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06/04/2020

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26/07/2019

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07/05/2019

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"यारा तेरी यारी"एक छोटा सा गाँव...जंहा सब लोग आपस मे बड़े प्रेम से रहते थे...वैसे हर चिज गाँव से दूर थी..हर छोटी बड़ी चि...
23/10/2018

"यारा तेरी यारी"

एक छोटा सा गाँव...जंहा सब लोग आपस मे बड़े प्रेम से रहते थे...वैसे हर चिज गाँव से दूर थी..हर छोटी बड़ी चिजे शहर से लाना पड़ता था मगर गांव वाले किसी से कोई शिकायत किए खुशी खुशी शहर जाके अपने लिए वह चिजे लाते थे...बस सरकार ने एक काम चलाउ छोटा सा अस्पताल जरूर खोल दिया था.. उस छोटे से गाँव की सबसे अच्छी चिज और सुंदरता थी तो..तिन दोस्तों की दोस्ती...
राजेश, मोहीत और राज दुबे..वैसे ये छोटे थे मगर इनकी दोस्ती बेहद बड़ी थी, दोस्ती भी ऐसी की क्या कहे आपको...सुबह का नाश्ता एक दोस्त के घर मे दोपहर का खाना दूसरे के घर मे रात का खाना तिसरे के घर में । और वहीं तिनो हंसते खेलते सो जाते थे..सारे गाँव वाले उनकी दोस्ती की मिसाले दिया करते थे..तिनो हम उम्र जैसे होने के कारण एक ही साथ पढ़ते थे..गाँव के ही बगल मे एक गाँव था जो शहर से जुड़ा था और वहीं पे उनका सरकारी स्कूल था और वे तिनो साथ पांचवी कक्षा मे पढ़ते थे। स्कूल मे भी इनकी दोस्ती जग जाहिर थी..वैसे स्कूल उतना दूर नहीं था मगर रास्ते मे जो नदी पड़ती थी वह वक्त ज्यादा ले लेता था स्कूल पहुँचने के लिए।
कुछ भी करना हो तिनो ही पहले आगे होते थे मगर इन तिनो मे थोड़ा जिद्दी राजेश था इसलिए हर वक्त जिद करके वही पहले आगे बढ़ता था, बस ऐसे ही एक दिन आम तोड़ने के चक्कर मे राजेश..मोहीत और राज से जिद करके आम के पेड़ पर चढ गया..मगर बरसात का मौसम पेड़ फिसलन होने कारण राजेश पेड़ से निचे आ गीरा, जल्दी से आनन फनान मे राजेश को घर लाया गया। वह अब पूरी अपाहीज जैसा हो गया था, न उठ सकता था न चल सकता था, घर वालों का रो रो के बुरा हाल था मगर मोहीत और राज एक बार भी नहीं रोये। इनको देखकर गाँव वाले भी हैरान थे कि आखिर एक साथ रहने वाले एक ही थाली मे खाने वाले ये दोनों दोस्त अपनी दोस्त की हालत पे क्यों नहीं रोये मगर सबके पास सवाल था मगर जवाब शायद सिर्फ दोनों के पास था। स्कूल की पढ़ाई शुरू हो चुकी थी। तिनो मे से एक स्कूल जा नहीं सकता था। मगर दो दोस्त तो जा सकते थे मगर अचानक वह दोनों एक दिन गाँव से गायब हो गये..बहुत तलाश किया गया मगर नहीं मिले..
करीब महीने दिन उन तीनों दोस्त के मास्टर जी उनके गाँव आते हैं और पूरे गाँव वालों से कहते हैं की...मैं कल अपने शहर से बाहर दूसरे शहर गया था, वहाँ मेरी नजर राज और मोहीत पे पड़ी, मैं उन्हें देखकर हैरान रह गया..वे फटे पुराने कपड़े पहने शहर मे बड़े बड़े अमीर लोगों की गाडीया साफ कर रहे थे, और साथ मे वहाँ खड़े लोगों का गाना गाके नाचके मनोरंजन कर रहे थे,। मेरी नजर और एक शख्स को ढूँढ रही थी। वह था राजेश उनका जीगरी यार, मगर मैं हैरान रह गया उसे न देखकर जबकि स्कूल मे साथ बैठते साथ खेलते थे। एक को लगी है भी तो तिनो साथ जाते थे। हम स्कूल वाले उनकी दोस्ती देखकर बड़े हैरान रह जाते थे। मगर उस वक्त उसको उनके साथ न देखकर मैं और भी ज्यादा हैरान रह गया था। सोचा उन दोनों बच्चों से मिलू पर भीड़ की वजह से मैं शरर्मींदगी महसूस हुई। आप लोगों को छोटे उम्र मे बच्चों को काम पे शहर नहीं भेजना चाहिए। पढ़ने की उम्र है इन्हें पढ़ने देते तो अच्छा होता। ऐसे भी सरकारी स्कूल मे खर्चा ही कहा है। मास्टर जी की बातें सुनकर गाँव वाले सारी बिती बात बता देते है मास्टर जी को कि कैसे राजेश बिमार हुआ और अचानक कैसे गायब हो गये गाँव से मोहीत और राज, मास्टर जी दुखी मन से लौट जाते है।
अचानक दो दिन बाद पूरा गाँव हैरान रह जाता है मोहीत और राज को गाँव मे वापस आते देखकर। मगर साथ मे एक चमचमाती गाड़ी भी थी और उनके साथ एक नौजवान इंसान भी था सूटबूट में। राज और मोहीत सिधा उस व्यक्ति को लेके राजेश के घर जाते है।
राजेश को देखते ही मोहीत और राज गले लगकर जोर जोर से रोते है। सब हैरान। राजेश भी फफक फफक के रो पड़ता है। तभी वह नौजवान व्यक्ति कहता है राज और मोहीत से, तुम दोनों को रोने के शिवा कुछ आता भी है या नहीं ? इतना कहके वह व्यक्ति खुद भी अपनी पलकों को साफ करता है और गाँव वालों से कहता है की..ये दोनों बेहद अद्भुत बच्चे हैं। मै आज जो यंहा पे खड़ा हूँ इसकी वजह ये दोनों मासूम बच्चे हैं और मै पेशे से एक डाक्टर हूँ । ये दोनों बच्चे हर सुबह वक्त से पहले आके
हर रोज मेरी गाड़ी को साफ करते थे। मेरे घर के आस पास एक कचरा भी रहने नहीं देते थे। पैसे देने पर दोनों हाथ जोड़कर सर हिलाकर नहीं कहते थे। आखो मे नमी साफ देख सकता था मैं। ये रोज का काम था इनका। मगर पैसे देने पर इंकार करते थे। इनका पैसा न लेना मुझे बड़ा अजीब लगता था। क्योंकि हर कोई पैसो के लिए काम करता है मगर ये दोनों किसलिये मुफ्त मे काम करते थे मैं उस वक्त जान न सका।
कंहा रहते थे कहा सोते थे पता नहीं मगर हर सुबह वक्त से पहले मेरी गाड़ी साफ करने आ जाते थे, मैंने उस दिन अपनी पत्नी से कहा कि इन दोनों बच्चों पर जरा ध्यान देना तो? मुझे कुछ ठीक नही लग रहा है । कुछ भी शक होता है तो पुलिस मे रिपोर्ट कर देते है फिर मै अस्पताल चला गया। मेरी पत्नी ने क्या देखा कि मेरे जाने के बाद दोनों गले मिलकर रो रहे थे..और फिर आसमान की और हाथ उठाके रोते हुए कह रहे थे..हमारे दोस्त को ठीक कर दो भगवान। मेरी पत्नी को इनपे दया आई और अंदर बुलाया और इन्होंने जो कहानी बताई मेरी पत्नी तक को रूला दिया जबकी मैंने शादी से पहले वादा किया था की तुम्हारी पलकों मे कभी आशू का एक बूँद भी आने नहीं दूंगा। मगर मै भी रो पड़ा जब मेरी पत्नी ने रोते हुए इनकी दोस्ती की कहानी सुनाई😢
इन दोनों ने कहा कि हम बेहद गरीब है और अपने दोस्त का इलाज नहीं कर सकते इसलिए शहर पैसे कमाने आये है ताकी अपने दोस्त का इलाज कर सके..हम रात मे सिर्फ चार घन्टे सोते है और बाकी हम पैसे कमाने मे जुट जाते हैं । हमें तब तक वापस नहीं जाना है जब तक उसके लिए व्हील चियर खरीद नहीं लेते😢😢
मैडम - व्हील चियर? ?
दोनों दोस्त - हाँ मैडम व्हील चियर😢😢😢 हमारा अजीज दोस्त हमारा राजेश अपाहीज हो गया है और हम उसके बिना एक कदम चल नहीं सकते। हम गरीब है मगर पढाई पूरी करना चाहते है मगर हम उसके बिना स्कूल नहीं जा सकते। इसलिए उसे भी हम अपने साथ व्हील चियर पे बिठाके स्कूल ले जायेगें।😢😢😢
मेरी पत्नी उनकी अद्भुत दोस्ती की कहानी सुनकर वह भी भावुक हो गई थी..
मैडम - ऐसी जिद अच्छी नहीं होती बच्चों। वापस लौट जाओ अपने गाँव ।
बच्चे - जिद अच्छी नहीं आप कहती हो मैडम मगर उस आदत का क्या करे जो उसके बिना जिया नहीं जाता। इस शहर मे आये कितने दिन हुए हमें पता नहीं मगर हर बार उसकी याद मे रोये है हमें पता है।
हम उस वक्त रो न सके जब वह बिमार हुआ था। शायद लोगों ने हमारी दोस्ती पर उँगली भी उठाई होगी,मगर रोते भी कैसे मैडम..हमारे एक आशू के बूँद हमारे दोस्त की जिंदगी के दिन कम कर देते। शायद उसे उसकी बिमारी से उतनी तकलीफ नहीं हुई होगी जितनी हमारे आशू से होता। 😢😢😢
मैडम - तुम लोग तो बेवकूफ हो, आखिर रोज सुबह मेरे पति तुम्हें पैसे देते है मगर तुम लोग लेते क्यों नहीं?
बच्चे -हमें भगवान के पैसे नहीं हमें भगवान चाहिए😢😢 क्योंकि सवाल पैसों का नहीं जिंदगी का है और जिंदगी भी ऐसी जंहा तिन जिंदगी और तिन साँसें एक साथ जुड़ी हो😢😢

