MEDIA and Political Solution

MEDIA and Political Solution Complete Solution on Media and Politics

30/10/2024

यह एक ऐसे व्यक्ति का यूपीआई नंबर है, जिसे इस दीवाली पर आपका छोटा सा सहयोग उसके जीवन को रोशन कर सकता है. इस नंबर Upi number-8969530105 पर जल्द सहयोग करें. आपकी छोटी रकम इसका बड़ा सहारा बनेगी.

इसे सब्सक्राइब करके उत्साहित करें...
07/03/2024

इसे सब्सक्राइब करके उत्साहित करें...

Share your videos with friends, family and the world

02/08/2016

हिंदी के कुछ बड़े अखबारों का भाषा और पत्रकारिता के इतिहास में बड़ा नाम रहा है। लेकिन उन्हीं अखबारों में इन दिनों खबरों में इस्तेमाल किए जा रहे कुछ शब्द बेहद खटकते हैं..उन पर लिखने की काफी दिनों से सोच रहा था, लेकिन आज रहा नहीं गया तो लिख ही दे रहा हूं..जैसे एक अखबार में अक्सर लिखा रहता है केंद्रीय विदेश मंत्री, केंद्रीय संचार मंत्री, केंद्रीय रक्षा मंत्री और केंद्रीय रेल मंत्री.. अब लिखने वाले को कौन समझाए कि भइया या बहन जी...केंद्र में ही विदेश, रक्षा, संचार और रेल मंत्री होते हैं..क्या भारत के किसी राज्य ने भी विदेश, रक्षा, संचार और रेल मंत्री को भी शपथ दिलाई है..

08/04/2016

भोपाल के माधव राव सप्रे संग्रहालय से मासिक पत्रिका निकलती है आंचलिक पत्रकार...विशुद्ध पत्रकारिता पर केंद्रित ऐसी हिंदी में मुझे दूसरी पत्रिका कम ही दिखी है..जिसमें संपादन का सुचिंतित रूप दिखता है..इस पत्रिका को कम से कम हर हिंदी पत्रकार और पत्रकारिता के छात्रों को पढ़ना चाहिए..अल्प साधनों में प्रकाशित इस पत्रिका में सुरूचि और संस्कारपूर्ण पत्रकारिता के उदात्त- विराट परंपरा के अक्सर दर्शन होते हैं..पत्रिका के संपादक और मध्य प्रदेश के जाने-माने पत्रकार विजयदत्त श्रीधर जी इसके लिए साधुवाद के पात्र हैं..

25/03/2016

सूचना और संचार क्रांति के दौर में हम अर्धसत्य के दौर में जी रहे हैं..सोशल मीडिया हो या मुख्यधारा का मीडिया..ज्यादातर लोगों के अपने-अपने सत्य हैं, कुछ उसी तर्ज पर जैसे पुरानी कहानी में अंधों के लिए हाथी का सच था..जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय की घटना हो या हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय का कुचर्चित रोहित बेमुला आत्महत्याकांड..या कोई मोहल्लास्तरीय घटना..लोगों के सत्य अलग-अलग हैं..मुकम्मल सच कहीं नहीं है..हर घटना का कोई एक पक्ष कोई अपने तईं पेश कर रहा है..तो कोई अपनी तरह से... इसके बावजूद विवेकवान इसके बावजूद पूरा सत्य जान-समझ ही लेते हैं.. लेकिन ऐसा तभी होता है,जब किसी एक पक्ष को भी पेश करते वक्त उसका संदर्भ भी बताया जाय..दुर्भाग्यवश अर्धसत्य के इस दौर में संदर्भ भी या तो बताए नहीं जा रहे या फिर गलत बताए जा रहे हैं..तो क्या यह मान लिया जाय कि मुकम्मल सत्य को छिपाने और अपने हित में अपनी हकीकत पेश करने का दौर आ गया है...लगता तो ऐसा ही है..इसीलिए कम से कम पढ़ा-लिखा वर्ग गहरे अविश्वास के साथ जिंदगी गुजार रहा है..हर दूसरे पढ़े-लिखे व्यक्ति का भरोसा पहले वाले की नजर में या पहले वाले का दूसरे की निगाह में कम हुआ है..अब सवाल यह है कि क्या इसी माहौल में अब एकता के सूत्र का पाठ पढ़ेंगे..आगे बढ़ेंगे...शुक्र है..जनता का एक बड़ा वर्ग..जिसे आप अनपढ़-अनगढ़ मान सकते हैं..जिंदगी में लगातार जूझ रहे तमाम झंझावातों के बावजूद वह इस कुपाठ, अर्धसत्य और अविश्वास से नागर समाज की तुलना में कहीं ज्यादा दूर है..और उम्मीद की किरण भी वही है..क्या आप इसे नहीं मानते...

06/03/2016

We are the group of Media and Political Professionals..We provide complete media and political solution with out expert views to company and political party and personality...

Address

Delhi
110016

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when MEDIA and Political Solution posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Business

Send a message to MEDIA and Political Solution:

Share