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26/06/2015
15/11/2014

कॅरियर ऑन क्लिक

आज जो समय के साथ कदम ताल कर सकता है, वही कामयाब है। जो इससे जरा सा भी पिछडा, उसको फर्श पर पहुंचते देर नहीं लगती। जिस टेक्नोलॉजी के बूते भारत ने कभी तरक्की का ककहरा सीखने की शुरुआत की थी, आज वही टेक्नोलॉजी देश की कामयाबी के महाग्रंथ रच रही है। केवल देश की तरक्की ही क्यों, रोजमर्रा की जिंदगी में भी इसने अपना मुकम्मल असर छोडा है। ऑफिस, घर, डिपार्टमेंटल स्टोर, स्कूल कॉलेज सभी जगह आईटी आज की जरूरत बन चुकी है। उन्नत आईटी सेवा की बदौलत आज विश्व की प्रमुख परीक्षाओं के साथ-साथ भारत में भी सभी प्रमुख परीक्षाएं ऑनलाइन हो रही हैं। जीमैट, जीआरई, टॉफेल के अलावा कैट, इंजीनियरिंग, लॉ, सीटीईटी सभी परीक्षाएं ऑनलाइन हो चुकी हैं या होने की तैयारी में है। विशेषज्ञों के अनुसार आनेवाले समय में यही एकमात्र परीक्षा का तरीका होगा। यही कारण है कि सभी संस्थान इस नई परीक्षा प्रणाली को लागू कर रहे हैं।

नई जेनरेशन, नई परीक्षा

भारत में ऑनलाइन का प्रचलन तेजी से बढ रहा है। चाहे आपको टिकट की बुकिंग करानी हो, बैंक से पैसे का ट्रांजैक्शन करना हो या फिर चैटिंग करनी हो-ये सभी काम आप आनॅलाइन के माध्यम से कर सकते हैं। इसकी विशेषता को देखते हुए अब ऑनलाइन एग्जाम भी देश की कई परीक्षाओं में शुरू हो गए हैं। सरल शब्दों में कहें तो ऑनलाइन एग्जाम एक नई तकनीक है, जिसमें इंटरनेट की मदद से आप परीक्षा दे सकते हैं। बस इसमें आपके पास लॉग इन आईडी व पासवर्ड की जरूरत होती है, जो सामान्यतय: एडमिनस्ट्रेटर प्रदान करता है। हां तेज नेवीगेशन के लिए आपका कंप्यूटर फै्रंडेली होना जरूरी है। इसमें इतनी आसानी रहती है कि ग्रामीण पृष्ठभूमि के लोग भी इस परीक्षा को आसानी से दे सकते हैं।

कंप्यूटर पर होते हैं एग्जाम

ऑनलाइन एग्जाम के तहत स्टूडेंट्स को परीक्षा देने शहर के किसी खास सेंटर पर जाना होता है, जहां कंप्यूटर खोलने पर उसके सामने प्रश्नों का एक सेट आ जाता है। ये प्रश्न ऑब्जेक्टिव टाइप होते हैं, जिनमें चार उत्तरों में से किसी एक को चुनना होता है। कई बार प्रश्नपत्र के एक से अधिक खंड होते हैं। इनमें से आप अपनी पसंद के अनुसार खंड चुन सकते हैं। सभी प्रश्नों को हल करने के लिए निर्धारित समय-सीमा होती है। यह सीमा खत्म होते ही पेपर अपने आप क्लोज हो जाता है। ऑनलाइन एग्जाम के लिए सेंटर पर इंस्ट्रक्टर उपस्थित होते हैं, जो कोई परेशानी होने पर उसे दूर करते हैं, लेकिन इस तरह का एग्जाम देने के लिए स्टूडेंट्स यदि कंप्यूटर पर पहले से प्रैक्टिस कर लें तो बेहतर होगा।

बेहतर टेक्नोलॉजी, बेहतर रिजल्ट

परीक्षार्थियों की लगातार बढती संख्या के कारण रिटेन एग्जाम लेना कठिन होता जा रहा है। उस पर लगने वाला समय, बढते वित्तीय बोझ के कारण शिक्षा संस्थान व रिक्रू टर दोनों ही पिछले कुछ समय से नए विकल्प की तलाश कर रहे थे। ऑनलाइन एग्जाम इस मामले में उन्हें सटीक ऑप्शन देता है, जहां आप इंटरनेट पर देश-दुनिया के किसी भी संस्थान के लिए इंट्रेस एग्जाम दे सकते हैं, नौकरी के लिए इंटरव्यू दे सकते हैं, सेमेस्टर एग्जाम दे सकते हैं आदि। दूसरी ओर इसका फायदा उन संस्थानों को भी मिल रहा है, जो कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे हैं। इसके अलावा समय की बचत, किफायती व सुविधाजनक होने के नाते इन दिनों इसकी लोकप्रियता काफी बढ चुकी है।

जरूरत जैसी, एग्जाम वैसा

ऑनलाइन एग्जाम कई मायनों में फायदों का सबब बन रहा है। देखा जाए तो इसमें संस्थान व स्टूडेंट दोनों को ही काफी सुविधा होती है, क्योंकि इसमें न संस्थान को मुद्रित प्रश्नपत्रों, उत्तर पुस्तिकाओं व बडी संख्या में परीक्षकों की जरूरत होती है और न छात्रों को पेन, पेंसिल, स्केल जैसे संसाधनों की। समय की बचत होती है वो अलग से। इसके साथ इसमें एक अन्य फायदा शीघ्र रिजल्ट प्राप्त होना होता है, जहां पेपर देने के ठीक बाद आप अपना स्कोर जान सकते हैं। इसके अलावा लिखित परीक्षा में जहां एक ही तिथि में देश के विभिन्न केंद्रों पर स्टूडेंट्स के बैठने की व्यवस्था करनी होती है, वहीं ऑनलाइन टेस्ट में प्राय: स्टूडेंट्स के लिए एक ही दिन परीक्षा देने की बाध्यता नहीं होती, क्योंकि प्रश्नपत्रों के बहुत सारे सेट होने के कारण सभी स्टूडेंट्स को एक ही दिन ऑनलाइन टेस्ट नहीं देना होता। इस तरह एक ही तिथि में परीक्षा होने के कारण बडी संख्या में स्टूडेंट्स के लिए सीटिंग अरेंजमेंट की व्यवस्था भी नहीं करनी पडती है। यही कारण है कि प्राय: सभी परीक्षाएं ऑनलाइन हो रही है।

आईटी सेक्टर ने बढाई रौनक

भारत कल तक इस क्षेत्र में दोयम दर्जे की हैसियत रखता था, इस समय हर बीतते साल के साथ वह इस सेक्टर का मंझा हुआ खिलाडी बन चुका है। आज हालात यह हैं कि दुनिया के करीब एक चौथाई कंप्यूटर सॉफ्टवेयर व बीपीओ सेवाएं भारत से ही संचालित हो रही हैं। रोजगार देने में भी पिछले कई सालों से यह सेक्टर अव्वल है। ऑनलाइन जैसी तकनीकी सेवाएं इसी आईटी की बदौलत संभव हुई हैं। आज ऑनलाइन एग्जाम से लेकर बाकी ऑनलाइन सेवाओं में हम तेजी से आगे बढ रहे हैं, उसके पीछे आईटी सेक्टर में हमारी तेज ग्रोथ ही जिम्मेदार है। ऑनलाइन एग्जाम की जिम्मेदारी प्राय: कॉम्प्रिहेंसिव टेस्टिंग ऐंड एसेसमेंट सेवा देने वाली कंपनियों को दी जाती है, जिसमें ईटीएस प्रोमैट्रिक,माइक्रोसॉफ्ट इंडिया, एनआइआइटी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

