Mayank Cyber Cafe

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26/08/2023

कल से देख रहा हूँ जो देखिये वहीं पोस्ट कर रहा हैं कि मेटा ये मेटा वो तो हम भी कह रहे हैं कि हमारी तरफ से फेसबुक को पूरी इजाज़त है, वो हमारी फ़ोटो को अपने मुख्यालय के मेन गेट पर लगवा दे तब भी हमें कोई दिक्कत नही हैं उल्टे हम धन्यवाद भी करेंगे।

और दूसरी बात हमारी कोई भी निजी जानकारी अगर फेसबुक के पास है तो उसे किताब में छपवा कर पूरे इंडिया और अमरीका में बंटवा दे इससे भी हमें कोई दिक्कत नहीं हैं इसकी इजाज़त हम खुली मन से दे रहे हैं।

NCL CLEARIFICATION
24/06/2023

NCL CLEARIFICATION

22/06/2023
22/06/2023
"अम्मा!.आपके बेटे ने मनीआर्डर भेजा है।"डाकिया बाबू ने अम्मा को देखते अपनी साईकिल रोक दी। अपने आंखों पर चढ़े चश्मे को उता...
20/06/2023

"अम्मा!.आपके बेटे ने मनीआर्डर भेजा है।"
डाकिया बाबू ने अम्मा को देखते अपनी साईकिल रोक दी। अपने आंखों पर चढ़े चश्मे को उतार आंचल से साफ कर वापस पहनती अम्मा की बूढ़ी आंखों में अचानक एक चमक सी आ गई..
"बेटा!.पहले जरा बात करवा दो।"
अम्मा ने उम्मीद भरी निगाहों से उसकी ओर देखा लेकिन उसने अम्मा को टालना चाहा..
"अम्मा!. इतना टाइम नहीं रहता है मेरे पास कि,. हर बार आपके बेटे से आपकी बात करवा सकूं।"
डाकिए ने अम्मा को अपनी जल्दबाजी बताना चाहा लेकिन अम्मा उससे चिरौरी करने लगी..
"बेटा!.बस थोड़ी देर की ही तो बात है।"
"अम्मा आप मुझसे हर बार बात करवाने की जिद ना किया करो!"
यह कहते हुए वह डाकिया रुपए अम्मा के हाथ में रखने से पहले अपने मोबाइल पर कोई नंबर डायल करने लगा..
"लो अम्मा!.बात कर लो लेकिन ज्यादा बात मत करना,.पैसे कटते हैं।"
उसने अपना मोबाइल अम्मा के हाथ में थमा दिया उसके हाथ से मोबाइल ले फोन पर बेटे से हाल-चाल लेती अम्मा मिनट भर बात कर ही संतुष्ट हो गई। उनके झुर्रीदार चेहरे पर मुस्कान छा गई।
"पूरे हजार रुपए हैं अम्मा!"
यह कहते हुए उस डाकिया ने सौ-सौ के दस नोट अम्मा की ओर बढ़ा दिए।
रुपए हाथ में ले गिनती करती अम्मा ने उसे ठहरने का इशारा किया..
"अब क्या हुआ अम्मा?"
"यह सौ रुपए रख लो बेटा!"
"क्यों अम्मा?" उसे आश्चर्य हुआ।
"हर महीने रुपए पहुंचाने के साथ-साथ तुम मेरे बेटे से मेरी बात भी करवा देते हो,.कुछ तो खर्चा होता होगा ना!"
"अरे नहीं अम्मा!.रहने दीजिए।"
वह लाख मना करता रहा लेकिन अम्मा ने जबरदस्ती उसकी मुट्ठी में सौ रुपए थमा दिए और वह वहां से वापस जाने को मुड़ गया।
अपने घर में अकेली रहने वाली अम्मा भी उसे ढेरों आशीर्वाद देती अपनी देहरी के भीतर चली गई।
वह डाकिया अभी कुछ कदम ही वहां से आगे बढ़ा था कि किसी ने उसके कंधे पर हाथ रखा..
उसने पीछे मुड़कर देखा तो उस कस्बे में उसके जान पहचान का एक चेहरा सामने खड़ा था।
मोबाइल फोन की दुकान चलाने वाले रामप्रवेश को सामने पाकर वह हैरान हुआ..
"भाई साहब आप यहां कैसे?. आप तो अभी अपनी दुकान पर होते हैं ना?"
"मैं यहां किसी से मिलने आया था!.लेकिन मुझे आपसे कुछ पूछना है।"
रामप्रवेश की निगाहें उस डाकिए के चेहरे पर टिक गई..
"जी पूछिए भाई साहब!"
"भाई!.आप हर महीने ऐसा क्यों करते हैं?"
"मैंने क्या किया है भाई साहब?"
रामप्रवेश के सवालिया निगाहों का सामना करता वह डाकिया तनिक घबरा गया।
"हर महीने आप इस अम्मा को भी अपनी जेब से रुपए भी देते हैं और मुझे फोन पर इनसे इनका बेटा बन कर बात करने के लिए भी रुपए देते हैं!.ऐसा क्यों?"
रामप्रवेश का सवाल सुनकर डाकिया थोड़ी देर के लिए सकपका गया!.
मानो अचानक उसका कोई बहुत बड़ा झूठ पकड़ा गया हो लेकिन अगले ही पल उसने सफाई दी..
"मैं रुपए इन्हें नहीं!.अपनी अम्मा को देता हूंँ।"