मेरी पत्नी ने तुरंत इन दोनों को गले लगाकर बोलो चलो नहा धोके कुछ खा लो। और येही रहो।
तुम्हारे भगवान तुम्हारे साथ तुम्हारे दोस्त को देखने जरूर जायेंगे 😢😢 और आज मैं यंहा आप सभी के सामने खड़ा हूँ। मैं अगले शनिवार को फिर आउंगा और राजेश को लेके जाऊँगा। और इसका इलाज कराउंगा। बस पैसों के नाम पे मुझे इन तिनो की दोस्ती सदा सलामत चाहिए😢😢😢
इधर मोहीत और राज अपने अपाहीज दोस्त को व्हील चियर पे बिठाके पूरा गाँव घूमते हैं । इन तिनो के एक साथ मुस्कुराने जैसे गाँव मे फिर से एक नयी रोशनी आई हो जैसे।
फिर सोमवार को तिनो स्कूल के लिए निकले है। व्हील चियर को आगे से राज खिच रहा है और पिछे से मोहीत धक्का दे रहा है और राजेश व्हील चियर पे बैठा मस्ती मे गाना गा रहा है...तेरे जैसा यार कहाँ, कहाँ ऐसा याराना😢😢😢😢😢😢😢
Sanju Goswami की कलम से...