प्रमुख एग्जाम हुए ऑनलाइन

देश में आज ऑनलाइन एग्जाम की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राष्ट्रीय व राज्य स्तर पर आयोजित होने वाले कई एग्जाम मसलन, इंजीनिय¨रग, प्रबंधन, बी-एड, लॉ आदि तेजी से ऑनलाइन किए जा रहे हैं। यहां कुछ ऐसीे ही एग्जाम व संस्थान दिए जा रहे हैं, जो ऑनलाइन हो चुके हैं-

अब सीटीईटी भी ऑनलाइन

तकनीक के प्रति युवाओं के बढते रूझान को देखते हुए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड सीबीएसई ने इंजीनियरिंग में दाखिले के लिए होने वाले ऑल इंडिया इंजीनियरिंग इंट्रेंस एग्जाम एआईईईई के बाद अब सेंट्रल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट सीटीईटी को भी ऑनलाइन करने की तैयारी कर ली है। बोर्ड ने दोनों ही परीक्षाओं को प्रोफेशनल मानते हुए इन्हें कम्प्यूटर बेस्ड टेस्ट फॉर प्रोफेशनल एंट्रेस एग्जाम पीईई 2012 की श्रेणी में रखा है। पीईई के आयोजन के लिए बोर्ड ने विभिन्न एजेंसियों से आवदेन मांगे हैं, जो इनका सफल संचालन करने में सक्षम हों। गौरतलब है कि सीबीएसई ने वर्ष 2011 में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर एआईईईई को पेपर टेस्ट के साथ-साथ ऑनलाइन भी आयोजित किया था। अब न सिर्फ इसे विस्तार देने की तैयारी की जा रही है, बल्कि 26 जून को पहली बार आयोजित हुए सीटीईटी को भी बोर्ड ऑनलाइन करने की कोशिश में है। कैट के लिए आवेदन करने वाले छात्रों की संख्या में हर साल करीब 40 हजार की बढोत्तरी हो रही है। ऑनलाइन व्यवस्था शुरू होने से इस परीक्षा में शामिल होने वाले आवेदकों को खासी सुविधा हो गई है। कैट के लिए जीआरई पैटर्न अपनाया गया है। सभी प्रोफेशनल परीक्षा भी ऑनलाइन हो रही है।

टीचर्स के लिए ई-टीचिंग ट्रेनिंग

आईटी क्षेत्र में हुए हालिया बदलावों को देखते हुए कई बडे संस्थान अध्यापकों की ऑनलाइन टीचिंग की व्यवस्था करा रहे हैं। माना यह जा रहा है इससे अध्यापन कार्य बहुआयामी हो सकेगा, जिसका सर्वाधिक लाभ स्टूडेंट्स को मिलेगा। इस कार्य के लिए उन्होंने कई कंपनियों से हाथ मिलाया है। बकौल यूनिवर्सिटी प्राय: सभी टीचर्स को कम्प्यूटर की बेसिक जानकारी तो है, लेकिन ई-टीचिंग की कामयाबी के लिए उन्हें बाकायदा प्रशिक्षण देना भी जरूरी है। ट्रेनिंग के दौरान उन्हें खास तौर पर यह बताया जाता है कि कैसे इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर स्टूडेंट्स को ज्यादा से ज्यादा फोकस करने में मदद करें। इसके कई फायदे भी नजर आ रहे हैं। इसका सबसे ज्यादा फायदा यह हो रहा है कि अब स्टूडेंट्स के साथ टीचर भी टेक्नोसेवी हो गए हैं, जिससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में बढोत्तरी हो रही है।

आसान है परीक्षा

यह ठीक है कि देश के कई संस्थान अब ऑन लाइन प्रवेश परीक्षा ले रहे हैं तो कई इम्प्लॉयर भी अपने कर्मचारियों के चयन में ऑनलाइन एग्जाम का सहारा ले रहे हैं, लेकिन इससे डरने की जरूरत नहीं है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अब तो देश की कई महत्वपूर्ण परीक्षाएं ऑनलाइन हो गई हैं और निकट भविष्य में अन्य परीक्षाएं भी इसी पैटर्न पर आधारित होंगी। इसलिए आवश्यक है कि हर स्टूडेंट ऑनलाइन प्रणाली को अच्छी तरह समझ ले। जो स्टूडेंट्स यह समझते हैं कि उन्हें फिलहाल ऐसी कोई परीक्षा नहीं देनी है, उन्हें भी पहले से इस बारे में सचेत हो जाना चाहिए। वैसे यह परीक्षा बहुत आसान है। अगर आपने कभी कंप्यूटर इस्तेमाल नहीं किया है, तो भी आप इससे एक-दो घंटे में आसानी से परिचित हो सकते हैं। बेहतर होगा कि आप इंटरनेट से प्रैक्टिस सेट लोड कर उसका अधिक से अधिक अभ्यास करें।

करें ऑनलाइन प्रैक्टिस

इन दिनों ऑनलाइन परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन के लिए मॉडल टेस्ट पेपर उपलब्ध हैं, जहां आप एकदम ऑनलाइन एग्जाम जैसी कंडीशन्स में मॉक टेस्ट दे सकते हैं। वे लोग जो ज्यादा कंप्यूटर सेवी नहीं है, उनके लिए ये टेस्ट और भी कारगर हैं। ऐसी कई वेबसाइट्स हैं जहां आपको विभिन्न कंपटिटिव एग्जाम के साथ सीबीएसई (पीसीएम, एसएसटी), जेएनयू, डीयू इंट्रेस के कई मॉडल टेस्ट पेपर हल करने को मिलते हैं। इन साइट्स में

www.wiziq.com

www.tcyonline.com

www.jumbotests.com

आदि प्रमुख हैं।

भाषा सिखाने वाली प्रमुख ऑनलाइन वेबसाइट्स

ऑनलाइन स्पेनिश के लिए वेबसाइट

21 देशों की ऑफिशियल भाषा स्पेनिश का काफी क्रेज है। यह यूरोपीय यूनियन की ऑफिशियल भाषा होने के अलावा संयुक्त राष्ट्रसंघ की आधिकारिक भाषाओं में शामिल है। अगर आप भी इस भाषा को सीखना चाहते हैं, तो भारत में इससे संबंधित कई तरह के कोर्स उपलब्ध हैं। अगर आप किसी कारणवश कॉलेज नहीं जा सकते हैं, लेकिन घर बैठे ही स्पेनिश भाषा बोलना और लिखना सीखना चाहते हैं, तो आप इंटरनेट के माध्यम से इस भाषा को आसानी से सीख सकते हैं। इस भाषा को सिखाने के लिए कई वेबसाइट्स उपलब्ध हैं। इनमें से कुछ पैसे लेकर सिखाती हैं, तो कुछ पर बिना पैसे के आप सीख सकते हैं।

www.studyspanish.com

www.studyspanishonline.org

ऐसी साइट्स हैं, जो आपको ऑनलाइन स्पेनिश सीखने में मदद करती हैं।

अगर सीखनी हो ऑनलाइन अंग्रेजी

अंग्रेजी विश्व की प्राय: सभी देशों में बोली और समझी जाने वाली महत्वपूर्ण भाषा है। अगर अंग्रेजी की बेहतर समझ है, तो आप विश्व के किसी भी कोने में रह सकते हैं और लोगों को अपनी बात बता सकते हैं। भारत में अंग्रेजी का क्रेज सिर चढकर बोल रहा है। कंप्यूटर की अच्छी समझ और बेहतर अंग्रेजी के ज्ञान की बदौलत भारतीय आईटी इंजीनियर प्रमुख कंपनियों की पहली पसंद हैं। यदि आप भी ऑॅनलाइन के माध्यम से अंग्रेजी लिखना और बोलना चाहते हैं, तो आप घर बैठे वेबसाइट के माध्यम से इसका लाभ उठा सकते हैं। वैसे तो अंग्रेजी भाषा सिखाने के लिए कई ऑनलाइन वेबसाइट्स हैं, लेकिन http://learnenglish.britishcouncil.org/en/

