आप आमंत्रित हैं एक शुद्ध भारतीय शिक्षा संस्थान में जिसकी शुरुआत आप को ही करनी है और जिसके मार्गदर्शक, परामर्शक, रखवाले और संरक्षक भी आपको ही बनना है.
भारतीय इतिहास में श्री ऋषभ देव का बड़ा योगदान है. उन्होंने जन जन को शिक्षित करने और उनको तकनीक सीखने का प्रयास किया . वे भारत के प्रथम राजा थे. उन्होंने ही शादी की वर्तमान प्रणाली विकसित की [सुनंदा से उनकी शादी वर्तमान व्यवस्था के तहत पहली शादी थी
] . उन्होंने संगीत, नृत्य, कला, प्रशाशन, और लोक जीवन की विविध कलाओं को विकसित किया. उन्होंने कृषि, तकनीक, और गृहस्थ जीवन की प्रणाली विकसित की और जन जन को उसका ज्ञान दिया. उन्होंने अपनी पुत्रियों [ब्राह्मी और सुंदरी ] को भी इसी कार्य को आगे बढ़ने का कार्य दिया. उन्ही के पुत्र श्री भारत के नाम पर भारत नाम से इस देश को जाना जाने लगा. उन्ही के पुत्र श्री बाहुबली ने अद्भुत और अलोकिक तपश्या की और आज भी बाहुबली की प्रतिमा इस का गवाह है. श्री ऋषभ देव ने गृहस्थ जीवन के लिए आवश्यक सभी आयाम जन जन को सिखाये. उन्ही ऋषभ देव को आदर्श बना कर ऋषभ देव महाविद्यालय स्थापित किया जा रहा है.
पाठ्यक्रम ;-
यह महाविद्यालय भारतीय संस्कृति और भारतीय अभिव्यक्ति को फिर से पुराने गौरव में ले जाने के प्रयास में विद्यार्थियों को संस्कृति और सभ्यता की पाठशाला बन सुसंस्कृत विद्यार्थियों के एक नए क्षितिज पर ले जाने के लिए पायस करेगा. इस महाविद्यालय में निम्न पाठ्यक्रम होंगे -
विद्यालय
संस्थान में विविध विषयों में आईटीआई प्रशिक्षण भी उपलब्ध होगा जिसके लिए अलग अलग उद्योगपतियों से सहयोग लिया जाएगा ताकि विद्यार्थी प्रशिक्षण के दौरान और बाद में उद्योगों के साथ मिल कर काम कर सके और वो वही पढ़ाई करे जो उद्योगों में काम आये.
बी. कॉम [ कम्प्यूटर एप्लीकेशन ]
बी.ऐ [ साहित्य, अर्थशाश्त्र, संस्कृत, चित्रकला, संगीत, अभिनय, दर्शन आदि ]
आईटीआई, पॉलिटेक्निक, स्वास्थ्य शाश्त्र, नर्सिंग, और इंजीनियरिंग [ भारतीय स्वास्थ्य विज्ञानं, पाक शास्त्र, भारतीय खगोल शाश्त्र, कम्प्यूटर विज्ञानं, सुचना प्रोद्योगिकी, फिल्म बनाना, वास्तु शाश्त्र, भारतीय कृषि विज्ञानं आदि ]
प्राकृतिक चिकित्सा, रिलेटिव इकोनॉमिक्स, प्रेक्षा ध्यान, और भारतीय परम्परों का अध्ययन
अध्यापक
भारत के श्रेष्ठं अध्यापकों के विडिओ कोन्फेरेंस सिस्टम से व्याख्यान होंगे और कई अध्यापक इस आवासीय परिसर में ही रुकेंगे इस हेतु अनुभवी लोगों से संपर्क जारी है और इनमे से कई अपनी सहमति भी प्रदान कर चुके हैं. बाहर से पधारने वाले प्रशिक्षकों और विद्यार्थियों हेतु आवासीय परिसर में अतिथि कक्ष होंगे.
