27/04/2020
Read : चेन्नई का वो लड़का नई शर्ट खरीदने से पहले भी कई बार सोचता था, क्योंकि उसे ऐसा लगता था कि ऐशो-आराम की चीजें खरीदने से कहीं उसे अपनी पढ़ाई की सामग्री से समझौता न करना पडे़। उसके जीवन में अगर परिवार के बाद कुछ था तो वो थी किताबें। पिता नौकरी जरूर करते थे लेकिन उनके दो कमरे के फ्लैट में टीवी नहीं थी सो उन्होंने स्टूडेंट रहते टीवी नहीं देखी। कार नहीं थी तो कार में कभी नहीं बैठे। और आज वो समय आ ही गया जब चेन्नई का यह लड़का दुनिया में सबसे ज्यादा सैलरी पानेवाला CEO बन गया है। जी हां, हम बात कर रहे हैं गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई की। सुंदर को 2019 में कुल 28.1 करोड़ डॉलर या 2,144.53 करोड़ रुपये की सैलरी मिली। यानी हर महीने करीब पौने दो सौ करोड़ रुपये।
सुंदर पिचाई ने 2004 में गूगल ज्वाइन किया था। उस समय वे प्रोडक्ट और इनोवेशन ऑफिसर थे। सुंदर सीनियर वाइस प्रेसीडेंट (एंड्रॉइड, क्रोम और ऐप्स डिविजन) रह चुके हैं। फिर उन्हें गूगल का सीनियर वीपी (प्रोडक्ट चीफ) बनाया गया था। एंड्रॉइड ऑपरेटिंग सिस्टम के डेवलपमेंट और 2008 में लांच हुए गूगल क्रोम में उनकी बड़ी भूमिका रही है। आर्थिक तंगी के दिनों में सुंदर पिचाई 1995 में स्टैनफोर्ड में बतौर पेइंग गेस्ट रहते थे। पैसे बचाने के लिए उन्होंने पुरानी चीजें इस्तेमाल कीं, लेकिन पढ़ाई से समझौता नहीं किया। वे पीएचडी करना चाहते थे लेकिन परिस्थितियां ऐसी बनीं कि उन्हें बतौर प्रोडक्ट मैनेजर अप्लायड मटीरियल्स इंक में नौकरी करनी पड़ी। प्रसिद्ध कंपनी मैक्किंसे में बतौर कंसल्टेंट काम करने तक भी उनकी कोई पहचान नहीं थी।
1 अप्रैल 2004 को वे गूगल में आये। सुंदर का पहला प्रोजेक्ट प्रोडक्ट मैनेजमेंट और इनोवेशन शाखा में गूगल के सर्च टूलबार को बेहतर बनाकर दूसरे ब्रॉउजर के ट्रैफिक को गूगल पर लाना था। इसी दौरान उन्होंने सुझाव दिया कि गूगल को अपना ब्राउजर लांच करना चाहिए। इसी एक आइडिया से वे गूगल के संस्थापक लैरी पेज की नजरों में आ गए। इसी आइडिया से उन्हें असली पहचान मिलनी शुरू हुई। 2008 से लेकर 2013 के दौरान सुंदर पिचाई के नेतृत्व में क्रोम ऑपरेटिंग सिस्टम की सफल लांचिंग हुई और उसके बाद एंड्रॉइड मार्केट प्लेस से उनका नाम दुनियाभर में हो गया।