www.englishlink.com

वेबसाइट्स के माध्यम से आप अंग्रेजी आसानी से बोलने के साथ लिखना भी सीख सकते हैं।

सीखें फ्रैंच ऑनलाइन

विदेश में ऑनलाइन का प्रचलन काफी वर्षो से है। वहां की प्राय: सभी परीक्षाएं ऑनलाइन होती हैं। ऑनलाइन एग्जाम के जरिए आप प्रोफेशनल कोर्सेज व संस्थानों में तो इंट्री ले ही सकते हैं, साथ ही घर बैठे तरह-तरह की विदेशी भाषाएं भी सीख सकते हैं। यदि आप फॉरेन लैंग्वेज सीखने के इच्छुक हैं तो भी ऑनलाइन लर्रि्नग आपको कई विकल्प सुझाती है।

www.clickonfrench.com

एक ऐसी साइट है, जो आपको ऑनलाइन फ्रैंच सीखने में मदद करती है। गौरतलब है कि आज फ्रैंच दुनिया की दूसरी सबसे ज्यादा पढी व समझी जाने वाली भाषा है। खुद भारत में 3000 से ज्यादा फ्रै च कंपनियां काम कर रही हैं। ऐसे में ऑनलाइन फ्रैंच भाषा सीख कर आप खुद के लिए इस दिशा में एक कॅरियर विकल्प जरूर बना सकते हैं। इसके अलावा आप ऑनलाइन के माध्यम से अंग्रेजी भी सीख सकते हैं। इस प्रकार आप घर बैठे ही फ्रैंच सीख सकते हैं।

ध्यान रखने वाली बातें

अगर अपना कंप्यूटर व इंटरनेट कनेक्शन है, तो उस पर संबंधित विषयों के प्रैक्टिस सेट डाउनलोड करके उन्हें हल करने का बार-बार अभ्यास करें। ऐसे कई सेट विभिन्न साइटों से मुफ्त मिल सकते हैं। ल्ल अगर आपके पास अपना कम्प्यूटर व नेट कनेक्शन नहीं है, तो आप नजदीक के किसी साइबर कैफे में जाकर वहां इंटरनेट का इस्तेमाल कर सकते हैं।

वे लोग जो पहली बार ऑनलाइन पेपर दे रहे हैं, हो सकता है कि उनको यह टेस्ट देने में कठिनाई हो। ऐसे में इससे परिचित होने के लिए कंप्यूटर पर प्रैक्टिस जरूर करनी चाहिए, अन्यथा स्टूडेंट्स का प्रदर्शन 20 से 25 फीसदी तक प्रभावित हो सकता है।

पहले अपने विषयों को कंपलीट करें और उसके बाद कंप्यूटर पर अभ्यास करें, क्योंकि ऑनलाइन टेस्ट में पूछे जाने वाले प्रश्न पहले की तरह आपके कोर्स पर ही आधारित होंगे।

15/11/2014

कॅरियर में दम रंगों के संग

ऑयल एंड पेंट टेक्नोलॉजी

बहुराष्ट्रीय कम्पनियों, मॉल्स, आटोमोबाइल कम्पनियों और रियल इस्टेट के माहौल ने लोगों की पसंद नापसंद की सोच को बदल दिया है। लोग रंगों और उनके प्रयोगों के प्रति जागरूक हुए हैं। इसी सजगता ने ऑयल एंड पेंट टेक्नोलॉजी के उद्योगों की चमक बढायी है। पेंट वस्तु की सुरक्षा, मजबूती और प्रतिरोधक क्षमता को बढाता है। अब पेंट का प्रयोग धातुओं व दीवारों से ऊपर उठकर सीरेमिक्स, सीसे, प्लॉस्टिक कागज, कपडे आदि पर होने से इस फील्ड में कॅरियर की संभावनाओं के ग्राफ में वृद्धि हुई है जिससे इसका क्रेज बढा है।

एजुकेशनल क्वालिफिकेशन

10वीं उत्तीर्ण होने के बाद डिप्लोमा या फिजिक्स केमिस्ट्री और मैथ के साथ बाहरवीं करने के बाद स्नातक (बीटेक-ऑयल एंड पेंट टेक्नोलॉजी) में प्रवेश लिया जा सकता है। इसमें प्रवेश के लिए हर संस्थान का मानक अलग है।

कौन से हैं कोर्स

- B. Tech Program in Paints Technology

- B. Tech. Degree in Surface Coating Technology

-B.E Program in Paint/Oil

- M. Tech in Paint Technology.

- Doctoral Programs in Paint Technology.

- DIPLOMA IN PAINT APPLICATION TECHNOLOGY

कॅ रियर की संभावनाएं

भारत में पेंट के करीब 50 बडे उद्योग व दो हजार लघु इकाइयां हैं, जो करीब आठ लाख टन पेंट का उत्पादन करती हैं। पेंट उद्योग में शोध और प्रोडक्शन में पेंट इंजीनियरों की डिमांड हर समय रहती है। पेंट टेक्नोलॉजी में प्रशिक्षण के उपरान्त आप मैन्युफैक्चरिंग, प्रोडक्शन, मार्केटिंग, डिस्ट्रीब्यूशन, टेक्निकल सेल्स एंड एप्लीकेशन से लेकर रिसर्च के क्षेत्र में बेशुमार संभावनाएं हैं। आप शिक्षण,ऑटोमोबाइल उद्योग, घरेलू उपकरण उत्पादक उद्योग तथा उपभोक्ता डीलिंग में कॅरियर की तलाश कर सकते हैं।

प्रमुख संस्थान

- एचबीटीआई, कानपुर

- यूआईसीटी, मुम्बई

- एलआईटी, नागपुर

- यूडीसीटी, जलगांव

- गवर्नमेंट पॉलीटेक्निक, कानपुर

- आईआईसीटी, हैदराबाद

- जादवपुर विश्वविद्यालय, कोलकाता

- इंडस्ट्रियल रिसर्च लेबोरेटरी, कोलकाता

- वीपीआरपीटीपी साइंस कॉलेज वल्लभ नगर, गुजरात

15/11/2014

डीएसई में कॅरियर

आप भी यदि एलआईसी से जुडना चाहते हैं, तो इसमें एंट्री के कई तरह के रास्ते हैं। हाल ही में एलआईसी ने डायरेक्ट सेल्स एग्जीक्यूटिव पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं।

योग्यता व सेलेक्शन

डायरेक्ट सेल्स एग्जीक्यूटिव के लिए किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से स्नातक की डिग्री अनिवार्य है। इसके साथ अंगे्रजी की जानकारी अपेक्षित है। डीएसई पदों के लिए न्यूनतम उम्र 21 वर्ष और अधिकतम 35 वर्ष निर्धारित है। डीएसई पदों के लिए भी एलआईसी परीक्षा लेती है। पहले लिखित परीक्षा होगी और इसमें उत्तीर्ण स्टूडेंट्स का इंटरव्यू होगा। लिखित परीक्षा के अंतर्गत एक ऑब्जेक्टिव टाइप का पेपर होगा। ऑब्जेक्टिव टाइप के अंतर्गत रीजनिंग एबिलिटी, न्यूमेरिकल एबिलिटी, जनरल नॉलेज से संबंधित प्रश्न पूछे जाएंगे।

बेहतर तैयारी से बनेगी बात

बाजार में ऐसी किताबें और गाइड्स मौजूद हैं जिनमें पिछले वर्षों के प्रश्न व उत्तर दिए होते हैं। ऐसी गाइड से अपनी मुकम्मल तैयारी कर सकते हैं। न्यूमेरिकल और रीजनिंग के लिए अधिक से अधिक अभ्यास से ही सफलता मिल सकती है। इसलिए इन दोनों विषयों का खूब अभ्यास करें। स्वयं की तैयारी परखने के लिए आप घर में ही निर्धारित समय-सीमा के अंदर सभी प्रश्नों को हल करने की कोशिश करें।

