बाबा जयगुरूदेव जी

बाबा जयगुरूदेव जी JAY GURU DEV बाबा जयगुरूदेव जी

आगे समय अच्छा नहीं है, भारी मुसीबतें आयेंगी। सभी लोगों से मेरी
प्रार्थना है कि सभी लोग शाकाहारी हो जायें। मांस, अण्डा, मछली, शराब आदि
का सेवन करना बन्द कर दें वरना ऐसी-ऐसी बिमारियां आ रही हैं जिनका तुमने
कभी नाम भी नहीं सुना। कुदरत तैयार खड़ी है और कुछ करना चाहती है किन्तु
महात्मा उसको रोके हुए हैं। जरा सी ढील देने पर त्राहिमाम्-त्राहिमाम्
मचने लगेगा चाहे वो भूकम्प हो अथवा सुनामी हो।

रघुवर जैसा और ना कोईसीता की समता नहीं होईजो करे पराजित कान्ति कोटी रति काम कीहम कथा सुनाते राम शक्ल गुणधाम कीये रामायण ह...
04/08/2020

रघुवर जैसा और ना कोई
सीता की समता नहीं होई
जो करे पराजित कान्ति कोटी रति काम की
हम कथा सुनाते राम शक्ल गुणधाम की
ये रामायण है पुण्य कथा श्री राम की


आप महान है।


https://t.co/nllKILJkAg

21/03/2020

जरूरी सूचना: कोरोना वायरस के खिलाफ आज सुबह 7 बजे से शुरू होगा जनता कर्फ्यू कृपया सब सहयोग दे। कृपया इस संदेश को सभी भाई बहनों तक पहुँचाने मै सहयोग दे। please share.

15/12/2019

जयगुरुदेव समाचार
जयगुरुदेव नगर (मथुरा)
9 दिसम्बर 2019।
जयगुरुदेव धर्म प्रचारक संस्था, मथुरा द्वारा संचालित जयगुरुदेव बाल्य बालक विद्यादान उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, मथुरा में ‘‘ज्ञान विज्ञान एवं कला महोत्सव 2019’’ के अन्तर्गत विज्ञान एवं कला प्रदर्शनी का आयोजन दि. 5 से 9 दिसम्बर तक किया गया। पांच दिवसीय इस प्रदर्शनी का उद्घाटन संस्था के महामन्त्री बाबूराम यादव ने किया। जयगुरुदेव मेले में पधारे लाखों श्रद्धालुओं ने इस प्रदर्शनी का अवलोकन किया। अनेक विद्यालयों के छात्र-छात्राओं, शिक्षकों व सम्मानित व प्रबुद्ध वर्ग के लोगों ने भी प्रदर्शनी को देखा। इस प्रदर्शनी में विज्ञान, कला, गणित, पेण्टिंग आदि अनेक विषयों व विधाओं के माॅडल प्रस्तुत किये। जयगुरुदेव विद्यालय के होनहार छात्र-छात्राओं, बाल वैज्ञानिकों ने अनेक सराहनीय माॅडलों का विद्यालय के अध्यापक डा. मनोज कुमार, अरविन्द सिंह के मार्गदर्शन में प्रदर्शन किया।
विद्यालय के प्रबन्धक चै. चरन सिंह एडवोकेट, संस्था के महामन्त्री बाबूराम यादव, जयगुरुदेव आश्रम मथुरा के प्रबन्धक सन्त राम चैधरी, प्रबन्ध समिति के अनेेक सदस्यों के साथ प्रदर्शनी का अवलोकन किया। पदाधिकारियों ने बच्चों के शोध, मेधाशक्ति, अन्वेषण सम्बन्धी माॅडलों की भूरि-भूरि प्रशंसा की। छात्र-छात्राओें के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। प्रदर्शनी में शामिल कौशल की ‘‘मल्टी परपज मशीन’’, विवेक कुमार का आॅडरलेस ट्वायलेट, शहरी बाबू की पाॅलीथीन पंचिंग मशीन, श्यामनाथ वर्मा की कील होल्डिंग मशीन, गिरधर सिंह की ‘‘चूना मशीन’’ आदि बहुत प्रशंसनीय रहीं। विद्यालय के प्रबन्धक चै. चरन ंिसंह ने बच्चों के उत्साहबर्धन के लिये प्रशास्ति पत्र एवं पुरस्कार देने की घोषणा दिया। इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य उमाशंकर सिंह यादव, डा. मनोज कुमार, अरविन्द कुमार, शोभाराम, स्वतंत्र कुमार अध्यापकगण आदि उपस्थित रहे।

