Shreenath Mobile Point

Shreenath Mobile Point || Jai Shree Krishna ||
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07/10/2014

"ब्रह्मानन्दात् समुधृत्य भजनानन्द योजने | लीला या युज्यते सम्यक् सा तुर्यैव निरुप्यते ||"
मुक्त जीवों को ब्रह्मानन्द से उद्धार करके भजनानन्द में नियोजित कर रास लीला का प्रत्यक्ष अनुभव कराने हेतु ही भगवान ने लीला करी है |
रस लीला का मुख्य उद्देश्य वैष्णवाचार्यों ने मार्ग चतुष्ट्य माना है-:
१) ज्ञान मार्ग २) योग मार्ग ३) कर्म मार्ग ४) भक्ति मार्ग
हमारे वल्लभ सम्प्रदाय में रासोत्सव महान गोपनीय रसमय रसरूप रसिक शिरोमणि की रसलीला का महोत्सव माना जाता है |
यह मधुर उपासना के अधिकारी सब नहीं होते हैं | यह साधन साध्य नहीं अपितु कृपा साध्य है |
शरदोत्सव महारास की खूब २ बधाई

02/09/2014

सभी वैष्णवों को मेरी ओर से
श्री ठाकुरजी की अर्धांगिनी, वृषभान
नंदिनी श्री राधारानी के जन्मोत्सव की अनेकानेक
बधाईया

06/07/2014

तुलसी की माला का महत्व --
गले में तुलसी की माला धारण करने से जीवनशक्ति बढ़ती है, बहुत से रोगों से मुक्ति मिलती है। तुलसी की माला पर भगवन्नाम जप करने से एवं गले में पहनने से आवश्यक एक्युप्रेशर बिन्दुओं पर दबाव पड़ता है, जिससे मानसिक तनाव में लाभ होता है, संक्रामक रोगों से रक्षा होती है तथा शरीर स्वास्थ्य में सुधार होकर दीर्घायु की प्राप्ति होती है। तुलसी माला धारण करने से शरीर निर्मल, रोगमुक्त व सात्त्विक बनता है। तुलसी शरीर की विद्युत संरचना को सीधे प्रभावित करती है। इसको धारण करने से शरीर में विद्युतशक्ति का प्रवाह बढ़ता है तथा जीव-कोशों द्वारा धारण करने के सामर्थ्य में वृद्धि होती है।
गले में माला पहने से बिजली की लहरें निकलकर रक्त संचार में रूकावट नहीं आनि देतीं। प्रबल विद्युतशक्ति के कारण धारक के चारों ओर चुम्बकीय मंडल विद्यमान रहता है।
तुलसी की माला पहनने से आवाज सुरीली होती है, गले के रोग नहीं होते, मुखड़ा गोरा, गुलाबी रहता है। हृदय पर झूलने वाली तुलसी माला फेफड़े और हृदय के रोगों से बचाती है। इसे धारण करने वाले के स्वभाव में सात्त्विकता का संचार होता है।
तुलसी की माला धारक के व्यक्तित्व को आकर्षक बनाती है। कलाई में तुलसी का गजरा पहनने से नब्ज नहीं छूटती, हाथ सुन्न नहीं होता, भुजाओं का बल बढ़ता है। तुलसी की जड़ें कमर में बाँधने से स्त्रियों को, विशेषतः गर्भवती स्त्रियों को लाभ होता है। प्रसव वेदना कम होती है और प्रसूति भी सरलता से हो जाती है। कमर में तुलसी की करधनी पहनने से पक्षाघात नहीं होता, कमर, जिगर, तिल्ली, आमाशय और यौनांग के विकार नहीं होते हैं।
यदि तुलसी की लकड़ी से बनी हुई मालाओं से अलंकृत होकर मनुष्य देवताओं और पितरों के पूजनादि कार्य करे तो वह कोटि गुना फल देने वाला होता है। जो मनुष्य तुलसी की लकड़ी से बनी हुई माला भगवान विष्णु को अर्पित करके पुनः प्रसाद रूप से उसे भक्तिपूर्वक धारण करता है, उसके पातक नष्ट हो जाते हैं।

14/06/2014
14/06/2014

टिप्पणी - श्रीनाथजी मंदिर

14 Jun, 2014 - शनिवार एकम कृष्ण पक्ष आषाढ
15 Jun, 2014 - रविवार तीज कृष्ण पक्ष आषाढ
16 Jun, 2014 - सोमवार चोथ कृष्ण पक्ष आषाढ
17 Jun, 2014 - मंगलवार पंचम कृष्ण पक्ष आषाढ
18 Jun, 2014 - बुधवार छठ कृष्ण पक्ष आषाढ
19 Jun, 2014 - गुरुवार सातम कृष्ण पक्ष आषाढ
20 Jun, 2014 - शुक्रवार आठम कृष्ण पक्ष आषाढ

Note:- Tithis are according to Vraj

| जय श्री कृष्ण |

14/06/2014

दर्शन समय - श्रीनाथजी मंदिर

14 Jun, 2014 - (शनिवार एकम कृष्ण पक्ष आषाढ)

05:50 To 06:35 - Mangla (मंगला)
07:10 To 07:40 - Shringar (श्रृंगार)
09:10 To 09:40 - Gwal (ग्वाल)
11:15 To 12:00 - Rajbhog (राजभोग)
03:45 To 04:00 - Uthapan (उथापन)
04:30 To 04:55 - Bhog (भोग)
05:10 To 06:00 - Aarti (आरती)

Note:- Tithis are according to Vraj

| जय श्री कृष्ण |

15/02/2014

टिप्पणी - श्रीनाथजी मंदिर

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