इससे समय रहते आपको अपनी कमजोरी का अहसास हो जाएगा और आप अपनी कमजोरी को दुरुस्त करते हुए एग्जामिनेशन में बैठ सकेंगे। यदि आप लिखित परीक्षा में सफल होते हैं,तो आपको इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। साक्षात्कार में सफल होने के लिए तैयारी बेहद जरूरी है, क्योंकि ऐसा करने से जॉब मिलने की संभावना बढ जाती है। यदि आप साक्षात्कार के लिए जा रहे हैं, तो मानसिक रूप से तैयार होने के साथ-साथ आवश्यक जानकारी भी जरूर हासिल कर लें। दरअसल, कई बार इस तरह की बातें भी सामने आई हैं कि कुछ लोग नई नौकरी हासिल करने से पहले ही उसे खो देते हैं, क्योंकि वे साक्षात्कार के लिए समुचित तैयारी नहीं करते हैं। यह सच है कि यदि आप थोडी-सी जानकारी और समझदारी से काम लें, तो आपके लिए साक्षात्कार को फेस करना ज्यादा मुश्किल नहीं होगा। इसके लिए बेहद जरूरी है कि आप सकारात्मक भाषा का प्रयोग करें। हां, इस दौरान किसी प्रकार की शेखी बिल्कुल न बघारें और न ही अपनी उपलब्धियों पर गर्व करें। सीधे और साधारण शब्दों में ही अपनी बातों को साक्षात्कारकत्र्ता के सामने रखें। अपनी कमजोरियों और त्रुटियों के बारे में अपने आप कोई जानकारी न दें। हां, यदि आपसे इनके बारे में पूछा जाए, तो ईमानदारी से जवाब दें।

टाइम मैनेजमेंट है अहम

परीक्षा की तैयारी में सफलता तभी मिलती है, जब टाइम मैनेजमेंट को ध्यान में रखते हैं। टाइम मैनेजमेंट का मतलब है स्पष्ट तौर पर तय किए गए लक्ष्यों को एक निश्चित समय में सफलतापूर्वक हासिल करना।

अगर लक्ष्य नहीं होगा तो टाइम मैनेजमेंट की जरूरत ही नहीं होगी। टाइम को ठीक से मैनेज नहीं करेंगे तो लक्ष्य पाना मुश्किल हो जाएगा। लक्ष्य या फिर प्राथमिकताएं तय करना टाइम मैनेजमेंट की पहली सीढी है। लक्ष्य तय हो तो उसे पाने का रास्ता आप आसानी से तैयार कर सकते हैं। इसके बाद आप अपने लिए एक रूटीन तैयार कर लें। अपने रूटीन पर बिल्कुल फोकस रह कर अमल कीजिए। यही टाइम मैनेजमेंट का की-फैक्टर है। आप देखें कि पिछले हफ्ते में अगर आप अपने रूटीन पर पूरी तरह अमल नहीं कर पाए हैं तो उस रही सही कसर को आने वाले हफ्ते में पूरा करने की कोशिश करें। इस तरह की रणनीति से आप किसी भी परीक्षा में सफल हो सकते हैं।

15/11/2014

मर्चेन्ट नेवी में सदाबहार कॅरियर

मर्चेन्ट नेवी में जहाजों के जरिये एक ही देश में या विभिन्न देशों में एक बंदरगाह से दूसरे बंदरगाह तक कार्गो या गुड्स ट्रांसपोर्ट किये जाते हैं। इनमें प्रयुक्त जहाजों का प्रयोग आयात एवं निर्यात में व्यापक रूप से होता है जिसमें सुई से लेकर हवाई जहाज तक शामिल हैं। स्टूडेंट्स इसमें अपनी रुचि और योग्यता के अनुरूप विभिन्न क्षेत्रों में कॅरियर बना सकते हैं, क्योंकि मर्चेन्ट नेवी में कई विभाग होते हैं, लेकिन मुख्यतया तीन विभाग प्रमुख होते हैं- डेक डिपार्टमेंट, इंजन डिपार्टमेंट एवं हाउसकीपिंग (स्टुवर्ड) डिपार्टमेंट।

डेक डिपार्टमेंट- इस विभाग के अंतर्गत् डेक आफिसर्स आते हैं जिन्हें नेवीगेशन आफिसर्स भी कहते हैं। डेक आफिसर्स शिप के लिये जिम्मेदार होते हैं। शिप्स पर अनुशासन, वेसेल के सुरक्षित चालन, पैसेन्जर्स की सुरक्षा, आंशिक रूप से कार्गो आपरेशंस और क्रू के प्रति उत्तरदायित्व इनका प्रमुख कार्य होता है। इसके अतिरिक्त भी और भी कार्य करने होते हैं। इस विभाग में डेक कैडेट से लेकर कैप्टन तक की रैंक होती है। शिप का कैप्टन जिसे मास्टर ऑफ द शिप भी कहते हैं, शिप का इंचार्ज होता है।

इंजन डिपार्टमेंट- इस विभाग की प्रमुख तौर पर जिम्मेदारी मरीन इंजीनियर्स पर होती है। इंजीनियरिंग ऑफिसर्स पर शिप्स की हर तरह की मशीनरीज(इंजन, ब्वॉयलर, इलेक्ट्रिकल, रेफ्रिजिरेटिंग, सेनिटरी इक्विपमेंट, डेक मशीनरी और स्टीम कनेक्शन वगैरह) को मेंटेन करने से लेकर इसे संचालित करने तथा नियंत्रित करने का कार्य होता है। इस विभाग में जूनियर इंजीनियर से लेकर चीफ इंजीनियर तक की रैंक होती है। चीफ इंजीनियर इस विभाग का प्रमुख होता है।

हाउसकीपिंग डिपार्टमेंट- हाउसकीपिंग विभाग लिविंग एवं कैटरिंग सेवायें देता है। फूड एवं बेवरेज की देखरेख एवं उपलब्धता से लेकर शिप की हाउसकीपिंग तक का पूरा काम इस विभाग के अंतर्गत् होता है। इस विभाग में चीफ कुक से लेकर चीफ स्टुअर्ड तक रैंक होती है।

शैक्षिक योग्यता

इस कोर्स के लिये टेन प्लस टू या इसके समकक्ष परीक्षा भौतिकी, रसायन शास्त्र एवं गणित के साथ 55 प्रतिशत अंकों के साथ पास होना जरूरी है। साथ ही अंग्रेजी विषय में भी पास होना जरूरी है। वैसे किसी भी स्ट्रीम से बैचलर डिग्री लेने के बाद मरीन इंजीनियरिंग या नॉटिकल साइंस में डिप्लोमा करके भी इस क्षेत्र में जाया जा सकता है।

इंटरमीडिएट भौतिकी, गणित, रसायन शास्त्र से उत्तीर्ण छात्र डायरेक्ट डेक कैडेट के तौर पर भी ज्वाइन कर सकता है। साथ ही जिनके पास मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, टेक्नोलॉजी इंजीनियरिंग की डिग्री है वो भी मर्चेन्ट नेवी में प्री-सी ट्रेनिंग द्वारा डायरेक्ट डेक कैडेट्स के लिये ज्वाइन कर सकते हैं जो कि रिक्रूटिंग कम्पनीज स्वयं कंडक्ट करवाती हैं। प्री-सी कोर्स 9 माह का होता है जिसे एम ई आर ई कंडक्ट कराता है। सभी कोर्सेस हेतु मेडिकल फिटनेस, नेत्र क्षमता 6 बाय 6 और कलर ब्लाइंडनेस नहीं होना चाहिये।

