SAGAR Computer Enterprises

SAGAR Computer Enterprises COMPUTER SERVICES

ONLINE REGISTRATION, HINDI & ENGLISH TYPING, ONLINE BILL PAYMENT, SCANNING, PRINTING , PHOTOCOPY, COLOUR PRINTING, LAMINATION, PROJECT WORK , PAN CARD ETC

31/10/2022
28/07/2014

From
Director Secondary Education
Haryana, Panchkula
To
All District Education Officers in State of Haryana.
All Block Education Officers in the State of Haryana.
Concerned Principals / Heads.
Memo No. 4/25-2014 CEC(1)
Dated Panchkula, the 2 ro7 2 al '7
Sub: Regarding payment of dues of Lab Assistants deployed in the ICT labs
setup by M/s CORE Education and Technologies Ltd.
This is with reference to this office letters of even number dated 04.07.2014 and
dated 11.07.2014 (also posted on the website of DSE) in respect of directions for
releasing the pending dues of the Lab Assistants for the period of six months i.e from
September 2012 to February 2013 and for marking of attendance of LAs.
In this respect it has come to the notice that in some cases, the amount is not
being released to the Lab Assistants and also their attendance is not being marked.
Some of the School Heads have sought clarifications in this respect. Accordingly it is
clarified that the amount of Rs.18000/- transferred to the account of the Principals /
Heads of respective schools in their RMSA Account from Utkarsh Society is for
disbursement of salary of LA's deployed in the ICT labs setup by M/s CORE for the
period from September 2012 to February 2013. The aforesaid payment of dues to Lab
Assistants is required to be released immediately based on the attendance record
available in the school. Further, as already directed vide this office letter dated
11.07.2014 (also posted on the website of DSE), all the Principals / Heads of Govt. High
and Govt. Sr. Sec. Schools should mark attendance of Lab Assistants in a proper
register for transparency of reference and record. Contact Numbers for further
clarifications in this respect are as under:-
Sh. Amandeep Singh, SIM/ HQ Mb. 9915194021 iolm.hq06©gmail.com
Sh. Sunil Dutt, SIM/ HQ Mb.8725959630 [email protected]
Project Coordinator / ICT
For Director Secondary Education,
Haryana, Panchkula

सौंफ प्रतिदिन घर में प्रयुक्त किए जाने वाले मसालों में से एक है। इसका नियमित उपयोग सेहत के लिए लाभदायक है। प्रायः गर्मिय...
09/06/2014

सौंफ प्रतिदिन घर में प्रयुक्त किए जाने वाले मसालों में से एक है। इसका नियमित उपयोग सेहत के लिए लाभदायक है। प्रायः गर्मियों की सब्ज़ियों में इसका उपयोग किया जाता है क्योंकि इसकी तासीर ठंडी है |

* सौंफ और मिश्री समान भाग लेकर पीस लें। इसकी एक चम्मच मात्रा सुबह-शाम पानी के साथ दो माह तक लें। इससे आँखों की कमजोरी दूर होती है त
था नेत्र ज्योति में वृद्धि होती है।

* सौंफ का अर्क दस ग्राम शहद मिलाकर लें। खाँसी में तत्काल आराम मिलेगा।

* बेल का गूदा 10 ग्राम और 5 ग्राम सौंफ सुबह-शाम चबाकर खाने से अजीर्ण मिटता है और अतिसार में लाभ होता है।

* यदि आपको पेटदर्द होता है, तो भुनी हुई सौंफ चबाइए, तुरंत आराम मिलेगा। सौंफ की ठंडाई बनाकर पीजिए, इससे गर्मी शांत होगी और जी मिचलाना बंद हो जाएगा।

* हाथ-पाँव में जलन की शिकायत होने पर सौंफ के साथ बराबर मात्रा में धनिया कूट-छानकर मिश्री मिलाकर खाना खाने के पश्चात 5-6 ग्राम मात्रा में लेने से कुछ ही दिनों में आराम हो जाता है।

* सौंफ रक्त को साफ करने वाली एवं चर्मरोग नाशक है।

*मोटी सौंफ को भोजन के बाद प्रतिदिन चबाने से एसिडिटी की समस्या से भी छुटकारा मिल जाता है |

