Dish N DTH Care, Mirganj

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We are serving as a private service center for dish related problems, as signal problem, new installation,
Our other supporting works are LED TV Wall mounting, Set Top Box Wall Mounting.

21/12/2023
17/12/2023

इलेक्ट्रिक केटल को साफ करने के लिए अपनाएं ये आसान तरीके, बदबू और दाग होंगे झटपट दूर
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🛑इलेक्ट्रिक केटल की बदबू को दूर करते हैं सोडा और नींबूहफ्ते में एक बार केटल को बाहर से जरूर साफ करेंकेटल को रनिंग टैप के नीचे रख कर न करें साफ

🛑इलेक्ट्रिक केटल का उपयोग कई चीजों को गरम करने और उबालने के लिए किया जाता है। लेकिन इसे साफ करने का तरीका बहुत कम लोगों को पता रहता है।

🛑कई लोग तो इलेक्ट्रिक केटल को साधारण बर्तनों की तरह साफ करते हैं। मगर ऐसा करने से आपका इलेक्ट्रिक केटल भी खराब हो सकता है। आज हम आपको इलेक्ट्रिक केटल को साफ करने का बेहद आसान तरीका बताएंगे।

🛑इस तरह करें बदबू को दूर

यदि आप इलेक्ट्रिक केटल का यूज पानी उबालने के साथ-साथ दूसरी चीजों को उबालने या गरम करने के लिए भी करते हैं तो उसमें हल्की-हल्की महक हो जाती है। ज्यादातर अंडा उबालने और चाय बनाने पर उसकी महक इलेक्ट्रिक केटल में रह जाती है और फिर अगर आप उसमें पानी उबालते है तो पानी से अजीब तरह की गंध आती है। अगर आपको इस गंध से बचना है तो आप ये दो तरीके अपना सकते हैं।

🛑करें सिरके से साफ
- इलेक्ट्रिक केटल में 1 बड़ा चम्मच सिरका डाल लें।
- उसके बाद केटल में पानी भरकर उसे गरम करें।
- गरम पानी को केटल में 10 मिनट तक रखें।
- इसके बाद पानी को फेंक दें। ऐसा करने से केटल की सारी गंध दूर हो जाएगी।

🛑करें नीबू से साफ
- सबसे पहले इलेक्ट्रिक केटल में पानी भरलें और फिर उसमें कटा हुआ नींबू डाल दें।
- इसके बाद आप केटल में पानी को उबालें और 10-15 मिनट तक गरम पानी उसमें ही रहने दें। ऐसा करने से सारी गंध दूर हो जाएगी।

🛑नई चमक लाने के लिए अपनाएं ये तरीका

केटल में बार-बार पानी उबालने से, केटल के अंदर लाइम स्टोन की परत बिल्डअप हो जाती है, जो पपड़ी के रूप में निकलने लगती है। बिल्डअप हुए परत के टुकड़े आपकी चाय और खाने में मिल जाते हैं, इसके अलावा पानी गर्म होने की स्पीड भी कम हो जाती है। ऐसे में केटल को साफ करने के लिए आप बेकिंग सोडा का इस्तेमाल कर सकते हैं।

🛑बेकिंग सोडा में एक्‍सफोलिएटिंग प्रॉपर्टीज होती हैं। यदि आप एक छोटा चम्‍मच बेकिंग सोडा पाउडर और 1 बड़ा चम्‍मच पानी मिक्‍स करके इलेक्ट्रिक केटल की सतेह पर डालती हैं और 15 मिनट बाद स्‍क्रब की मदद से इलेक्ट्रिक केटल की सफाई करती हैं तो यह झटपट साफ हो कर नई जैसी चमकने लगेगी।

🛑ध्यान रखने के लिए कुछ खास टिप्स

- इलेक्ट्रिक केटल को साफ करने के लिए लिक्विड डिश क्‍लीनर का इस्‍तेमाल करें क्‍योंकि ये केटल से बाहर निकालने में बेहद आसान होता है

-🛑इलेक्ट्रिक केटल में पानी भर कर न रखें। ऐसा करने से इलेक्ट्रिक केटल में लगा हीटिंग एलिमेंट खराब हो सकता है।
- इलेक्ट्रिक केटल को कभी भी रनिंग टैप के नीचे रख कर न साफ करें। इससे उसके हीटिंग एलिमेंट को छति पहुंच सकती है।

