Swastice Institute of Computer Science

Swastice Institute of Computer Science Its a Institute of Computer Science towards the total Computer Literacy and Computer education to all including poorest of the poor with best tecnology

24/08/2020

Coming back soon ............

https://youtu.be/RU2zM5zswuc
06/08/2017

https://youtu.be/RU2zM5zswuc

Himachal GK Basic Info is the first chapter of Hichal GK Series of HAS Online Study group. This series ill further contain 20 to 22 chapter in which importan...

29/10/2015

भारत में महिला सशक्तीकरण
“महिला सशक्तीकरण से तात्पर्य महिलाओं की पुरुषों के बराबर वैधानिक, राजनीतिक, शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं आर्थिक क्षेत्रों में उनके परिवार, समुदाय, समाज एवं राष्ट्र की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि में निर्णय लेने की स्वायत्‌ता से है” - अंतरराष्ट्रीय महिला सम्मेलन, 1985 (नैरोबी)
सशक्तीकरण एक बहुआयामी प्रक्रिया है। यह महिला में इतनी जागरुकता लाती है कि वह
शक्ति को प्राप्त करे एवं उसमें सामाजिक, आर्थिक संसाधनों पर नियंत्रण प्राप्त करने की क्षमता का विकास हो। यह उन्हें जीवन को स्वयं निर्देशित करने के लिय प्रेरित करती है तथा घर एवं बाहर के निर्णयों में उसकी भागीदारी को बढ़ाती है। यह शक्ति संबंधों को चुनौती देती है। यह पुरुष संप्रभुता के स्थान पर महिला संप्रभुता स्थापित करने का प्रयास नहीं है, बल्कि समानता के आधार पर सामंजस्यपूर्ण भागीदारी की मांग है। यह संसाधनों तक महिलाओं की पहुँच को संभव बनाती है। सशक्तीकरण का आशय सिर्फ शक्ति का अधिग्रहण नहीं है, बल्कि इसमें शक्ति प्रयोग की क्षमता का विकास किया जाता है। महिलाओं को परावलंबन की भावना से मुक्त करना, उनकी हीन भावना को समाप्ता करना ही सशक्तीकरण है। महिलाओं को हाशिये से हटाकर समाज की मुख्यधारा में लाना व निर्णय लेने की क्षमता का विकास करना सशक्तीकरण है। यदि समाज में नारी भयमुक्त हो अथवा सम्मान खोए बिना अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सके, उसकी इच्छा-अनिच्छा की परिवार एवं समाज के स्तर पर कद्र की जाए, उसे अपना अधिकार मिले, देश की प्रगति में इसका पर्याप्त योगदान हो, तो हम कह सकेंगे कि महिला सशक्त हो गई है। सबलता एवं सुयोग्यता नारी सशक्तीकरण की प्रमुख पहचान है।
सशक्तीकरण हेतु कुछ व्यावहारिक सुझाव

“महिलाओं के साथ किए जा रहे असमान व अमानवीय व्यवहार को यथाशीघ्र बदलना होगा। उन्हे पुरुषों के समान सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक अधिकार देकर ही समाज का सर्वांगीण विकास संभव होगा।“

महिलाओं को आर्थिक रुप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वरोजगार योजनाओं, शिक्षा एवं उच्च शिक्षा पर महत्व देना चाहिए। साथ ही, आधुनिकीकरण अपनाना होगा, वरना वह दिन दूर नहीं जब जीवन को पल्लवित करने वाली कोख ही उपलब्ध न होगी।

महिला सशक्तीकरण महिलाओं को क्षमता, शक्ति तथा योग्यता देता है, ताकि वे अपने जीवन स्तर को सुधार, जीवन की दिशा को स्वयं निर्धारित कर सकें । अंतत: महिलाओं का सशक्तीकरण ऐसी धारणा है, जिसके बिना हम भारत ही नहीं, अपितु मानव सभ्यता के समुचित विकास की कल्पना तक नहीं कर सकते। महिला सशक्तीकरण से न केवल महिलाओं के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, अपितु निश्चय ही पुरुषों व बच्चों को भी इससे लाभ प्राप्त होगा।“

