Mahadev Trading Co.

Mahadev Trading Co. ERD MOBILE ACCESSORIES MOBILE� SPARE� PARTS
TELANGANA, ANDHARA PARDESH, MAHARASTRA, KARANATAKA
(1)

🌻 मनुष्य अगर पकड़-अकड़ छोड़ दे, तो दुःख और भय को जगह ही नहीं मिलेगी।🌻 मनुष्य को चाहिए कि चिंता नहीं करे, क्योंकि तरतीव्र...
06/10/2025

🌻 मनुष्य अगर पकड़-अकड़ छोड़ दे, तो दुःख और भय को जगह ही नहीं मिलेगी।

🌻 मनुष्य को चाहिए कि चिंता नहीं करे, क्योंकि तरतीव्र प्रारब्ध जैसा होता है, वह तो होकर ही रहता है। किंतु इसका यह अर्थ भी नहीं है कि हाथ-पर-हाथ रखकर बैठ जाये। पुरुषार्थ तो करना ही चाहिए। बिना पुरुषार्थ के कोई भी कार्य सिद्ध होना संभव ही नहीं है। यदि आपने तत्परता से, मनोयोग से, विचारपूर्वक कार्य किया हो, फिर भी सफल न हुए हों, तो उसे विधि का विधान मानकर सहजता से स्वीकार करो, दुःखी होकर नहीं।

🌻ऐसे सद्गुरु का ऋण, मैं किस प्रकार चुका सकता हूँ!? जिन्होने, मुझे जन्म लेना न पड़े, ऐसी कृपा मुझ पर कर दी।

भारत में निर्मित मोबाइल चार्जर बैटरी केबल पावर बैंक सभी उपलब्ध है                                             नए मॉडल मे...
17/09/2025

भारत में निर्मित मोबाइल चार्जर बैटरी केबल पावर बैंक सभी उपलब्ध है








नए मॉडल में उपलब्ध

दृढ संकल्पवान तथा सेवाभावी मनुष्य हर क्षेत्र में सफल और हर किसीका प्यारा हो सकता है । करना राम बग संसार की आसक्ति जितनी-...
10/12/2024

दृढ संकल्पवान तथा सेवाभावी मनुष्य हर क्षेत्र में सफल और हर किसीका प्यारा हो सकता है । करना राम बग

संसार की आसक्ति जितनी-जितनी मिटेगी और भगवान की प्रीति जितनी-जितनी बढ़ेगी, उतना-उतना मानव भीतर से महान होगा। जितनी-जितनी आसक्ति बढ़ेगी, उतना-उतना वह भीतर से साधारण होता जायेगा। फिर उसकी आवश्यकताएँ बढ़ जायेंगी और उसे डर भी ज्यादा लगेगा। जितनी संसार की वासना ज्यादा, उतना भीतर से डरपोक रहेगा और जितने ईश्वर की प्रीति ज्यादा, उतना भीतर से निर्भय़ रहेगा।

गुरु-शिष्य का नाता तो... मौत भी नहीं तोड़ सकती तो ये अभागे निंदक क्या तोड़ पायेंगे...।

बाहर कैसी भी घटना घटी हो, चाहे वह कितनी भी #प्रतिकूल लगती हो, परन्तु तुम्हें उससे खिन्न होने की तनिक भी आवश्यकता नहीं.......

आप जब सही करने लगते हैं, #शास्त्रानुकूल करने लगते हैं तो भीतर से धन्यवाद छलकता है। इसको बोलते हैं अंतर्यामी अवतार। आपके हृदय में वह अकाल पुरुष अंतर्यामी रूप में अवतरित होता रहता है। हम अगर सात-सात गुफाओं में छुपकर भी बुरा कार्य करें, जहाँ हमें कोई भी न देख सके, वहाँ भी कोई देखने वाला होता है जो हमें कोसता है

14/01/2024
3 in 1 CABLE MICRO,USB-C,IPHONE
12/01/2024

3 in 1 CABLE
MICRO,USB-C,IPHONE

20W CHARGER
13/12/2023

20W CHARGER

भारत में निर्मित मोबाइल चार्जर बैटरी केबल पावर बैंक सभी उपलब्ध है                 नए मॉडल में उपलब्ध
19/09/2023