09/11/2019

अयोध्या पर सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय ने आक्रांता के घाव को भरने ,दाग़ मिटाने का काम किया है. यह भारत का विजय दिवस है . संप्रदायिकता और छद्म धर्म निरपेक्षता की हार हुई है .
उन सब कारसेवकों को नमन जिहोंने राम मंदिर के लिए बलिदान दिया।

जय श्री राम🚩🚩🚩

20/09/2019

जयगुरुदेव समाचार
मथुरा, 20 सितम्बर 2019
ईश्वर भक्ति की प्रेरणा देने, मद्यनिषेध सामाजिक समरसता लाने की प्रेरणा देने व अच्छे समाज के निर्माण के लक्ष्य से 25 अगस्त को मथुरा से 62 दिवसीय आध्यात्मिक, वैचारिक जनजागरण यात्रा के साथ जयगुरुदेव धर्म प्रचारक संस्था। यहाँ आयोजित सत्संग समारोह में प्रवचन करते हुए उन्होंने कहा चरित्र उत्थान मानव की सबसे बड़ी पूंजी है। चरित्र के बिना मानव का कुछ अस्तित्व नहीं इसलिए चरित्र-उत्थान की नितान्त आवश्यकता है। हम चाहते हैं कि सबमें भाईचारे का विकास हो। लोग गृहस्थ आश्रम में रहकर मेहनत और ईमानदारी से अपनी रोजी रोटी कमायें। थोड़ा सा समय निकालकर प्रभु का भजन, खुदा की इबादत करें। आंखों में मां-बहन, बेटी की पहचान कायम रखें। इससे हमारा समाज अच्छा चलेगा और आत्म-कल्याण भी होगा।
सत्संग में उन्होंने मानव शरीर की प्राप्ति को परमात्मा का सबसे बड़ा वरदान बताया, चैरासी लाख योनियों में मानव सर्वश्रेष्ठ है। इसमें प्रभु के पास जाने का दरवाजा है। सारी मानव आत्मायें शब्द वेदवाणी पर उतारकर लाई गईं। जब शब्द का आधार आत्माओं का छूट गया तो इन्हें बोध नहीं रहा कि हम कहां से आये और कहां जायेंगे। इस कलयुग में प्रभु की बहुत बड़ी कृपा हुई कि सन्त धरती पर पधारे और उन्होंने सुरत-शब्द योग (नाम योग) का रास्ता खोला। जिसमें घर-बार छोड़ने की जरूरत नहीं है। इसी प्रभु प्राप्ति के सबसे सरल मार्ग को युग महापुरुष परम सन्त बाबा जयगुरुदेव जी महाराज ने बताया और उनसे बीसों करोड़ लोग जुड़कर शाकाहारी-सदाचारी बनकर प्रभु का भजन कर रहे हैं।
पंकज जी महाराज ने बाबा जयगुरुदेव जी महाराज के वचनों को याद करते हुए कहा बाबा जी ने आवाज लगाई ऐ इन्सानों! तुम अपने दीन-ईमान पर वापस आ जाओ। उस परमात्मा की याद करो उस खुदा की सच्ची इबादत करो ताकि तुम्हारी रुह दोजख में जाने से बच जाये। सन्त, महात्मा जीवों को समझाते हैं कि इस मनुष्य शरीर में साधना का धाम है। इसमें प्रभु के देश से आने वाली आकाशवाणियाँ, वेदवाणियाँ, कलमा, आयतें सुनने का कान है और रुहानी सृष्टि को देखने की आंख हैं। जब पहुँचे हुए सन्त-महात्मा, फकीर मिल जायेंगे तो उसे देखने, सुनने की युक्ति बता देंगे।
उन्होंने कहा कि सबसे पहले इन्सान बनें। मानवतावादी बनें। प्रभु ने केवल एक इन्सान बनाया। इन्सानियत सबसे बड़ा धर्म, मजहब है। अज्ञानता में हमने बड़ी लड़ाईयाँ लड़ लीं। इससे नफरत के सिवाय हमको क्या मिला? पंकज जी महाराज ने लोगों को प्रभु-प्र्राप्ति का सरल रास्ता सुरत-शब्द योग (नाम योग) का रास्ता बताया। सुमिरन, ध्यान, भजन की तरकीब समझाया। रुहानी मण्डलों की गहरी व्याख्या किया।
महाराज जी ने जयगुरुदेव आश्रम, मथुरा में आयोजित होने वाले आगामी 4 से 8 दिसम्बर 2019 तब दादा गुरु जी महाराज के 71वें पावन वार्षिक भण्डारा सत्संग-मेला में भाग लेने के लिए सभी को सादर निमंत्रण दिया। सत्संग में भाग लेकर लाभ उठाने दया, दुआ, बरकत, आशीर्वाद लेने की अपील की।
इस अवसर पर संस्था के महामंत्री बाबूराम यादव, उ.प्र. संगत के प्रान्तीय अध्यक्ष सन्त राम चैधरी, विहार प्रान्त के अध्यक्ष मृत्युंजय झा, दिल्ली के प्रान्तीय अध्यक्ष विजयपाल सिंह राठौर, प्रबन्ध समिति के सदस्य अनूप कुमार ंिसंह, सतीश उपाध्याय, बी.बी. दोहरे, मुहम्मद ईसा तथा बाराबंकी संगत जिलाध्यक्ष रामचन्द्र यादव, उपाध्यक्ष अवध नरेश सिंह, ब्लाॅक अध्यक्ष सूरतगंज विनोद कुमार शुक्ला सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन उपस्थित रहे।