28/10/2015

सच हम नहीं सच तुम नहीं
सच हम नही सच तुम नहीं
सच है सतत संघर्ष ही ।
संघर्ष से हट कर जिए तो क्या जिए हम
या कि तुम।
जो नत हुआ वह मृत हुआ ज्यों वृन्त से झर कर कुसुम।
जो पंथ भूल रुका नहीं,जो हार देखा झुका नहीं,
जिसने मरण को भी लिया हो जीत, है जीवन
वही।
सच हम नहीं सच तुम नहीं।
ऐसा करो जिससे प्राणों में कहीं जड़ता रहे।
जो है जहाँ चुपचाप अपने आपसे लड़ता रहे।
जो भी परिस्थितियाँ मिलें,
काँटें चुभें, कलियाँ खिलें,
टूटे नहीं इन्सान, बस सन्देश यौवन का यही।
सच हम नहीं सच तुम नहीं।
हमने रचा आओ हमीं अब तोड़ दें इस प्यार को। यह क्या मिलन, मिलना वही जो मोड़ दे
मँझधार को।
जो साथ कूलों के चले,
जो ढाल पाते ही ढले,
यह ज़िन्दगी क्या ज़िन्दगी जो सिर्फ़
पानी-सी बही।
अपने हृदय का सत्य अपने आप हमको खोजना।
अपने नयन का नीर अपने आप हमको पोंछना।
आकाश सुख देगा नहीं,
धरती पसीजी है कहीं,
हर एक राही को भटक कर
ही दिशा मिलती रही
बेकार है मुस्कान से ढकना हृदय की खिन्नता।
आदर्श हो सकती नहीं तन और मन
की भिन्नता।
जब तक बंधी है चेतना,
जब तक प्रणय दुख से घना,
तब तक न मानूँगा कभी इस राह को ही मैं
सही।
सच हम नहीं सच तुम नहीं।
- जगदीश गुप्त (Jagdish Gupt)

27/10/2015

संघर्ष
हर लम्हा एक संघर्ष
किसने जाना है कल को,
सबने सिर्फ माना है कल को,
कल था जो वो आज नहीं
आज है जो वो कल नहीं
हर घडी एक चुनौती है-
हर पल एक इंतजार
सत्य तो बस एक है –
हर लम्हा एक संघर्ष है……

जिस तरह जलती हुई लौ,
अंधकार से लड़ती है
जिस तरह आंधी में खड़ा वृक्ष
अपने वजूद से लड़ता है
उसी तरह हर मनुष्य,
अपने आने वाले कल से लड़ता है
क्योंकि जानता है वो –
सत्य तो बस एक है –
हर लम्हा एक संघर्ष है……

डरता है वो जिसने गिरना नहीं सीखा
उठा है वो जिसने गिर कर डरना नहीं सीखा,
चाहा है जिसने, मिला उसे कुछ नहीं,
मिला है उसे जिसने जूझा है खुद से,
गीता का भी तो यही सार है,
हर लम्हा एक संघर्ष है……

अमर कौन है,
मृत्यु का जिसे भय नहीं
चौर कौन है,
सत्य को जिसने अभी अपनाया नहीं
सफल कौन है?
भाग्य को जिसने कभी कोशा नहीं
भूमण्डल में जाना जिसने केवल एक ही सत्य को,
हर लम्हा एक संघर्ष को…..

