10/04/2025
"रामबोध"
हर साल राम नवमी का पर्व चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन विष्णु के सातवें अवतार भगवान राम ने धरती पर अधर्म का नाश करने और धर्म की पुनः स्थापना के लिए अवतार लिया था। इस दिन को हिंदू धर्म में बहुत ही शुभ माना जाता है। इस साल राम नवमी का पर्व 6 अप्रैल 2025 को था इसी शुभ अवसर पर युवा शोध आयाम ने भगवान श्रीराम पर आधारित एक प्रश्नमंजूषा प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता का उद्देश्य युवा पीढीको, भारतीय परिजनोंको भारतीय संस्कृति, धर्म और मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों से अवगत कराना था। इस प्रतियोगिता में १९ साल से लेकर तो ६६ साल के प्रतिभागी ने सहभाग लिया.
प्रतियोगिता मे प्रश्न श्रीराम के जीवन, उनके आदर्शों, रामायण की प्रमुख घटनाओं, गुरु, मूल रामायण की भाषा, रामचरितमानस के श्लोकों तथा तुलसीदास जी और वाल्मीकि जी द्वारा रचित रामायण से लिए गए थे। प्रतिभागियों ने अपनी जानकारी और तत्परता से प्रभावित किया। इसतरहसे हमें भगवान श्रीराम का जीवन मर्यादा के दायरे में रहकर कर्तव्यों का पालन करने की सीख देता है। उनके जीवन के दो महत्वपूर्ण पहलू वचनबद्धता और कर्तव्यनिष्ठा हैं। उनके जीवन से हम कई चीजों की प्रेरणा ले सकते हैं, जो जीवन में हमें सही मार्ग प्रशस्त करते हैं।
भगवान राम सिर्फ एक ऐतिहासिक या धार्मिक पात्र नहीं हैं वे भारतीय संस्कृति, आस्था और नैतिकता के प्रतीक हैं। उन्हें "मर्यादा पुरुषोत्तम" कहा जाता है, यानी ऐसा पुरुष जो सभी सीमाओं और मर्यादाओं का पालन करते हुए आदर्श जीवन जीता है। राम का जीवन त्याग, सहनशीलता और आदर्शों का उदाहरण है। जब उन्हें अयोध्या का राजा बनाए जाने वाला था, तभी पिता के वचन के कारण उन्हें 14 वर्षों के लिए वनवास जाना पड़ा। न कोई शिकायत, न कोई प्रतिकार। उनके लिए पिता का वचन ही सर्वोपरि था। ये उनके चरित्र की ऊँचाई है कि वो राजमहल से वन तक का सफर उतनी ही गरिमा से निभाते हैं। आज के युवापीढी उनसे कुछ सिख लेनी चाहिए भी जब किसी मुश्किल या असफलता से गुजरें, तो तुरंत प्रतिक्रिया देने की बजाय शांत होकर सोचें सही निर्णय वहीं से शुरू होता है।
आज की तेज़ रफ़्तार दुनिया में जहाँ हर कोई जल्दबाज़ी, सफलता और प्रतिस्पर्धा में उलझा हुआ है, वहाँ भगवान राम की जीवन गाथा हमें रुक कर सोचने, समझने और सही दिशा में चलने की सीख देती है। भगवान राम सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि युवाओं के लिए एक लाइफ गाइड हैं।
राम ने सीता के लिए रावण से युद्ध लड़ा, लेकिन जब सवाल समाज का आया, तो उन्होंने खुद पर भारी निर्णय लिया। भले ही वह विवादास्पद हो, पर एक राजा के रूप में उन्होंने समाज और नारी की गरिमा को सबसे ऊपर रखा।आज के युवाओं को महिलाओं के प्रति सम्मान, विश्वास और मर्यादा को समझना होगा।
राम को केवल पूजना ही नहीं, उनके आदर्शों को अपनाना भी ज़रूरी है। अगर हर इंसान अपने जीवन में राम की तरह निर्णय लेने लगे मर्यादा में रहते हुए, सबके हित में तो समाज में संतुलन, प्रेम और शांति स्थापित हो सकती है।
"क्या हम राम को सिर्फ मंदिरों में पूजना चाहते हैं, या अपने जीवन में उनके साथ जीना भी चाहते हैं?"
आज अगर युवा राम के जीवन से प्रेरणा लें चाहे वो निर्णय लेने की बात हो, रिश्तों को निभाने की, या नेतृत्व करने की तो वे सिर्फ अपने जीवन को ही नहीं, पूरे समाज को बेहतर बना सकते हैं।
जय श्री राम
डॉ. अनिता काटगाये
शोध आयाम
भारतीय विचार मंच