"ये पोस्ट मेरी दोस्त को समर्पित है"चश्मीस👓कॉलेज शुरू हो चुका था। और नये नये student भी आये थे...उन्हीं मे एक लड़की भी थी...
29/09/2018

"ये पोस्ट मेरी दोस्त को समर्पित है"

चश्मीस👓

कॉलेज शुरू हो चुका था। और नये नये student भी आये थे...उन्हीं मे एक लड़की भी थी जिसका नाम नयना थी..खूबसूरत तो नहीं कहूँगा मगर बेहद ही क्यूट सी थी वह..आखो मे चश्मा। और आपको तो पता ही है की चशमीस लडकीया बेहद क्यूट दिखती है और उसकी क्यूटनेस मे चार चाँद लगाती उसकी खूबसूरत मुस्कुराहट, जो उसके होंठों पे हमेशा रहती थी वह Bscकी फस्ट ईयर student थी, नयना की एक आदत दी की वह चश्मा पूरा सटाकर नहीं पहनती थी, अक्सर थोड़ी निचे होती थी..ऐसे ही वह अपने नये दोस्तों के साथ class की ओर आ रही थी की एक लड़का नयना को देखकर उँगली से कूछ इशारा करता है। नयना देखकर भी नजरअंदाज करके निकल जाती है मगर उसकी सहेलियां पूछती है की वह पागल क्या इशारा कर रहा था अपनी उँगली से..
नयना- अरे छोड़ न, ऐसी बातों पर ध्यान नहीं देते मगर मुझे भी पता नहीं क्या इशारा कर रहा था,
कॉलेज में हर दिन वह लड़का जब भी नयना को देखता, मुस्कुराके उँगली से कुछ इशारा करता। सहेली सब कहती है की चलो न सर को कम्पेलन कर देते हैं मगर नयना कहती है की हम लड़कियाँ कीस किस की कम्पेलन करेंगे हाँ? एक बाप और भाई के अलावा बस कुछ अच्छे मर्दो की पनाह मे सुरक्षित है। वर्ना हर मोड़ पे हमे उठानै वाले लोग है। पढ़ाई मे ध्यान दो बस।
मगर एक दिन तो हद ही हो जाती है। उस दिन नयना ने अपना चश्मा कुछ ज्यादा ही निचे कर रखा था, बहुत सारे student थे सभी साथ में । वह रोज उँगली से इशारा करने वाला लड़का नयना के पास जाके अचानक उसके चश्मे को हाँथ लगाती है की नयना थोड़ी पिछे हटकर एक तमाचा जड़ देती है लड़के को, आस पास के कुछ लडके भी आकर एक दो हाँथ की मदत कर देते है लड़के के गाल पर, नयना भीड़ जमा देख जल्दी से class रूम की ओर भाग जाती है। नयना खुद हैरान थी की उसे गुस्सा क्यों आया। और थोड़ी राहत भी थी की वह कमजोर नहीं है। कुछ लडके मिलकर नयना से कहते है की कॉलेज प्रशासन से शिकायत करो उस बदमास की, हम साथ है आपके...मगर नयना कुछ नही कहती,।
दूसरे दिन नयना कॉलेज आती है मगर वह लड़का कहीं नहीं दिखता,
सभी येही सोचते है की शायद शर्मिन्दा हो गया होगा, मगर अचानक उस दिन नयना की एक सहेली वासरूम मे फिसल के गिर जाती है। पैरों मे भारी मोच आने की वजह से उस कुछ दोस्त मिलकर हस्पीटल लाते हैं। दोस्त को एकसेरे रूम मे छोड़कर कुछ सहेलियों के साथ हस्पीटल मे घूमती है की..उसकी नजर उसी लड़के पर पड़ती है जो उगलीयो से इशारा करता था और जो नयना और कुछ लडके के हाथों का मार खा चुका था, लड़के के सामने बेड पर कोई 10- बारह साल की एक लकवे की मारी बच्ची थी जो उसकी तरह ही चश्मा पहने थे, लकवे की मार मुँह और दोनों हाथों मे थी, लड़का उस वक्त बच्ची को खाना खिला रहा था,
बच्ची ठीक से बोल नहीं पाती थी,
लड़का - ले अब थोड़ा सा बचा है खाले फिर हम घूमने चलेंगे ।
बच्ची- बत भैया नहीं थाना मुदे।
लड़का -अरे पगली ठीक से नहीं खायेगी तो जल्दी बड़ी कैसे होगी बोल तू?
बच्ची- मैं बली होके भी तय्या तोलूंगी भैया। न मुदे कोई पतंग कलेगा न कोई तादी कलेगा😢😢
लड़का - छी...कीतनी गंदी बात करती है तू, तू तो परी जैसी है तूझे तो हर कोई अपना बनाना चाहेगा😢
बच्ची - एक तो मैं बिमाल हूँ और तसमीस(चशमीस) भी, तोन पतंग कलेगा तुमाली पली को भैया 😢
लड़का- अरे मेरी गुड़िया तूझे पता नहीं है मगर चशमीस लडकीया अच्छे लडको की पहली पशंद होती है। बड़ी ही क्यूट और मासूम दिखती है। खूबसूरत दिखने के लिए मेकअप जरूरी है मगर क्यूट दिखने के लिए बस एक चश्मा पहन और होठो पे एक प्यारी सी मुस्कान चाहिए।
बच्ची - तुम धूत बोलते हो भैया ।