06/07/2019
जयगुरुदेव समाचारमथुरा, 10 अप्रैल 2019'‘कर नैंनों दीदार महल में प्यारा है’’यह शब्द हैं आदि प्रकट सन्त कबीर साहब का। इस शब...
11/04/2019

जयगुरुदेव समाचार
मथुरा, 10 अप्रैल 2019

'‘कर नैंनों दीदार महल में प्यारा है’’

यह शब्द हैं आदि प्रकट सन्त कबीर साहब का। इस शब्द के द्वारा उन्होंने शरीर के चक्रों और वहाँ पर स्थित देवताओं, धनियों का जिक्र किया है। उनके स्वरूप, शब्द तथा विशेषताओं पर भी प्रकाश डाला है। उनके अनुसार शरीर एक चेतन ईश्वरीर मन्दिर है, कुदरती काबा है। इसी प्रकार विख्यात परम सन्त बाबा जयगुरुदेव जी महाराज ने मानव-शरीर को परमात्मा का बनाया हुआ चेतन परमात्मिक मन्दिर बताया है। इसी जिस्मानी मस्जिद में आवाजे-आसमानी लगातार उतरती है। वेदवाणी, आकाशवाणी हो रही है। अन्तर इतना है कि उन गगन वाणियों, अनहद नादों को शारीरिक नामों से नहीं सुना जा सकता है। कुदरती तौर पर सबके पास मौजूद जीवात्मा के तीसरे कान से सुनाई पड़ती है। परासृष्टि को देखा भी जा सकता है। आँख, कान को वही खोली सकते हैं, जो गुरु कृपा लेकर स्वयं की दिव्यदृष्टि खोल चुके हों।’’
यह उद्गार जयगुरुदेव धर्म प्रचारक संस्था मथुरा के महामन्त्री, राष्ट्रीय उपदेशक एवं प्रवक्ता माननीय श्री बाबूराम जी के, जो उन्होंने आज अपने नेपाल राष्ट्र के दौरे के दौरान कोटईमाई, बैरघाट, रूपदेही में एक सत्संग के दौरान व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि सेवा के लिए परम सन्त बाबा जयगुरुदेव जी महाराज ने अपना सम्पूर्ण जीवन मानवता की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। आजीवन अथम परिश्रम कर देशभर में बहुत बड़ा जागरण किया। जो विश्व कीर्तिमान परम पूज्य बाबा जयगुरुदेव जी ने स्थापित कर दिया, करोड़ों लोगों को शाकाहारी, सदाचारी, नशामुक्त बनाकर असाधारण काम किया, उस रिकार्ड को कोई साधारण व्यक्ति नहीं तोड़ सकता।

विशेष : 17 से 21 मई 2019 तक मथुरा में जयगुरुदेव आश्रम पर आयोजित परम पूज्य बाबा जयगुरुदेव जी महाराज के सातवें वार्षिक भण्डारा सत्संग-मेला में भाग लेने व लाभ उठाने का निमन्त्रण भी दिया।

जयगुरुदेव समाचार23 मार्च 2019जयगुरुदेव आश्रम, मथुरा में चल रहा ‘‘जयगुरुदेव होली सत्संग-समारोह आज का दृश्य अभूतपूर्व था। ...
23/03/2019