26/10/2015

आलोचनाओं से विचलित न हो
एक दिन एक किसान का गधा कुँए में गिर गया । वह गधा घंटों ज़ोर -ज़ोर से रोता रहा और किसान सुनता रहा और विचार करता रहा कि उसे क्या करना चाहिए और क्या नहीं। अंततः उसने निर्णय लिया कि चूंकि गधा काफी बूढ़ा हो चुका था, अतः उसे बचाने से कोई लाभ होने वाला नहीं था; और इसलिए उसे कुँए में ही दफ़ना देना चाहिए। किसान ने अपने सभी पड़ोसियों को मदद के लिए बुलाया। सभी ने एक-एक फावड़ा पकड़ा और कुँए में मिट्टी डालनी शुरू कर दी। जैसे ही गधे कि समझ में आया कि यह क्या हो रहा है,वह और ज़ोर-ज़ोर से चीख़ चीख़ कर रोने लगा। और फिर, अचानक वह आश्चर्यजनक रुप से शांत हो गया। सब लोग चुपचाप कुँए में मिट्टी डालते रहे। तभी किसान ने कुँए में झाँका तो वह आश्चर्य से सन्न रह गया। अपनी पीठ पर पड़ने वाले हर फावड़े की मिट्टी के साथ वह गधा एक आश्चर्यजनक हरकत कर रहा था। वह हिल-हिल कर उस मिट्टी को नीचे गिरा देता था और फिर एक कदम बढ़ाकर उस पर चढ़ जाता था। जैसे-जैसे किसान तथा उसके पड़ोसी उस पर फावड़ों से मिट्टी गिराते वैसे-वैसे वह हिल-हिल कर उस मिट्टी को गिरा देता और एक सीढ़ी ऊपर चढ़ आता । जल्दी ही सबको आश्चर्यचकित करते हुए वह गधा कुँए के किनारे पर पहुंच गया और फिर कूदकर बाहर भाग गया।
ध्यान रखो, तुम्हारे जीवन में भी तुम पर बहुत तरह कि मिट्टी फेंकी जायेगी, बहुत तरह कि गंदगी तुम पर गिरेगी। जैसे कि, तुम्हें आगे बढ़ने से रोकने के लिए कोई बेकार में ही तुम्हारी आलोचना करेगा,कोई तुम्हारी सफलता से ईर्ष्या के कारण तुम्हें बेकार में ही भला बुरा कहेगा। कोई तुमसे आगे निकलने के लिए ऐसे रास्ते अपनाता हुआ दिखेगा जो तुम्हारे आदर्शों के विरुद्ध होंगे ऐसे में तुम्हें हतोत्साहित होकर कुँए में ही नहीं पड़े रहना है बल्कि साहस के साथ हिल-हिल कर हर तरह कि गंदगी को गिरा देना है और उससे सीख लेकर, उसे सीढ़ी बनाकर, बिना अपने आदर्शों का त्याग किये अपने कदमों को आगे बढ़ाते जाना है।
अतः याद रखो! जीवन में सदा आगे बढ़ने के लिए
१)नकारात्मक विचारों को उनके विपरीत सकारात्मक विचारों से विस्थापित करते रहो।
२)आलोचनाओं से विचलित न हो बल्कि उन्हें उपयोग में लाकर अपनी उन्नति का मार्ग प्रशस्त करो।

24/10/2015

छिपी शक्ति की पहचान
कुछ लोग जीवन में अपनी असफलता के ऐसे-ऐसे तर्क देते हैं कि सुनकर हंसी आ जाती है। इनमें से कुछ लोग तो बिलकुल दया के पात्र दिखाई देते हैं।
उनके विचार देखिए—
‘हम तो जीवन में कभी तरक्की कर ही नहीं सकते।’
‘हम नौकरी छोड़ कर अपना व्यवसाय करें ? असम्भव।’
‘क्या करें, हमारे पास साधन ही नहीं हैं और वैसे साधन जुटाना तो हमारे लिए असम्भव है।’
‘मैं जीवन में कभी अपना मकान बना पाऊंगा, यह सम्भव ही नहीं है। अरे भई ! हम तो धरती से जुड़े ग़रीब हैं। गरीबी में ही पैदा हुए हैं और गरीबी में ही मर जाएंगे।’

‘हमारा तो अपना व्यवसाय बदलना ही असम्भव है इसके लिए कितनी भागदौड़ करनी पड़ती है।’ ऐसी बात करने वाले लोग वास्तव में मनोबल से हीन होते हैं। निराशा और एक अनजाने भय ने उनके मस्तक पर कब्जा किया होता है। कोई उनसे ये पूछे कि भई ! जो काम आप फिलहाल कर रहे हैं, वह भी किसी प्रकार आपके लिए सम्भव हो पाया या नहीं ? आपने इस स्थिति को वश में किया या नहीं ?