कतम खाओ तो की मैं खूबतूलत तीउत हूँ?
लड़का - कसम तो नहीं खाउंगा रे मेरी गुड़िया । मगर जिस दिन तेरा भाई झूठ बोलेगा तूझसे। उसी दिन तेरे भाई की सांसे रूक जायेगी 😢😢 इतना कहकर वह अपनी बहन के निचे हुये चश्मे को उँगली से उपर उठा देता है।
बच्ची - भैया तुम एक लस्सी बान दो मेले तशमे में की वह न गीले बाल बाल,
लड़का- क्यों बांधना, मैं किसलिये हूँ? मैं उठाता रहूँगा न बार बार ।
बच्ची - मगल भैया कब तक,? तेली थादी होगी । फिल तू कैसे तू अपनी गुलीया के तशमे को बाल बाल उठाता रहेगा । भाभी तो बोत नालाज हो दायेगी ।
लड़का - जब तक तु ठीक नहीं हो जायेगी तब तक मैं शादी नहीं करूँगा ।
बच्ची - मैं कबी तिक नहीं हुई तो भैया 😢?
लड़का - जोड़ से गले लगाकर अपनी बहन को कहता है की...ऐसा तो कभी होने न दूंगा। यंहा एक भाई की इज्जत दाँव पे लगी है। येदी भाई भी हार गया तो भगवान को खुद शर्मीदा होना पड़ेगा की...उनकी सृष्टि की अनमोल खूबसूरत सृष्टि की रचना लड़कीयो की हिफाजत कौन करेगा, क्योंकि एक लड़की एक अच्छे बाप एक अच्छा भाई और अच्छे इसानो के बिच मे ही महफूज है येदी ऐसा न होता तो कब की दुनिया से बेटी नाम की खूबसूरत सृष्टि कबकी बिलुप्त हो जाती गंदे लोगों की हवस में 😢😢
बच्ची - मत लो भैया । तू तो मेले लिए सबकुत है। मैं दल्दी तीक हो दाउंगी और तुम कीसी तशमे वाली को भाभी बनाना, तुम भाभी की तशमा उपर कलना और भाभी मेली कलेगी😢
लड़का इतना सुनते ही अपनी गालो मे हाथ रखकर सहलाता है
बच्ची - त्या हुआ भैया गालो को?
लड़का - अरे कुछ नहीं पागल ।
बाहर खड़ी नयना की पलकों मे ढेरों सारा पानी था भाई बहन के प्यार को देखकर, उसे खुद से नफरत सी होने लगी की मैंने क्यों हाथ उठाया उस सीधे इंसान पर। फिर अपनी पलकों के आशूओं को साफ करके डाक्टर से मिलके उस बच्ची के बारे मे पूछती है।
डाक्टर कहते हैं की बड़ी अद्भुत मोहब्बत है इन दो भाई बहन में। ऐ लड़का दिन को कॉलेज जाता है और रात को स्टेशन पे रिक्शा चलाता है। एक बिधवा माँ है और एक बहन। ऐ बच्ची बहुत जल्दी ठीक हो जायेगी क्योंकि अभी तो बहुत ज्यादा ठीक है वर्ना पहले तो बदतर थी हालत, वह उँगली से इसारा करता है की चश्मा उपर कर, कोशिश करती है उसकी बहन, मगर जब कर नहीं पाती तो खुद जाके उठा देता है। कमबख्त दोनों बहुत रूलाते है हमें अद्भुत प्यार दिखाकर, अब नयना सब समझ जाती है की लड़का उगलीयो से क्या इसारा करता था,
नयना- डाकटर साहब क्या हम बच्ची की मदत कर सकते है?😢
डाकटर- कैसी मदत?
नयना- आर्थिक मदत,
डाकटर मुस्कुराके कहते है की ये जो बिमारी है न आर्थिक मदत से नहीं मोहब्बत और प्यार से ठीक होती है।
जब पहली बार आई थी तो हम खुद हैरान थे की कैसे ठीक होगी, मगर एक भाई ने जादू कर दिया अपनी मोहब्बत से।
नयना ये सुनते ही वहाँ से निकल पड़ती है।
दूसरे दिन नयना कॉलेज आने के लिए घर से जल्दी निकल जाती है और उसकी पहली मंजिल थी हस्पीटल की वह प्यारी से बच्ची।
वह अपने साथ गुड़िया मिठाई फल फूल सब लेके आती है। और बच्ची के साथ हंसकर खेल रही होती है की तभी लड़का भी आ जाता है।
नयना तुरंत खड़ी हो जाती है और कुछ न समझते हुए अपने दोनों हाथ लड़के के आगे जोड़ देती है। सबकी नजर उनपे आ टीकती है। पर लड़का नयना के हाथों को झटकर कर सीधे उसकी चश्मे को उपर करता है और जल्दी से अपने हाथ अपने गालो पे रखता है।
नयना मुस्कुराहट देती है और बच्ची की ओर झूककर बच्ची के चश्मे को उपर करती है की तभी बच्ची बोलती है।
कितने धूते हो तुम भैया । मूदे बोला की मेले ठीक होने तक थादी नहीं कलेगा और तुपके से भाबी भी ले आया
मगल अच्छी है भाबी...मेली तलह चश्मीस..मगल मुदसे भी क्यूट और खूबसूलत...
नयना के साथ साथ सभी हस्पीटल के लोग हंसने लगते हैं मगर वह पागल बेवकूफ शर्मा जाता है जो अपनी छोटी बहन की सेवा करते हुए जो कभी न शरमाया था।