09/06/2014

.....जरूरी सूचना..... ..दोस्तों इस को एक बार पढ़ें जरुर........
हम आज कल ACID ATTACKS { तेजाब से हमला } के बारे में अक्सर सुनते रहते हैं.....
दोस्तों अगर किसी के उपर तेजाब पड़ जाऐ या किसी ने तेजाब डाल दिया गया हो तो क्या करें.....???
नहीं पता तो इस जानकारी को पढ़ें.......
शरीर के जिस हिसे पर तेजाब पड़ गया हो उस पर सब से पहले जितना जल्दी हो सके उस के उपर दूध { MILK } डाले जहा तेज डाला था या गलती से गिरा .......
दूध तब तक डालते रहे जबतक दूध फटना बंद ना हो....
दूध को बहता रहने दे उपर से और डालते जाए और ये काम जितना जल्दी हो सके उतना ही अच्छा हैं..क्यों के जितनी देर होगी शरीर को उतना ही नुकसान होता रहे गा ......
अगर तेजाब पड़ने के साथ ही तुरंत दूध के साथ अच्छी तरह धोदे { जेसे पहले बताया } तो आप देखेगे के आप को पता भी नहीं चलेगा कहा तेजाब गिरा था या डाला गया था .....सकिन पर भी कोई दाग नहीं पड़ता...
इस जानकारी को जितना हो सके शेयर करे ......आप का एक शेयर किसी की जिंदगी बदल सकता है......