कोर्स में प्रवेश

वर्ष में एक बार आइआइटी. और इंडियन मरीन इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट के जरिये मरीन इंजीनियरिंग या नॉटिकल साइंस के कोर्सेज में प्रवेश लिया जा सकता है। इन राजकीय संस्थानों में प्रवेश परीक्षा, जीडी एवं इंटरव्यू के माध्यम से प्रवेश लिया जा सकता है। मर्चेन्ट नेवी में एंट्री के लिये आई एम यू भी प्रवेश परीक्षा आयोजित कराता है। यह गवर्नमेंट बॉडी है जिसके अंतर्गत् सात कालेज आते हैं। इसके अलावा और बहुत सारे प्राइवेट कालेज हैं जहां डिप्लोमा कोर्स किये जा सकते हैं।

यू. के. एवं आस्ट्रेलियन प्रक्रिया

कैपेला मैरीटाइम कॅरियर इंस्टीट्यूट(सी. एम. सी. आई.) द्वारा चलायी जा रही यह प्रक्रिया भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्य है। यह उन छात्रों के लिये अति उपयोगी है जो मेधावी होते हुये किसी कारण परीक्षा में नंबर प्राप्त नहीं कर सके। इसमें न्यूनतम योग्यता टेन प्लस टू पी. सी. एम., पी. सी. बी. 50 प्रतिशत अंकों के साथ एवं कामर्स के छात्र जिन्होंने टेन प्लस टू में गणित विषय लिया हो वो भी न्यूनतम 50 प्रतिशत अंकों के साथ मर्चेन्ट नेवी के लिये अप्लाई कर सकते हैं। मेडिकल फिटनेस, नेत्र क्षमता 6 बाय 6 और कलर ब्लाइंडनेस नहीं होना चाहिये।

बेहतर कॅरियर का विकल्प

मर्चेन्ट नेवी के तीनों ही विभागों में जाब्स के ढेरों अवसर हैं जिसमें 15 से 2 लाख रुपए प्रतिमाह तक वेतन मिलता है। विदेशी शिपिंग कंपनीज भी अच्छे जॉब्स आफर करती हैं। विश्व की सबसे बडी शिपिंग संस्था बिम्को और इंडियन सीफरेर फेदेद्रतिओं के सर्वे के अनुसार इस क्षेत्र में सन् 2015 तक लगभग 30 हजार क्वालिटी ऑफिसर्स की कमी होने वाली है।

जॉब्स ऑनशिप

- डेक साइड जॉब- डेक कैडेट, थर्ड आफिसर, सेकेंड ऑफिसर, चीफ आफिसर, कैप्टेन।

- इंजन साइड जॉब- इंजन कैडेट, फोर्थ इंजीनियर, थर्ड इंजीनियर, सेकेंड इंजीनियर, चीफ इंजीनियर।

- जी पी रेटिंग- क्रू मेंबर।

- ऑफ शोर जाब्स: पेट्रोलियम इंजीनियरिंग या नेवेल आर्किटेक्चर, एम बी ए इन पोर्ट मैनेजमेंट या हार्बर इंजीनियरिंग इत्यादि। सी. एम. सी. आई. के द्वारा आफसोर जाब्स के लिये भी तैयारी करायी जाती है। यह उन छात्रों के लिये है जिन्हें रोमांच एवं घूमना ज्यादा पसंद नहीं है। इसमें सन् 2015 तक 27 हजार जाब्स होंगे।

15/11/2014

कॅरियर का ऑफ बीट पाथ

परीक्षा खत्म होने के बाद स्टूडेंट्स के सामने किसी बढिया कोर्स में प्रवेश की चुनौती होती है। बहुत से छात्र इस चुनौती को सफलतापूर्वक पार कर लेते हैं तो बडी संख्या में छात्रों को निराशा हाथ लगती है। लेकिन अब इन स्टूडेंट्स को निराश होने की जरूरत नहीं है। आज कॅरियर के फैलते दायरे में मेडिकल, इंजीनियरिंग जैसे मेन स्ट्रीम कॅरियर के अलावा भी ऐसे कई ऑफ बीट कोर्स लोकप्रिय हो रहे हैं जिन्हें चुनकर आप अपना कॅरियर बुलंद कर सकते हैं। खास बात यह है कि इन कोर्सो के जरिए आप बचपन के किसी स्किल्स/पैशन/शौक को भी परवान चढा सकते हैं।

कोरियोग्राफर

कोरियोग्राफी यानि डांसिंग एक कॅरियर के तौर पर अपनी पुख्ता जगह बना रही है। इस क्षेत्र में इंट्री लेने से पहले आपको तरह-तरह के डांस कंपोजीशन, गजब की कल्पनाशक्ति के साथ संगीत की धुनों में भी माहिर होना पडेगा। कोरियाग्राफर के लिए फिल्म, म्यूजिक, टेलीविजन, डांस इंस्टीट्यूट्स में बढिया मौके होते हैं।

जेमोलॉजी

कहते हैं हीरे की परख केवल जौहरी को ही होती है, लेकिन आज इस क्षेत्र में बढती टेक्नोलॉजी की भूमिका के चलते जेमोलॉजी में अवसरों का दायरा परंपरागत सुनार की दुकानों से आगे बढ चुका है। यहां इंट्री लेने वाले युवाओं को रत्न, धातुओं की गहरी जानकारी के साथ उनके डिजाइन, मार्केटिंग के काम में भी निपुण होना पडता है। कई यूनिवर्सिटी व संस्थान जेमोलॉजी में डिप्लोमा लेवल कोर्स ऑफर करते हैं।

टी टेस्टर

यदि आप चाय के दीवाने हैं और उसकी अलग-अलग किस्मों, तासीरों की भी अच्छी जानकारी रखते हैं तो अपने इस हुनर को कॅरियर बना सकते हैं। आज देश में?बडे-बडे टी/कॉफी शॉप्स से लेकर टी बोर्ड ऑफ इंडिया में टी टेस्टर्स को हाथों-हाथ लिया जाता है। यहां फूड साइंस में ली गई डिग्री या संबंधित क्षेत्रों में कार्य अनुभव बहुत काम आता है।

अंडरवाटर डाइ¨वग

आज उन युवाओं की बिल्कुल कमी नही है, जिन्हें जोखिम भरे कामों में लुत्फ आता है। ऐसे युवाओं के लिए स्कूबा डाइविंग बेहतर विकल्प है। स्कूबा डाइवर्स/अंडरवॉटर डाइवर्स समुद्र में गोता लगा ओसिनोग्राफिंग, शोध या फिर रेस्क्यू ऑपरेशन्स को अंजाम देते हैं। आज इस क्षेत्र में प्रशिक्षण देने वाले संस्थानों की कमी नहीं है।

फिटनेस ट्रेनर

आज के बिजी शिड्यूल में फिटनेस बरकरार रखने के लिए लोग बडी संख्या में ट्रेनर का सहारा ले रहे हैं। आंकडे बताते हैं कि फिटनेस के प्रति बढे रुझान के चलते आने वाले पांच सालों में पांच लाख से ज्यादा ट्रेंड फिटनेस प्रोफेशनल्स की जरूरत पडने वाली है। ऐसे में माना जा सकता है कि फिटनेस में रुचि रख रहे युवाओं के लिए यहां दमदार मौके हैं।

प्रोफेशनल ब्लॉगर

आज के आईटी क्रांति के युग में हर कोई ज्यादा से ज्यादा लोगों से जुडना चाहता है, जिसमें ब्लॉग राइटिंग संवाद कायम करने का एक महत्वपूर्ण जरिया बन उभरा है। ऐसे में यह फील्ड उन युवाओं के लिए भी अहम है, जिन्हें लिखना पसंद है। ऐसे लोग किसी फर्म, कॉरपोरेट सेक्टर से जुडकर या किसी व्यक्ति के लिये पर्सनल ब्लागिंग कर कॅरियर चमका सकते हैं।