"येदी आपको बेहद खूबसूरत दिखना है तो...
बस आप अच्छे बन जाओ...
जैसे वह मेरी अजनबी चश्मीस नयना थी...
लेखक मैं स्वयम आपका Sanju Goswami

Deshi

"ये पोस्ट मेरी दोस्त को समर्पित है"चश्मीस👓कॉलेज शुरू हो चुका था। और नये नये student भी आये थे...उन्हीं मे एक लड़की भी थी...
29/09/2018

"ये पोस्ट मेरी दोस्त को समर्पित है"

चश्मीस👓

कॉलेज शुरू हो चुका था। और नये नये student भी आये थे...उन्हीं मे एक लड़की भी थी जिसका नाम नयना थी..खूबसूरत तो नहीं कहूँगा मगर बेहद ही क्यूट सी थी वह..आखो मे चश्मा। और आपको तो पता ही है की चशमीस लडकीया बेहद क्यूट दिखती है और उसकी क्यूटनेस मे चार चाँद लगाती उसकी खूबसूरत मुस्कुराहट, जो उसके होंठों पे हमेशा रहती थी वह Bscकी फस्ट ईयर student थी, नयना की एक आदत दी की वह चश्मा पूरा सटाकर नहीं पहनती थी, अक्सर थोड़ी निचे होती थी..ऐसे ही वह अपने नये दोस्तों के साथ class की ओर आ रही थी की एक लड़का नयना को देखकर उँगली से कूछ इशारा करता है। नयना देखकर भी नजरअंदाज करके निकल जाती है मगर उसकी सहेलियां पूछती है की वह पागल क्या इशारा कर रहा था अपनी उँगली से..
नयना- अरे छोड़ न, ऐसी बातों पर ध्यान नहीं देते मगर मुझे भी पता नहीं क्या इशारा कर रहा था,
कॉलेज में हर दिन वह लड़का जब भी नयना को देखता, मुस्कुराके उँगली से कुछ इशारा करता। सहेली सब कहती है की चलो न सर को कम्पेलन कर देते हैं मगर नयना कहती है की हम लड़कियाँ कीस किस की कम्पेलन करेंगे हाँ? एक बाप और भाई के अलावा बस कुछ अच्छे मर्दो की पनाह मे सुरक्षित है। वर्ना हर मोड़ पे हमे उठानै वाले लोग है। पढ़ाई मे ध्यान दो बस।
मगर एक दिन तो हद ही हो जाती है। उस दिन नयना ने अपना चश्मा कुछ ज्यादा ही निचे कर रखा था, बहुत सारे student थे सभी साथ में । वह रोज उँगली से इशारा करने वाला लड़का नयना के पास जाके अचानक उसके चश्मे को हाँथ लगाती है की नयना थोड़ी पिछे हटकर एक तमाचा जड़ देती है लड़के को, आस पास के कुछ लडके भी आकर एक दो हाँथ की मदत कर देते है लड़के के गाल पर, नयना भीड़ जमा देख जल्दी से class रूम की ओर भाग जाती है। नयना खुद हैरान थी की उसे गुस्सा क्यों आया। और थोड़ी राहत भी थी की वह कमजोर नहीं है। कुछ लडके मिलकर नयना से कहते है की कॉलेज प्रशासन से शिकायत करो उस बदमास की, हम साथ है आपके...मगर नयना कुछ नही कहती,।
दूसरे दिन नयना कॉलेज आती है मगर वह लड़का कहीं नहीं दिखता,
सभी येही सोचते है की शायद शर्मिन्दा हो गया होगा, मगर अचानक उस दिन नयना की एक सहेली वासरूम मे फिसल के गिर जाती है। पैरों मे भारी मोच आने की वजह से उस कुछ दोस्त मिलकर हस्पीटल लाते हैं। दोस्त को एकसेरे रूम मे छोड़कर कुछ सहेलियों के साथ हस्पीटल मे घूमती है की..उसकी नजर उसी लड़के पर पड़ती है जो उगलीयो से इशारा करता था और जो नयना और कुछ लडके के हाथों का मार खा चुका था, लड़के के सामने बेड पर कोई 10- बारह साल की एक लकवे की मारी बच्ची थी जो उसकी तरह ही चश्मा पहने थे, लकवे की मार मुँह और दोनों हाथों मे थी, लड़का उस वक्त बच्ची को खाना खिला रहा था,
बच्ची ठीक से बोल नहीं पाती थी,
लड़का - ले अब थोड़ा सा बचा है खाले फिर हम घूमने चलेंगे ।
बच्ची- बत भैया नहीं थाना मुदे।
लड़का -अरे पगली ठीक से नहीं खायेगी तो जल्दी बड़ी कैसे होगी बोल तू?
बच्ची- मैं बली होके भी तय्या तोलूंगी भैया। न मुदे कोई पतंग कलेगा न कोई तादी कलेगा😢😢
लड़का - छी...कीतनी गंदी बात करती है तू, तू तो परी जैसी है तूझे तो हर कोई अपना बनाना चाहेगा😢
बच्ची - एक तो मैं बिमाल हूँ और तसमीस(चशमीस) भी, तोन पतंग कलेगा तुमाली पली को भैया 😢
लड़का- अरे मेरी गुड़िया तूझे पता नहीं है मगर चशमीस लडकीया अच्छे लडको की पहली पशंद होती है। बड़ी ही क्यूट और मासूम दिखती है। खूबसूरत दिखने के लिए मेकअप जरूरी है मगर क्यूट दिखने के लिए बस एक चश्मा पहन और होठो पे एक प्यारी सी मुस्कान चाहिए।