06/06/2014

ह्रदयघात या हार्ट अटैक के लक्षणों , जांच व उपचार की विस्तृत जानकारी
हार्ट अटैक के लक्षण
1. छाती में बेचैनी
छाती के बीच में बेचैनी-दबाव, दर्द, जकड़न और भारीपन का अहसास होता है, ये अवस्था कुछ मिनट तक रह कर या तो गायब हो जाती है, या फिर लौट आती है। (अगर ये 30 मिनट तक जारी रहती है या सॉरबिटेट 5 मिग्रा के इस्तेमाल से भी राहत नही मिलती है तो ये हार्ट अटैक का पुख्ता लक्षण हैं।)
2. छाती के अलावा शरीर के अन्य हिस्सों में भी बेचैनी
बेचैनी (दर्द या भारीपन) बाहों, कमर, गर्दन और जबड़े में भी महसूस हो सकती है। सीने में बेचैनी, बांहों, कंधों, जबड़े या गर्दन और कभी-कभी यहां से सीने तक भी पहुंच सकती है।
3. पेट के ऊपरी हिस्से में भराव, एसिडिटी और अपच के साथ दर्द की शिकायत कम होती है। इस दर्द में एंटासिड का असर नही होता, इन लक्षणों की अनदेखी नही करनी चाहिए और संभावित हार्ट अटैक के लिए इनकी जांच की जानी चाहिए।
4. सांस ठीक से न आना
छाती में दर्द शुरू होने से पहले सांस लेने में परेशानी भी हो सकती है, या दर्द इससे पहले भी शुरू हो सकता है,अन्य लक्षणउपरोक्त लक्षणों के साथ-साथ उल्टी आने, पसीना छूटने या चक्कर आने की शिकायत भी हो सकती है। कभी-कभी बिना दर्द हुए सांस न आने या दम घुटने जैसे एकमात्र लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।
उपरोक्त में से किसी भी संभावित हार्ट अटैक सी परिस्थिति में घर पर ही प्राथमिक चिकित्सा -
मैडिकल सहायता मिलने से पहले ऐसे व्यक्ति को 300 मिग्रा एस्पिरिन (Ecosprin 150 की 2 गोली) दी जा सकती है। एस्पिरिन से खून पतला हो जाता है और खून का थक्का घुल जाने से खून अवरूद्ध रक्तवाहिका से गुजर जाता है। सबसे अच्छा तो यह है कि एस्पिरिन की 1 गोली को चूरा करके इसे जबान के नीचे रख लिया जाए ताकि ये जल्दी से खून में घुल जाए और 1गोली पानी में घोलकर दी जा सकती है, और अगर ये एस्पिरिन पानी में घुलनशील हो तो इसे आधा गिलास पानी में घोल कर पिलाया जा सकता है। (जिन लोगों को पेट का अल्सर हो, और जिन्हें एस्पिरिन से एलर्जी हो, उन्हें एस्पिरिन नही दी जानी चाहिए)
अब आगे क्या करें?
आप फौरन डाक्टर के पास जाएं। सबसे अच्छा ये होगा कि आप किसी ऐसे हस्पताल जाएं जहां ई सी जी और खून का टैस्ट CPK-MB या सबसे जरूरी Troponin-T अथवा Troponin-I किया जा सके।
★ ह्रदय घात सम्बंधित भ्रांतियां -
किसी रात को या दिन का व्यस्त समय शुरू होने के पहले आपकी छाती में दर्द शुरू हुआ। कहीं हार्ट अटैक तो नहीं- इस सवाल से आतंकित आप भागे भागे अस्पताल पहुँचे। बस, अब आपके हाथ में कुछ नहीं रहा। डॉक्टर का ईमान, वह आपके दिल के साथ जो चाहे कर सकता है। छाती के दर्द के साथ अस्पताल पहुँचे मरीजों को आज कल कैप्टिव पेशेंट (चंगुल में फँसे मरीज) की संज्ञा दी जा रही है।
कई अध्ययनों से यह बात सामने आ चुकी है कि छाती में दर्द के कुल मामलों में से करीब 33 प्रतिशत ही हार्ट से जुड़े होते हैं। बाकी दर्द पेट या स्पाइन से जुड़े होते हैं लेकिन देश की राजधानी दिल्ली सहित जयपुर, जोधपुर या किसी भी शहर के निजी अस्पतालों में छाती में दर्द के मामलों के रिकॉर्ड देखें तो उनमें लगभग शत-प्रतिशत को प्राथमिक जांच में Observation के नाम पर अस्पताल में रोकने हेतु सिर्फ हार्ट से जुड़ा दर्द या संभावित हार्ट से जुड़ा दर्द ही बताया जायेगा।
★★ ध्यान देने योग्य बातें -
छाती में दर्द के बाद भयभीत होकर अस्पताल पहुँचे मरीजों पर बेवजह एंजियोप्लास्टी कर कुछ अस्पताल मालामाल हो रहे हैं। उन्होंने छाती के दर्द के मरीजों को फाँसने के लिए कई जगह अपने छोटे-छोटे चेस्ट पेन क्लिनिक खोल रखे हैं।आप वहाँ गए नहीं कि वहाँ बैठे अस्पताल के एजेंट आपको अस्पताल की इमरजेंसी में पहुँचा देंगे।
कई ऐसे टेस्ट हैं जिसके जरिए यह पता लगाया जा सकता है कि छाती का दर्द ‘लो रिस्क’ है या जानलेवा साबित हो सकता है लेकिन वे ऐसा नहीं करते। दवा से दिल के मरीजों का इलाज करने वाले कई विशेषज्ञ निजी बातचीत में यह स्वीकार करते हैं कि छाती के दर्द के भय का फायदा उठा कर कुछ डॉक्टर व अस्पताल दिल का मामला नहीं होने के बावजूद एंजियोप्लास्टी जैसी तकनीक का इस्तेमाल कर डालते हैं लेकिन वे खुल कर ऐसा कहने की जुर्रत नहीं करते क्योंकि एंजियोप्लास्टी आज कल किसी भी अस्पताल की कमाई का बहुत बड़ा जरिया बन गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार कई संबंधित टेस्टों में से एक टेस्ट ऐसा है, जिससे यह साफ हो जाता है कि छाती का दर्द हार्ट अटैक है या नहीं। ‘ट्रोपोनिन आई/ Troponin-I या Trop-I’ नामक एक ब्लड टेस्ट करने पर यह पता चल जाता है। अगर यह टेस्ट निगेटिव आता है तो यह निश्चित किया जा सकता है कि छाती के इस दर्द का हार्ट अटैक से कोई लेना-देना नहीं।
लेकिन यह टेस्ट करने के बजाय डॉक्टर एंजियोग्राम कर देते हैं। दिल की नली में ब्लॉक की जाँच इसी विधि से की जाती है। इस जाँच के बाद ही एंजियोप्लास्टी होती है।
अब अधेड़ उम्र के किसी भी व्यक्ति की जाँच इस विधि से करें तो दिल की नली में कुछ न कुछ रुकावट तो मिल ही जाएगी। इसी को आधार बना कर जरूरत नहीं होने पर भी एंजियोप्लास्टी कर दी जाती है।
एक डॉक्टर ने कहा कि यही वजह है कि अनेक लोगों में एंजियोप्लास्टी के बाद भी छाती का दर्द नहीं रुकता है क्योंकि वह दर्द किसी और वजह से हो रहा होता है। दुनिया में रोज लाखों लोग छाती के दर्द से पीड़ित होते हैं लेकिन हर दर्द हार्ट अटैक का नहीं होता है। हाँ, सबके लिए यह एक डरावना दर्द जरूर है।
Angina दर्द और हार्ट अटैक से उत्पन्न दर्द में भी फर्क है और Angina को दवाओं द्वारा काबू में रख कर राहत पहुँचा कर इलाज जारी रखा जाता है और एंजियोप्लास्टी/स्टेंटिंग इसमें आवश्यक नहीं है।
आशा करती हूँ कि यह सामान्य सी जानकारी आप सब मित्रों हेतु लाभप्रद रहे ..!
स्वस्थ रहें, प्रसन्नचित्त रहें, मंगलकामनाएँ
शेयर करदे जिससे और मित्र भी ये उपयोगी जानकारी जान सके