🛑- केटल में अंडे उबालते समय ध्यान रखें कि फूटा हुआ अंडा इलेक्ट्रिक केटल में न डालें, वरना उसमें से महक आने लग जाएगी। अंडे की महक को इलेक्ट्रिक केटल से दूर कर पाना बहुत मुश्किल होता है।
- हफ्ते में एक बार केटल को बाहर से जरुर साफ कर लेना चाहिए। ऐसा करने से इसकी चमक बरकरार रहती है।

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18/07/2023

मोमोज आपकी जिंदगी बर्बाद कर देगा!!
आजकल गली मोहल्लो नुक्कड़ मार्केट पर सिल्वर के स्ट्रीमर में उबलते हुए मोमोज तीखी लाल मिर्च की चटनी के साथ खाते हुए युवा किशोर आपको भारी संख्या में दिख जाऐंगे।
अक्सर शाम के समय मासूम युवा किशोर नहीं जानते वह मोमोज खा कर अपने स्वास्थ्य चरित्र को किस हद तक बर्बाद कर रहे हैं।
Momoz मैदा के बने हुए होते हैं मैदा गेहूं का एक उत्पाद है जिसमें से प्रोटीन व फाइबर निकाल लिया जाता है मृत starch ही शेष रहता है।
उसे और अधिक चमकाने के लिए बेंजोयल पराक्साइड मिला दिया जाता है जो एक रासायनिक बिलीचर है।
जी हां वही ब्लीचर्स जिससे चेहरे की सफाई की जाती है।यह ब्लीचर शरीर में जाकर किडनी को नुकसान पहुंचाता है।
मैदे के प्रोटीन रहित होने से इसकी प्रकृति एसिडिक हो जाती है यह शरीर में जाकर हड्डियों के कैल्शियम को सोख लेता है तीखी लाल मिर्च की चटनी उत्तेजक होती है, जिससे यौन रोग धातु रोग नपुंसकता जैसी महा भयंकर बीमारियां देश के किशोर व युवा को खोखला कर रही है।
इस में ऐसे कैमीकलों को मिलाया जाता है जो बच्चों के दिमाग में चले जाते हैं।
जिससे बच्चों का मन बार बार खाने को करता है।
यह कैमीकल बच्चीयों में बांझपन और लड़कों को नपुंसकता पैदा करते है।
जिसकी खाने वालों को भनक भी नहीं लगती।
यह खाना आपकी आंतों में जाकर चिपक जाता है।
आंतों का सत्यानाश कर देता है।
जिससे बच्चों में नया खून बनना बंद हो जाता है और शरीर का विकास रूक जाता है।
जीभ के स्वाद में आकर अपने स्वास्थ्य को युवा किशोर खराब कर रहे हैं।
Momoz पूर्वी एशियाई देशों चीन तिब्बत का खाना है वहां की जलवायु के यह अनुकूल वहां है भारत की गर्म जलवायु के यह अनुकूल नहीं है।
आज ही शुभ संकल्प लें इस स्वास्थ्य नाशक रोग प्रधान आहार को कभी नहीं खाऐंगे ना ही किसी को खाने दिजिए !!
साभार।

कहां-कहां बारिश हो रही है कृपया कमेंट करें🌨️🌨️🌨️🌨️🌨️🌨️🌨️🌨️🌨️🌨️🌨️🌨️
30/06/2023

कहां-कहां बारिश हो रही है कृपया कमेंट करें
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24/06/2023

दो दो करोड़ से ज्यादा खर्च करके सिर्फ टाइटैनिक का मलबा देखने और फोटोग्राफी करने के मंतव से अपनी जान गवा बैठे 5 अरबपति, आखरी समय उनका समय कैसा पीड़ा वाला रहा होगा कोई सोच भी नही सकता।

और अब "टाइटन गेट" पनडुब्बी में सवार सभी अरबपति आज मृत घोषित कर दिए गए।
उनके पास चाहे कितना ही पैसा था पर आखिरी समय में केवल "जीवित रहने" और धरती पर वापस आने के लिए प्रार्थना कर रहे होंगे।

जीवन अपने आप में कितना अनमोल है, इसे महत्व दें, इसके लिए आभारी रहें, अपनी ऊर्जा एवं धन को सकारात्मक कार्यों में खर्च करें।

जब आपके पास बहुत ज्यादा पैसा हो तो उलटी सीधी हरकतों के बजाय अपने जीवन का अधिकतम लाभ उठायें गरीबों एवं जरूरतमन्दों की मदद करें..