बच्ची - तुम धूत बोलते हो भैया ।
कतम खाओ तो की मैं खूबतूलत तीउत हूँ?
लड़का - कसम तो नहीं खाउंगा रे मेरी गुड़िया । मगर जिस दिन तेरा भाई झूठ बोलेगा तूझसे। उसी दिन तेरे भाई की सांसे रूक जायेगी 😢😢 इतना कहकर वह अपनी बहन के निचे हुये चश्मे को उँगली से उपर उठा देता है।
बच्ची - भैया तुम एक लस्सी बान दो मेले तशमे में की वह न गीले बाल बाल,
लड़का- क्यों बांधना, मैं किसलिये हूँ? मैं उठाता रहूँगा न बार बार ।
बच्ची - मगल भैया कब तक,? तेली थादी होगी । फिल तू कैसे तू अपनी गुलीया के तशमे को बाल बाल उठाता रहेगा । भाभी तो बोत नालाज हो दायेगी ।
लड़का - जब तक तु ठीक नहीं हो जायेगी तब तक मैं शादी नहीं करूँगा ।
बच्ची - मैं कबी तिक नहीं हुई तो भैया 😢?
लड़का - जोड़ से गले लगाकर अपनी बहन को कहता है की...ऐसा तो कभी होने न दूंगा। यंहा एक भाई की इज्जत दाँव पे लगी है। येदी भाई भी हार गया तो भगवान को खुद शर्मीदा होना पड़ेगा की...उनकी सृष्टि की अनमोल खूबसूरत सृष्टि की रचना लड़कीयो की हिफाजत कौन करेगा, क्योंकि एक लड़की एक अच्छे बाप एक अच्छा भाई और अच्छे इसानो के बिच मे ही महफूज है येदी ऐसा न होता तो कब की दुनिया से बेटी नाम की खूबसूरत सृष्टि कबकी बिलुप्त हो जाती गंदे लोगों की हवस में 😢😢
बच्ची - मत लो भैया । तू तो मेले लिए सबकुत है। मैं दल्दी तीक हो दाउंगी और तुम कीसी तशमे वाली को भाभी बनाना, तुम भाभी की तशमा उपर कलना और भाभी मेली कलेगी😢
लड़का इतना सुनते ही अपनी गालो मे हाथ रखकर सहलाता है
बच्ची - त्या हुआ भैया गालो को?
लड़का - अरे कुछ नहीं पागल ।
बाहर खड़ी नयना की पलकों मे ढेरों सारा पानी था भाई बहन के प्यार को देखकर, उसे खुद से नफरत सी होने लगी की मैंने क्यों हाथ उठाया उस सीधे इंसान पर। फिर अपनी पलकों के आशूओं को साफ करके डाक्टर से मिलके उस बच्ची के बारे मे पूछती है।
डाक्टर कहते हैं की बड़ी अद्भुत मोहब्बत है इन दो भाई बहन में। ऐ लड़का दिन को कॉलेज जाता है और रात को स्टेशन पे रिक्शा चलाता है। एक बिधवा माँ है और एक बहन। ऐ बच्ची बहुत जल्दी ठीक हो जायेगी क्योंकि अभी तो बहुत ज्यादा ठीक है वर्ना पहले तो बदतर थी हालत, वह उँगली से इसारा करता है की चश्मा उपर कर, कोशिश करती है उसकी बहन, मगर जब कर नहीं पाती तो खुद जाके उठा देता है। कमबख्त दोनों बहुत रूलाते है हमें अद्भुत प्यार दिखाकर, अब नयना सब समझ जाती है की लड़का उगलीयो से क्या इसारा करता था,
नयना- डाकटर साहब क्या हम बच्ची की मदत कर सकते है?😢
डाकटर- कैसी मदत?
नयना- आर्थिक मदत,
डाकटर मुस्कुराके कहते है की ये जो बिमारी है न आर्थिक मदत से नहीं मोहब्बत और प्यार से ठीक होती है।
जब पहली बार आई थी तो हम खुद हैरान थे की कैसे ठीक होगी, मगर एक भाई ने जादू कर दिया अपनी मोहब्बत से।
नयना ये सुनते ही वहाँ से निकल पड़ती है।
दूसरे दिन नयना कॉलेज आने के लिए घर से जल्दी निकल जाती है और उसकी पहली मंजिल थी हस्पीटल की वह प्यारी से बच्ची।
वह अपने साथ गुड़िया मिठाई फल फूल सब लेके आती है। और बच्ची के साथ हंसकर खेल रही होती है की तभी लड़का भी आ जाता है।
नयना तुरंत खड़ी हो जाती है और कुछ न समझते हुए अपने दोनों हाथ लड़के के आगे जोड़ देती है। सबकी नजर उनपे आ टीकती है। पर लड़का नयना के हाथों को झटकर कर सीधे उसकी चश्मे को उपर करता है और जल्दी से अपने हाथ अपने गालो पे रखता है।
नयना मुस्कुराहट देती है और बच्ची की ओर झूककर बच्ची के चश्मे को उपर करती है की तभी बच्ची बोलती है।
कितने धूते हो तुम भैया । मूदे बोला की मेले ठीक होने तक थादी नहीं कलेगा और तुपके से भाबी भी ले आया
मगल अच्छी है भाबी...मेली तलह चश्मीस..मगल मुदसे भी क्यूट और खूबसूलत...
नयना के साथ साथ सभी हस्पीटल के लोग हंसने लगते हैं मगर वह पागल बेवकूफ शर्मा जाता है जो अपनी छोटी बहन की सेवा करते हुए जो कभी न शरमाया था।

