10/11/2021
चढ़ते सूरज को प्रणाम करने वाली दुनिया में भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जहॉं ढल रहे सूर्य को भी पूरी कृतज्ञता के साथ अर्घ्य देने की परंपरा है। पूरे दिन को अपनी ऊर्जित आभा से दीप्त करने के बाद भगवान भास्कर जब स्वयं निस्तेज होकर ढल रहे होते हैं तो उस समय उन्हें प्रकृति के अन्य तत्वों के साथ मिलकर प्रणाम निवेदित करना हमारी संस्कृति में समाहित कृतज्ञता के सुंदर संस्कारों का जीवंत उदाहरण है।
प्रकृति को समर्पित चार दिवसीय महापर्व छठ के दौरान आज सूर्य की सांध्य आराधना का दिवस है। आज शाम जल में खड़े होकर अस्ताचलगामी सूर्य से मंगल-कामना की तैयारी कर रहे आप सभी व्रतियों का सौभाग्य अचल रहे, अनुष्ठान का अभीष्ट सभी इष्ट-मित्रों तक अवश्य पहुँचे तथा समस्त सदिच्छाएँ पूर्ण हों।
ूजा की हार्दिक शुभकामनाएं❤️
दीपक कुमार
परमेश्वर कंप्यूटर & CSC 🕷️🙏🙏💞