Ocean Gate कंपनी पहले ही एफिडेविट ले चुकी थी के अगर इस 8 घंटे के हैरतंगेज टूर में जान चली जाती है तो उसका कोई क्लेम नही होगा।

सोचकर ही रोंगटे खड़े होते है के यह कैसा हैरतंगेज काम था जो लगभग एक सदी पहले डूब चुके टाइटैनिक जहाज का मलबा मात्र देखने का प्रोग्राम था।

सोचकर देखो उस जगह पर हजार से ज्यादा लोगों की आत्मा भटक रही होगी और यह लोग अब उन्हीं आत्माओं के पास चले गए।

अपना पैसा और समय अच्छे कार्यों पर खर्च करे।🙏

21/06/2023

आदत बदलो, खुशियाँ पाओ

एक बार की बात है एक शहर में एक मशहूर होटल मालिक ने अपने होटल में एक स्विमिंग पूल बनवाया। स्विमिंग पूल के चारों ओर बेहतरीन इटैलियन टाइल्स लगवाये, परन्तु मिस्त्री की गलती से एक स्थान पर टाइल लगना छूट गया। अब जो भी आता पहले उसका ध्यान टाइल्स की खूबसूरती पर जाता। इतने बेहतरीन टाइल्स देख कर हर आने वाला मुग्ध हो जाता।

वो बड़ी ही बारीकी से उन टाइल्स को देखता व प्रशंसा करता। तभी उसकी नज़र उस मिसिंग टाइल पर जाती और वहीं अटक जाती.... उसके बाद वो किसी भी अन्य टाइल की ख़ूबसूरती नहीं देख पाता। स्विमिंग पूल से लौटने वाले हर व्यक्ति की यही शिकायत रहती की एक टाइल मिसिंग है। हजारों टाइल्स के बीच में वो मिसिंग टाइल उसके दिमाग पर हावी रहता थी।
कई लोगों को उस टाइल को देख कर बहुत दुःख होता कि इतना परफेक्ट बनाने में भी एक टाइल रह ही गया।

तो कई लोगों को उलझन हो होती कि कैसे भी करके वो टाइल ठीक कर दिया जाए। बहरहाल वहां से कोई भी खुश नहीं निकला, और एक खूबसूरत स्विमिंग पूल लोगों को कोई ख़ुशी या आनंद नहीं दे पाया |

टाइल तक तो ठीक है पर यही बात हमारी जिंदगी में भी हैं। यह एक मनोवैज्ञानिक समस्या है जिससे हर व्यक्ति गुज़र रहा है। उन चीजों पर ध्यान देना जो हमारे जीवन में नहीं है, आगे चल कर हमारी ख़ुशी को चुराने का सबसे बड़ा कारण बन जाती हैं।

जिन्दगी में कितना कुछ भी अच्छा हो, हम उन्हीं चीजों को देखते हैं जो *मिसिंग* हैं और यही हमारे दुःख का सबसे बड़ा कारण है।

क्या इस एक आदत को बदल कर हम अपने जीवन में खुशहाली ला सकते हैं ?

भगवान ने हमे 32 दांत दिये, लेकिन हमारी जीभ उस टूटे हुए दांत पर ही क्यूँ जाती रहती हैं, कभी सोचा है । घर पर आपका ध्यान उसी फर्नीचर पर जाता है जो अपनी जगह पर से हटा दी गयी होगी। यहाँ तक की अगर एक माँ के तीन संताने हो और उनमें से एक सन्तान विदेश गया हुआ होगा, तो माँ अपने उसी सन्तान के बारे में ज़्यादा सोचती हैं जो विदेश गया हुआ है , ना कि उन दो संतानो के बारे में जो उसके साथ रहते हुए उनकी सेवा करते रहते हैं।

ऐसे बहुत से उदाहरण हो सकते हैं जिसमें हम अपनी किसी एक कमी के पीछे सारा जीवन दुखी रहते हैं। ज्यादातर लोग उन्हें क्या-क्या मिला है पर खुश होने के स्थान पर उन्हें क्या नहीं मिला है पर दुखी रहते हैं।

मिसिंग टाइल हमारा फोकस चुरा कर हमारी जिन्दगी की सारी खुशियाँ चुराता है। यह शारीरिक और मानसिक कई बीमारियों की वजह बनता है, अब हमारे हाथ में है कि हम अपना फोकस मिसिंग टाइल पर रखे और दुखी रहें या उन नेमतों पर रखे जो हमारे साथ है और खुश रहें...