संस्थान और सुविधाएँ
यह संस्थान ३१ बीघा भूमि में स्थित है फिर आवश्यकता के अनुसार और भूमि ले ली जायेगी. यह संस्थान गोशाला के ठीक सामने स्थित है जो की संस्थान के लिए जरुरी भी है. क्योंकि इससे दूध और गोबर की उप्लाभ्दता और गायों की सेवा से जोड़ने का मौका मिलेगा
इस आवासीय महाविद्यालय में सभी सुविधाएँ होंगी जैसे आवास, भोजन शाला, प्रेक्षा गृह,ओद्योगिक शोध केंद्र, ओद्योगिक प्रशिक्षण केंद्र, इंटरनेट, वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग, प्रदर्शनी, सेमिनार हॉल, डिस्प्ले सेंटर, स्वास्थ्य जांच केंद्र आदि.
संस्थान का अपना ग्रीन हाउस शोध केंद्र और कृषि केंद होगा जहाँ पर शुद्ध भारतीय तरीके से [आर्गेनिक कृषि ] कृषि की जायेगी.
प्लेसमेंट
संस्थान में उद्यमिता प्रशिक्षण केंद्र होगा जो लगातार उद्यमिता का प्रशिक्षण देगा. संस्थान में इन्क्यूबेशन सेंटर भी होगा जो विद्यार्थियों को उद्योग लगाने में मदद करेगा और इससे उनको आगे भी मार्गदर्शन मिलता रहेगा. विद्यार्थियों हेतु सतत औद्योगिक प्रशिक्षण की व्यवस्था है. जो विद्यार्थी नौकरी करना चाहेंगे उनको प्लेसमेंट में मदद होगी. संस्थान के विद्यार्थियों के प्लेसमेंट हेतु अभी से कम्पनियों की स्वीकृति मिल चुकी है और श्रेष्ठ विद्यार्तियों को बेहतरीन प्लेसमेंट मिलेंगे.
संस्थान में आईएएस, चार्टर्ड एकाउंटेंसी, कंपनी सेक्रेटरी, आदि प्रोफेशनल पाठ्यक्रम का पशिक्षण भी उपलभ्द रहेगा
प्रकाशन
संस्थान भारतीय ज्ञान पर नियमित प्रकाशन और वेबसाइट पर प्रकाशन करेगा. पात्र पत्रिकाएं भी प्रकाशित करेगा
संगोष्टी
संस्थान हर वर्ष भारतीय ज्ञान पर एक संगोष्ठी करेगा
भोजन
विद्यार्थियों, अतिथियों और शिक्षकों हेतु शुद्ध सात्विक भोजन की व्यवस्था होगी. सायं का भोजन सूर्यास्त से पहले भी उपलभ्ध होगा.
उपसरा
संतों के रहने के लिए एक उपसरा होगा जिसमे संत रह कर विद्यार्थियों को ज्ञान दे सकेंगे.
प्रयोगशालाएं और एक्सहिबिशन हॉल
संस्थान में अनेक प्रयोगशालाएं और प्रदर्शनी कक्ष होंगे, जैसे -
ऋषभदेव जीवन प्रदर्शनी
भारतीय विज्ञानं प्रदर्शनी
भारतीय वास्तु कला प्रदर्शनी
भारतीय चित्र कला प्रदर्शनी
भारतीय पाक कला प्रदर्शनी
भारतीय न्याय व्यवस्था
भारतीय गणित
भारतीय चिकित्सा शाश्त्र - आयुर्विज्ञान
भारतीय दर्शन शाश्त्र
आदि
यह संस्थान जुलाई २०१५ से आप सभी के सहयोग से शुरू हो रहा है.
मदद
यह संस्थान अपने आप तो बन नहीं सकता, इस संस्थान के निर्माण में अनेक लोग मदद कर रहे हैं. आगे भी आप लोगों की मदद मिलती रहेगी. जो भाई / बहिन भी इच्छुक हों - कृपया संपर्क कर सकते हैं.