23/03/2019
जयगुरुदेव समाचार
23 मार्च 2019
जयगुरुदेव आश्रम, मथुरा में चल रहा ‘‘जयगुरुदेव होली सत्संग-समारोह आज का दृश्य अभूतपूर्व था। मेला-मैदान झण्डे के साथ श्रद्धालुओं से अटा पड़ा हुआ था। ऐतिहासिक मुक्ति दिवस महापर्व का मौका अद्भुत, अलौकिक, अकल्पनीय था। श्रद्धालु अपने-अपने घरों की ओर लौटने लगे हैं। ऐतिहासिक महापर्व के मौके पर देश के अमर सपूतों, सरदार भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
संस्था के महामन्त्री बाबूराम ने बताया कि देशभर से जुटे बाबा जयगुरुदेव जी महाराज के अनुयायियों में मुक्ति दिवस महापर्व को लेकर खासा उत्साह था, जो आज प्रातः कालीन बेला के सत्संग में पूरी तरह दिखाई दिया। अपने-अपने कैम्पों से जयगुरुदेव झण्डे लेकर मेला-मैदान की तरफ बढ़ते गुरु भक्तों का रेला प्रवेश मार्गों को ठसाठस जाम कर दिया। महोत्सव की झलक जयगुरुदेव झण्डे से अटे-पड़े मेला-मैदान में दिखाई पड़ रही थी। पूज्य पंकज जी महाराज के मंच पर पधारने ही जन समुद्र ‘‘जयगुरुदेव नारों’’ का उद्घोष कर भव्य स्वागत किया। पूज्य पंकज जी महाराज ने आश्रम पर उमड़े आस्था, श्रद्धा और भक्ति के जन-सैलाब को सत्संग सुनाते हुए शाकाहार, सदाचार, मद्य-निषेध, चरित्र-उत्थान, अच्छे समाज के निर्माण, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता-सफाई, गुरु-महिमा, जी जी प्रभु-प्राप्ति की साधना आदि विषयों पर प्रेरक व मार्ग दर्शक सन्देश सुनाया।
संस्था प्रमुख ने कहा कि सन्त-महात्म, फकीर कोई धर्म, मजहब, जाति-पाँति, पंथ-सम्प्रदाय बनाने नहीं आते। वह तो सबमें प्रेम-मुहब्बत करने, जीवात्माओं को जगाने, मालिक प्रभु से जीते जी मिलाने का काम करने के लिए आते हैं। सत्संग में किसी धर्म, मजहब, पूजा-पाठ, व्यक्ति विषेश की कोई निन्दा-आलोचना नहीं की जाती, बल्कि मालिक से मिलने का प्रेम, प्यार पैदा किया जाता। सत्संग वो जल है जिसमें कौवा स्नान करता है तो हंस बनकर निकलता है। सत्संग की जरूरत सबको है। सत्संग लौकिक, पारलौकिक लाभ देता, घर में सुमति आती, रगड़े-झगड़े खत्म होते, बरक्कत मिलती, बीमारियों और अन्य संकटों में मदद मिलती, जीवन के उद्देश्यों को समझने का मौका मिलता।
उन्होंने मुक्ति दिवस के महत्व को बताते हुए मुक्ति दिवस के इतिहास को बहुत दर्दिला इतिहास कहा। कहा कि ‘‘दुनिया पर आफत आनी थी, अपने सिर पर ओढ़ लिया।’’ इसी पंक्ति की चरितार्थ करते हुए बाबा जयगुरुदेव जी महाराज ने कठिन यातनाओं की धारा को झेला। उन्हें 29 जून 1975 को आपातकाल के दौरान गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। आगरा-बरेली, बैंगलोर, तिहाड़ जेल दिल्ली में रखा गया। 23 मार्च 1977 को तिहाड़ जेल से रिहा होने की खुशी में यह पर्व मनाया जाता है। प्रातःकाल जयगुरुदेव ध्वजारोहण के बाद प्रेमी 3 बजे तक व्रत रखते हैं। 30 मार्च तक मुक्ति दिवस सप्ताह के अन्तर्गत सत्संग, गोष्ठियों, शाकाहार, फेरियों, साधना शिविरों, विचार-गोष्ठियों आदि के आयोजन होते हैं। इस पर्व को दीपावली की तरह हर्षोल्लास के साथ दीप जलाकर मनाया जाता है।
बाबा जयगुरुदेव के उत्तराधिकारी ने कहा कि चरित्र मानव-धर्म की पूँजी है। चरित्र के अभाव में अच्छे संस्कार डालने की जरूरत है। बच्चे देश के भविष्य हैं। इनको सत्संग में लाना चाहिए ताकि इन पर अच्छे संस्कार पडें। उन्होंने 17 से 21 मई 2019 तक जयगुरुदेव आश्रम, मथुरा में पारम्परिक रूप से आयोजित परम पूज्य बाबा जयगुरुदेव जी महाराज के सातवें पावन वार्षिक भण्डारा में पधारने का लाभ लेने का पुनः सादर निमंत्रण दिया। इस मौके पर संस्था के महामन्त्री राष्ट्रीय उपदेशक एवं प्रवक्ता बाबूराम यादव, मेला प्रभारी चौधरी चरन सिंह, प्रबन्धक सन्त राम चौधरी, मंत्री विनय कुमार सिंह, दिल्ली प्रदेशाध्यक्ष विजयपाल सिंह, बिहार प्रदेशाध्यक्ष मृत्युंजय झा, प्रबन्ध समिति के अनेक सदस्य सहित लाखों लोग उपस्थित रहे।