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घोड़े को तो हम सब अच्छे तरह से जानते हैं लेकिन फिर भी कुछ ऐसे अनजाने बाते हे जो हम सायद ही जानते होंगे | ऐसे कुछ अंजनी और...
14/01/2022

घोड़े को तो हम सब अच्छे तरह से जानते हैं लेकिन फिर भी कुछ ऐसे अनजाने बाते हे जो हम सायद ही जानते होंगे | ऐसे कुछ अंजनी और अनसुनी बाते जान्ने के लिए चलिये इस वीडियो को देखते हैं |

Ghode Ki Sachai | Facts of Horse in Hindi | Ghoda | Horse | घोड़े की सचाई | Knowledge guruKnowledge guru ke ek or naye video me aap logoko swagat heDosta aaj ...

https://youtu.be/ykdK6urRWMo
16/12/2021

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Facts of Elephant | Haathi ki Sachhai Hindi me | हाथी के बारे में कुछ अनजानी बातें | Knowledge GuruBest info etc ke ek or naye video me aap logoko swagat heD...

छकुंड बारिश की सीजन की पौधा हे। इसकी उचाई 1 से 5 फिट तक होता हे। फूल पिले रंग के और फल 6 से 8 इंच लंबा होता हे। इसकी बीज...
29/07/2021

छकुंड बारिश की सीजन की पौधा हे। इसकी उचाई 1 से 5 फिट तक होता हे। फूल पिले रंग के और फल 6 से 8 इंच लंबा होता हे। इसकी बीज छोटा और मुंग की जैसे दिखने में और इसकी दोनों तरफ तिरछा होक कटे हुए जैसे दिखाई पड़ता हे। फल सूखने पर झन झन की आवाज़ करती हे। छकुंड ज्यादातर खली पड़ी जमीन, नदी और नाले जैसी जगह पर उगती हे।

गर्मिओ की दिनों में इसकी पौधा सुख जाती हे और फल अपने आप फैट के उसकी बीज निचे गिर जाती हे। इसकी एक कली में 3 जोड़ा पत्ते होते हैं। कुछ लोग इसकी पत्ते को सब्जी बनाके कहते हैं, जिसकी बजह से उनको अनजाने में भी कई रोगो का समाधान हो जाता हे। इस पौधे में बहोत सारे औषधीय गुण हे। उसमे से कुछ निचे दिया गया हे।

छकुंड बारिश की सीजन की पौधा हे। इसकी उचाई 1 से 5 फिट तक होता

बकुल की पेड़ को तो हर कोई अच्छी तरह से पहचानता हे। क्यूंकि यह पेड़ हरकहिं देखने को मिल जाता हे। यह एक चिर रहित पेड़ हे। इसक...
18/07/2021

बकुल की पेड़ को तो हर कोई अच्छी तरह से पहचानता हे। क्यूंकि यह पेड़ हरकहिं देखने को मिल जाता हे। यह एक चिर रहित पेड़ हे। इसकी फूल अत्यंत सुगन्धित होने के बजह से इसकी माला बनाके महिलाएं बालोपे भी लगाते हैं। बकुल की पका हुआ फल की स्वाद कसाई मिश्रित मीठा जैसा होता हे। बकुल की पेड़ की बहोत सारे औषधिया गुण होते हैं।

बकुल की पेड़ को तो हर कोई अच्छी तरह से पहचानता हे। क्यूंकि यह पेड़

बबुल की पेड़ को हम औसधि की रूप में इस्तिमाल करके नेत्र रोग, दन्त पीड़ा,कठिन स्तन,गला रोग,जलोदर और पेट रोग, अरुचि, कमल रोग,...
15/07/2021

बबुल की पेड़ को हम औसधि की रूप में इस्तिमाल करके नेत्र रोग, दन्त पीड़ा,कठिन स्तन,गला रोग,जलोदर और पेट रोग, अरुचि, कमल रोग, अतिसार, रक्तातिसार, जाकृत और जाकृत गैस, आमदोस (बार बार Letring जाना ), योन सक्ति बढ़ाना, हर प्रकार की योन रोग, रक्त प्रदर, स्वेत प्रदर, कटे हुए घाव, मुहासे इत्यदि बिमारिओ से छुटकारा पा सख्ते हैं।