जयगुरुदेव समाचार
23 मार्च 2019
जयगुरुदेव आश्रम, मथुरा में चल रहा ‘‘जयगुरुदेव होली सत्संग-समारोह आज का दृश्य अभूतपूर्व था। मेला-मैदान झण्डे के साथ श्रद्धालुओं से अटा पड़ा हुआ था। ऐतिहासिक मुक्ति दिवस महापर्व का मौका अद्भुत, अलौकिक, अकल्पनीय था। श्रद्धालु अपने-अपने घरों की ओर लौटने लगे हैं। ऐतिहासिक महापर्व के मौके पर देश के अमर सपूतों, सरदार भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
संस्था के महामन्त्री बाबूराम ने बताया कि देशभर से जुटे बाबा जयगुरुदेव जी महाराज के अनुयायियों में मुक्ति दिवस महापर्व को लेकर खासा उत्साह था, जो आज प्रातः कालीन बेला के सत्संग में पूरी तरह दिखाई दिया। अपने-अपने कैम्पों से जयगुरुदेव झण्डे लेकर मेला-मैदान की तरफ बढ़ते गुरु भक्तों का रेला प्रवेश मार्गों को ठसाठस जाम कर दिया। महोत्सव की झलक जयगुरुदेव झण्डे से अटे-पड़े मेला-मैदान में दिखाई पड़ रही थी। पूज्य पंकज जी महाराज के मंच पर पधारने ही जन समुद्र ‘‘जयगुरुदेव नारों’’ का उद्घोष कर भव्य स्वागत किया। पूज्य पंकज जी महाराज ने आश्रम पर उमड़े आस्था, श्रद्धा और भक्ति के जन-सैलाब को सत्संग सुनाते हुए शाकाहार, सदाचार, मद्य-निषेध, चरित्र-उत्थान, अच्छे समाज के निर्माण, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता-सफाई, गुरु-महिमा, जी जी प्रभु-प्राप्ति की साधना आदि विषयों पर प्रेरक व मार्ग दर्शक सन्देश सुनाया।
संस्था प्रमुख ने कहा कि सन्त-महात्म, फकीर कोई धर्म, मजहब, जाति-पाँति, पंथ-सम्प्रदाय बनाने नहीं आते। वह तो सबमें प्रेम-मुहब्बत करने, जीवात्माओं को जगाने, मालिक प्रभु से जीते जी मिलाने का काम करने के लिए आते हैं। सत्संग में किसी धर्म, मजहब, पूजा-पाठ, व्यक्ति विषेश की कोई निन्दा-आलोचना नहीं की जाती, बल्कि मालिक से मिलने का प्रेम, प्यार पैदा किया जाता। सत्संग वो जल है जिसमें कौवा स्नान करता है तो हंस बनकर निकलता है। सत्संग की जरूरत सबको है। सत्संग लौकिक, पारलौकिक लाभ देता, घर में सुमति आती, रगड़े-झगड़े खत्म होते, बरक्कत मिलती, बीमारियों और अन्य संकटों में मदद मिलती, जीवन के उद्देश्यों को समझने का मौका मिलता।
उन्होंने मुक्ति दिवस के महत्व को बताते हुए मुक्ति दिवस के इतिहास को बहुत दर्दिला इतिहास कहा। कहा कि ‘‘दुनिया पर आफत आनी थी, अपने सिर पर ओढ़ लिया।’’ इसी पंक्ति की चरितार्थ करते हुए बाबा जयगुरुदेव जी महाराज ने कठिन यातनाओं की धारा को झेला। उन्हें 29 जून 1975 को आपातकाल के दौरान गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। आगरा-बरेली, बैंगलोर, तिहाड़ जेल दिल्ली में रखा गया। 23 मार्च 1977 को तिहाड़ जेल से रिहा होने की खुशी में यह पर्व मनाया जाता है। प्रातःकाल जयगुरुदेव ध्वजारोहण के बाद प्रेमी 3 बजे तक व्रत रखते हैं। 30 मार्च तक मुक्ति दिवस सप्ताह के अन्तर्गत सत्संग, गोष्ठियों, शाकाहार, फेरियों, साधना शिविरों, विचार-गोष्ठियों आदि के आयोजन होते हैं। इस पर्व को दीपावली की तरह हर्षोल्लास के साथ दीप जलाकर मनाया जाता है।
बाबा जयगुरुदेव के उत्तराधिकारी ने कहा कि चरित्र मानव-धर्म की पूँजी है। चरित्र के अभाव में अच्छे संस्कार डालने की जरूरत है। बच्चे देश के भविष्य हैं। इनको सत्संग में लाना चाहिए ताकि इन पर अच्छे संस्कार पडें। उन्होंने 17 से 21 मई 2019 तक जयगुरुदेव आश्रम, मथुरा में पारम्परिक रूप से आयोजित परम पूज्य बाबा जयगुरुदेव जी महाराज के सातवें पावन वार्षिक भण्डारा में पधारने का लाभ लेने का पुनः सादर निमंत्रण दिया। इस मौके पर संस्था के महामन्त्री राष्ट्रीय उपदेशक एवं प्रवक्ता बाबूराम यादव, मेला प्रभारी चौधरी चरन सिंह, प्रबन्धक सन्त राम चौधरी, मंत्री विनय कुमार सिंह, दिल्ली प्रदेशाध्यक्ष विजयपाल सिंह, बिहार प्रदेशाध्यक्ष मृत्युंजय झा, प्रबन्ध समिति के अनेक सदस्य सहित लाखों लोग उपस्थित रहे।