गिफ्ट रैपर

तेजी से बदली अर्थव्यवस्था ने कुछ सामान्य चलनों में फर्क ला दिया है। गिफ्ट देना ऐसा ही चलन है। आज यह फील्ड प्रोफेशनल हो चुकी है, जहां बडी तादाद में उन लोगों की जरूरत है जो आकर्षक ढंग से गिफ्ट पैक कर सकते हों। बडे-बडे आफिसों, क ॉरपोरेट घरानों में ऐसे लोगों के लिए इन दिनों काम की गुंजाइशें हैं।

15/11/2014

फोटोग्राफी: हाई रेजोल्यूशन कॅरियर

फोटोग्राफी महज एक पेशा भर नहीं है बल्कि यह तो हर नए दिन को खुद को नए सिरे से साबित करने की चुनौती है। इसमें मुश्किलें हैं, संघर्ष है तो बेरौनक चीजों को एक हल्के से क्लिक से अमर बना देने का अवसर भी है। आज फोटोग्राफर्स हमारे दुनिया देखने के ढंग को बदल रहे हैं। यदि आप भी अपनी नजर से लोगों का नजरिया बदलना चाहते हैं तो फोटोग्राफी सही विकल्प है। इस क्षेत्र की व्यापक होती परिधि में कॅरियर का नया?नवेला फ्रेम उभर आया है। ये आपको शोहरत, दौलत तो दिलाता ही है, इतिहास में जगह बनाने का मौका भी देता है।

विजन है कामयाबी का सबब

पेशेवर फ्रंट पर देखा जाए तो यहां कॅरियर बनाने के लिए आपको डिग्री व डिप्लेामा कोर्स की दरकार होगी। फोटोग्राफी में स्नातक कोर्स के लिए न्यूनतम योग्यता 10+2, वहीं पीजी, पीजीडीएम कोर्स के लिए आपको किसी भी स्ट्रीम में ग्रेजुएट होना जरूरी होगा। देश के कई संस्थान फोटोग्राफी में डिप्लोमा, पीजीडीएमबीएफए से लेकर एमए इन फोटोग्राफी, एमएफए इन फोटाग्राफी जैसे कोर्स संचालित करते हैं। फोटोग्राफी में धर्य आपकी कामयाबी का बडा मापदंड होता है। इस क्षेत्र में अच्छे कॉन्टेक्ट भी खासे लाभदायक होते हैं। फैशन, मीडिया, इंडस्ट्री में व्यक्तिगत संबंधों के बल पर बेहतरीन फुटेज हासिल किए जा सकते हैं। आप अपनी रुचि के अनुरूप फोटोग्राफी के किसी भी क्षेत्र में कॅरियर बना सकते हैं। इस क्षेत्र की यही खासियत इसे अन्य प्रोफेशन से अलग और बेहतर बनाती है।

फोटोग्राफी पत्रकारिता

तस्वीरों से बनेगी खबर

घटनाओं, खबरों, कहानियों एवं कविताएं आदि समझने के लिए प्रिंट मीडिया में फोटोग्राफ्स की अहमियत छिपी नहीं है। फोटो पत्रकारिता इसी विधा का नाम है। यहां वर्क एथिक्स, डेडलाइन, विजन जैसी चीजें आवश्यक हैं। एडिटोरियल फोटोग्राफी, स्पोर्ट्स फोटोग्राफी भी इसी के अंतर्गत आती हैं। यहां आपको दृश्य और खास मोमेंट पर एकाग्र होने की जरूरत होती है। अगर आपकी रुचि पत्रकारिता में है तो बतौर फोटो पत्रकार यहां काम की कमी नहीं है।

फैशन फोटोग्राफी

फोटो से झांकता जलवा

फैशन फोटोग्राफी आर्टिस्टिक फोटोग्राफी के अंर्तगत आती है। क्रिएटिविटी एवं आय दोनों ही रूपों में यह एक भरोसेमंद क्षेत्र है। देश में फैशन इंडस्ट्री के बढते आकार के बीच यहां अच्छे फोटोग्राफर्स की मांग बढी है।

विज्ञापन फोटोग्राफी

बिजनेस को देगा रौनक

आर्टिस्टिक फोटोग्राफी के अंतर्गत आने वाली, विज्ञापन फोटोग्राफी एक उभरता हुआ क्षेत्र है। यहां विज्ञापन एजेंसियों के कैटलॉग बनाने, स्टूडियो, फ्रीलांसिंग जैसे बहुत सी चीजें आती हैं। फाइन आर्ट्स फोटोग्राफी:

कला की सही परख

प्राकृतिक दृश्यों के फोटो, प्रसिद्ध चित्रों, पेंटिग्स के फोटोग्राफ या फिर वो सभी चीजें जो किसी न किसी रूप में फाइन आर्ट्स से संबंध रखती हों, फाइन आर्ट फोटोग्राफी में आती हैं। आज कला की ओर लोगों की बढी अभिरुचि के चलते इस क्षेत्र में नाम व दाम दोनों ही संभावनाओं में इजाफा हुआ है।

वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी

चुनौती पग-पग पर

नेचर की गहराइयों की समझ रखनेवाला व्यक्ति ही वाइल्ड फोटोग्राफी में सफल कॅरियर बना सकता है। नेचर फोटोग्राफर के समक्ष दुर्लभ जीव-जंतुओं, सूर्यास्त, झरना-झीलें, पेड-पौधे इत्यादि की आकर्षक तस्वीरें कैमरे में कैद करने की चुनौती होती है। वैसे इस फील्ड में काम करने वाले रिसर्च, कवर, कैलेंडर आदि के लिए भी काम कर सकते हैं।

पोर्टे्रट फोटोग्राफी

खूब है डिमांड

पोर्ट्रेट काविषय घरेलू कार्यक्रम, शादी, बच्चे, पालतू जानवर की तस्वीरें जैसा कुछ भी हो सकता है। इस समय पोट्र्रेट फोटोग्राफर की मार्केट में खूब डिमांड है।

फोरेंसिक फोटोग्राफी

अपराध की पूरी पडताल

फोरेंसिक फोटोग्राफी से घटना की वास्तविक स्थिति व कई परिस्थतिजन्य साक्ष्यों की पडताल की जाती है। फोरेंसिक फोटोग्राफर अन्वेषण ब्यूरो, लीगल सिस्टम, पुलिस विभाग तथा प्राइवेट डिटेक्टिव एजेंसी के लिए काम करते हैं।

इंडस्ट्रियल फोटोग्राफी

अर्थव्यवस्था ने गढे मायने आर्थिक प्रतिस्पर्धा के दौर में इंडस्ट्रियल फोटोग्राफी एक अलग शाखा के रूप में सामने आई है। इसके अंतर्गत देश की कई कंपनियां संस्थान केफोटो, काम करते हुए कर्मचारी आदि की फोटो का इस्तेमाल प्रचार प्रसार व इमेज मेकओवर में करती हैं।

फ्री लांसिंग फोटोग्राफी

फोटोग्राफी की दुनिया में यह सबसे पंसदीदा विकल्प माना जाता है। यहां न आपका कोई बॉस होता है न ही आपकी रचनात्मकता पर लगाम लगाने वाले नियम कायदे ही होते हैं। आप अपनी क्षमता का जैसा चाहें वैसा इस्तेमाल कर रचनात्मकता के शिखर को छू सकते हैं।

तस्वीरें जो बनीं गवाह

इतिहास की न जाने कितनी त्रासदियां आज भी फोटोग्राफ्स के सहारे हमारे दिलों दिमाग पर काबिज हैं। आखिर कौन भूल सकता है ग्रेट डिप्रेशन एरा की कहानी कहती फ्लोरेंस थॉमसन की खींची माइग्रेट मदर या युद्ध का ध्वंस बयां करती रॉबर्ट कॉपर की फालिंग सोल्जर। ये सब दुनियावी इतिहास के अलग-अलग हिस्सों की तस्दीक करने वाले दस्तावेज हैं। इनमें से सब अपनी अलग-अलग खासियत रखते हैं, लेकिन जो बात सभी में समान है वो ये कि तस्वीरें अपने देखने वालों पर पुरजोर असर छोडती हैं।

15/11/2014

ग्राम स्वराज सेग्राम रोजगार

विलेज इकोनॉमी को लगते पंख

विलेज इकोनॉमी के अंतर्गत ऐसे कई क्षेत्र आते हैं, जहां कोशिशें परवान चढे तो सोना बरस सकता है..

