10/07/2022
लक्ष्मी एवं अलक्ष्मी में अंतर ,
( लक्ष्मी जी सत्वगुण संपन्न है जो नेक एवं ईमानदार ( देवताओं ) लोगो के घर में जाती है क्योंकि विष्णु जी देव है वएवं लक्ष्मी जी देवी है ! अलक्ष्मी भ्रष्ट लोगों के घर में मिलती है ! वह तमोगुणी है )
लोककथाओं में अलक्ष्मी का जन्म समुद्र से हुआ इसलिए लक्ष्मी की बहन
कुछ कथाओं की मान्यता अलक्ष्मी भी अपनी बहन की तरह समुद्र मंथन में प्रकट हुई थीं
भगवत महापुराण में समुद्र मंथन के दौरान लक्ष्मी से पहली उनकी बड़ी बहन अलक्ष्मी निकली थीं। कम ही लोग जानते हैं कि देवी लक्ष्मी की कोई बड़ी बहन भी है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है अलक्ष्मी, इसलिए उन्होंने आसुरी शक्तियों का वरण किया और उनके बाद समुद्र से निकलीं लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को चुना। जहां देवी लक्ष्मी धन-धान्य की देवी है, उनकी पूजा-अर्चना करने से धन की प्राप्ति होती है, उसके विपरीत देवी अलक्ष्मी गरीबी और दरिद्रता की देवी हैं। हालांकि इन्हें समुद्र मंथन से निकले 14 रत्नों में नहीं गिना जाता है। ग्रंथों में उल्लेख है कि एक महर्षि से इनका विवाह हुआ था।
लोक कथाओं के मुताबिक समुद्र मंथन के समय जब रत्न निकले तो इनके बीच कुछ उपरत्न आदि भी निकले। इन्हीं में से एक देवी अलक्ष्मी भी थीं। कुछ मान्यताओं के अनुसार समुद्र से वारुणी यानी मदिरा लेकर निकलने वाली स्त्री ही अलक्ष्मी थीं, मदिरा को भगवान विष्णु की अनुमति से दैत्यों को दे दिया गया। कुछ लोग मान्यताओं के मुताबिक अलक्ष्मी की उत्पत्ति भी समुद्र से हुई थी, इस कारण उन्हें लक्ष्मी की बड़ी बहन कहा जाता है।
मान्यताओं के अनुसार, देवी लक्ष्मी की तरह ही अलक्ष्मी का उद्गम भी समुद्र में से हुआ था, जिसके कारण अलक्ष्मी को देवी लक्ष्मी की बड़ी बहन माना जाता है। देवी अलक्ष्मी का विवाह उद्दालक नाम के मुनि से हुआ था। जब मुनि देवी अलक्ष्मी को लेकर अपने आश्रम गए तो अलक्ष्मी ने उस आश्रम में प्रवेश करने से माना कर दिया। जब मुनि ने इसका कारण पूछा तो देवी अलक्ष्मी ने बताया कि वे कैसे घरों में निवास करती हैं और कैसे जगहों पर वे प्रवेश भी नहीं करतीं। देवी अलक्ष्मी के द्वारा बताई गई बातों से धन हानि के कारणों और उनसे बचाव के बारे में आसानी से जाना जा सकता है।
देवी अलक्ष्मी कहती हैं कि मैं सिर्फ उन ही घरों में जाती हूं जो घर गंदे रहते हों, जहां के लोग हर समय लड़ाई-झगड़ा करते रहते हों, जहां लोग गंदे कपड़े पहनते हों और जहां रहने वाले लोग अधर्म या गलत काम करते हों। जिन घरों में हमेशा साफ-सफाई रहती हो, यहां को लोग सुबह जल्दी उठते हों, रोज भगवान की पूजा-अर्चना करते हों, साफ कपड़े पहनते हों, ऐसी जगहों पर देवी अलक्ष्मी प्रवेश नहीं कर पाती। ऐसे घरों में देवी लक्ष्मी का अधिकार होता है। मान्यता है कि देवी अलक्ष्मी को तीखी और खट्टी वस्तुएं पसंद हैं और इसी वजह से घर-दुकान के बाहर नींबू-मिर्ची टांगे जाते हैं।