फिर दूसरे ऐसे कौन से काम हैं जिन्हें करने का आप प्रयास करें और वह पूरे न हो ? उनमें आपको सफलता प्राप्त न हो। गारफील्ड का कहना है—‘कोई व्यक्ति जब तक किसी वस्तु की प्राप्ति के लिए प्रयत्न नहीं करेगा, तब तक वह वस्तु उसे प्राप्त नहीं हो सकेगी।’

सफलता-प्राप्ति के लिए जिन गुणों की आवश्यकता होती है, उनका उल्लेख करते हुए आस्टिन फिलिप्स कहता है—‘मनुष्य को सतर्क रहते हुए अवसर की ताक में रहना चाहिए। साहस के साथ सुअवसर को प्राप्त करने का यत्न करना चाहिए और पूरी शक्ति लगाकर दृढ़ता के साथ प्राप्त अवसर के सहारे सर्वोत्तम ढंग से सफलता तक पहुंचना चाहिए। निश्चित सफलता के लिए इन्हीं सद्गुणों की आवश्यकता होती है।’

वरले ने कहा है—‘यदि आप पूर्ण निष्ठा के साथ उद्यम कर रहे हैं तो एक क्षण को भी व्यर्थ मत जाने दीजिए। आप जो काम कर सकते हैं अथवा जिस काम को करने का स्वप्न देखते हैं, उसे आरम्भ कर दीजिए।’

यह मत सोचिए कि ये कार्य आपके वश का नहीं या जो बात आप सोच रहे हैं, वह असम्भव है। मनुष्य के हृदय में यह दृढ़ विश्वास होना चाहिए कि मार्ग की खोज कर लूंगा अथवा अपने मार्ग का स्वयं निर्माण करूंगा। नील नदी के युद्ध का निकट समय आ ही रहा था। नेलसन ने अपने कमाण्डरों के सामने युद्ध का मानचित्र फैलाया। कैप्टन बेरी ने उसे देखा और प्रसन्न होते हुए बोल उठा—‘यदि हम विजयी हुए तो संसार क्या कहेगा ?’
नेलसन भला कैसे चुप रह सकता था, तड़ाक से बोला ‘हमारे पास ‘यदि’ के लिए कोई स्थान नहीं। निश्चित रूप से विजय हमारी ही होगी। हां, यह बात दूसरी है कि हमारी विजय-गाथा कहने वाला कोई जीवित रहेगा या नहीं।’
थोड़ी देर बाद जब कमाण्डर लोग अपने खेमों को आने लगे तो नेलसन फिर दृढ़ निश्चयपूर्वक बोला—‘कल इस समय से पूर्व या तो मैं विजयी हो जाऊंगा या वेस्ट मिन्स्टर गिरजे में मेरे लिए कब्र की तैयारी हो जाएगी।’

सब लोग चले गए। जहां नेलसन के साथी पराजय की सम्भावना देख रहे थे, वहीं नेलसन की तीक्ष्ण दृष्टि एवं साहसी आत्मा को अपूर्व विजय का अवसर दिखाई दे रहा था। सेण्ट बरनार्ड की घाटी की जांच-पड़ताल और निरीक्षण करके इंजीनियर लोग लौटे तो नेपोलियन ने पूछा—‘क्या सचमुच एल्प्स पर्वत पार करना असम्भव है ?’ इंजीनियरों ने थोड़ा झिझकते हुए उत्तर दिया—‘श्रीमान् सम्भव है कि हम पार कर लें।’

‘जवानो, आगे बढ़ो !’ नेपोलियन के मुंह से यह बात निकल पड़ी। उसने दुर्गम मार्ग और उसमें आने वाली कठिनाइयों की ओर किंचित् ध्यान दिए बिना यह आदेश दे दिया।

