Sheraj ahmad

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08/02/2021

#तिजारत_कैसे_करे ?

सभी व्यापरी दुकानदार इस पोस्ट को पुरा पढे

🌿तिजारत में बरकत है🌿
तिजारत में बरकत है और अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने भी तिजारत की है । अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का इरशाद गिरामी है कि अल्लाह ने रिज़्क के दस हिस्से किए हैं और अकेले नौ हिस्से तिजारत में है

लिहाज़ा मुस्लमानों को तिजारत की तरफ़ राग़िब होना चाहीए ।इसी लिए अक्सर हमदर्द मुसलमानों को तिजारत करने का ही मश्वरा देते हैं ।जिस तरह हर काम के उसूल होते हैं इसी तरह तिजारत के भी कुछ उसूल-ओ-ज़वाबत हैं जिन पर अमल ना करके या ग़फ़लत और कोताही करने पर कभी कामयाबी नहीं मिल सकती।

🌳आज से सदीयों पहले हिंदूस्तान के साहिली इलाक़ों में सहाबा किराम ने क़दमरंजा फ़रमाकर इस्लामी उसूलों के तहत तिजारत शुरू की तो लोग उन की ईमानदारी और ख़ुशअख़लाक़ी से मुतआस्सिर होकर इस्लाम क़बूल करने लगे ।

🌸आज हम लोग इस्लामी उसूलों को बालाए ताक़ रख कर जो थोड़ी बहुत तिजारत करते भी हैं तो हमारी बेईमानी बे उसूली और बदअख़्लाकी की वजह से ग़ैर कौमें मुसलमानों से मुतनफ़्फ़िर होती जा रही हैं ।एक चीनी कहावत है कि जो शख़्स ख़ुशअख़लाक़ नहीं है उसे दुकान नहीं खोलनी चाहीए ।हमारा तो ये हाल है कि अगर हमारा कारोबार नहीं चल रहा है तो बरकत के लिए क़ुरआन ख्वानी और आयत-ए-करीमा का वरद करवाऐंगे। और अगर अल्लाह के फ़ज़ल से कारोबार चलने लगा तो ग्राहकों से खासतौर पर छोटे ग्राहकों से बेहद बेरुख़ी या फिर इंतिहाई बदतमीज़ी से पेश आयेंगे ।

🌲तिजारत शुरू करने और कामयाबी से जारी रखने के लिए कुछ उसूल हैं उन्हें अच्छी तरह याद रखें ।

🌷 *क़र्ज़ लेकर कारोबार हरगिज़ शुरू ना करें बल्कि पहले कुछ बचत करें फिर पूंजी लगाऐं।

🌷*तिजारत के लिए सूद पर हरगिज़ पैसा ना लें क्योकिं सूद में बरकत नहीं वबाल है ।सूद के बारे में कहा गया है कि वो अल्लाह और उसके रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के ख़िलाफ़ ऐलान जंग है।

🌷*सारी जमा पूंजी ना लगा दें क्यों कि कारोबार जमने और उस को फ़रोग़ पाने में कुछ वक़्त तो लगता ही है बल्कि कई बार सालों लग जाते हैं तब तक अपने घरेलू ख़र्च के लिए रक़म आप के पास होना चाहीए।

🌷*कारोबार चाहे कुछ भी करें इस का तजुर्बा होना बहुत ज़रूरी है। कारोबार से मुतआल्लिक़ कारख़ाने या दुकान में मुलाज़मत करें होसके तो फेरी भी करें इस से आप को तजुर्बा और काम की छोटी मोटी छिपी हुई चीज़ें मालूम होंगी।हमारे बहुत से भाई ख़लीजी ममालिक में ज़िंदगी भर कमा कर रक़म जमा करते हैं मगर बगै़र किसी तजुर्बे के कोई भी कारोबार शुरू कर देते और नतीजतन अपनी सारी रक़म डूबा बैठते हैं।

🌷*किसी की देखा देखी या दूसरों के कहने में आकर कोई कारोबार शुरू ना करें।तिजारत इसी चीज़ की करें जिस का आप को तजुर्बा हो।

🌷*कोई भी कारोबार करें हमेशा छोटे पैमाने पर शुरू करें और फिर बतदरीज उसे तरक़्क़ी देने की कोशिश करें।

🌷*अपने कारख़ाने और दूकान के छोटे से छोटे काम तक ख़ुद ही अंजाम देने की कोशिश करें ख्वाह इस के लिए मुलाज़िम ही क्यों ना मौजूद हो ,ताकि कभी उन की इत्तिफ़ाकिया ग़ैर मौजूदगी में आप को परेशानी ना हो।

🌷* पुराने मुलाज़मीन की क़दर करें और उनके सुख दुख में बनफ़स नफ़ीस शरीक हों इस से आप को उनके तजुर्बों से ज़्यादा दिनों तक फ़ायदा होता रहेगा।

🌷*बड़े ग्राहकों के साथ साथ छोटे ग्राहकों से भी ख़ुशअख़लाक़ी से पेश आएं ,अगर कोई गाहक सामान ना भी ख़रीदे तो भी अपनी दूकान में आने के लिए इस का शुक्रिया अदा करें ।अगर जगह हो तो पानी पिलाने का भी इंतिज़ाम रखें ।ग्राहकों के साथ आने वाले छोटे बच्चों को चॉकलेट टॉफ़ीयां दें ।ये छोटी छोटी बातें लोगों का दिल जीतने और उन को क़रीब लाने का ज़रीया बनती हैं।

