05/08/2025
पुलिस थाने और सरकारी कार्यालय में कई बार पीड़ित से ही 'पैसा' मांगा जाता है – और ये भी परंपरा बन गई है। सोशल मीडिया, वायरल वीडियो और सिस्टम की असहायता 'पुलिस केस' तभी दर्ज होता है जब घटना का वीडियो वायरल हो, या कोई मीडिया प्लेटफार्म ट्वीटर-फेसबुक पर उबाल लाए। इससे पहले – या तो पीड़ित खुद अपराधी बना दिया जाता है, या फिर उसे गांव छोड़ने पर मजबूर किया जाता है। गरिमा, सम्मान, न्याय – तीनों सिर्फ संविधान की किताब में बचा है। अब आंकड़े, असर और असली सवाल सरकार कहती है – "हमने कानून बना दिये, राहत निधि दे दी, फास्ट ट्रैक कोर्ट खोल दी, SC/ST एक्ट संशोधित हो गया..." मग़र पीड़ित कब तक न्याय का इंतज़ार करेगा? 2023 में 60% केस में भी चार्जशीट नहीं दाखिल। 2025 में पंचायत स्तर पर डकैती, तिरंगा अपमान, सार्वजनिक बेइज्जती के केस बेखौफ पुलिस, प्रशासन, समाज – तीनों की चुप्पी सबसे बड़ी सजा। मीडिया, रिपोर्टिंग और 'असल भारत'
बड़े चैनलों पर अक्सर जातीय दंगों, आरक्षण की राजनीति और दलितों की सियासत पर लंबी बहसें होती हैं।
पूरा ब्लॉग पढ़े लिंक पर क्लिक करके कुछ नहीं सच्चाई सामने आएगी अच्छा लगे तो लाइक करें
भारत की आर्थिक, सामाजिक और ऐतिहासिक विचारधारा