04/06/2014

खुशख़बरी खुशख़बरी खुशखबरी
सभी लैब सहायको के लिए खुशखबरी है कि हमारा जो पंचकुला जिले का केस लेबर कोर्ट में डाला गया था उसका फैसला आज हमारे हक़ में आया है I और कोर्ट ने यह फैसला सुनाया कि सभी लैब सहायको को उनकी स्कूल ज्वाइनिंग तिथि से लेकर अब तक की सैलरी डी. सी . रेट के अनुसार शिक्षा विभाग को देने का निर्देश जारी किया हैI और यह सैलरी अगले दो महीने के अंदर देने के लिए कहा गया है अगर विभाग दो महीने तक सैलरी न दे तो 9% ब्याज के साथ देनी होगी यह सब आपके सहयोग से हो पाया हैI

29/05/2014

Hry - पक्के होंगे कच्चे कर्मचारी
दयानंद शर्मा
चंडीगढ, 28 मई - हरियाणा के
मुख्यमंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह
हुड्डा ने आज अनुबंध आधार पर लगे
तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के
कर्मचारियों को नियमित करने के
लिए पंजाब सरकार की नीति हु-ब-हु
लागू करने की घोषणा की और यह
नीति 28 मई, 2014 से लागू होगी।
मुख्यमंत्री आज हरियाणा मंत्रिमंडल
की बैठक की अध्यक्षता करने के
उपरांत एक पत्रकार सम्मेलन
को संबोधित कर रहे थे।
श्री हुड्डा ने
कहा कि कर्मचारी तालमेल कमेटी के
साथ हुई बातचीत में हुए निर्णय
को सरकार ने मान लिया है। पंजाब
सरकार की 28 मार्च, 2011
को लागू रेगुलराइजेशन नीति के
अंतर्गत गु्रप-‘सी’ व ‘डी’ के ऐसे
कर्मचारी जो सरकार या राज्य
सरकार की स्वीकृत एजेंसियों के
माध्यम से अनुबंध आधार पर 28
मई, 2014 को तीन वर्ष
की अवधि पूरी करते है
तथा जो शुरूआत में स्वीकृत रिक्त
पदों के विरुद्ध लगे तथा अब भी ऐसे
पदों पर कार्यरत है, को लाभ
मिलेगा।
राज्य सरकार के निर्णय के अनुसार
17 जून, 1997, 5 नवम्बर, 1999
तथा 1 अक्तूबर, 2003 की नीति में
प्रशासनिक कारणों से नियमित होने
से वंचित रह गये अन्यथा पात्र थे,
को भी उसी तिथि से नियमित
किया जायेगा, जब वे नीति के तहत
इसके लिए पात्र थे।
इसके अलावा, तदर्थ आधार पर लगे
ग्रुप-बी के ऐसे कर्मचारी जो वर्ष
1996 की नीति के अंतर्गत पात्र थे
लेकिन सरकार द्वारा 8 दिसम्बर,
1997 को नीति वापिस लेने के
कारण नियमित होने से वंचित रह
गये थे, को भी नीति जारी होने
की तिथि से नियमित किया जायेगा।
इसके अलावा, दैनिक
वेतनभोगी कर्मचारियों की सेवा अवधि की पेंशन
लाभ के लिए गणना में
पूरी सेवा अवधि को माना जायेगा।