"मैं समझा नहीं?"
उस डाकिया की बात सुनकर रामप्रवेश हैरान हुआ लेकिन डाकिया आगे बताने लगा...
"इनका बेटा कहीं बाहर कमाने गया था और हर महीने अपनी अम्मा के लिए हजार रुपए का मनी ऑर्डर भेजता था लेकिन एक दिन मनी ऑर्डर की जगह इनके बेटे के एक दोस्त की चिट्ठी अम्मा के नाम आई थी।"
उस डाकिए की बात सुनते रामप्रवेश को जिज्ञासा हुई..
"कैसे चिट्ठी?.क्या लिखा था उस चिट्ठी में?"
"संक्रमण की वजह से उनके बेटे की जान चली गई!. अब वह नहीं रहा।"
"फिर क्या हुआ भाई?"
रामप्रवेश की जिज्ञासा दुगनी हो गई लेकिन डाकिए ने अपनी बात पूरी की..
"हर महीने चंद रुपयों का इंतजार और बेटे की कुशलता की उम्मीद करने वाली इस अम्मा को यह बताने की मेरी हिम्मत नहीं हुई!.मैं हर महीने अपनी तरफ से इनका मनीआर्डर ले आता हूंँ।"
"लेकिन यह तो आपकी अम्मा नहीं है ना?"
"मैं भी हर महीने हजार रुपए भेजता था अपनी अम्मा को!. लेकिन अब मेरी अम्मा भी कहां रही।" यह कहते हुए उस डाकिया की आंखें भर आई।
हर महीने उससे रुपए ले अम्मा से उनका बेटा बनकर बात करने वाला रामप्रवेश उस डाकिया का एक अजनबी अम्मा के प्रति आत्मिक स्नेह देख नि:शब्द रह गया।🙏🏼
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17/06/2023
Shout out to my newest followers! Excited to have you onboard!Ranjeet Kumar, Karan Kumar, Krishna Kumar, Mahanand Singh,...
15/06/2023

Shout out to my newest followers! Excited to have you onboard!

Ranjeet Kumar, Karan Kumar, Krishna Kumar, Mahanand Singh, Arun Kumar, अमन प्रताप सिंह, Sanoj Kumar, Keshav Home Tution

यूरोप का एक देश है नार्वे। वहां कभी जाईयेगा तो यह सीन आम तौर पर पाईयेगा। एक रेस्तरां है। उसके कैश काउंटर पर एक महिला आती...
11/06/2023

यूरोप का एक देश है नार्वे। वहां कभी जाईयेगा तो
यह सीन आम तौर पर पाईयेगा। एक रेस्तरां है। उसके कैश काउंटर पर एक महिला आती है
और कहती है -
"5 Coffee, 1 Suspension"..
फिर वह पांच कॉफी के पैसे देती है और चार कप कॉफी ले जाती है। थोड़ी देर बाद, एक और आदमी आता है ,कहता है-
"4 Lnch, 2 Suspension" !!!
वह चार Lunch का भुगतान करता है और दो Lunch packets ले जाता है।
फिर एक और आता है आर्डरदेता है -
"10 Coffee, 6 Suspension" !!!
वह दस के लिए भुगतान करता है,चार कॉफी ले जाता है।
थोड़ी देर बाद एक बूढ़ा आदमी जर्जर कपड़ों में
काउंटर पर आकर पूछता है-
"Any Suspended Coffee ??"
काउंटर-गर्ल मौजूद कहती है-
"Yes !!"
और एक कप गर्म कॉफी उसको दे देती है।
कुछ देर बाद वैसे ही एक और दाढ़ी वाला आदमी अंदर आता है, पूछता है-
"Any Suspended Lunch ??"
तो काउंटर पर मौजूद व्यक्ति गर्म खाने का एक पार्सल और
पानी की एक बोतल उसको दे देता है। और यह क्रम ...
एक ग्रुप द्वारा अधिक पेमेंट करने का और दूसरे ग्रुप द्वारा बिना पेमेंट खान-पान ले जाने का दिन भर चलता रहता है।
यानि, अपनी "पहचान" न कराते हुए और किसी के चेहरे को "जाने बिना" भी अज्ञात गरीबों, जरुरतमन्दों की मदद करना यह है नार्वे नागरिकों की परंपरा।
और बताया गया कि यह "कल्चर" अब यूरोप के अन्य कई देशों में फैल रही है। और हम अस्पतालों में एक केला, एक संतरा मरीजों को बांटेंगे तो सारे मिलकर अपनी पार्टी, अपने संगठन का ग्रुप फोटो खिंचाकर अखबार में छापेंगे।
है ना ???
क्या भारत में भी इस प्रकार की खान-पान की "Suspension" जैसी प्रथा का प्रारंभ हो सकता है ???

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