साठ हजार सैनिक का भारी शस्त्रास्त्र लेकर एल्प्स पर्वत की दुर्गम चोटियों को पार करना वस्तुतः बहुत ही कठिन कार्य था, परन्तु उस समय उसका साथी जेनेवा में शत्रु सेनाओं से घिरा हुआ था और भूखों मर रहा था। विजय के मद में अन्धे आस्ट्रियन सैनिक नील के फाटकों पर धावा बोल रहे थे। ऐसे में नेपोलियन कैसे चुप बैठ सकता था ? अपने साथियों को विपत्ति में पड़ा कैसे छोड़ सकता था ? जब यह असम्भव बात नेपोलियन ने सम्भव कर दिखायी तो लोग कहने लगे-‘अरे वाह ! यह कौन-सी बड़ी बात थी ? यह तो पहले ही सम्भव था।’

वैसे अधिकांश व्यक्ति और सैनिक एल्पस पर्वत की कठिनाइयों के कारण ही इस कार्य को दुष्कर समझते थे। सेनाएं उनके पास थीं, भयंकर शस्त्रास्त्र भी थे, परन्तु उनके पास एक ही वस्तु की कमी थी और वह थी दृढ़ इच्छाशक्ति, जिसके कारण नेपोलियन का कलेजा वज्र के समान कठोर हो जाता था। बड़ी-से-बड़ी आपत्ति आने पर भी वह अपनी आवश्यकता के अनुरूप अवसरों को अपने अनुकूल बना लेता था।

क्या यह अद्भुत बात बिना प्रयास के अपने ही आप हो गई ?
होरेशस ने टाइवर नदी के पुल पर केवल दो सैनिकों के साथ नब्बे हजार टक्सनों की सेना को पुल टूटने तक कैसे रोके रखा ? यह सब कैसे हुआ ? अपनी पराजय देखकर सीजर स्वयं भाला लेकर युद्ध के मैदान में कूद पड़ा और युद्ध का पासा पलट दिया। यदि रीड आस्ट्रियन भालों के सामने अपनी छाती न तान देता तो स्वतन्त्रता का मार्ग कैसे खुलता ? नेपोलियन अनेक वर्षों तक युद्धों में कैसे विजयी होता चला गया ? इतिहास ऐसे हजारों उदाहरणों से भरा पड़ा है, जिनसे यह सिद्ध होता है कि आत्मा की आवाज सुनकर दृढ़ निश्चयपूर्वक जो भी कार्य किया जाता है, संसार की कोई भी शक्ति उसकी सफलता में आड़े नहीं आ सकती। कोई भी बाधा उसमें रुकावट नहीं डाल सकती। बहुत से व्यक्ति किसी खास अवसर की प्रतीक्षा किया करते हैं। वह अक्सर कहा करते हैं-मुझको मौका मिलने दो।

साधारण अवसरों को वे उपयोगी नहीं समझते। उन्हें यह ज्ञात नहीं कि कोई भी अवसर छोटा या बड़ा नहीं होता। छोटे-छोटे अवसर को भी व्यक्ति अपने बुद्धि-चातुर्य से महत्त्वपूर्ण बना सकता है। आवश्यकता इस बात की है कि आप छोटे अवसर को भी हाथ से न जाने दें। कई बार छोटे-छोटे अवसर ही मनुष्य की बहुत बड़ी उपलब्धि का कारण बन जाते हैं।
ई.एच. चेपिन का कहना ठीक है कि अवसर की प्रतीक्षा करने वाले व्यक्तियों को महान या सर्वोत्तम नहीं कहा जा सकता। महान व्यत्ति तो वे हैं जो अवसर को अपना अनुगामी, अपना दास, अपना आज्ञापालक बना लेते हैं।