अनुसरित रचना__हारून पाशा

10/06/2023

एक था भिखारी ! रेल सफ़र में भीख़ माँगने के दौरान एक सूट बूट पहने सेठ जी उसे दिखे। उसने सोचा कि यह व्यक्ति बहुत अमीर लगता है, इससे भीख़ माँगने पर यह मुझे जरूर अच्छे पैसे देगा। वह उस सेठ से भीख़ माँगने लगा।*

भिख़ारी को देखकर उस सेठ ने कहा, “तुम हमेशा मांगते ही हो, क्या कभी किसी को कुछ देते भी हो?”

*भिख़ारी बोला, “साहब मैं तो भिख़ारी हूँ, हमेशा लोगों से मांगता ही रहता हूँ, मेरी इतनी औकात कहाँ कि किसी को कुछ दे सकूँ?”*

सेठ:- जब किसी को कुछ दे नहीं सकते तो तुम्हें मांगने का भी कोई हक़ नहीं है। मैं एक व्यापारी हूँ और लेन-देन में ही विश्वास करता हूँ, अगर तुम्हारे पास मुझे कुछ देने को हो तभी मैं तुम्हे बदले में कुछ दे सकता हूँ।

*तभी वह स्टेशन आ गया जहाँ पर उस सेठ को उतरना था, वह ट्रेन से उतरा और चला गया।*

इधर भिख़ारी सेठ की कही गई बात के बारे में सोचने लगा। सेठ के द्वारा कही गयीं बात उस भिख़ारी के दिल में उतर गई। वह सोचने लगा कि शायद मुझे भीख में अधिक पैसा इसीलिए नहीं मिलता क्योकि मैं उसके बदले में किसी को कुछ दे नहीं पाता हूँ। लेकिन मैं तो भिखारी हूँ, किसी को कुछ देने लायक भी नहीं हूँ।लेकिन कब तक मैं लोगों को बिना कुछ दिए केवल मांगता ही रहूँगा।

*बहुत सोचने के बाद भिख़ारी ने निर्णय किया कि जो भी व्यक्ति उसे भीख देगा तो उसके बदले मे वह भी उस व्यक्ति को कुछ जरूर देगा। लेकिन अब उसके दिमाग में यह प्रश्न चल रहा था कि वह खुद भिख़ारी है तो भीख के बदले में वह दूसरों को क्या दे सकता है?*

इस बात को सोचते हुए दिनभर गुजरा लेकिन उसे अपने प्रश्न का कोई उत्तर नहीं मिला।

*दुसरे दिन जब वह स्टेशन के पास बैठा हुआ था तभी उसकी नजर कुछ फूलों पर पड़ी जो स्टेशन के आस-पास के पौधों पर खिल रहे थे, उसने सोचा, क्यों न मैं लोगों को भीख़ के बदले कुछ फूल दे दिया करूँ। उसको अपना यह विचार अच्छा लगा और उसने वहां से कुछ फूल तोड़ लिए।*

वह ट्रेन में भीख मांगने पहुंचा। जब भी कोई उसे भीख देता तो उसके बदले में वह भीख देने वाले को कुछ फूल दे देता। उन फूलों को लोग खुश होकर अपने पास रख लेते थे। अब भिख़ारी रोज फूल तोड़ता और भीख के बदले में उन फूलों को लोगों में बांट देता था।

*कुछ ही दिनों में उसने महसूस किया कि अब उसे बहुत अधिक लोग भीख देने लगे हैं। वह स्टेशन के पास के सभी फूलों को तोड़ लाता था। जब तक उसके पास फूल रहते थे तब तक उसे बहुत से लोग भीख देते थे। लेकिन जब फूल बांटते बांटते ख़त्म हो जाते तो उसे भीख भी नहीं मिलती थी,अब रोज ऐसा ही चलता रहा।*