भारत में निर्मित मोबाइल चार्जर बैटरी केबल पावर बैंक सभी उपलब्ध है





नए मॉडल में उपलब्ध

कांग्रेस ने "ISRO"  #वैज्ञानिकों के साथ किए हुए अत्याचार ...अवश्य पढ़े 🙏नाम : नंबी नारायण, किनको-किनको याद है ?वैसे इस न...
25/08/2023

कांग्रेस ने "ISRO" #वैज्ञानिकों के साथ किए हुए अत्याचार ...अवश्य पढ़े 🙏

नाम : नंबी नारायण, किनको-किनको याद है ?

वैसे इस नाम पर एक फिल्म भी बनी है:
ROCKETRY: The NAMBI effect

इसकी चर्चा मैं इसलिए छेड़ रहे है कि चंद्रयान-3 के कल की सफल लैंडिंग के बाद ISRO और इसके वैज्ञानिकों की पलभर की हौसला अफजाई के बाद राजनीतिक श्रेय लेने की जो बेशर्म होड़ मची है, उस पर विराम लग सके वैसे राजनीति है तो बेशर्म तो होगी ही

भारत इस अभियान में कब का सफल हो जाता यदि प्रसिद्ध वैज्ञानिक और तत्कालीन ISRO वैज्ञानिक(1994)
नंबी नारायण को तत्कालीन सरकार ने झूठे जासूसी के केस में फंसाकर जेल में न डाला होता। क्रायोजेनिक इंजन की जिज्ञासा लिए जब वैज्ञानिक इस दिशा में कदम बढ़ा रहे थे तो तत्कालीन केरल की कांग्रेस सरकार ने अमेरिकी प्रभाव में आकर उनके कदमों में बेड़ियाँ जड़ दीं। 50-60 दिनों की यातनापूर्ण कैद में रखा और बाद में सिद्ध क्या हुआ कि उन पर लगाए गए सारे आरोप पूर्णत: झूठे थे। किंतु उसके बाद भारत के सभी वैज्ञानिकों की एक के बाद एक संदेहास्पद स्थिति में मौत हो गई और कुछ का अपहरण हो गया जिनका आज तक कुछ पता न चल सका

1995 से 2013 का दौर में हमारे सभी वैज्ञानिक षडयंत्र के तहत मार दिए गए, उनके परिवार के सदस्य भी गायब कर दिए गए ताकि कहीं से कोई आवाज न उठे

इसके बावजूद भी आज भारत और ISRO की इस उपलब्धि से नंबी नारायण खुश हैं क्योंकि आज की सरकार का हर संभव समर्थन ISRO के साथ है..!!

नंबी नारायण जी को नमन हे🚩🙏

ऐसा कोई ज्ञान नही जो आपकी गहराई मे ना पड़ा हो..!तुम अव्यक्त हो और परमात्मा भी अव्यक्त है..!जो व्यक्त है वो बदल जाता है ....
23/08/2023

ऐसा कोई ज्ञान नही जो आपकी गहराई मे ना पड़ा हो..!

तुम अव्यक्त हो और परमात्मा भी अव्यक्त है..!

जो व्यक्त है वो बदल जाता है ..अव्यक्त ज्यो का त्यों रहता है..!

तुमको मार सके ऐसी दुनिया मे कोई मौत पैदा नही हुई..!

https://www.facebook.com/100063577341149/posts/774121334717104/?mibextid=cr9u03

भारत की 'चंद्रयान-3' और रसिया की 'लूना-25' में से, कौन चन्द्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहले उतरेगा? यह चन्द्रमा का एक ऐसा हिस्सा है, जहां आज तक किसी भी देश का "लेंडर" नहीं पहुंच सका है।