आप चाकलेट खा रहे हैं या निर्दोष बछड़ों का मांस?___________________________________________________चाकलेट का नाम सुनते ही...
27/05/2014

आप चाकलेट खा रहे हैं या निर्दोष बछड़ों का मांस?
___________________________________________________

चाकलेट का नाम सुनते ही बच्चों में गुदगुदी न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता। बच्चों को खुश करने का प्रचलित साधन है चाकलेट। बच्चों में ही नहीं, वरन् किशोरों तथा युवा वर्ग में भी चाकलेट ने अपना विशेष स्थान बना रखा है। पिछले कुछ समय से टॉफियों तथा चाकलेटों का निर्माण करने वाली अनेक कंपनियों द्वारा अपने उत्पादों में आपत्तिजनक अखाद्य पदार्थ मिलाये जाने की खबरे सामने आ रही हैं। कई कंपनियों के उत्पादों में तो हानिकारक रसायनों के साथ-साथ गायों की चर्बी मिलाने तक की बात का रहस्योदघाटन हुआ है।

गुजरात के समाचार पत्र गुजरात समाचार में प्रकाशित एक समाचार के अनुसार नेस्ले यू.के.लिमिटेड द्वारा निर्मित किटकेट नामक चाकलेट में कोमल बछड़ों के रेनेट (मांस) का उपयोग किया जाता है। यह बात किसी से छिपी नहीं है कि किटकेट बच्चों में खूब लोकप्रिय है। अधिकतर शाकाहारी परिवारों में भी इसे खाया जाता है। नेस्ले यू.के.लिमिटेड की न्यूट्रिशन आफिसर श्रीमति वाल एन्डर्सन ने अपने एक पत्र में बतायाः “ किटकेट के निर्माण में कोमल बछड़ों के रेनेट का उपयोग किया जाता है। फलतः किटकेट शाकाहारियों के खाने योग्य नहीं है। “ इस पत्र को अन्तर्राष्टीय पत्रिका यंग जैन्स में प्रकाशित किया गया था। सावधान रहो, ऐसी कंपनियों के कुचक्रों से! टेलिविज़न पर अपने उत्पादों को शुद्ध दूध से बनते हुए दिखाने वाली नेस्ले लिमिटेड के इस उत्पाद में दूध तो नहीं परन्तु दूध पीने वाले अनेक कोमल बछड़ों के मांस की प्रचुर मात्रा अवश्य होती है। हमारे धन को अपने देशों में ले जाने वाली ऐसी अनेक विदेशी कंपनियाँ हमारे सिद्धान्तों तथा परम्पराओं को तोड़ने में भी कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं। व्यापार तथा उदारीकरण की आड़ में भारतवासियों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ हो रहा है।

हालैण्ड की एक कंपनी वैनेमैली पूरे देश में धड़ल्ले से फ्रूटेला टॉफी बेच रही। इस टॉफी में गाय की हड्डियों का चूरा मिला होता है, जो कि इस टॉफी के डिब्बे पर स्पष्ट रूप से अंकित होता है। इस टॉफी में हड्डियों के चूर्ण के अलावा डालडा, गोंद, एसिटिक एसिड तथा चीनी का मिश्रण है, ऐसा डिब्बे पर फार्मूले (सूत्र) के रूप में अंकित है। फ्रूटेला टॉफी ब्राजील में बनाई जा रही है तथा इस कंपनी का मुख्यालय हालैण्ड के जुडिआई शहर में है। आपत्तिजनक पदार्थों से निर्मित यह टॉफी भारत सहित संसार के अनेक अन्य देशों में भी धड़ल्ले से बेची जा रही है।