बबुल ज्यादातर रेगिस्तान में बढ़ने बलि पेड़ है। यह एक कांटे दार पेड़ हे, इसकी

विशल्यकरणी एक लता प्रजाति की पौधा हे। यह भूमि के उप्पर फैलती हे। यह पौधे को थोड़े बहोत सब जानते हैं। विशल्यकरणी के पत्तिय...
11/07/2021

विशल्यकरणी एक लता प्रजाति की पौधा हे। यह भूमि के उप्पर फैलती हे। यह पौधे को थोड़े बहोत सब जानते हैं। विशल्यकरणी के पत्तियों से तीब्र बदबू आती है। पत्ते को मसलने से तेज सुगंध निकलती हे। इसकी फूल छोटी से होती हे और फल पंचकोणीय होती हे। यह अपने आप उगने बाली पोधो में से हे। अगर आप को इसकी पहचान करना आता हे तो ये आप को किसी भी बाग़ बगीचों में मिल जायेगा।

विशल्यकरणी एक लता प्रजाति की पौधा हे। यह भूमि के उप्पर फैलती हे। यह पौधे

ब्राह्मी एक लाता प्रजाति की पौधा हे। यह जमीं के ऊपर गीली जमीन पर उगती हे। संस्कृत में इसको “मंडूक पर्णी ” काका जाता हे। ...
13/06/2021

ब्राह्मी एक लाता प्रजाति की पौधा हे। यह जमीं के ऊपर गीली जमीन पर उगती हे। संस्कृत में इसको “मंडूक पर्णी ” काका जाता हे। यह प्रतिभाशाली होने की बजह से इसको ब्राह्मी नाम से नामित किया गया हे। ब्राह्मी में प्रचुर परिमाण में रोग प्रतिरोधक शक्ति हे। यह देखने में “सुनसुनिआ साग” (कीचड़ में उगने बलि एक साग) जैसे हे लेकिन सुनसुनिआ साग की एक टहनी पे 4 पत्ते होते हैं और ब्राह्मी के एक टहनी पे एक ही बड़ा पत्ता होता हे और ब्राह्मी के पत्ते की धार सामान नहीं होता हे।

ब्राह्मी एक लाता प्रजाति की पौधा हे। यह जमीं के ऊपर गीली जमीन पर उगती

निर्गुण्डी की पेड़ को हर कोई जानता हे। यह एक बहुबर्षीय झाडिओडर पेड़ हे। इसकी पत्ते को हाथ में लेके मसलने से एक अलग प्रकार ...
12/06/2021

निर्गुण्डी की पेड़ को हर कोई जानता हे। यह एक बहुबर्षीय झाडिओडर पेड़ हे। इसकी पत्ते को हाथ में लेके मसलने से एक अलग प्रकार की दुर्गन्ध होती हे। इसलिए इस पेड़ पौधे को कोई जानवर खता नहीं हे। असल में निर्गुन्डी की पेड़ दो प्रकार की देखने को मिलती हे, एक सफ़ेद फूलो वाला और एक नीला फूलो वाला। संस्कृत में नीला फूलों वाला पेड़ को निर्गुण्डी कहा जाता हे और सफ़ेद फूलों वाला पर्द को सिन्धुवारी कहा जाता हे। निर्गुण्डी की पेड़ हमें प्रकृति से फि हुई एक बहुगुणी पेड़ हे।

निर्गुण्डी की पेड़ को हर कोई जानता हे। यह एक बहुबर्षीय झाडिओडर पेड़ हे। इसकी

बहेड़ा का पेड़ हमारे देस की पहाड़ी इलाके और जंगलो में बिसेष रूपसे देखने को मोलता हे | जड़ीबूटी और आयुर्बेद की दुनिआ की जो सर...
09/06/2021