इस क्षेत्र में ऐसे क्षेत्रों को शामिल किया जाता है, जिनका संबध कृषि व संबंधित क्षेत्रों से है। आज ये चीजें पूरी तरह प्रोफेशनल हो चुकी हैं। इनमें कामयाबी के लिए जरूरी है थोडा धर्य व पूरा समर्पण। अगर आप चाहें तो आपके लिए अवसर के कई दरवाजे खुले हैं।

ग्राम स्वराज की मेरी कल्पना हैकि यहां हर व्यक्ति अपने आप में आत्मनिर्भर होगा और यह तंत्र अपनी सभी जरूरतें स्वयं पूरा कर सकेगा।

महात्मा गांधी

रूरल मैनेजमेंट से मिली है नई तस्वीर

देश की इकोनॉमी में गांवों का योगदान कोई रहस्य नहीं रह गया है। खुद भारत जैसे देश में जहां बहुसंख्य आबादी गांवों मे रहती हो, रूरल मैनेजमेट की अवधारणा और पुख्ता हो जाती है। दरअसल प्रोफशनल रूरल मैनेजर्स का काम ग्रामीणों की विकास परक गतिविधियों में सहयोग व सलाह देना होता है। इन सलाहों में फसल उत्पादन, फसलों के व्यवसायिक प्रबंधन, जल संचयन, मृदा सुधार, उद्यमशीलता जैसी चीजें होती हैं। वैसे भी विकास के चक्के को तेज करने के लिए रूरल मैनेजर्सकी भूमिका अहम मानी जा रही है। मांग और हालात को देखते हुए ज्यादातर प्रबंधन कॉलेज रूरल मैनेजमेंट को पाठ्यक्रम का हिस्सा बना रहे हैं।

माइक्रोफाइनेंस हैकारगर

बांग्लादेश ग्रामीण बैंक के पूर्व प्रमुख यूनिस खान के माइक्रोफाइनेसिंग के सफल प्रयोग के बाद पूरी दुनिया ने इसके महत्व को समझा है। दरअसल में माइक्रोफाइनेसिंग वे छोटे लोन होते हैं, जिनका इस्तेमाल दुकानदारों, फेरीवालों, डेयरी, पोल्ट्री समेत दूसरे कम पूंजी वाले व्यवसाइयोंकी वित्तीय जरूरतें पूरी करने में होता है। एक अनुमान के मुताबिक आज देश के करीब 10 करोड परिवारों को माइक्रोफाइनेंसिंग सुविधाओं की दरकार है। ऐसे में इस क्षेत्र में आज जॉब्स की जोरदार संभावनाएं हैं।

डेयरी ने सच किए सपने

डेयरी, पशु पालन हमेशा से ही कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ रहे हैं। पर पहले जहां डेयरी प्रोडेक्ट्स के उत्पादन का लक्ष्य निजी जरूरतें पूरी करना हुआ करता था, आज इसने व्यवसायिक प्रतिस्पर्धा का रूप ले लिया है। नेशनल सैंपल सर्वे के एक अध्ययन के मुताबिक यह सेक्टर देश में 9.8 मिलियन लोगों को सीधा व करीब इतने ही लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार दे रहा है। उत्पादन की दृष्टि से आज भारत, दुनिया का सबसे बडा दूध उत्पादक देश है जहां विश्व के 13 फीसदी दूध का उत्पादन होता है। माना जा रहा है कि बढती मांग के बीच भविष्य में योग्य लोगों की काफी जरूरत होगी।

रूरल मार्केट ने बदली जमीन

आज रूरल कंज्यूमर मार्केट देश के सबसे तेजी से बढते सेक्टर्स में एक है। इसकी ग्रोथ रेट का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 2004-05 की तुलना में आज इस क्षेत्र का विस्तार दोगुना हो चुका है। वहीं भारत में रूरल कंज्यूमर मार्केट का कुल बाजार 425 बिलियन डॅालर के आंकडे को छू रहा है। इसका यह विस्तार इन दिनों ग्रामीण युवाओं के सपनों को भी विस्तार दे रहा है।

सेरीकल्चर का रेशमी कॅरियर

भारत की जलवायु रेशम कीट पालन के लिए आदर्श है। देश में सिल्क की पांच तरह की किस्मों का उत्पादन होता है। रेशम उत्पादों की बढी मांग के बीच आज यहां भारी निवेश के साथ कार्यदक्ष लोगों की जरूरत है। ऐसे में वे लोग जो इस फील्ड में कार्य करना चाहते हैं, उनके लिए तरक्की के दरवाजे खुले हैं।

फिशरीज ने बढाए विकल्प

देश का विशाल समुद्र तट, नदियां, असंख्य तालाब जैसी प्राकृतिक परिस्थितियां देश में मत्स्य पालन की असीम संभावनाएं पैदा करती हैं। आज देश में 1 करोड से ज्यादा लोग प्रत्यक्ष, व अप्रत्यक्ष रूप से मत्स्य पालन से जुडे हैं, वहीं मत्स्य निर्यात के मामले में भारत की गिनती शीर्ष दस देशों में होती है।

हस्तशिल्प से मिलेगी पहचान

आज दुनिया में हस्तशिल्प का बाजार 400 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। पर अभी इसमें भारत की हिस्सेदारी मात्र 2 प्रतिशत की ही है। पर देश की विविधता,प्राचीन इतिहास को देखते हुए भारतीय हस्तशिल्प खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में विकास की ढेरों संभावनाएं मौजूद हैं। कई सरकारी, गैर सरकारी प्रयास आज इसी दिशा मे हो रहे हैं। जिसके चलते पिछले कुछ सालों में यहां 15 फीसदी की विकास दर दर्जकी गई है।

पॉल्ट्री फार्मिग

ग्रामीण क्षेत्रों में पॉल्ट्री फार्मिग यानि मुर्गीपालन भी रोजगार का एक अहम जरिया बन उभरा है। देश में पॉल्ट्री उत्पादों की बढी मांग के बीच यहां करने को बहुत कुछ है। कई सरकारी बैंकें, सहकारी संगठन इस क्षेत्र में युवाओं को प्रशिक्षण के साथ वित्तीय मदद भी मुहैया कराते हैं।

ऑर्गेनिक फार्मिग

आर्गेनिक फार्मिग तेजी से बढता सेक्टर है। खासतौर पर उन क्षेत्रों में जहां रासायनिक प्रभाव से जमीनें बंजर होती जा रही हैं, ऑर्गेनिक फार्मिग एक सही विकल्प है। शहरों में तेजी से लोकप्रिय हो रही ऑर्गेनिक सब्जियां, फ्रूट्स आउटलेट्स इसकी संभावनाओं को बढत दिला रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में ऑर्गेनिक फार्मिग के विकास के लिए नाबार्ड समेत कई सरकारी व गैर सरकारी संस्थान कार्यरत हैं।

बी कीपिंग से उपजती कॅरियर की मिठास

मधुमक्खी पालन आज ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ अर्धशहरी, कस्बों, शहरों में भी फायदे का सबब बन रहे हैं। मोम व शहद का मुख्य श्चोत मधुमक्खी पालन यद्यपि लघु उद्योगों की ही श्रेणी में आता है, लेकिन इसके फायदों को देखते हुए इसमें प्ाूजी विस्तार व रोजगार की उजली संभावनाएं हैं।