"येदी आपको बेहद खूबसूरत दिखना है तो...
बस आप अच्छे बन जाओ...
जैसे वह मेरी अजनबी चश्मीस नयना थी...
लेखक मैं स्वयम आपका Sanju Goswami
*****Deshi Boyz*****

"   की कलम से..             "Sanju"कॉलेज का पहीला दिन था, इसलिए प्रिंस अपने दोस्तों से खूब मजाक मस्ती कर रहा था , इतने म...
29/09/2018

" की कलम से..
"Sanju"

कॉलेज का पहीला दिन था, इसलिए प्रिंस अपने दोस्तों से खूब मजाक मस्ती कर रहा था , इतने मे प्रिंस के कुछ दोस्त उसे दौडाते है शायद प्रिंस ने कुछ मजाक कर दिया होगा दोस्तों के उपर, प्रिंस दोस्तों की ओर घुम के दौड़ रहा होता है कि अचानक एक लड़की से टकरा जाता है और इस टकराहट मे लड़की तो गीर जाती है मगर प्रिंस भी खुद को सम्भालते सम्भालते दूर जा गिरता है..प्रिंस उठकर कुछ कहता इससे पहले जमीन पे गीरी हुई लड़की को उठाती हुई उसके सहेलियां गुस्से मे कहती है कि...बड़ी जवानी चढ़ी है न..जो एक अंधी लड़की को तक छुने का बहाना ढूँढते हो? छी कितना गिरा हुआ इंसान है। इतनी आग है तो शादी कर लेना किसी लड़की से..
राजा के दोस्त कुछ कहते इससे पहले प्रिंस अपने दोस्तों को हाथों के इशारे से कहता है की चुप रहे
फिर प्रिंस खड़े होके पास आके कहता है कि...मुझे बेहद अफसोस है कि मैं अचानक आपसे टकरा गया..सफाई भी दूँगा तो आप और आपके दोस्त यकीन नहीं करेंगे
और माफी भी माँगूंगा तो मुझपर जो फबतिया कसी है आपके दोस्तों ने वह जल्दी मिटने वाला नहीं मेरे दिल से...इसलिए आपके दोस्तों के कही बातों पर मैं जरूर अमल करूँगा। इतना कहके प्रिंस अपना दोनों हाथ जोड़कर वंहा से निकल जाता है। जो लड़की प्रिंस से टकरा के जमीन पे गीरी थी उसका नाम रानी है और वह अंधी है। आखो से भले अंधी थी मगर उसे पढ़ने का जूनून सवार था, वह कोई भी बात दिमाग मे अच्छी तरह बसा लेती थी, मगर वह कॉलेज मे पढ़ाई नहीं करती थी, एक तो वह गरीब थी। वैसे वह पैदाइसी अंधी नहीं थी, बारहवीं पास करने के बाद एक दुर्घटना मे उसकी दोनों आखो की ज्योति चली गई थी, डाक्टर ने जांच मे इतना ही कहा था की..हमारे वश की तो बात नही
हाँ अगर कोई बड़े अच्छे डाक्टर को दिखाया तो कुछ हो सकता है मगर पैसे बहुत लगेंगे। बेचारे कोशिश करते भी कैसे । सामने गरीबी यमराज बनके खड़ा था। इसलिए वह उसके सहेलियों के साथ कॉलेज आती थी और कॉलेज के बाहर ही बैठकर सहेलियों का इंतजार करती और उसकी सहेलियां उसे उस दिन का पूरा नोट्स पढ़कर सुनाती थी।
ये रोज का काम था रानी का, वैसे उसकी सहेलियां बेहद ही अच्छी थी उसके लिए और सहेलियां भी जान छिडकती थी उसपर। फिर सहेलियों ने स्कूल प्रशासन से बिनती कर करके राजी कर लिया की रानी भी कॉलेज मे class मे बैठने लगी थी। वैसे राज नाम के लड़के से रानी और उसकी सहेलियों की अच्छी दोस्ती हो गई थी। एक दिन रानी की सहेलियां बाजार घूमने गयी थी तो क्या देखते है कि एक जगह पूरा भीड़ जमा है। साथ मे रानी भी थी। वह जब उस भीड़ मे पहुँचते है तो देखते है की प्रिंस अपने कुछ दोस्तों के साथ नाटक दिखा रहा है जिसमें प्रिंस के साथ कॉलेज के लड़के लडकीया भी थी। फिर प्रिंस एक प्लास्टिक का बाल्टी लेके सबके पास जाता है। लोग कुछ न कुछ रूपये उसमें डाल देते हैं ।
दूसरे दिन कॉलेज मे रानी की सहेलियां प्रिंस से कहते है।
सहेलियां - क्या बात है प्रिंस साहब
कल तो बाजार मे कुछ नमूनों के साथ खूब बंदर की तरह उछल रहे थे। और बाल्टी लेकर भीख भी माँग रहे थे। ऐसी क्या मजबूरी हो गई? कहीं शादी के लिए पैसे तो नहीं जुटा रहे हो? वैसे फिक्र न करो हमने भी मिलकर सौ रूपये आपको भीख मे दे दिये हैं । सभी खिलखीलाके हंसती है कि तभी उन सबका प्रिय दोस्त राज कहता है कि.. अरे इनकी इज्जत न उतारो। ये रात को पिने के लिए पैसों का इंतजाम कर रहे हैं । फिर हसी चारों तरफ गूँज उठती है। मगर प्रिंस का दोस्त अजय मिश्रा है जिसको बरदास्त नहीं होता । वह कुछ बोलने को होता है की प्रिंस रोक देता है।
एक दिन अचानक रानी के सहेलियों के पास एक लड़की आके एक फम देके कहती है कि कोई बाहर से DS नाम की संस्था है जो एक अंधी लड़की के आखो की रोशनी देने के सारे खर्चे उठा रहा है। लेकिन सिर्फ दस फम दस कॉलेज मे भेजा गया है और किस्मत से एक फम हमारे कॉलेज मे भी आया है। और ये रहा फम। जल्दी से रानी का पूरा पता उमर नाम सब भरके मुझे दे दो। मैं भेज दूंगी DS ग्रुप के पास । रानी की सहेलियां बेहद खुश होती है मगर रानी कहती है की मत भरो।
अगर भरने के बाद उन दस मे मेरा नाम नहीं आया तो और ज्यादा तकलीफ होगी मेरे घरवालो को।
फम लाने वाली लड़की कहती है कि...हाँ ये तो है
मगर येदी लग गया तो? वैसे रानी जी आपके पास खोने के लिए शायद ही कुछ बचा हो मगर पाने के लिए अभी बहुत रास्ते बचे है।
सबकी दबाव मे फम भरा जाता है।
इधर कुछ दिनों बाद रानी का ही नाम उठता है उन दस मे से। बहुत बड़े आखो के डॉक्टर के जांच करने पर पता चलता है की अपरेशन से भी आखे ठीक हो सकती है। फिर रानी के आखो का अपरेशन होता है। और सफल भी होता है । और इधर एक महीने तक वह अस्पताल मे रहती है मगर दोस्ती सचमुच गजब की थी उसकी सारी सहेलियां भी उसके साथ ही रहती है। एक महीने बाद रानी अपनी आखो की ज्योति लेके घर लौटती है । घर मे मानो ऐसी खुशी जो बयान हो नहीं सकती। उस दौरान उसके पापा रानी को एक महीने का कॉलेज नोट्स भी देके कहते है की सचमुच तू बेहद किस्मत वाली है बेटी । देख तेरे कालेज गैर हाजरी पे भी हर शाम एक लड़का तेरे लिए हर रोज की पढ़ाई का नोट्स दे जाता था ताकि तेरे अस्पताल से लौटने पर पर भी तू कॉलेज की पढ़ाई को समझ सके। नाम पूछा तो बस इतना कहा ..इंसान हूँ ।
रानी बेहद खुश हो जाती है और सोचती है की जरूर राज का काम होगा। अब उसने तय कर लिया था कि दूसरे दिन कलेज पहुँचते ही सबके सामने राज को I LOVE YOU बोल दूंगी ।
दूसरे दिन कलेज मे एक भीड़ जमा थी रानी के चारों ओर। सब अपनी अपनी तरिके से बधाई दे रहे थे। राज ने फूलों का गुलदस्ता देके गले लगाकर बधाई दी। अब रानी कुछ कहती इससे पहले रानी की सहेलियों की नजर प्रिंस और उसके दोस्तों पर पड़ती है और कहती है की वह देखो बंदरो की टोली भी आ गयी और ताली बजाके कहती है..सुनो सुनो दोस्तों कुछ कहना है आप सभी से। फिर रानी की ओर मुडके कहती है कि..पता है तूझे? इसी बंदर ने पहली बार तूझे कॉलेज मे धक्का मारा था,
