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24/06/2018

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17/06/2018

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27/10/2017

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How to create complaint log in WD(Western Digital) External  Hard Disk Drive. 1. Open the site www.wd.com2. Go to Suppor...
18/03/2014

How to create complaint log in WD(Western Digital) External Hard Disk Drive.
1. Open the site www.wd.com
2. Go to Support Tab
3. Click the warranty & RMA option
4. Click end user
5. Click Product Replacement (RMA)
6. If you should any troubleshooting with HDD then click in knowledgebase option
7. If No, then go to continuous to WD Support portal
8. Type Your User name if You have already created an ID in wd portal or website if no then you have to create an ID in WD portal or website
9. For create a account click the create new account
10. Firstly you have to register you product from click on the product registration
11. Enter your hard disk serial number & click register.
12. Then click o the product replacement
13. Click standard Replacement
14. Create new case
15. An email from wd will have been sent to your mail box.
16. Your Case has been created.

छत्तीसगढ़ के केशकाल में एक अजीबो-गरीब बच्ची का जन्म हुआ है. यह बच्ची लोगों के बीच कौतूहल का विषय बनी हुई है. स्थिति ये आ...
09/03/2014

छत्तीसगढ़ के केशकाल में एक अजीबो-गरीब बच्ची का जन्म हुआ है. यह बच्ची लोगों के बीच कौतूहल का विषय बनी हुई है. स्थिति ये आ गई है कि इस बच्‍ची को देखने के लिए लोगों की भीड़ अस्पताल में उमड़ रही है.

बताया जा रहा है कि बच्ची मानव जाति से बिल्कुल अलग ही शरीर लेकर पैदा हुई है. सात माह की बच्ची का रंग हरा और उसके शरीर में कछुए की तरह धारीदार आकृति बनी हुई है. यही नहीं, उसका सिर भी पूर्ण रूप से विकसित नहीं है. यहां तक कि उसके शरीर के कई हिस्से विकसित नहीं हैं, वहीं कुछ हिस्से जरूरत से ज्यादा विकसित हो चुके हैं.

बच्‍ची के मुंह का क्षेत्र विकसित हो चुका है, जबकि कान विकसित नहीं हो सके हैं, आंखें भी पूरी तरह से नहीं बन पाई है, जिससे यह पूरी तरह से लाल दिखाई पड़ रही है. कोई उसे देवी का अवतार बता रहा तो कोई एलियन (दूसरे ग्रह का इंसान) का दर्जा दे रहा है.

डाक्टरों ने साफ शब्दों में कह दिया है कि यह कोई एलियन नहीं है और न ही कोई भगवान का अवतार. ये बच्‍ची एक गंभीर बीमारी हरक्वीलीन से पीड़ित है. डाक्टरों के अनुसार, लाखों में से एक प्रकरण इस तरह देखने में मिलते हैं. शिशु रोग विशेषज्ञ डा. बी.आर. भगत का कहना है कि हरक्वीलीन नामक एक सिन्ड्रोम होता है. इस सिन्ड्रोम के चलते इस तरह की हरक्वीलीन बच्ची पैदा होती है.

उनका कहना है कि लाखों में से इस तरह के एक प्रकरण देखने में मिलता है. उनका कहना है कि यदि बच्ची के माता-पिता तैयार हों तो उसे रायपुर के मेडिकल कालेज में लाकर विशेषज्ञों द्वारा उस पर अध्ययन कर उसके रोग का पता लगाया जा सकता है. वहीं उन्होंने बताया कि इस तरह के बच्चों के बचने की बहुत कम उम्मीद रहती है. For More update like my page https://www.facebook.com/3gpsolutions

Did you know you can fix a scratched DVD with a banana.What you’ll need:1. A banana2. A banana peel3. Some glass cleaner...
27/02/2014

Did you know you can fix a scratched DVD with a banana.