हार्टीकल्चर में हरा भरा भविष्य

बागवानी का क्षेत्र वैसे तो कृषि से जुडा हुआ है, लेकिन बागवानी उत्पादों का बढा चलन, निर्यात संभावनाएं इसे पृथक पहचान दे रही हैं। बागबानी के अंतर्गत सभी प्रकार के फल व सब्जी उत्पादन, कीटों की रोकथाम, उत्पादन बढोत्तरी जैसी चीजें आती हैं। इस क्षेत्र में आप बतौर विशेषज्ञ, सुपरवाइजर, हॉर्टीकल्चर स्पेशलिस्ट, फ्रूट वेजीटेबल इंस्पेक्टर काम कर सकते हैं।

मशरूम से उपजेगी खुशहाली

पिछले कुछ एक सालों में लोगों मेंपोषण के बारे में आई जागरूकता के चलते पूरे देश मे मशरूम की मांग में वृद्धि देखी जा सकती है। आज इसका उत्पादन बढाने के लिए सरकार, ग्राम स्तर पर मशरूम की खेती को बढावा दे रही है। इन कार्यक्रमों के तहत बीज, लोन के साथ उत्पादन जागरूक ता जैसी चीजें भी अंजाम दी जा रही हैं।

महिलाओं के लिए भी है अवसर

महिलाओं को भी कृषि से जुडा यह सेक्टर उपयोगी अवसर देता है। सहकारी उद्यम, स्वयं सहायता समूह, सस्ते ऋण, तकनीकी सहायता जैसे प्रयास इस क्षेत्र में महिलाओं को नई व आत्मनिर्भर पहचान दे रहे हैं। स्थानीय व ग्राम स्तर पर मसाला, कपास छंटाई, फूड प्रोसेसिंग, पॉल्ट्री, जूट, गन्ना, राइस मिल्स जैसे काम इन्हीं में शुमार होते हैं।

ग्राम: आत्मनिर्भरता की ओर

ग्राम स्वराज महात्मा गांधी की ग्रामीण आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करती एक ऐसी ही परिकल्पना है, जिसकी आखिरी मंजिल राम राज्य है। इसके अनुसार ग्रामों में पंचायतें ही विकास के लिए जिम्मेदारी होंगी। यहां न कोई बाहरी दखल होगा, न ही किसी प्रकार की परनिर्भरता। महात्मा गांधी के ही शब्दों में संतुलित विकास की महत्वपूर्ण शर्त गांव का विकास है और ग्रामोद्योग इस शर्त को पूरा करने का माध्यम। अब सरकारें भी यह मानने लगी हैं कि इस तरक्की का आधार गांव की घसियाली मिट्टी ही है, जिससे उपजते सोने से ही देश की तकदीर बनती बिगडती है। खुद भारत पर नजर डालें तो आज देश की करीब 70 फीसदी आबादी ग्रामीण है जो देश के जीडीपी में एक चौथाई की ताकतवर हैसियत रखती है। हमारी खाद्य आत्मनिर्भरता गांवों की ही देन है। इन्हीं सबको देखते हुए आज सरकार प्रधानमंत्री ग्राम सडक योजना, रूरल हाउसिंग स्कीम, संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना, स्वर्ण जंयती ग्राम स्वरोजगार योजना, मनरेगा, प्रधानमंत्री ग्रामोदय जैसी कई ग्रामोन्मुख योजनाएं चला रही है। इसके तहत देश के समग्र आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक विकास का व्यापक खाका खींच रही है। कई निजी प्रयास भी इस क्षेत्र को रोजगार की उर्वर जमीन में तब्दील कर कर रहे हैं।

जरूरत ने बढाया गांव का महत्व

आजादी के बाद से अब तक औद्योगिकीकरण के मायने काफी कुछ बदल गए हैं। पहले जहां औद्योगिकीकरण का महत्व अपनी खुद की जरूरतें पूरी करने से था, वहीं अब औद्योगिकीकरण, विकास दर की रफ्तार का सबब बन चुका है। इस दरम्यान देश में बाजारवादी संस्कृति बढी, नए अवसर पैदा हुए हैं, तो लोगों के पास धन की आमद में गुणात्मक वृद्धि हुई, जीवन की गुणवत्ता भी बेहतर हुई। पर ज्यादा फायदा उन शहरों को मिला, जो इस दौरान तेजी से पूंजीगत गतिविधियों के गढ बनें। विकास की यही रफ्तार गांवों से लोगों के शहरों की ओर पलायन का भी कारण बनी। एक अनुमान के मुताबिक आने वाले 10 सालों में देश में करीब 150 मिलियन लोग शहरों की ओर पलायन करेंगे। इसलिए यह आज की जरूरत है कि लोगों को उनके गांवों में ही रोजगार मुहैया करायाजाए। इन्हीं सबकेकारण आज ग्राम आत्मनिर्भरता एक महत्वपूर्ण मसला बनकर उभरा है। यहां कृषि से लेकर कुटीर उद्योगों तक अवसरों का संजाल बिछा है। जो युवा अच्छे कॅरियर के लिए शहरों की बांट जोहते थे, आज अपने दर पर नौकरियों की आहट पा रहे हैं।

तरक्की से बदली चमक

इन दिनों ग्रामीण क्षेत्रों में इंडस्ट्री तेजी से पांव पसार रही है। एसोचैम के एक अध्ययन के मुताबिक, आज रूरल रिटेल मार्केट का आक ार 113 बिलियन डॉलर का हो चुका है जो देश के कुल रिटेल मार्केट का 40 प्रतिशत है।

इस बडे मार्केट के अपार फायदों को पाने के लिए देश के कई कॉरपोरेट गु्रप्स गांवों का रुख कर रहे हैं। यही नहीं 425 बिलियन डॉलर का रूरल कंज्यूमर मार्केट भी आज नेशनल मल्टीनेशनल कंपनियों के लिए आकर्षण का विषय है। इसके साथ रूरल सर्विसेज इंडस्ट्री व रूरल हेल्थ केयर इंडस्ट्री भी तेजी से अपने पांव गांव की ओर बढा रहे हैं।

एग्रो इकोनॉमी से पुराना नाता

चरखा एक यंत्र भर नहीं बल्कि हिदुस्तान की कंगालियत मिटाने का एक अस्त्र है, बताने की आवश्यकता नहीं कि जिस रास्ते से भुखमरी मिटेगी, स्वराज भी उसी रास्ते आएगा।

प्रांरभ से ही ग्रामीण क्षेत्रों में लोग अपनी खाद्य जरूरतों से लेकर वस्त्र, मकान, रोजमर्रा की चीजों का उत्पादन स्थानीय स्तर पर करते थे। इसके कई फायदे थे। एक तो गांववासियों की जीवनोपयोगी चीजों के लिए बाहर पर निर्भरता कम थी, वहीं इससे गांव के लोगों को रोजगार भी मुहैया हो जाता था। लेकिन इस दौरान ग्रामवासी, उत्पादन के व्यवसायिक लाभ से दूर रहते थे। इसी को देखते हुए आज सरकार ग्रामवासियों को उत्पादन का पूरा फायदा देने के लिए प्रतिबद्ध है। कईग्रामीण केंद्रित योजनाओं, ग्रामीण क्षेत्रों में किए भारी निवेश के चलतेआज विलेज इकोनॉमी, देश की अर्थव्यवस्था का पेसमेकर बन रही है। यहां तक कि जीडीपी से लेकर कॉरपारेट जगत के तिमाही, छमाही नतीजों तक पर यह असर डालती है। लिहाजा इस क्षेत्र को देश के विकास का पाथ फांइडर कहा जा रहा है।

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