रानी- अरे छोड़ न क्या गैरो से मुँह लगाती है।
राज- अभी धक्का लगाये तो मर्द समझूं नार्मद की औलाद ..घर मे बहन बेटी को भी शायद ऐसे करते होंगे ऐसे गंदी सोच के लोग। मगर तभी प्रिंस का दोस्त अजय मिश्रा आगे बढके चिल्लाता है चुप रहो..मगर तभी प्रिंस कहता है अरे जाने दे मगर उसके ग्रुप के सारे दोस्त चिल्लाते हैं...तेल लेना गया तेरी कसम और वचन। अब बहुत हो गया। या तो दोस्ती खत्म नहीं तो आज हमें बोलने से मत रोक। अजय..तू बोल।
अजय कुछ बोले इससे पहले प्रिंस वहाँ से खिसक जाता है ।
अजय - सुन राज...तूझसे हम डरते नहीं है। और जो तू इतना बड़ा धर्मी बन रहा है न वह सिर्फ तू रानी के शरीर को चाहता है। अभी मत बोल, तूझे भी भरपूर मौका मिलेगा बोलने का, मैं चुप अब तभी होऊंगा जब मेरी बात खत्म होगी। वाह क्या माल है। मस्त है यार,अंधी है तो क्या हुआ, माल सोलिड है ऐसा ही कहा था तूने अपने दोस्तों को, सबूत मत माँग वरना खुद की नजरों मे तू गीर जायेगा। वह तेरा दोस्त आज हमारी ग्रुप मे है। और सुनो लडकीयो, अब तुम्हारी बारी, रानी से टकराने के बाद प्रिंस बहुत दुखी था, फिर हमारे सामने आके उसने बताया कि इंसान का अंधापन उसका अभीशाप होता है। उसने कहा की मेरी बहन भी अंधी थी एक दिन मा के साथ बाजार गयी थी तो मा उसको बस एक मिनट के लिए छोड़ के गयी थी मगर तक आदमी आके बहन बोलके माँ बुला रही है और मुझे लेने भेजा है ये कहकर एक घर मे ले जाके बलात्कार कर दिया उसकी बहन का। और बहन उसी हालत मे भागकर सड़क पार करते गाड़ी से टकरा कर मर गई थी, अंधेपन का फायदा दुनिया उठाना चाहती है। उस दिन तुम सब के कहे शब्दों ने उसे अंदर तक रूलाया था, इसलिए उसने हमसे कहा की चलो कुछ अच्छा करके पैसा जमा करके रानी के आखो की रोशनी वापस लाते है मगर सभी से हाथ पे हाथ रखकर वचन लिया था कि कोई भी कभी भी इस राज को नहीं खोलेगा। फिर कुछ लड़कियों ने भी हमारी ग्रुप join की..उस दिन तुमने बाजार मे जो देखा था न प्रिंस को बंदर की तरह उछलते हुए। वह रानी जी की इलाज के लिए खुद का तमाशा बना रहा था, हम सबने एक बहुत बड़े डाक्टर से बात की तो वह इतने प्रभावित हुए प्रिंस से की उन्होंने भी हमारी ग्रुप join कर ली। सिर्फ दवाईयो के पैसे लिया मगर इलाज मुफ्त मे किया गया, फिर पल्लवी को सामने बुलाके अजय कहने लगा । ए प्रिंस की मुँह बोली बहन है इसी ने आपको फम लगाके दिया था,
सहेलियां - मगर उसमें तो दस लड़की थी और कोई DS ग्रुप था।
अजय - कोई दस नहीं थी। ये तो पल्लवी से कहा गया था कि दस लडकीया है और लौटरी के द्वारा चुनाव होगा,
और DS ग्रुप हमारा ही है...जिसे प्रिंस ने नाम दिया था...DS का मतलब, "दिल से" प्रिंस की बातों मे क्या जादू था की लोग अपने आप इस ग्रुप से जुडते गये दिल से; रानी जी के घर हर दिन प्रिंस कॉलेज का नोट्स भेजता था जो उसकी बहन पल्लवी देती थी। वह रानी से प्यार नहीं करता और न ही कोई एहसान कर रहा था, बस वह चाहता था कि कोई लड़की अंधी न रहे। दुनिया खूबसूरत है और इसे देखने के लिए इंसान के शरीर का खूबसूरत अंग आंखे होना जरूरी है। वैसे प्रिंस येही नहीं रूका, उसने हम सभी से कहा की ये दिल से ग्रुप अब रूकेगा नहीं। आगे भी हम नाटक करके किसी की जिंदगी बचाते रहेंगे । अभी एक केन्सर से पीड़ित गरीब बच्ची का केस आया है और कल से हम सभी फिर से
दिल से उस बच्ची के लिए काम करेंगे
की तभी अजय का मोबाइल बजता है। देखता है तो उसी डाक्टर का था जिसने रानी का इलाज कराया था। फिर अजय लाउडस्पीकर मे डालके बात करता है।
डाक्टर - अरे अजय...ये प्रिंस ने अपना मोबाइल क्यों बंद रखा है? और कहता है की कल का प्रोग्राम कहा रखा है प्रिंस ने?
अजय जगह का नाम और समय बता देता है।
डाक्टर - वैसे रानी बेटी आज तो कॉलेज आई होगी? कितना अच्छा लगता होगा न उसे फिर से खूबसूरत दुनिया को देखकर? कशम से कमाल का है हमारा पागल प्रिंस। जो भी करता है दिल से करता है। मगर किसी को खबर तक होने नहीं देता, ठिक है मैं कल पहुँच जाउगा प्रोग्राम पे।
फोन कट हो जाता है और सभी सुनते है। सबकी पलके नम थी। खासकर रानी की।
दूसरे दिन प्रोग्राम पे प्रिंस और उसके दोस्त जैसे ही नाटक शुरू करते है की रानी अपनी सहेलियों के साथ पहुँच कर कहती है। कि हम भी इस दिल से ग्रुप मे शामिल होना चाहते है ताकी हम भी वजह बन सके दिल से किसी की जिंदगी के लिए। प्रिंस और उसके दोस्त मुस्कुरा देते है।
रानी प्रिंस से कहती है कि...आपको हमसे मोहब्बत नहीं है मगर हमें आप से बेपनाह मोहब्बत हो चुकी है। आप हा करो या न करो... हम तो आपके ही रानी बनके रहेंगे।
उधर उसके ग्रुप के सारे लड़के लडकीया एक साथ बोलते हैं की...ओये पागल. हाँ कर दे
ऐसे भी तेरी उम्र निकल रही शादी के लिए 😃😃
ए मजाक नहीं रे पागल...
बात दिल से है।
सभी एक साथ हंसने लगते हैं... दिल से 💕 समाप्त।

WRITER -

बैठे तो बडे प्रेम से हैं मगर... picture देखकर लगता है की...इनके बिच बहुत कुछ ठीक नहीं है😂😂😂blessed night for all my frie...
29/09/2018

बैठे तो बडे प्रेम से हैं मगर... picture देखकर लगता है की...इनके बिच बहुत कुछ ठीक नहीं है😂😂😂

blessed night for all my friends

11/09/2018

😂😁😂😁😂😁😂😁😂😁😂
* #गणेश_चतुर्थी में जाने की तैयारी शुरू हो गई रे बाबा*
#13 को पहुँचना है इसलिए #स्नान #ध्यान में #मुषक जी जुट गए हैं ।*
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आशाओं के दीप जलेआशीर्वाद – उपहार मिलेवर्षगाँठ हैं आपकीशुभकामनाओ से प्यार मिलेजन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाये.HAPPY BIRTHD...
14/07/2018

आशाओं के दीप जले
आशीर्वाद – उपहार मिले
वर्षगाँठ हैं आपकी
शुभकामनाओ से प्यार मिले
जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाये.
HAPPY BIRTHDAY

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