09/07/2024
1990 की घटना है....
असम से दो सहेलियाँ रेलवे की नौकरी में भर्ती हेतु गुजरात रवाना हुईं . रास्ते में एक स्टेशन पर गाड़ी बदलकर आगे का सफ़र उन्हें तय करना था,लेकिन पहली गाड़ी में कुछ लड़को ने उनसे अभद्रता की । इस वजह से अगली गाड़ी में तो कम से कम बाक़ी का सफ़र सुखद हो, यह आशा मन में रखकर भगवान से प्रार्थना करते हुए दोनों सहेलियाँ स्टेशन पर उतर गयीं। भागते हुए रिजरवेशन चार्ट तक वे पहुँचीं और चार्ट देखने लगीं.चार्ट देख दोनों परेशान और भयभीत हो गयीं क्योंकि उनका रिजर्वेशन कन्फर्म नहीं हो पाया था.
मायूस और न चाहते उन्होंने नज़दीक खड़े TC से गाड़ी में जगह देने के लिए विनती की. TC ने भी गाड़ी आने पर कोशिश करने का आश्वासन दिया....एक दूसरे को तसल्ली देते दोनों गाड़ी का इंतज़ार करने लगीं,अन्ततः गाड़ी आ ही गयी और दोनों जैसे तैसे कर गाड़ी में एक जगह बैठ गईं...अब सामने देखा तो क्या!
सामने दो पुरूष बैठे थे. पिछले सफ़र में हुई बदसलूकी कैसे भूल जाती…लेकिन अब वहाँ बैठने के अलावा कोई चारा भी नहीं था क्यों की उस डिब्बे में कोई और जगह ख़ाली भी नहीं थी।
गाडी निकल चुकी थी और दोनों की निगाहें TC को ढूंढ रही थी शायद कोई दूसरी जगह मिल जाये......कुछ समय बाद भीड़ को काटते हुए TC वहाँ पहुँच गया और कहने लगा…कहीं जगह नहीं है और इस सीट का भी रिजर्वेशन अगले स्टेशन से हो चुका है अतः आप कृपया अगले स्टेशन पर दूसरी जगह देख लीजिये.
यह सुनते ही दोनों के पैरो तले जैसे जमीन ही खिसक गयी क्यों की रात का सफ़र जो था.गाड़ी तेज़ी से आगे बढ़ने लगी . जैसे जैसे अगला स्टेशन पास आने लगा दोनों परेशान होने लगीं,लेकिन सामने बैठे पुरूष उनकी परेशानी के साथ भय की अवस्था को बड़ी बारीकी से देख रहे थे.
जैसे ही अगला स्टेशन आया दोनों पुरूष उठ कर खड़े हो गए और चल दिये....अब दोनों लड़कियो ने उनकी जगह पकड़ ली और गाड़ी निकल पड़ी कुछ क्षणों बाद वो दोनों पुरूष वापस आये और कुछ कहे बिना नीचे सो गए ।दोनों सहेलियाँ यह देख अचम्भित हो गयीं और डर भी रही थी. जिस प्रकार सुबह के सफ़र में हुआ उसे याद कर डरते सहमते वे भी सो गयीं.
सुबह चाय वाले की आवाज़ सुन नींद खुली. दोनों ने उन पुरूषों को धन्यवाद कहा तो उनमे से एक पुरूष ने कहा " बहन जी गुजरात में कोई मदद चाहिए हो तो जरुर बताना " ...अब दोनों सहेलियों का उनके बारे में धारणा बदल चुकी थी. खुद को बिना रोके एक लड़की ने अपनी बुक निकाली और उनसे अपना नाम और संपर्क लिख देने का आग्रह किया ...दोनों ने अपना नाम और पता बुक में लिखा और "हमारा स्टेशन आ गया है" ऐसा कह उतर गए और भीड़ में कही गुम हो गए !
दोनों सहेलियों ने उस बुक में लिखे नाम पढ़े वो नाम थे…..संघ के स्वंयसेवक #नरेंद्र_मोदी जी और #शंकर सिंह वाघेला जी......
वर्तमान में इस घटना की लेखिका General Manager of the centre for railway information system- Indian railway New Delhi में कार्यरत है और यह लेख
"The Hindu” नामक अंग्रेजी समाचारपत्र के पृष्ठ नंः 1 पर "A train journey and two names to remember " इस नाम से दिनांक 1 जून 2014 को प्रकाशित हुआ….
तो क्या आप अब भी ये सोचते है की हमने गलत #प्रधानमन्त्री चुना है ??