एक दिन जब वह भीख मांग रहा था तो उसने देखा कि वही सेठ ट्रेन में बैठे है जिसकी वजह से उसे भीख के बदले फूल देने की प्रेरणा मिली थी।

*वह तुरंत उस व्यक्ति के पास पहुंच गया और भीख मांगते हुए बोला, आज मेरे पास आपको देने के लिए कुछ फूल हैं, आप मुझे भीख दीजिये बदले में मैं आपको कुछ फूल दूंगा।*

सेठ ने उसे भीख के रूप में कुछ पैसे दे दिए और भिख़ारी ने कुछ फूल उसे दे दिए। उस सेठ को यह बात बहुत पसंद आयी।

*सेठ:- वाह क्या बात है..? आज तुम भी मेरी तरह एक व्यापारी बन गए हो, इतना कहकर फूल लेकर वह सेठ स्टेशन पर उतर गया।*

लेकिन उस सेठ द्वारा कही गई बात एक बार फिर से उस भिख़ारी के दिल में उतर गई। वह बार-बार उस सेठ के द्वारा कही गई बात के बारे में सोचने लगा और बहुत खुश होने लगा। उसकी आँखे अब चमकने लगीं, उसे लगने लगा कि अब उसके हाथ सफलता की वह चाबी लग गई है जिसके द्वारा वह अपने जीवन को बदल सकता है।

*वह तुरंत ट्रेन से नीचे उतरा और उत्साहित होकर बहुत तेज आवाज में ऊपर आसमान की ओर देखकर बोला, “मैं भिखारी नहीं हूँ, मैं तो एक व्यापारी हूँ..*

मैं भी उस सेठ जैसा बन सकता हूँ.. मैं भी अमीर बन सकता हूँ!

*लोगों ने उसे देखा तो सोचा कि शायद यह भिख़ारी पागल हो गया है, अगले दिन से वह भिख़ारी उस स्टेशन पर फिर कभी नहीं दिखा।*

एक वर्ष बाद इसी स्टेशन पर दो व्यक्ति सूट बूट पहने हुए यात्रा कर रहे थे। दोनों ने एक दूसरे को देखा तो उनमे से एक ने दूसरे को हाथ जोड़कर प्रणाम किया और कहा, “क्या आपने मुझे पहचाना?”

सेठ:- “नहीं तो ! शायद हम लोग पहली बार मिल रहे हैं।

*भिखारी:- सेठ जी.. आप याद कीजिए, हम पहली बार नहीं बल्कि तीसरी बार मिल रहे हैं।*

सेठ:- मुझे याद नहीं आ रहा, वैसे हम पहले दो बार कब मिले थे?

अब पहला व्यक्ति मुस्कुराया और बोला:

हम पहले भी दो बार इसी ट्रेन में मिले थे, मैं वही भिख़ारी हूँ जिसको आपने पहली मुलाकात में बताया कि मुझे जीवन में क्या करना चाहिए और दूसरी मुलाकात में बताया कि मैं वास्तव में कौन हूँ।

*नतीजा यह निकला कि आज मैं फूलों का एक बहुत बड़ा व्यापारी हूँ और इसी व्यापार के काम से दूसरे शहर जा रहा हूँ।*

आपने मुझे पहली मुलाकात में प्रकृति का नियम बताया था... जिसके अनुसार हमें तभी कुछ मिलता है, जब हम कुछ देते हैं। लेन देन का यह नियम वास्तव में काम करता है, मैंने यह बहुत अच्छी तरह महसूस किया है, लेकिन मैं खुद को हमेशा भिख़ारी ही समझता रहा, इससे ऊपर उठकर मैंने कभी सोचा ही नहीं था और जब आपसे मेरी दूसरी मुलाकात हुई तब आपने मुझे बताया कि मैं एक व्यापारी बन चुका हूँ। अब मैं समझ चुका था कि मैं वास्तव में एक भिखारी नहीं बल्कि व्यापारी बन चुका हूँ।

*भारतीय मनीषियों ने संभवतः इसीलिए स्वयं को जानने पर सबसे अधिक जोर दिया और फिर कहा -*

सोऽहं
शिवोहम !!

समझ की ही तो बात है...
*भिखारी ने स्वयं को जब तक भिखारी समझा, वह भिखारी रहा | उसने स्वयं को व्यापारी मान लिया, व्यापारी बन गया |*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

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