What you’ll need:

1. A banana
2. A banana peel
3. Some glass cleaner

Take a CD / DVD that has smudges and minor scratches on it.
Using a circular motion, apply a freshly cut banana to it.
Next, wipe it down with the banana peel (the inside). The wax from the peel will help polish and further clean the disk.
Take a clean cotton cloth and wipe the entire surface of the CD / DVD. Be sure to apply moderate pressure while moving in a circular motion. This should be done for around 3 to 4 minutes.
Finally, spray the disc with glass cleaner and wipe it clean.
Voilà! Your scratched CD or DVD should now look like new! Please note that this trick will also help you repair scratched Playstation and Xbox CD’s and DVD’s.
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आप एक घंटे में कार खुद बनाकर उसे सड़क पर दौड़ा सकते हैं. जी हां...यह सपना नहीं बल्कि हकीकत है. क्‍योंकि अब आपके लिए आ गई...
12/02/2014

आप एक घंटे में कार खुद बनाकर उसे सड़क पर दौड़ा सकते हैं. जी हां...यह सपना नहीं बल्कि हकीकत है. क्‍योंकि अब आपके लिए आ गई है ऐसी कार, जिसे आप महज साठ मिनट में असेंबल कर रोड में दौड़ने लायक बना सकते हैं.

मेल ऑनलाइन में छपी रिपोर्ट के मुताबिक इस कार को चीन के एक बिजनेस मैन और इटली के डिजायनर ने तैयार किया है. ओएस व्‍हीकल प्रोजेक्‍ट के को फाउंडर ऐम्‍पेलियो मैशी ने बताया कि इस अर्बन टैबी कार को साठ मिनट में आसानी से असेंबल किया जा सकता है. इसमें आसानी से दो से चार लोग सफर कर सकते हैं. इस कार में इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड इंजन होगा.

यह कार आसानी से 85 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से सरपट दौड़ सकती है. ओएस व्‍हीकल का कहना है कि इसको असेंबल करने के लिए किसी विशेष टूल्‍स की जरूरत नहीं होगी और इसे आसानी से कैरी भी किया जा सकता है. यह कार टू और फोर सीटर सेगमेंट में है.

मैशी के सहयोगी फ्रांसिस्‍को लियू का कहना है कि हमारी तरफ से कस्‍टमर्स को केवल कार के पुर्जे और पार्ट्स ही भेजे जाते हैं. 6000 यूरो में आप इस बेहतरीन अर्बन टैबी कार का लुत्‍फ उठा सकते हैं. इस कार की रेंज 4 हजार यूरो से 6 हजार यूरो के बीच है. आप इस कार की चैसिस भी अपनी पसंद के मुताबिक चुन सकते हैं.
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09/01/2014

लखनऊ के इंजीनियर ने बनाई हवा से चलने वाली बाइक

पेट्रोल के बढ़ते दाम के बीच अब हवा से चलने वाली बाइक मिल जाए तो क्या कहने. ऐसी की बाइक लखनऊ के एक इंजीनियर ने तैयार किया है जिसे लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड ने भी अपने अंक में शामिल किया है. फरवरी 2014 में लॉन्च होने वाली लिमका बुक में इस अविष्कार को प्रकाशित किया जाएगा.

लखनऊ में स्कूल ऑफ मैनेजमेंट साइंसेस के निदेशक डॉ. भरत राज सिंह व कानपुर के हरकोर्ट बटलर टेक् नोलॉजिकल इंस्टीच्यूट के डॉ. ओंकार सिंह द्वारा तैयार की गई, एयर-ओ-बाइक की खासियत यह है कि इसमें पांच रुपये की हवा भराकर 45 किमी. का सफर 80 किमी. प्रति घंटा की रफ्तार से तय किया जा सकता है.

डॉ. सिंह बताते हैं कि बाइक का एयर इंजन मात्र चार इंच का है जिसे पांच वर्षों के अथक प्रयास के बाद बनाया गया है. प्रयोगशाला में किए गए परीक्षण में पाया गया कि लोड के साथ इंजन 2000-3000 आरपीएम पर चलता है जबकि बगैर लोड के 10 हजार आरपीएम पर चलता है. जीरो उत्सर्जन वाले इस इंजन का बीते वर्ष भारतीय पेटेंट भी हासिल किया जा चुका है.