04/01/2019

जयगुरुदेव समाचार
जयगुरुदेव नगर, 2 जनवरी 2019
जयगुरुदेव धर्म प्रचारक संस्था, मथुरा के राष्ट्रीय महामन्त्री, राष्ट्रीय उपदेशक एवं प्रवक्ता माननीय श्री बाबूराम जी ने आज सायंकालीन बेला में नियमित प्रार्थना एवं सामूहिक साधना के बाद दर्शन मंच से सत्संग सुनाते हुए कहा कि संसार में परमार्थ के राहगीर को बड़ी सावधानी और चौकसी से रहना पड़ता है। यहाँ कोई भी सच्चा हमदर्द नहीं। हमारा सच्चा साथी, हितैषी और मददगार है तो हमारा सतगुरु। सतगुरु के बराबर कोई सगा नहीं। मानव की स्वयं के सुख की चिन्ता करने की भावना उसे पशुवत् बनाती है। यही पशु प्रवृत्ति है कि आप आप ही चरे, वही मनुष्य है कि मनुष्य के लिए मरै। मनुष्यता के गुणों का होना मानव बनने के लिए आवश्यक है।
राष्ट्रीय उपदेशक ने कहा कि भारतीय संस्कृति की यह परम्परा रही है कि सबको सुखी, निरोगी, बन्धुवत् संसार को देखने के महान् गुणों ने हमें विश्व का मार्गदर्शक बनाया। सार्वजनिक सुख सौहार्द और कल्याण की भावना हमारी उच्चकोटि संस्कृति की विरासत है। ‘‘सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः, सर्वे भद्राणि पश्यन्तुः मा कश्चिद दुःखभाग्भवेत।’’ यानि सभी सुखी हों, सभी निरोगी, बन्धुवत् दीख पड़ें। दुःख न सताये कोई किसी को, न ही कोई चीख पड़े।। यही महारी गरिमा गौरव, हमको याद कराती है। ऊँचे दर्जे के चिन्तन की दुनिया गुणगान गाती है।’’ भजन करने वाले का ही चिन्तन इतना महान् हो सकता है।
संस्था प्रवक्ता ने कहा कि आज जिस तरह से युवा पीढ़ी अपनी श्रम, शक्ति और अमूल्य समय की बर्बादी पर तुली है, यह एक घोर चिन्ता का विषय है। माँसाहार और नशों की बढ़ती प्रवृत्ति सबके लिए विनाश नुकसान देय है। नये बच्चों में अच्छे संस्कार पैदा किये जायें तभी इन्हें विनाश की बर्बादी से बचाया जा सकता है।

जयगुरुदेव समाचार18 दिसम्बर 2018जयगुरुदेव आश्रम में चल रहे पाँच दिवसीय वार्षिक भण्डारा सत्संग-मेला के चौथे दिन राष्ट्रीय ...
18/12/2018

जयगुरुदेव समाचार
18 दिसम्बर 2018
जयगुरुदेव आश्रम में चल रहे पाँच दिवसीय वार्षिक भण्डारा सत्संग-मेला के चौथे दिन राष्ट्रीय उपदेशक श्री सतीश चन्द जी और श्री बाबूराम जी ने श्रद्धालुओं को सम्बोधिक किया। उपदेशक सतीश जी ने कहा कि हम गीता, रामायण, पुराण को पढ़ते हैं, सतलोक धाम कहाँ हैं, लोगों को पता नहीं हैं। सारी जीवात्मायें सतलोक से नीचे उतारी गईं हैं। काल प्रभु ने पाप-पुण्य का संविधान बनाकर जीवों को फँसा लिया। जिसके कारण जीवात्मायें अपने घर सतलोक वापस नहीं जा सकती हैं। सन्त, फकीर सतलोक से मनुष्य शरीर में आकर जीवों को समझाते और चेताते हैं कि यह आपका देश नहीं है और न ही सामान आपका है। काल प्रभु ने किराये पर कुछ समय के लिए मनुष्य शरीर और इसकी रक्षा के लिए सामान दिया है। मौत के समय शरीर यहाँ गिर पड़ेगा और ये सामान यहीं पड़ा रहेगा। यह सब माया की छाया है। महापुरुष सत्संग-वचन सुना-सुनाकर जीवों को अपने पास खींच लेते हैं और सद्मार्ग पर लगा देते हैं। धरती पर कितनी जीवात्मायें है, यह केवल सन्त जानते हैं। सतलोक में एक ही ऋतु रहती है। कभी अंधेरा नहीं होता, वहाँ किसी प्रकार की कोई तकलीफ नहीं है। वह आनन्द का देश है। सन्त रैदास ने उसे बेगमपुरा कहा है। नामदान के समय सन्त सतगुरु जीवात्मा की डोरी अपने हाथ में ले लेते हैं। धीरे-धीरे सत्संग सुनाकर, सेवा कराकर और अपनी दया से जीवों को अपने घर सतलोक पहुँचा देते हैं।
उन्होंने आगे कहा गुरु आदेश पर खर्च किया गया धन और की गई सेवा बरक्कत बरसाती है। यदि लोगों को बरकत नहीं मिलती तो विभिन्न प्रान्तों से लोग अपना किराया-भाड़ा खर्च करके नहीं आते। इस संसार में सब मन का बखेड़ा है। मन से गुरु वचनों को बराबर याद करते रहने से जीव की सम्हाल होती है।
राष्ट्रीय उपदेशक बाबूराम ने बताया कि भारत-भूमि प्राचीनकाल से धार्मिक और आध्यात्मिक शिक्षा का केन्द रहा है। सतलोक की सीधी किरणें भारत-भूमि पर पड़ती हैं। जिसका केन्द्र वाराणसी है। भारत देश विश्व में अपने आदर्शों ओर मानवीय मूल्यों के लिए प्रसिद्ध रहा। इसलिए इसे विश्व गुरु का दर्जा प्राप्त है। बाबा जयगुरुदेव जी महाराज द्वारा चलाये गए शाकाहार-सदाचार,. मद्यनिषेध की वैचारिक क्रान्ति धीरे-धीरे विश्वव्यापी हो जायेगी। इसमें सभी लोगों को सतत् लगे रहना है, जिससे एक अच्छे समाज का निर्माण हो सके। जितनी भी क्रान्तियाँ हुईं उनकी सफलता के पीछे किसी न किसी ऋषि, मुनि, तपस्वियों, त्यागियों का हाथ रहा। दादा गुरु जी और बाबा जयगुरुदेव जी महाराज ने सत्संग सुनाने के लिए जमीन तैयार किया।