🌷* सामान में अगर वाक़ई ऐब हो तो बहाने ना बनाऐं ं बल्कि तबदील करके दें और माफ़ी भी मांगें।

🌷*अपने काम में दूसरों के मुक़ाबले कुछ अच्छा और नयापन पैदा कर।ें जैसे आप दर्ज़ी हैं तो गाहक के बिना कहे ही कपड़ों में ज़रा अच्छा बटन लगा दें । चाय का स्टाल चलाते हैं तो चाय में इलायची और अदरक डाल दें ।खाने का होटल है तो खाने के साथ कोई अच्छी सी चटनी ही बनाकर पेश कर दें। ।बहुत ही मामूली ख़र्च करके भी आप अपनी इन्फ़िरादी पहचान क़ायम कर सकते हैं।

🌷 * पैकिंग से ज़्यादा कवालीटी पर ध्यान दें।

🌷* अपने हम पेशा लोगों से दोस्ताना ताल्लुक़ात बनाऐ ,उनके राबते में रहें आम तौर पर देखा गया है कि लोग हम पेशा ताजिर से रक़ाबत और हसद रखते हैं जो कि निहायत नुक़्सानदेह है।

🌷*कामयाबी से चलते कारोबार का ख़ानदानी झगड़े में बटवारा हरगिज़ ना करें बल्कि हिसाब किताब साफ़ रखते हुए मुनाफ़ा में हिस्सादार बनें ।एक कारोबार को बटवारे में ख़त्म करना तो आसान है मगर उसे कामयाबी से क़ायम रखने के लिए कई मर्तबा दो से तीन नसलों को मेहनत करना पड़ती है।

🌷*अपने बच्चों को एक दम से कारोबार के हवाले ना करें ,पहले उन्हें अपने मुलाज़मीन के साथ काम करवाईए , मार्कीट में भेजकर जायका लें और दुकान की साफ़ सफ़ाई में लगाऐं ,कुछ वक़्त अपने साथ रखें तब जाकर कारोबार उनके हवाले करें वर्ना अगर आप ने यकायक कारोबार या गल्ला उसके हवाले किया नहीं कि वो फुज़ूलखर्ची में मुबतला होकर आपके बरसों की मेहनत से जमाए कारोबार की बर्बादी का सबब बन जाएगा । वह मुलाज़िमों को सेठ बन कर ज़लील करेगा ,ग्राहकों से बेरुख़ी से बात करेगा नतीजा ये होगा कि मुलाज़िम काम छोड़कर चले जाऐंगे और गाहक मुँह मोड़ लेंगे और आप का कारोबार बंद।

🌷*रोज़ाना अख़बारात और खबरों का मुताला करें मिनजुमला हालात के कारोबारी हालात पर नज़र रखें।

🌷*अपनी क़ाबिलीयत से ज़्यादा बढ़ चढ़ कर दावा और वायदा ना करें ,तयशुदा वक़्त से पहले ,मुतवक़्क़े क्वालिटी से बेहतर और मुक़र्ररा लागत से कम में पूरा किया जाने वाला काम गाहक के इतमीनान और आप की कामयाबी का सबब बनता है।

🌷आहिस्ता आहिस्ता मगर मुसलसल चलना कामयाबी की ज़मानत है।कारोबार में नफ़ा के साथ नुक़्सान भी इस का एक अहम हिस्सा है जिस के लिए सब्र के साथ ख़ुद को ज़हनी और मआशी तौर पर तैय्यार रखें।साथ ही ये भी याद रखें कि क़सम खाकर माल बेचने से माल तो बिक जाता है मगर बरकत ख़त्म हो जाती है।

🌷 ज़कात बिलकुल सही हिसाब लगाकर अदा करें और अपने कारोबार की हिफ़ाज़त सदक़ा के ज़रीये करें ।

🌷दूकानों और कारख़ानों में कुरआनी आयात के फ्रे़म और स्टीकर ही ना लगाऐं बल्कि ख़ुद तिलावत भी करें और वो भी तर्जुमा के साथ ताकि ख़ालिक़ ए कायनात आप से क्या चाहता है वो आप को सीधे मालूम हो जाए।

🌷 कारोबार ख़ालिस इस्लामी उसूलों पर करें और अपनी दुनिया समेत आख़िरत को भी बेहतर बनाने का सामान करें।

🌷अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का फ़रमान है कि सच्चा और ईमानदार ताजिर कभी भी परेशान नहीं होता हमेशा कामयाबी हासिल करता है। साथ ही रोज ए क़ियामत वह नबियों और शहीदों के साथ होगा।

🌷अल्लाह से दुआ है कि सभी ताजिर भाइ अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के द्वारा बताए गए तरीके से तिजारत करने की तौफीक अता करे। आमीन
लिजा हर्बल
(तिजारत

14/10/2020
खड़े-खड़े साहिल पर हमने शाम कर दी,अपना दिल और दुनिया आप के नाम कर दी,ये भी न सोचा कैसे गुज़रेगी ज़िंदगी,बिना सोचे-समझे हर ख़ु...
03/01/2020

खड़े-खड़े साहिल पर हमने शाम कर दी,
अपना दिल और दुनिया आप के नाम कर दी,
ये भी न सोचा कैसे गुज़रेगी ज़िंदगी,
बिना सोचे-समझे हर ख़ुशी आपके नाम कर दी।

16/12/2018

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