01/11/2014
गोवंशके प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करते हुए जिले भर में शुक्रवार को गोपाष्टमी पर्व पर अन्नकूट के साथ-साथ महिलाओं ने परम्परागत रूप से गऊ माता को सजाकर धार्मिक रीति-रिवाज के साथ पूजा-अर्चना की।
शुक्रवार को महेंद्रगढ़ क्षेत्र के साथ-साथ जिले की गोपाल गोशाला बुचियावाली, गोशाला धोलपोश, नगर की पुरानी श्रीकृष्ण गोशाला, नावां गोशाला, जड़वा गोशाला, सतनाली गोशाला, माधोगढ़ गुदड़िया गोशाला, चितलांग गोशाला, भालखी गोशाला, बुचावास गोशाला खुड़ाना गोशालाओं में सुबह से ही हवन-यज्ञ के साथ-साथ गौ उत्सव प्रारंभ हुआ। गोशालाओं में आयोजित हवन-यज्ञ में जहां भक्तों ने आहुति डाली मंत्रोच्चारण के साथ गोमाता की आराधना की। महिलाएं परम्परागत वेशभूषा में गोमाता के लिए पूजा-अर्चना का सामान लेकर गोपाष्टमी पर्व पर गाए जाने वाले लोकगीतों को गाते हुए गोशालाओं में पहुंची। महिलाओं ने श्रद्धा पूर्वक गोमाता की पूजा-अर्चना की। कई गोभक्तों ने इस मौके पर विभिन्न गोशालाओं में गौ माता के लिए सवामणियों का भी आयोजन किया।
नगर की बुचियावाली स्थित गोपाल गोशाला में अन्नकूट का प्रसाद वितरित किया गया। इसके साथ-साथ अनेक स्थानों पर गौ माता की महिलाओं ने फेरियां लगाई। गोशालाओं द्वारा गायों को लेकर श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित करते हुए नगर परिक्रमा भी की।
गोपाष्टमी के महत्व के बारे में बताते हुए ज्योतिषाचार्य एडवोकेट बुद्धिप्रकाश वशिष्ठ ने बताया कि कार्तिक के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को भगवान श्री कृष्ण ने प्रजा जनों की भलाई के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी ऊं गली पर उठाया था। इसके पीछे मान्यता यह रही है कि भगवान ने पर्वत को ढाल बनाकर गाय तथा मथुरावासियों को इंद्रदेव के प्रकोप से बचाया था। इस दौरान बरसात में भीगने से कई गायें बीमार पड़ गई, उसी दिन से बीमार गायों के उपचार के लिए अष्टमी को गोवंश की रक्षा के लिए दान करने की परम्परा बनी। गोभक्त कार्तिक शुक्ल पक्ष की अष्टमी को गोपाष्टमी के रूप में मनाने लगे। तब से लेकर अब तक यह परम्परा गोवंश के सम्मान के लिए चली रही है।
गोपाष्टमी पर्व की पूर्व संध्या पर हुआ जागरण
श्रीकृष्ण-सुदामागोशाला भालखी में गुरुवार रात को गोपाष्टमी पर्व के उपलक्ष्य में जागरण का आयोजन किया गया। शुक्रवार को गोपाष्टमी पर्व पर भंडारा भी लगाया गया। इस अवसर पर हवन-यज्ञ कलश यात्रा भी निकाली गई। गोशाला क