*जयगुरुदेव समाचार**14 दिसम्बर 2018*जयगुरुदेव धर्म प्रचारक संस्था, मथुरा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूज्य पंकज जी महाराज ने अपन...
15/12/2018

*जयगुरुदेव समाचार*
*14 दिसम्बर 2018*
जयगुरुदेव धर्म प्रचारक संस्था, मथुरा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूज्य पंकज जी महाराज ने अपने एक सन्देश में कहा कि देश-दुनिया में प्रेम-मुहब्बत पैदा करने वाल, साम्प्रदायिक सद्भाव की स्थापना करने वाली, मानव-धर्म, मानव-कर्म, चरित्र-उत्थान एवं अच्छे समाज के निर्माण की शिक्षा के प्रचार की नितान्त आवश्यकता है। यह शिक्षा शाकाहार-सदाचार और मद्य-निषेध की भावना जगाने पर ही संभव है। जब तक लोगों का खान-पान शुद्ध नहीं होगा, वैचारिक पवित्रता असंभव है।
बाबा जयगुरुदेव जी महाराज के उत्तराधिकारी ने कहा कि मानव-समाज में हिंसा की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। नशों की गिरफ्त में नयी पीढ़ी फँसती जा रही है। जब विकृति पैदा करने वाला आहार किया जाएगा तो बुद्धि स्वतः पशुवत् हो जायेगी। मेरे गुरु महाराज परम सन्त बाबा जयगुरुदेव जी महाराज कहा करते थे कि इन्सान जब पशुवृत्ति भोजन करेगा, तो उसकी बुद्धि-विचार स्वतः पशुवत् हो जायेंगे। अशुद्ध आहार से न केवल मन, बुद्धि, चित्त और अन्तःकरण बल्कि जीवात्मा भी दूषित हो जाती है। गन्दे स्थान पर परमात्मा कैसे उतरेगा?
बाबा जयगुरुदेव जी महाराज के परम भक्त ने कहा कि कोई भी पूजा, उपासना, भक्ति, इबादत बिना शाकाहार अपनाये संभव नहीं है। जब आदमी शाकाहारी, सदाचारी बनकर पूजा-भक्ति करेगा, तभी उसकी पूजा स्वीकार होगी। अखाद्य वस्तुओं के सेवन से जब शरीर अशुद्ध हो जायेगा तो पूजा का फल कैसे मिलेगा? जब हम मुर्दा छूते, जलाते हैं तो स्नान करते हैं। पशु-पक्षियों का मुर्दा मनुष्य शरीर रूपी मन्दिर, मस्जिद में डाल लिया तो हम अपवित्र हो गये। अपवित्र शरीर से भक्ति नहीं हो सकती। उन्होंने सबसे शाकाहार अपनाने और नशामुक्ति जीवन जीने की अपील दुहराई।
जयगुरुदेव आश्रम, मथुरा पर आयोजित होने वाले पूज्य पाद दादा गुरु जी महाराज के 70 वें पावन वार्षिक भण्डारे की तैयारियाँ पूर्ण हैं। आश्रम व मेला परिसर में चहल-पहल होने लगी है। निरन्तर सत्संग-श्रद्धालुओं का आना जारी है। आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आवासीय व्यवस्था की गई है। भोजन के लिए लंगर-भण्डारे आरम्भ हो गये हैं। आश्रम की ओर से तैयार की गई व्यवस्थाओं को जिम्मेदार सेवादारों से सम्भाल लिया है। आश्रम के सभी सेवा-विभाग मुस्तैदी से सेवा कार्यों में लगे हैं और चौबीसों घण्टे सेवा के लिए तैयार हैं। यह कार्यक्रम 15 से 19 दिसम्बर 2018 तक चलेगा। पूजन 16 दिसम्बर की मध्यरात्रि में होगा और 17 दिसम्बर को पावन भण्डारा पर्व होगा। संस्थाध्यक्ष पूज्य पंकज जी महाराज का मुख्य सत्संग भी 17 दिसम्बर को प्रातः 8 बजे से होगा।