एयर-ओ-बाइक में सीमलेस यानी बगैर जोड़ का इंजन लगाया गया है जिससे दुर्घटना होने पर इंजन को नुकसान न पहुंचे. हालांकि इससे इसका वजन 20-25 किलो तक बढ़ जाता है. यही इसका नुकसान भी है क्योंकि दो लोगों के बैठने से लोड बहुत अधिक हो जाता है. इसलिए कोशिश की जा रही है कि कार्बन स्टील व कार्बन फाइबर से ऐसा इंजन बनाया जाए जिससे इसका वजन तो कम हो साथ ही मजबूती भी प्रभावित न हो. लखनऊ के इंजीनियर द्वारा तैयार एयर-ओ-बाइक की टेक्नोलॉजी के लिए कनाडा, बुल्गारिया, जर्मनी जैसे देशों से मांग आ रही है, लेकिन इस देशी टेक्नोलॉजी के अविष्कारक डॉ.भरत राज सिंह व प्रो. ओंकार सिंह चाहते हैं कि एयर-ओ-बाइक का निर्माण सरकारी प्रतिष्ठान में ही हो. उनका मानना है कि इससे न केवल प्रदूषण की समस्या पर काबू पाया जा सकेगा बल्कि दिनोंदिन महंगे होते पेट्रोल से भी निजात मिलेगी.

03/01/2014
03/01/2014

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23/12/2013

भले ही बैलों की मदद से चलने वाले कोल्‍हू अब कम नजर आते हों, लेकिन यह तकनीक अभी भी कारनामा करने का माद्दा रखती है. भिलाई में कोल्‍हू से बिजली पैदा करने की तकनीक ईजाद कर ली गई है.

भिलाई के शंकराचार्य इंजीनियरिंग कॉलेज के मैकेनिकल विभाग की टीम ने कोल्हू तकनीक से विद्युत उत्पादन इकाई तैयार कर ग्रामीण भारत के लिए एक उपयोगी यंत्र उपलब्ध कराया है. पशुओं की मदद से चलने वाली यह मशीन न केवल सस्ती है, बल्कि इसके प्रयोग से बिजली की कमी से जूझ रहे ग्रामीण इलाकों में भी बिजली आई जा सकती है.

शंकराचार्य इंजीनियरिंग कॉलेज के मेकेनिकल विभाग के प्रवक्ता शरद कुमार चंद्राकर, एमई के छात्र धनंजय कुमार यादव, ललित कुमार साहू और धीरज लाल सोनी ने तीन महीने की मेहनत के बाद इस सस्ते यंत्र को विकसित किया.

गौरतलब है कि दल के सभी सदस्य किसान वाली पृष्ठभूमि से जुड़े हुए हैं. उन्होंने ग्रामीण इलाकों में बिजली की समस्या को ध्यान में रखकर ही इसे विकसित किया है. चंद्राकर ने बताया कि कोल्हू की तर्ज पर बनाए गए इस प्रोजेक्ट में चार जोड़े विभिन्न आकार के गियर, एक जोड़ी पुल्ली और बेयरिंग का इस्तेमाल किया गया है. एक हैंडल को कोल्हू की शक्ल दी गई है, जिसे बैल घुमाते हैं.

उन्होंने बताया कि बैलों के घुमाने पर आठों गियर घूमने लगते हैं और उससे पुल्ली के माध्यम से जुड़ा कार का अल्टरनेटर घूमने लगता है. अल्टरनेटर से डीसी वोल्ट पैदा होने लगता है, जो एक बैटरी को चार्ज करता है. बैटरी पूरी तरह चार्ज होने के बाद इनवर्टर के माध्यम से एसी करंट पैदा कर उसे इस्तेमाल में लाया जाता है.

इस यंत्र के माध्यम से बैल की एक घंटे की मेहनत से 5 घंटे 40 मिनट की बिजली पैदा की जा सकती है. बैलों के एक चक्कर में अल्टेरनेटर 1500 बार घूमता है. इस तरह बैटरी जल्दी चार्ज हो जाती है. एक घंटे में तैयार हुई बिजली से 0.5 HP पंप को 5 घंटे 40 मिनट तक चलाया जा सकता है और 14 हजार लीटर पानी निकाला जा सकता है. इसके अलावा इससे पैदा हुई बिजली से अन्य घरेलू काम भी किए जा सकते हैं.

चंद्राकर ने आगे बताया कि इसे बनाने में उतना ही खर्च आ रहा है, जितना कि एक किसान का सालभर का बिजली खर्च आता है. चंद्राकर के अनुसार, इस संयंत्र को बनाने में 23 हजार रुपये की लागत आती है. इसके अलावा यह प्रदूषण मुक्त भी है.


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