भारत के अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन, ISRO की ओर से भेजे गए चंद्रयान-3 ने चंद्रमा की 'कक्षा' में प्रवेश कर लिया है। और वहीं कल ही रूस ने भी चांद के लिए, अपना लूना-25 मिशन लॉन्च कर दिया है "चंद्रयान-3 और लूना-25" को चन्द्रमा के उसी दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करना है!! जहां पर करोड़ों सालों से सूरज की रोशनी नहीं पहुंची है, और जहां दुनिया का कोई देश आज तक नहीं पहुंचा है!! ऐसे में इस मिशन का यह पल बेहद हैरतअंगेज कर देने वाला होगा। हालांकि, दोनों के बीच लैंडिंग की दूरी करीब '120 किलोमीटर' की होगी। और दोनों के एक ही दिन चन्द्रमा के सतह पर उतरने के दावे किए जा रहे हैं। तो मित्रों... चलिए जानते हैं इन दावों की सच्चाई। मुझे भी बहुत सारे मित्रों ने, मैसेज बॉक्स और कॉमेंट में पुछा है कि क्या 15 तारीख को भारत की चन्द्रयान-3 चन्द्रमा पर लैंडिंग करेगी!?

एक तरफ भारत के चंद्रयान-3 को चन्द्रमा पे पहुंचने में करीब 27 दिनों का वक्त लग रहा है, तो वहीं लूना-25 केवल 10 से 11 दिनों में चांद पर लैंड कर सकता है!? दरअसल इसे बहुत ही शक्तिशाली 'सोयूज 2.1' रॉकेट से लॉन्च किया गया है, जो लूना-25 को धरती की कक्षा की परिक्रमा के बगैर, सीधे चांद के ऑर्बिट में पहुंचा देगा! ऐसे में चंद्रयान-3 और लूना-25 में से कौन चन्द्रमा के दक्षिणी ध्रुव पे पहले उतरेगा, इसे लेकर पूरी दुनिया में "चर्चा" छिड़ गई है। यह चन्द्रमा का एक ऐसा हिस्सा है, जहां आज तक किसी भी देश का "लेंडर" नहीं पहुंच सका है। ऐसे में चंद्रयान-3 और लूना-25 की लैंडिंग एक दूसरे की प्रतिद्वंदिता के तौर पर भी देखी जा रही है और इसी विषय को लेकर ISRO के एक पूर्व वैज्ञानिक, तपन मिश्रा जी के इंटरव्यू भी बहुत महत्वपूर्ण है!! मिश्रा जी के कथन अनुसार रसिया के चंद्रयान मिशन से हमारे चंद्रयान-3 का कोई मुकाबला ही नहीं है। इसे प्रतिद्वंदिता के तौर पर, बिल्कुल नहीं देखा जाना चाहिए क्योंकि चंद्रयान-3 लूना-25 के मुकाबले अधिक महत्वाकांक्षी मिशन है। भारत के इस महत्वाकांक्षी अभियान में केवल 615 करोड़ रुपये का "खर्च" हुए हैं, जो देश के अंदर एक छोटा सा फ्लाईओवर निर्माण के खर्च के बराबर है और इतने कम राशि में हमारा मिशन चन्द्रमा के उस हिस्से के लिए निकला है जहां दुनिया का कोई देश आज तक नहीं पहुंचा!! ऐसे में लूना-25 का चंद्रयान-3 से कोई मुकाबला ही नहीं हो सकता। मिश्रा जी ने कहा कि भारत के लिए यह बहुत गौरव का क्षण होगा, जब चंद्रयान-3 तय समय से पहले चन्द्रमा की सबसे निचली कक्षा में जा पहुंचा है। (यहां पे नोट करें कि तय समय से पहले) ओर इसके 'वैज्ञानिक' पहलू पर रुख करें तो "चन्द्रमा" की आखिरी कक्षा में जब चंद्रयान-3 को पहुंचना था तो, उसके काफी पहले उसके कक्ष की गणना कर के ISRO के "वैज्ञानिकों" ने इंजन को फायरिंग कर उसे पहुंचा दिया था!! ऐसे में अगर ISRO ने चाहा तो तय तारीख से चार दिन पहले ही मौजूदा साइंटिफिक आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए जीरो एरर के साथ, चंद्रयान-3 को शेड्यूल लैंडिंग साइट पर उतार सकता है! परंतु भारत की इस अति महत्वाकांक्षी मिशन को, लूना-25 के प्रतिद्वंदिता से जोड़कर नहीं देखा जा रहा है, इसलिए भारत कोई रिस्क नहीं लेगा। (यहां पे आप नोट करें कि तय तारीख से चार दिन पहले चन्द्रयान-3 को उतारा जा सकता है और यह बहुत अहम बात है)