लाखों अवसरों को खोजने पर शायद ही कोई ऐसा अवसर मिले जो विशेष रूप से आपकी सहायता कर सके। यदि आप विचार करेंगे तो आपको पता लगेगा कि अवसर आपके सामने सदैव उपस्थित होते रहते हैं। यदि आज आप थोड़े से भी कामयाब हैं, तो आप उस विषय में सोंचें जब आपने यहां तक पहुंचने के अवसर को चुना और यहां तक पहुंचे। कोई अवसर कितनी विशेष उपलब्धि दिलाएगा, पहले से ऐसा कुछ नहीं कहा जा सकता। आपमें इच्छाशक्ति है, काम करने की लगन है तो आपको किसी भी अवसर का लाभ उठाने से कोई नहीं रोक सकता। अवसर तो ईश्वर की कृपा-रूपी बहती गंगा है। इसमें डुबकी लगाकर अपने जीवन को सफल एवं धन्य क्यों नहीं बना लेते ?
अवसर न मिलने का रोना कौन लोग रोते हैं, पहले इस तथ्य पर गौर करें। ऐसा करने वाले वही लोग हैं जो निर्बल हैं। जो संशय में जीते हैं। जो हीनता से ग्रस्त हैं, दब्बू और डरपोक हैं।अपने को दुर्बल समझने की भावना वास्तव में सच नहीं होती। यह तो मन की एक बीमारी है जिसके भयंकर परिणाम होते हैं। उसे अपनी शक्ति का पता ही नहीं है; उसने बिना अपने आपको तौले यह समझ रखा है कि वह शक्तिहीन है, बदकिस्मत है। जरा सोचिए कि कोई भी व्यक्ति बदकिस्मती के चक्रव्यूह से कैसे निकल सकता है, जब तक कि उसे स्वयं ही विश्वास न हो कि वह इससे निकल भी सकता है।

जब व्यक्ति यह सोचने लगता है कि यह काम मेरे लिए असम्भव है और मैं यह काम नहीं कर सकता तो किसी विज्ञान या किसी टोने-टोटके में इतनी ताकत नहीं कि उसके दम पर उससे वह काम करा लिया जाए।
* अवसरों को पहचानना सीखें. अपने अंदर दूरदृष्टि विकसित करें और यह देखें कि फलां चीज किस तरह आपको भविष्य में फायदा पहुंचा सकती है.

24/10/2015

अच्छे अवसर हाथ से न जाने दें
।। दक्षा वैदकर ।।
मेरे एक दोस्त ने मुझे बताया कि उसे चालीस लाख रुपये की अच्छी लोकेशन वाली एक जमीन सिर्फ तीस लाख रुपये में मिल रही है. मैंने कहा, यह तो बहुत अच्छी बात है. इसे तुरंत ले लो. हाथ से जाने मत दो. उसने कहा,‘जो आदमी इसे बेच रहा है, वह जरूरतमंद है. अगर मैं उसे एक लाख रुपये और कम करने को कहूं, तो वह उसमें भी मान जायेगा. मेरे एक लाख रुपये और बच सकते हैं.’ उसने मेरे सामने ही उस आदमी को फोन लगाया और कहा कि 29 लाख में वह जमीन उसे बेच दे. सामनेवाले व्यक्ति ने कुछ सोच कर कहा कि कल सुबह तक बताता हूं. अगली सुबह जब मेरे मित्र ने उसे फोन लगाया, तो उस आदमी ने कहा कि उसने वह जमीन 30 लाख में दूसरे सज्जन को बेच दी. यह सच्ची घटना हमें सीख देती है कि अवसरों को हाथ से जाने न दें. हमारा थोड़ा-सा लालच हमें भारी नुकसान कर सकता है. किसी ने सच ही कहा है कि भगवान जिंदगी में सभी को अवसर देते हैं, लेकिन बुद्धिमान व समझदार लोग उनका अधिक-से-अधिक लाभ उठा पाते हैं. यदि कोई बुद्धिमान नहीं है, तो भी सामान्य समझ का उपयोग कर अवसरों का अच्छा लाभ ले सकता है. सामान्यत: अवसर प्राप्त करने के लिए आपको आलस्य छोड़ एक कदम आगे बढ़ाने की आदत रखनी होती है. उत्साहित व जाग्रत व्यक्ति के पास अवसर खुद चल कर आते हैं. परन्तु ज्यादा होशयारी, अकुलाहट या हड़बड़ाहट में भी अवसर हाथ से निकल जाते हैं. एक कहानी सुनें.

