और दूसरी तरफ़ माँ की आँखों में आँसू।

शिकायत क्या हैं??

"डॉक्टर साहब, इसे माहवारी (Periods) शुरू हो गई है।"

ये पढ़कर आपका दिल दहल गया ना???

जिस उम्र में बच्चियों को रस्सी कूदनी चाहिए, उस उम्र में इन नन्हे पंछियों को सैनिटरी पैड्ज़ और पेट के दर्द संभालने पड़ रहे हैं।

मां मुझे ख़ून क्यों आ रहा है?"

8, 9 साल की बच्ची का ये सवाल सुनकर उस माँ का कलेजा फट गया था... और एक डॉक्टर का दिमाग़ सुन्न हो गया था।

क्या ये बचपन छीन लेना नहीं है तो और क्या है?

हम अपने बच्चों को पाल नहीं रहे, हम उन्हें फुला रहे हैं।

जिस तरह पोल्ट्री फ़ार्म में इंजेक्शन देकर 40 दिन में 'ब्रायलर मुर्ग़ी' तैयार की जाती है, कुछ वैसी ही हालत आज हमने अपनी औलाद की कर दी है। ये मज़ा नहीं, ये जिस्म की सूजन है!

इसका ज़िम्मेदार कौन है?

हमारी 'मॉडर्न' लाइफ़ स्टाइल ,पसंद और सोच!

देखें हम सीधे तौर पर उनकी ज़िंदगी से कैसे खेल रहे हैं:

🍕 500 रुपये का पीज़ा या ज़िंदगी की का अंत ?

वीक एंड पर मॉल में 500-800 रुपये का पीज़ा/बर्गर खाते हुए आप तस्वीर खींचकर इंस्टाग्राम पर डालते हैं... "फ़ैमिली टाइम!"

अरे, ये फ़ैमिली टाइम नहीं, ये आपके बच्चों की सेहत की बर्बादी है! रबड़ जैसे मैदे और प्रोसेस्ड चीज़ का ये खाना हार्मोन खत्म करने की फ़ैक्ट्री है।

जिस्म में जितनी ज़्यादा चर्बी, उतना ही ज़्यादा एस्ट्रोजन बनता है। और यही ज्यादा हार्मोन उस 8 साला बच्ची के नाज़ुक दिमाग़ को संदेश देता है:

"बच्ची, तुम्हारा बचपन ख़त्म, अब तुम औरत हो!"

🥡 गर्म खाने के लिए प्लास्टिक का डब्बा?

स्टील का डब्बा भारी लगता है और प्लास्टिक का फ़ैंसी, इसलिए वही बच्चों को दे रहे हो?

जब आप इसमें भाप उड़ाती गर्म सब्ज़ी रखते हैं तो इसमें मौजूद ज़ेनो-एस्ट्रोजन्ज़ (Xenoestrogens) खाने में शामिल हो जाते हैं। ये केमिकल जिस्म में जाकर बहरूपिए की तरह काम करते हैं। जिस्म को लगता है कि ये एस्ट्रोजन है, और जिस्म समय से पहले बालिग़ होने लगता है।

आपकी 'फ़ैंसी' आदत ने क़ुदरती घड़ी ही बिगाड़ दी है!

🍗 दूध-चिकन या 'हार्मोनल बम'?

"डॉक्टर, बच्ची बहुत दुबली है, नॉन-वेज दें? दूध कितना पिलाएँ?"

खिलाएँ ज़रूर, मगर बाज़ार का वो 40 दिन में फूला हुआ ब्रायलर चिकन और थैली का 'केमियाई' दूध देते वक़्त सौ बार सोचें।

चिकन: मुर्ग़ी को जल्दी बड़ा करने के लिए ग्रोथ हार्मोन्ज़ के भारी डोज़ दिए जाते हैं। वही हार्मोन बच्ची के पेट में जाते हैं। इसी लिए आजकल चौथी जमाअत की बच्चियों के होंटों पर बाल (Facial Hair) आ रहे हैं। ये PCOD की पहली अलामत है!

दूध: गाय-भैंस को ज़्यादा दूध के लिए दिए गए ऑक्सीटोसिन के इंजेक्शन दूध के ज़रीए आपकी बच्ची के नन्हे से रहम को "बड़ा होने" के ग़लत सिग्नल देते हैं।

जिन चीज़ों को आप 'प्रोटीन' समझकर खिला रहे हैं, वो दरअस्ल हार्मोनल बम हैं!

💉 सब से ख़ौफ़नाक हक़ीक़त:

इस उम्र में माहवारी शुरू हो जाए तो हड्डियाँ जल्दी जुड़ जाती हैं और क़द हमेशा के लिए रुक जाता है। इसे रोकने के लिए फिर क्या करना पड़ता है?

"हार्मोन सप्रेशन थेरेपी!"

ज़रा प्रतिक्षा करें......!

उस 8 साला नाज़ुक फूल को, अपनी माहवारी रोकने के लिए अगले 3-4 साल तक हर महीने एक तकलीफ़देह, मोटे इंजेक्शन की सुई लगवानी पड़ेगी!

आपकी लाड़ली बेटी हर महीने उस सुई के ख़ौफ़ से काँपेगी, और आप बेबस होकर ये सब देखेंगे।

सोचिए......🤔?

10 साल बाद जब वो आपसे पूछेगी:

"मां, तब क्यों ध्यान नहीं दिया? क्या वो पीज़ा-बर्गर मेरी ज़िंदगी से ज़्यादा अहम थे?"

तो आपके पास क्या जवाब होगा?

अभी भी वक़्त हाथ से नहीं निकला... सुधर जाओ!

1. किचन से 'सफ़ेद ज़हर' (मैदा, चीनी) बाहर फेंक दें।
2. प्लास्टिक के डब्बों को आग लगा दें: सिर्फ़ स्टील इस्तेमाल करें।
3. बच्चों को 'ब्रायलर' न बनाएँ: उन्हें मिट्टी में खेलने दें, धूप में दौड़ने दें।
4. लाड़-प्यार का मतलब ज़हर खिलाना नहीं, ये फालतू के काम अब बंद करें!

इस संदेश को पढ़कर भूल मत जाना। ये संदेश हर फ़ैमिली ग्रुप तक पहुँचाना आपका पहला फ़र्ज़ है।✅

अपनी बेटियों का बचपन बचाने के लिए ये क़दम उठाना ही होगा।

क्या आपके आस-पास भी ऐसी चीजें नज़र आती है?

तो अपने विचार नीचे ज़रूर शेयर करें।.....

धन्यवाद🙏🙏

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