मुझे लगता है कि जितनी कम कीमत में हमारा चंद्रयान चन्द्रमा पर गया है, उससे कई गुना अधिक कीमत, रूस के लूना-25 पर लगी है। इसके अलावा हमारा यह मिशन, महज तीन साल में प्लान किया गया है! जबकि रूस ने अपने लूना-25 मिशन को 1990 के दशक से ही 'प्लानिंग और प्रक्रिया' शुरू कर दी थी। इसके अलावा लूना 25 की लॉन्चिंग में कम से कम 160 मिलियन रुपये का खर्च हुआ है जो चंद्रयान-3 के बजट से कई गुना ज्यादा है!! इसीलिए हमारा चंद्रयान मिशन लूना-25 के मुकाबले, अधिक महत्वाकांक्षी व देश को गौरवान्वित करने वाला है... मिश्रा जी का कहना है कि जैसे लूना-25 को लॉन्च करने के लिए, अति शक्तिशाली रॉकेट का इस्तेमाल किया गया जो सीधे धरती की कक्षा से उपग्रह को ले जाकर, सीधे चन्द्रमा की कक्षा में प्रवेश करा सकता है, वैसी टेक्नोलॉजी हमारे पास फिलहाल 'मौजूद' नहीं है। बावजूद इसके हमने चंद्रयान-3 को स्लिंगशॉट मेकानिजम के तहत पहले "धरती" के गुरुत्वाकर्षण की मदद से धरती के परिक्रमा कराते हुए कक्षा से बाहर फेंका उसके बाद चन्द्रमा की कक्षा में, सबसे आखरी वलय तक उसे पहुंचा दिया है। इस "मेकानिजम" को सरल शब्दों में समझें तो जैसे एक गुलेल में रबड़ लगी होती है। उसमें से जिस वस्तु को दूर फेंकना है तो पहले रबड़ में उस वस्तु को डाल कर हथेलियों से पीछे खींचा जाता है। और खिंचने वाले की, मांसपेशियों की ऊर्जा रबड़ में जाती है, और स्टोर हो जाती है। उसके बाद जब गुलेल को छोड़ा जाता है तो रबड़ में 'एकत्रित' हुई मांसपेशियों की ऊर्जा एकजुट होकर, गुलेल से छोड़े जाने वाली 'वस्तु' को काफी तेज रफ्तार से दूर फेंक देती है। इसी तकनीक से हमारा चंद्रयान-3 को चंद्रमा की दक्षिणी ध्रुव तक पहुंचा दिया गया है और इससे बहुत बड़ी ईंधन की खपत बचाई गई है, जो भारत के वैज्ञानिकों की सूझबूझ और दक्षता को दर्शाती है। इसीलिए लूना-25 और चंद्रयान-3 में कोई तुलना नहीं है।

जिस सटीकता के साथ भारतीय वैज्ञानिक, मिशन को अंजाम दे रहे है, वह निश्चित तौर पर चंद्रमा की 'दक्षिणी ध्रुव' पर लैंड करेगा। चन्द्रयान-2 के Orbiter से भेजे गए डाटा व सर्वेक्षण से पता चला है कि जहां हमारा चन्द्रयान-3 लैंडिंग करेगा वहां बहुत बर्फ जमी है, और चंद्रयान-3 का मकसद भी यही है कि वहां ऑक्सीजन और पानी की खोज करेगा और यही मकसद लूना-25 का भी है! लेकिन रसिया को यह अभियान करने में 40 साल लग गए। 47 सालों के बाद रसिया ने, अपना चन्द्रमा का मिशन किया है, जबकि भारत के वैज्ञानिको ने, महज तीन वर्षों में इसे सफलता तक पहुंचाया है। चंद्रमा की उत्पत्ति 450 करोड़ साल पहले हुई थी! और तब से लेकर अब तक उसपर लगातार अंतरिक्ष से आने वाले "पत्थर" और उल्कापिंड गिरते रहते हैं। इनके गिरने से गड्ढे यानी 'Crater' बनते हैं और इन्हें Impact Crater भी कहते हैं!! चंद्रमा पर करीब "14 लाख गड्ढे" हैं। 9137 से ज्यादा क्रेटर की पहचान की गई है। 1675 की तो उम्र भी पता की गई है। परंतु वहां हजारों गड्ढे हैं, जिन्हें इंसान देख भी नहीं पाया है। क्योंकि उसके अंधेरे वाले हिस्से में देखना मुश्किल है। ऐसा नहीं है कि चन्द्रमा की "सतह" पर मौजूद गड्ढे सिर्फ इम्पैक्ट क्रेटर हैं!! कुछ ज्वालामुखी विस्फोट की वजह से भी बने हैं करोड़ों साल पहले।