जयगुरुदेव समाचार13 दिसम्बर 2018जयगुरुदेव धर्म प्रचारक संस्था मथुरा एवं जयगुरुदेव धर्म प्रचारक ट्रस्ट मथुरा के संयुक्त तत...
14/12/2018

जयगुरुदेव समाचार
13 दिसम्बर 2018
जयगुरुदेव धर्म प्रचारक संस्था मथुरा एवं जयगुरुदेव धर्म प्रचारक ट्रस्ट मथुरा के संयुक्त तत्वावधान में जयगुरुदेव आध्यात्मिक सत्संग मेले का परम्परागत आयोजन (70वां पावन वार्षिक भण्डारा महापर्व) दि. 15 से 19 दिसम्बर 2018 तक जयगुरुदेव नाम योग साधना मन्दिर पर होगा। यह भण्डारा महापर्व विख्यात सन्त बाबा जयगुरुदेव जी महाराज के गुरु पूज्यपाद स्वामी घूरेलाल जी महाराज, जिन्हें संगत के लोग ‘दादा गुरु जी महाराज’ के नाम से पुकारते हैं, की धरती पर अवतरण एवं उनके निजधाम गमन की दुर्लभ तिथि मार्गशीर्श (अगहन) शुक्ल दशमी के अवसर पर मनाया जाता है। भण्डारे का मुख्य पूजन कार्यक्रम 16/17 दिसम्बर की मध्य रात्रि से शुरु होकर 19 दिसम्बर तक चलता रहेगा। भण्डारे की तिथि 17 दिसम्बर को है। संस्थाध्यक्ष पूज्य पंकज जी महाराज का मुख्य सत्संग 17 दिसम्बर को प्रातः 8 बजे से होगा। शेष दिनों में उपदेशकों के सत्संग प्रवचन प्रातः 7.30 बजे व सायं 3.30 बजे से होंगे। इस अवसर पर प्रार्थना, सामूहिक साधना, पूजन, दर्षन, सत्संग गोष्ठियाँ एवं दहेज रहित विवाहों के आयोजन आदि विविध कार्यक्रम आयोजित होते हैं।
यह जानकारी जयगुरुदेव धर्म प्रचारक संस्था, मथुरा के महामन्त्री राष्ट्रीय उपदेषक एवं प्रवक्ता बाबूराम जी ने जयगुरुदेव धर्म प्रचारक ट्रस्ट मथुरा के पंजीकृत कार्यालय चिरौली सन्त आश्रम, कृष्णानगर मथुरा में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दी। उन्होंने बताया कि सन्तमत की राधास्वामी पंथ की परम्परा में सरायरोहिल्ला दिल्ली निवासी स्वामी गरीबदास जी महाराज के परम भक्त के रूप में एक महाविभूति पूज्यपाद स्वामी घूरेलाल जी महाराज (दादा गुरु जी) महाराज अवतरित हुये। इनके बड़े भाई स्वामी विष्णु दयाल जी महाराज स्वामी गरीबदास जी महाराज के शिष्य जो उच्च कोटि के विरक्त सन्त थे। स्वामी गरीबदास जी महाराज ने इन्हीं के सानिध्य व संभाल में दादा गुरु जी को सौंप दिया। वह विश्वविख्यात परम सन्त बाबा जयगुरुदेव जी महाराज के गुरु थे। वह बहुत सीधे-सादे गृहस्थ थे, सादगी से रहते थे। उनकी आंतरिक पहुँच और साधना के बारे में कुछ ही लोग जानते थे। उच्च आध्यात्मिक गति के धनी दादा गुरु जी की अलौकिक और रहस्यमयी तरीके से बाबा जयगुरुदेव की मुलाकात हुई। उन्होंने अथक परिश्रम और अकूत मेहनत के साथ, साधना की लगन से उच्चतम मुकाम हासिल किया। पूज्य दादा गुरु जी ने परम पूज्य बाबा जयगुरुदेव जी महाराज को आदेश दिया था कि जो दौलत मैनें तुम्हें दी है इसे अपने पास ही न रखना लोगों को बांट देना। जिसका बाबा जी ने जीवन पर्यन्त पालन किया। समाज-सुधार, व्यक्ति सुधार हेतु भारी जनजागरण