चीनी की अधिक मात्रा होने के कारण इन टॉफियों को खाने से बचपन में ही दाँतों का सड़ना प्रारंभ हो जाता है तथा डायबिटीज़ एवं गले की अन्य बीमारियों के पैदा होने की संभावना रहती है। हड्डियों के मिश्रण एवं एसिटिक एसिड से कैंसर जैसे भयानक रोग भी हो सकते हैं।
सन् 1847 में अंग्रजों ने कारतूसों में गायों की चर्बी का प्रयोग करके सनातन संस्कृति को खण्डित करने की साजिश की थी, परन्तु मंगल पाण्डेय जैसे वीरों ने अपनी जान पर खेलकर उनकी इस चाल को असफल कर दिया। अभी फिर यह नेस्ले कंपनी चालें चल रही है। अभी मंगल पाण्डेय जैसे वीरों की ज़रूरत है। ऐसे वीरों को आगे आना चाहिए। लेखकों, पत्रकारों को सामने आना चाहिए। देशभक्तों को सामने आना चाहिए। देश को खण्ड-खण्ड करने के मलिन मुरादेवालों और हमारी संस्कृति पर कुठाराघात करने वालों के सबक सिखाना चाहिए। देव संस्कृति भारतीय समाज की सेवा में सज्जनों को साहसी बनना चाहिए। इस ओर सरकार का भी ध्यान खिंचना चाहिए।

ऐसे हानिकारक उत्पादों के उपभोग को बंद करके ही हम अपनी संस्कृति की रक्षा कर सकते हैं। इसलिए हमारी संस्कृति को तोड़नेवाली ऐसी कंपनियों के उत्पादों के बहिष्कार का संकल्प लेकर आज और अभी से भारतीय संस्कृति की रक्षा में हम सबको कंधे-से-कंधा मिलाकर आगे आना चाहिए।

सभी लैब सहायकों को सूचित किया जाता है के 28-05-2014 सुबह 08:00 AM C.M. से चंडीगढ़ में बैठक सुनिश्चित हुई है,इस बैठक के ल...
21/05/2014

सभी लैब सहायकों को सूचित किया जाता है के 28-05-2014 सुबह 08:00 AM C.M. से चंडीगढ़ में बैठक सुनिश्चित हुई है,इस बैठक के लिए हरियाणा के सरकारी स्कूल में कार्यरत लैब सहायकों को बुलाया गया है ,और इसके लिए संघ की राज्य कमेटी ने फैसला लिया है की सभी लैब सहायक 27-05-2014 को नाडा साहब गुरुद्वारा पंचकुला में शाम तक पहुँच जाये ताकि सुबह जल्दी C.M. हाउस चंडीगढ़ सेक्टर 1 पहुंचा जा सके आप सभी अपने जवाब C.M. से सीधे ले सकते है संघ की कौर कमेटी अलग से C.M. या किसी भी अन्य अधिकारी से अलग या अकेले में कोई भी बैठक नहीं करेगी और C.M के अलावा किसी भी अन्य अधिकारी से मिलना मंजूर नहीं होगा यदि C.M. सभी से मिलने में आना कानी या नहीं मिलते तो इस स्थिति में चाहे सभी लैब सहायको को वहां लम्बे समय तक बैठना पड़े लेकिन सभी C.M. से मिले बगैर वापस नहीं आयेंगे आप सभी का साथ हमारी सफलता है ,अधिक से अधिक संख्या में पहुंचे और अपने सभी जानकर लैब सहायको को साथ लेकर आये ,क्योकि यह आर पार की लड़ाई है और सभी लैब सहायको के हक़ की लड़ाई है दोबारा फिर आपसे प्रार्थना है की आप अधिक से अधिक से अधिक संख्या में C.M, हाउस चंडीगढ़ सेक्टर 1 में पहुंचे ये आपके अपने हक़ की लड़ाई है
इन्कलाब जिंदाबाद
इन्कलाब जिंदाबाद
धन्यवाद
निवेदक :- प्रदेश कमेटी
हरियाणा राजकीय लैब सहायक संघ