बहेड़ा का पेड़ हमारे देस की पहाड़ी इलाके और जंगलो में बिसेष रूपसे देखने को मोलता हे | जड़ीबूटी और आयुर्बेद की दुनिआ की जो सर्बो श्रेष्ठ औसधि मणि जाती हे उसका नाम हे त्रिफला, उसी त्रिफला में से एक फल हे बहेड़ा | बहेड़ा की पेड़ की उचाई ६०-८० फिट की होती हे | मई की महीने में इसकी पेड़ में फूल आना सुरु हो जाता हे और जानुअरी, फेब्रुअरी की महीने में फल सुख के झड़ते हैं | बहेड़ा में बहोत सरे औषधीय गुण निहित हैं | तो आईऐ जानते हे कुछ बीमारियां की बारे में जो बहेड़ा की प्रयोग में पूरीतरह से ठीक हो जाते हैं |

बहेड़ा का पेड़ हमारे देस की पहाड़ी इलाके और जंगलो में बिसेष रूपसे देखने को

आयुर्बेद में बेल की बारे में बहोत सारे फायदे का उल्लेख किया गया हे । बेल में विटामिन सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है और...
27/05/2021

आयुर्बेद में बेल की बारे में बहोत सारे फायदे का उल्लेख किया गया हे । बेल में विटामिन सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है और प्रोटीन, राइबोफ्लेविन, बीटा-कैरोटीन और थायमीन भी पाई जाती हे । बेल का इस्तेमाल कई सरे स्वादिष्ट व्यंजन बनाने की साथ साथ इसमें कई तरह की दवाइयों को बनाने में भी इस्तिमाल होता है । तो चलिये बिस्तर रूप से बेल की बारे में जान ते हैं ।

बेल की पेड़ ज्यादातर हर इलाका में देखने को मिल जाता हे । तुलसी और

अमरुद को हर कोई जानता हे । यह फल की रूप में ब्यबहार किया जाता हे । अमरुद का पेड़ हर कही देखने को मिल जाता हे, अमरुद हर कि...
26/03/2021

अमरुद को हर कोई जानता हे । यह फल की रूप में ब्यबहार किया जाता हे । अमरुद का पेड़ हर कही देखने को मिल जाता हे, अमरुद हर किसी का पसंदीदा फल हे । यह दो प्रकार के प्रजाति की पाई जाती हे लाल और सफ़ेद । इसकी अंदर बहोत औसधिया गुण निहित हे । इसकी खेती यहाँ अत्यंत सफलतापूर्वक की जाती है क्यों की भारत की जलवायु में अमरूद पूरीतरह से घुल मिल गया है । मान्यता है कि अमरुद को १७वीं शताब्दी में भारतवर्ष में इसे लाया गया था । बहोत ही सहिष्ण होने के बजह से इसकी खेती हर प्रकार की मिट्टी और जलवायु में सम्भब हो है। अमरुद स्वास्थ्य के लिए बहोत ही लाभदायक होता है। अमरुद में विटामिन “सी’ अधिक मात्रा में पाई जाती है और विटामिन “ए’ तथा “बी’ भी पाए जाते हैं। अमरुद में फास्फोरस, लोहा और चूना की मात्रा भी पाई जाती हैं।

अमरुद को हर कोई जानता हे । यह फल की रूप में ब्यबहार किया जाता

होली के लिए रंग बनाने के अलावा इसके बहोत सारे गुण हे इसकी फूलों को पीसकर चेहरे में लगाने से चेहरे में निखार आती है। पलास...
17/03/2021

होली के लिए रंग बनाने के अलावा इसके बहोत सारे गुण हे इसकी फूलों को पीसकर चेहरे में लगाने से चेहरे में निखार आती है। पलास की उपयोग से बुढ़ापा भी दूर किया जा सख्त हे । पलाश की फलियां कृमिनाशक का काम करती है । पलाश फूल के पानी से स्नान करने से लू नहीं लगती तथा गर्मी का अहसास नहीं होता और ताजगी महसूस होती है। पलास काम शक्तिवर्धक हे और शीघ्रपतन की समस्या को भी दूर करता है। इसके अलाबा भी पलास का बहोत सारे औषधीय गुण हे तो आइये जानते हे पलास की बारे में बिस्तृत से ।

पलाश एक 15 से 20 फिट उच्चता बिसिस्ट वृक्ष है जिसके फूल बहुत ही आकर्षक

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