24/12/2025
कुछ शेरों ने मिलकर एक गधे को बंदी बना लिया। उन शेरों में से एक शेर बोला, “इसे मारो मत। मेरे पास इसे लेकर एक बड़ी योजना है। उस योजना के अनुसार शेरों ने गधे को अपने साथ ही रख लिया। वे बहुत प्यार-दुलार से उसकी सेवा करने लगे और उसका भरोसा जीत लिया। फिर एक दिन वे उसे उसके ही गधों के समाज में छोड़ आए। लेकिन अब वह गधा, गधे जैसा नहीं रहा था, बल्कि शेरों की तरह राजा बनकर गधों के समाज में लौटा।
क्योंकि इस गधे की शेरों से दोस्ती थी, इसलिए दूसरे गधे उससे डरने लगे। वे उसके खिलाफ कुछ कहने की हिम्मत नहीं करते थे।
जब भी शेर उससे मिलने आते, तो वह गधा राजा की तरह अपने पीछे गधों का एक झुंड लेकर शेरों से मिलने जाता। और जब शेर वापस जाते, तो वह उनके खाने के लिए गधे भेंट कर देता।
यह गधा शेरों जैसा शक्तिशाली बन गया था, लेकिन शेरों के सामने वह हमेशा वही गधा ही रहा। गधों के समाज में वह राजा बन गया था, लेकिन वह एक ऐसी ताकत के जाल में फँस गया था, जहाँ से वह निकल नहीं सकता था।
इसी कारण उसने हज़ारों निर्दोष गधों की कुर्बानी दे दी, सिर्फ इस सोच में कि इससे वह और अधिक शक्तिशाली बनेगा और अपनी सत्ता को बनाए रख पाएगा।
लेकिन एक दिन ऐसा आया जब सारे गधे एकजुट होकर उस गधे के अत्याचार के खिलाफ खड़े हो गए। उन्होंने फैसला किया कि अब जब भी शेर आएँगे, तब उनमें से कोई भी उस गधे के साथ वहाँ नहीं जाएगा, चाहे अंजाम कितना भी बुरा क्यों न हो।
अगले दिन जब शेर आए, तो वह गधा अकेला ही उनसे मिलने गया। उसके पीछे कोई गधों का झुंड नहीं था। तब गधे ने शेरों से विनती करते हुए कहा कि अब गधों के समाज में उसका डर खत्म हो चुका है। अब कोई उससे डरता नहीं, कोई उसकी बात नहीं मानता।
यह सुनकर शेरों ने फैसला किया, “यह गधा अब हमारे किसी काम का नहीं रहा।” और वे उसे अपने साथ ले गए, उसे खाने के लिए।
इस तरह अंत में वह गधा खुद भी शिकार बन गया।
बिलकुल इसी तरह हर समाज में ऐसे गधे जरूर होते हैं जो—
अपने लालच के कारण,
अपनी ताकत बढ़ाने के लिए,
अपनी सत्ता के लिए,
अपने ही समाज को खतरे में डाल देते हैं।