माना जाता है कि ऐसी वस्तुएं देवी अलक्ष्मी को प्रिय होने के कारण वे दरवाजे पर ही उनका भोज कर देती है और उस जगह पर अंदर प्रवेश करने की जगह दरवाजे से ही चली जाती है। जिन लोगों को देवी लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने के बावजूद पैसों की हानि होती रहती है, ऐसे लोगों पर देवी अलक्ष्मी का प्रभाव होता है और वे लोग देवी अलक्ष्मी के द्वारा बताई गई बातों को ध्यान में रखकर उनसे और धन हानि से छुटकारा पा सकते हैं।
ग्रंथों के अनुसार, घर-दुकान में कभी भी देवी लक्ष्मी की ऐसी मूर्ति या तस्वीर नहीं रखनी चाहिए, जिसमें वे उल्लू ( देवी लक्ष्मी जी का वाहन ) पर बैठी हों। मान्यता है कि ऐसी लक्ष्मी चंचल स्वभाव की होती है और वे कभी भी एक जगह पर नहीं ठहरती। इसके अलावा देवी लक्ष्मी की खड़ी मूर्ति रखने से भी बचना चाहिए।
घर-दुकान में देवी लक्ष्मी की ऐसी तस्वीर या मूर्ति रखनी चाहिए, जिसमें वे कमल के फूल पर बैठी हुई हों। लक्ष्मी जी की ऐसी तस्वीर धन लाभ के लिए शुभ मानी जाती है।
विशेष ,,,,,,, जो लोग नेक कमाई में विश्वास करते है वे ही लक्ष्मी जी को प्राप्त करने के अधिकारी है !
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2. लक्ष्मी जी की (कहानी)
एक गांव में एक साहूकार था, उसकी बेटी प्रतिदिन पीपल पर जल चढाने जाती थी. जिस पीपल के पेड पर वह जल चढाती थी, उस पेड पर लक्ष्मी जी का वास था. एक दिन लक्ष्मी जी ने साहूकार की बेटी से कहा मैं तुम्हारी मित्र बनना चाहती हूँ. लडकी ने कहा की मैं अपने पिता से पूछ कर आऊंगा. यह बात उसने अपने पिता को बताई, तो पिता ने हां कर दी. दूसर दिन से साहूकार की बेटी ने सहेली बनना स्वीकार कर लिया.
दोनों अच्छे मित्रों की तरह आपस में बातचीत करने लगी. इक दिन लक्ष्मीजी साहूकार की बेटी को अपने घर ले गई. अपने घर में लक्ष्मी जी उसका दिल खोल कर स्वागत किया. उसकी खूब खातिर की. उसे अनेक प्रकार के भोजन परोसे,मेहमान नवाजी के बाद जब साहूकार की बेटी लौटने लगी तो, लक्ष्मी जी ने प्रश्न किया कि अब तुम मुझे कब अपने घर बुलाओगी. साहूकार की बेटी ने लक्ष्मी जी को अपने घर बुला तो लिया, परन्तु अपने घर की आर्थिक स्थिति देख कर वह उदास हो गई. उसे डर लग रहा था कि क्या वह, लक्ष्मी जी का अच्छे से स्वागत कर पायेगी.
साहूकार ने अपनी बेटी को उदास देखा तो वह समझ गया, उसने अपनी बेटी को समझाया, कि तू फौरन मिट्टी से चौका लगा कर साफ -सफाई कर. चार बत्ती के मुख वाला दिया जला, और लक्ष्मी जी का नाम लेकर बैठ जा. उसी समय एक चील किसी रानी का नौलखा हार लेकर उसके पास डाल गई. साहूकार की बेटी ने उस हर को बेचकर सोने की चौकी, था, और भोजन की तैयारी की.
थोडी देर में श्री गणेश के साथ लक्ष्मी जी उसके घर आ गई. साहूकार की बेटी ने दोनों की खूब सेवा की, उसकी खातिर से लक्ष्मी जी बहुत प्रसन्न हुई. और साहूकार बहुत अमीर बन गया.
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