19/08/2022
अवतीर्ण जगतपति होगा अब उद्धार जगत का करने को।
पृथ्वी प्रति स्वयं आ रहा है पृथ्वी की पीड़ा हरने को।।
संगठित आंसुओं की बूंदें जो टपक रही है भूतल पर।
आएंगी बनकर प्रलय काल अत्याचारी राक्षस दल पर।।
गोलोक वासिनी महाशक्ति वृषभान लली कहलाएंगी।
रामअवतार की वैदेही राधिका नाम से आएंगी।।
तुम सब भी गोप, गोपी बनो जा पहुंचो पहले उस मग में।
खेलेगा प्रकृति खिलाड़ी यह - टोली के साथ खेल जग में।।
श्रीवर गुरुवर इष्टवर दो ऐसा वरदान।
राधावर की कथा का घर घर गूंजे गान।।
श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक मंगलकामनाएं।