एक गरीब व्यक्ति की व्याकुल प्रार्थना से पिघल कर एक देवता ने उसे तीन वरदान का आशीर्वाद दिया. यह सुन कर पति-पत्नी दोनों सोचने लगे कि क्या-क्या मांगे. अपने-अपने स्वार्थ के चलते दोनों का झगड़ा हो गया. पति की नाक बहुत बदसूरत एवं भद्दी थी. वह जोर से चिल्लाया, मुझे सुंदर नाक चाहिए. उसने देखा तत्काल उसके चेहरे पर तीन सुंदर नाक आ गयीं. हड़बड़ा कर उसने कहा, ये नाक हटा लो. उसने देखा उसके चेहरे से नाक ही गायब हो गयी. घबरा कर वह बोला, मुझे पहलेवाली नाक ही दे दो. उसे वापस पहले जैसी नाक मिल गयी. उनके तीनों वरदान बेकार चले गये. इस तरह से धैर्य न रखने पर उसने अवसर खो दिया.

- बात पते की
* ज्यादा होशियारी न दिखायें. धीरज रखें व सामान्य समझ का उपयोग करें. निश्चित तौर पर भगवान के दिये अवसरों का आप लाभ उठा सकेंगे.

24/10/2015

TIPS FOR FACING
AN INTERVIEW BOARD

The interview may be the most difficult part of any selection procedure or it may be the easiest. After clearing the technical barriers, its time to face an exam where you cannot revise your answers or leave them for later -- the interview. Here are some tips and tricks to help you perform your best in any interview; whether it's for college, a job or qualification.

1. Be Confident: The key to a successful interview is confidence. If you believe that you are the right person for the job/course and are confident then it's likely that your interviewer will believe that too.To improve your confidence talk more, you can practice by facing the mirror and talking. If you are equipped with some recording device you can record your voice to analyse how you will sound in front of interviewer. Talk about yourself, your dreams and your strengths. Focus on speaking fluently without stumbling or fidgeting.

2. It is essential that whichever language you speak in, you should have a good command over it. Brush up some basic grammar rules.
3. Listen to news in the language you will be using during the exam. This will help you remember correct pronunciations and improve your flow of language.
4. Remember that while it's good to talk eloquently you should not ramble on. Speak clearly and concisely, so you express your thoughts in the best way possible.
5. Know your resume inside out: You should know everything about your resume, as anything may be asked, your previous education, extra-curricular activities, awards, projects etc. You should be able to confidently speak about each point on your resume.
6. Remember to maintain eye contact with the interviewer.

7. Research the organization before your interview and prepare at least 2-3 questions that you will ask the interviewer about the job/course/organization. This shows your genuine interest in the role.

8. Practice positive body language: Even if the interviewer hasn't actively studied body language he/she will still pick up general signs. Remember not to fidget, stand still and relaxed and while sitting sit casually maintaining a comfortable straight posture.
9. Try planning your answers to a few questions that you know will definitely come, such as: Why are you interested in this course/job/field? What are your strengths? What are your weaknesses? Why do you think you should be selected for this role/course? Do not write out any answers but jot down a few important points that you need to remember for the answers and based on the points speak spontaneously.
10. Before the interview, practice with a friend/relative and record your answers. You will be able to listen/see where you fumble and where you need to improve.
11. Focus on speaking positively and avoiding negativity. This gives a more positive effect of your interview and will more likely get you a positive response.
12. Be professional while you speak, avoid petty conversations, complaining, blaming or trying to seek pity.
13. Be polite and calm. Showing anger is definitely not a good idea.
14. Include your technical knowledge wherever applicable, this shows you are proactive and pay attention to studies.
15. On the day of the interview make sure you are properly dressed in formal attire, are carrying copies of your resume (and relevant certificates as required) in proper case, are well rested and fresh.
16. Remember to reach the venue early and arrive for the interview on time.

There is no syllabus on interview preparation and no notes. You won't be given answer sheets or time to revise. What you will have however is a clean slate to express yourself. Your power lies in your ability of expression: how you talk, move, respond, dress, carry yourself and how you answer questions. Be calm, cool and confident and you will definitely get good marks! All the Best! The World is yours!

Address

VPO Chadhiar Near Gas Agency Teh Baijnath Dist Kangra
Chadhiar
176088

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Swastice Institute of Computer Science posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Business

Send a message to Swastice Institute of Computer Science:

Share