21/05/2014

सभी लैब सहायकों को सूचित किया जाता है के 28-05-2014 सुबह 08:00 AM C.M. से चंडीगढ़ में बैठक सुनिश्चित हुई है,इस बैठक के लिए हरियाणा के सरकारी स्कूल में कार्यरत लैब सहायकों को बुलाया गया है ,और इसके लिए संघ की राज्य कमेटी ने फैसला लिया है की सभी लैब सहायक 27-05-2014 को नाडा साहब गुरुद्वारा पंचकुला में शाम तक पहुँच जाये ताकि सुबह जल्दी C.M. हाउस चंडीगढ़ सेक्टर 1 पहुंचा जा सके आप सभी अपने जवाब C.M. से सीधे ले सकते है संघ की कौर कमेटी अलग से C.M. या किसी भी अन्य अधिकारी से अलग या अकेले में कोई भी बैठक नहीं करेगी और C.M के अलावा किसी भी अन्य अधिकारी से मिलना मंजूर नहीं होगा यदि C.M. सभी से मिलने में आना कानी या नहीं मिलते तो इस स्थिति में चाहे सभी लैब सहायको को वहां लम्बे समय तक बैठना पड़े लेकिन सभी C.M. से मिले बगैर वापस नहीं आयेंगे आप सभी का साथ हमारी सफलता है ,अधिक से अधिक संख्या में पहुंचे और अपने सभी जानकर लैब सहायको को साथ लेकर आये ,क्योकि यह आर पार की लड़ाई है और सभी लैब सहायको के हक़ की लड़ाई है दोबारा फिर आपसे प्रार्थना है की आप अधिक से अधिक से अधिक संख्या में C.M, हाउस चंडीगढ़ सेक्टर 1 में पहुंचे ये आपके अपने हक़ की लड़ाई है
इन्कलाब जिंदाबाद
इन्कलाब जिंदाबाद
धन्यवाद
निवेदक :- प्रदेश कमेटी
हरियाणा राजकीय लैब सहायक संघ

Chalo Chandigarh pahucho Chandigarh 28 may 9 am. CM HOUSE....
18/05/2014

Chalo Chandigarh pahucho Chandigarh 28 may 9 am. CM HOUSE....

इलायची -इलायची दो प्रकार की होती है-छोटी और बड़ी | आज हम आपको छोटी इलायची के विषय में जानकारी देंगे, इसे हम संस्कृत में ए...
17/05/2014

इलायची -
इलायची दो प्रकार की होती है-छोटी और बड़ी | आज हम आपको छोटी इलायची के विषय में जानकारी देंगे, इसे हम संस्कृत में एला भी कहते हैं | यह हमारे देश तथा इसके आस पास के गर्म देशों में अधिक मात्रा में पायी जाती है | इसके पेड़ हल्दी के पेड़ के सामान होते हैं | इलायची स्वादिष्ट होती है और आमतौर पर इसका प्रयोग खाने के पदार्थों में किया जाता है | छोटी इलायची खाने में शीतल होती है और इसका अधिक मात्रा में उपयोग आँतों के लिए हानिकारक होता है | इसका सेवन १-३ ग्राम की मात्रा में किया जा सकता है | यह कफ ,खांसी ,श्वास व बवासीर नाशक है और ह्रदय एवं गले की मलिनता को दूर करती है | इसे खाने से मुख की दुर्गन्ध दूर होती है और जी मिचलाना बंद हो जाता है | इलायची का प्रयोग हम विभिन्न रोगों के उपचार के लिए कर सकते हैं -

१- लगभग १० ग्राम इलायची को १ लीटर पानी में डालकर पकाएं ,जब एक चौथाई (२५० ग्राम ) शेष रह जाए तब उसे उतारकर ठंडा कर लें | इस पानी को थड़ी -थोड़ी देर में घूँट -घूँट करके पीने से,हैजा व मूत्रावरोध रोगों में लाभ होता है |

२- छोटी इलायची के दानों को तवे पर भून कर पीस लें | इस चूर्ण को शहद या देसी घी में मिलाकर सुबह -शाम चाटने से खांसी में लाभ होता है |

३- दिन में कई बार इलायची चबाने से मुँह की दुर्गन्ध व सांस की बदबू ख़त्म होती है |

४- इलायची को पानी के साथ पीसकर सिर पर लेप की तरह लगाने से सिर दर्द दूर हो जाता है |

५- इलायची ,काली मिर्च ,दालचीनी ,धनिया और सौंठ को बराबर मात्रा में लेकर इनको दरदरा पीस लें | इस चूर्ण की दो चम्मच लेकर २५० मिलीलीटर पानी में पकाएं | जब पानी आधा रह जाए तो छानकर गुनगुना पिलायें | इससे तेज़ जुकाम दूर हो जाता है |

६- छोटी इलायची को पीस लें | इस चूर्ण को शहद के साथ थोड़ा -थोड़ा चाटने से पेशाब की जलन शांत होती है |

Address

VILLAGE/TIGAON
Faridabad
121101

Telephone

9899661489

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when SAGAR Computer Enterprises posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Business

Send a message to SAGAR Computer Enterprises:

Share