23/05/2023
चीन और यूएस को पछाड़ ऑटो सेक्टर में किंग बनने की ओर भारत
चीन और अमेरिका के बाद भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी ऑटो इंडस्ट्री है। ऐसी कोई कंपनी जो भारत में मौजूद ना हो। जो नहीं है वो भी भारत में आने के लिए बेसर्बी से इंतजार कर रहा हैं। जिसमें नया नाम जुड़ गया है और वह है टेस्ला का। जिसकी भारत सरकार के साथ बातचीत चल रही है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या ऑटो सेक्टर और खासकर ईवी सेगमेंट में भारत अमेरिका और चीन को पीछे छोड़ सकता है। सवाल यहां पर बड़ा इसलिए भी है क्योंकि मौजूदा समय में सेमीकंडक्टर की कमी पूरी नहीं हो पा रही है।
मैन्युफैक्चरिंग कपैसिटी को पूरा करने में बड़ी से बड़ी कंपनी पीछे है। वहीं दूसरी ओर यूरोप, ब्रिटेन और अमेरिका में मंदी के घने बादल छाए हुए हैं। नौकरियां जा रही हैं। जिसकी वजह से डिमांड कम होने के आसार बढ़ गए हैं। ऐसे में इस इंडस्ट्री के सामने चुनौतियां काफी हैं। वैसे मारुति सुजुकि के चेयरमैन ने हाल ही में कहा कि भारत की ऑटो इंडस्ट्री साल 2030 से पहले दुनिया की सबसे बड़ी ऑटो इंडस्ट्री की हब बन सकती है।
हाल के वर्षों में भारत व्हीकल मेकर्स के लिए मेन मार्केट के रूप में उभरा है। भारत में लगातार मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स का विस्तार देखने को मिला है। नई-नई यूनिट्स और इंवेस्टमेंट देखने को मिल रहे है। अब तो टेस्ला की भी बात चल रही है, जो कि काफी सकारात्मक मोड पर है। ऐसे में देश में आने वाले सालों में अमेरिका और चीन जैसे बड़े मार्केट को पीछे छोड़ सकती है। इस बात की भविष्यवाणी मारुति सुजुकी इंडिया के चेयरमैन आरसी भार्गव ने भी की है। उनका कहना है कि भारत अगले पांच वर्षों के भीतर अमेरिका और चीन दोनों को पछाड़ते हुए दुनिया का नंबर वन कार मार्केट बन जाएगा।
मौजूदा समय में चीन दुनिया का सबसे बड़ा कार मार्केट है। यहां पर सबसे ज्यादा कारों की बिक्री होती है। ऐसे में भारत के लिए चीन को पीछे छोडऩा मुश्किल तो है, लेकिन नामुमकिन नहीं है। आंकड़ों पर बात करें तो साल 2022 में भारत में सभी कैटेगिरी व्हीकल की सेल्स 20.75 मिलियन यूनिट्स थी। चीन ने इसी साल में 26.86 मिलियन वाहन बेचे हैं। कई उपायों को करने के साथ भारत चीन को पीछे छोड़ सकता है। आरसी भार्गव का मानना है कि अगर भारत लोकल लेवल पर अपने प्रोडक्शन फैसिलिटी को बढ़ाने के लिए अपनी मैन्युफैक्चरिंग कैपैसिटी में इजाफा करता है तो भारत चीन और अमेरिका दोनों को पीछे छोड़ सकता है।
अगले पांच सालों में ऑटो मैन्युफैक्चरिंग 70 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश हो सकता है। मारुति सुजुकी खुद 18 हजार करोड़ रुपये का निवेश करने जा रही है। वो हरियाणा के सोनीपत में प्रोडक्शन यूनिट का निर्माण करेगी। ये कंपनी की अब तक की सबसे बड़ी प्रोडक्शन यूनिट होने का अनुमान है। मारुति सुजुकी के अलावा दूसरे कार मेकर्स भी अपने प्रोडक्शन को एक्सपैंड करने के लिए निवेश करने का मन बना चुके हैं।
हुंडई ने देश में 20 हजार करोड़ रुपये का निवेश कर प्रोडक्शन यूनिट बनाने की ऐलान कर चुका है, ताकि प्रोडक्शन बढ़ाकर एक्सपोर्ट को बढ़ाया जा सके। वहीं दूसरी ओर एमजी मोटर्स भी देश में 5 हजार करोड़ रुपये का निवेश कर सकती है। दुनिया की सबसे बड़ी ईवी कंपनी भारत में एंट्री को तैयार है। अगर सरकार के डील होती है तो अनुमान के अनुसार टेस्ला भी भारत में 30 से 35 हजार करोड़ रुपये कर निवेश कर सकती है।