किया और करोड़ो लोगों को शाकाहारी बनाकर उन्हें नशा मुक्त किया। अपराध व बुराईयों की गिरफ्त से निकलकर भगवत् भजन, खुदाई इबादत में लगाया। उन्होंने बताया कि पूज्यपाद ‘दादा गुरु जी’ महाराज की संसार में प्रकट होने और परलोक गमन की दुर्लभ तिथि मार्गशीर्ष (अगहन) शुक्ल दशमी है। इसी तिथि को वह जन्मे और संसार की इहलीला समाप्त की उसी पुण्य तिथि पर प्रतिवर्ष वार्षिक भण्डारा महापर्व, जयगुरुदेव आध्यात्मिक सत्संग मेला पारम्परिक रूप से मनाया जाता है। यह ब्रज क्षेत्र का ख्याति प्राप्त, मशहूर लक्खी मेला है। जिसमें भाग लेने के लिये देश के कोने-कोने से तथा पड़ोसी देश नेपाल से भी लाखों श्रद्धालु एवं आम जनता आती है। मेले में उमड़ने वाले जनशैलाब के मद्देनजर मेले की व्यवस्थायें की जाती हैं। महीनों पहले से तैयारियाँ शुरु होती है। सेवादार समूहों के साथ जिले-जिले की टोलियाँ आकर सेवा, श्रमदान करके पूरा परिसर ठीक करती हैं। डेरे, तम्बुओं व रावटियों आदि से जयगुरुदेव नगर बस जाता है जो विभिन्न वेशभूषा संस्कृतियों का संगम है। इस जयगुरुदेव आध्यात्मिक सत्संग मेला में ‘लघु’भारत का दर्शन होता है। उन्होंने बताया कि मेले की व्यवस्था के लिये प्रबन्ध तन्त्र की अनेक बैठकें हो चुकी हैं। सभी व्यवस्थाओं के व्यवस्थापक व सहव्यवस्थापक बनाये गये हैं, जो अपनी स्वयं सेवी सत्संगियों की टोलियों के साथ व्यवस्था संभालने में लगे हैं। आवास, पेयजल, भण्डारा, सुरक्षा, सफाई, स्वास्थ्य, शौचालय निर्माण, यातायात, पार्किंग, प्रकाश आदि की व्यवस्थायें लगभग पूरी हो चुकी हैं। कार्यकर्ता जी जान से जुटे हुये हैं। मेला प्रभारी चौधरी चरन सिंह एडवोकेट ने बताया कि अबकी बार जिलों-जिलों से अधिक लोगों के पधारने की सूचनायें मिल रही हैं। उसको ध्यान में रखकर जन सुविधायें स्थापित की जा रही है। प्रबन्धक सन्तराम चौधरी ने बताया कि मेले को 31 सेक्टरों में बाँटकर व्यवस्थायें की जा रही हैं। सभी व्यवस्थाओं के जिम्मेदार अपने-अपने विभागों को जिम्मेदारीपूर्वक संभाल रहे हैं। व्यवस्थायें अन्तिम चरण में हैं। लगभग 28 विभाग बनाये गये हैं। सारी व्यवस्थायें प्रशिक्षित सेवादारों के द्वारा नियंत्रित की जा रही हैं। संस्था के पदाधिकारियों ने आम जनता से सभी वर्ग, धर्म, जाति व मजहब के लोगों से सत्संग में पधारकर लाभ उठाने की अपील की है। इस अवसर पर संस्था के मंत्री विनय कुमार सिंह, प्रबन्ध समिति के सदस्य, भरत कुमार टी. मिस्त्री ‘नानक भाई’, अनूप कुमार सिंह, रोहिताश कुमार गुप्ता, सतीश उपाध्याय, अरुन कुमार, विजय प्रकाश श्रीवास्तव, आनन्द बहादुर सक्सेना, पी. सी. काले, माधव भाई पाटिल, बी. बी. दोहरे तथा सुभाष मास्टर, संजय शर्मा, रामपाल गुप्ता, डी. डी. शुक्ला, पी. सी. यादव, अनिल ठाकुर प्रवक्ता आदि उपस्थित रहे।

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