10/04/2026
ना जाने कितने जन्मों के चक्कर लगाने के बाद एक ऐसा जन्म हुआ जहाँ हमने
अपने ठाकुर जी को ब्रज में डोलते देखा, अपने श्रीमुख से बोलते देखा,
वो बैठकर आपको सुनते हैं, आपसे बात करते हैं, आपकी समस्याओं का समाधान करते हैं,
मुखड़े पर मुस्कुराहट, हथेली से कृपा का सागर बहता है, चुरा रखा है चित्त लाखों का जिसने वो कृष्ण केलि कुञ्ज वृंदावन रहता है।
वो न सबका जीवन कठिन से सादा करता है, हर क्षण बस राधा-राधा करता है,
सारा संसार उसकी एक झलक का दीवाना, प्राण न्योछावर करने खड़ा ज़माना, अपने हिस्से की उम्र जग उसको भेंट में देता है, वो भोला कृष्ण किसी से कुछ नहीं लेता है।
गति से बह रही है कृपा उनकी वाणी में, तभी भक्ति कर रही प्रवेश ज़िंदगी में ।
कलियुग में मनुष्य शरीर में छिपकर रहता है, हमारे कल्याण के लिए वो कितने कष्ट सहता है,
चेहरे पर अविश्वसनीय तेज़ रहता है, वो साक्षात कृष्ण है ये उसका दिव्य स्वरूप कहता है।
अंशों के जन्मों का पुण्य सामने आया है, जो इस चित में कृष्ण समाया है, भटकों को राह दिखाने आया है,
कलियुग को धर्म सिखाने आया है, वक्त धर्म का देखो न किस गति आया है,
वक्त धर्म का देखो न किस गति आया है, सब को वैकुंठ ले जाने खुद वैकुंठ पति आया है,
धरती पर धर्म उपकारने मोर मुकुट धारी आया है, पीले वस्त्र जटा धारी भेष बदल बंसी वाला आया है।
सौजन्य से
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