मित्रों... मैंने जितना इस विषय पर अध्ययन किया है वह सभी जानकारी आप लोगों के सामने रखा है, मेरे बहुत सारे मित्रों ने मुझे जितने सारे सवाल किए थे, मैंने हर सवालों के जवाब को तथ्य के साथ विश्लेषण करके आप लोगों के सामने रखा है...

सदा जय हो मेरे देश के वैज्ञानिको की, जय भारत

सारे शुभ को ढोंग खा जाता है और सच्चाई सारे अशुभ को खा जाती है जैसे सूर्य अंधकार को खा जाता है । शुभ कर्म और भगवद चिंतन च...
26/05/2023

सारे शुभ को ढोंग खा जाता है और सच्चाई सारे अशुभ को खा जाती है जैसे सूर्य अंधकार को खा जाता है । शुभ कर्म और भगवद चिंतन चिंताओं को और पापों को नष्ट कर देता है । ऐसे अशुभ कर्म, अशुभ चिंतन योग्यताओं को हर लेता है ।

महाराणा प्रताप की उदारताजिसका चरित्र पवित्र है, वही दूसरों में पवित्र भावना का संचार कर सकता है  । उसीका जीवन सुरभित सुम...
09/05/2023

महाराणा प्रताप की उदारता

जिसका चरित्र पवित्र है, वही दूसरों में पवित्र भावना का संचार कर सकता है । उसीका जीवन सुरभित सुमन की भाँति संसार-वाटिका को सौरभ से परिपूर्ण कर सकता है । चरित्रबल की बड़ी महत्ता है ।

बात उन दिनों की है जब भामाशाह की सहायता से महाराणा प्रताप पुनः सेना एकत्र करके मुगलों के छक्के छुड़ाते हुए डूँगरपुर,बाँसवाड़ा आदि स्थानों पर अपना अधिकार जमाते जा रहे थे ।

एक दिन तेज ज्वर के कारण महाराणा प्रताप युद्ध में न जा सके । इस कारण युद्ध का नेतृत्व उनके पुत्र कुँवर अमरसिंह कर रहे थे । उनकी मुठभेड़ अब्दुर्रहीम खानखाना की सेना से हुई । खानखाना और उसकी सेना जान बचाकर भाग खड़ी हुई । अमरसिंह ने महिलाओं तथा बचे हुए सैनिकों को वहीं कैद कर लिया । जब यह समाचार महाराणा को मिला तो वे अमरसिंह पर बहुत क्रुद्ध हुए और बोले : ‘‘किसी स्त्री पर राजपूत हाथ उठाये, यह मैं सहन नहीं कर सकता । यह हमारे लिए शर्म से डूब मरने की बात है ।’’ वे तेज ज्वर में ही युद्धभूमि के उस क्षेत्र में जा पहुँचे, जहाँ खानखाना परिवार की महिलाएँ बंदी बनाकर रखी गयी थीं ।

महाराणा प्रताप खानखाना की बेगम से विनीत स्वर में बोले : ‘‘खानखाना मेरे बड़े भाई हैं । इसलिएरिश्ते में आप मेरी भाभी हैं । यद्यपि यह मस्तक आज तक किसी व्यक्ति के सामने नहीं झुका, परंतु मेरे पुत्र अमरसिंह ने आप लोगों को कैद कर लिया है, उसके इस व्यवहार से आपको जो कष्ट हुआ उसके लिए मैं माफी चाहता हूँ और आप लोगों को ससम्मान मुगल छावनी में पहुँचाने का वचन देता हूँ ।’’

उधर हताश-निराश खानखाना जब अकबर के पास पहुँचे तो उसने व्यंग्यपूर्ण वाणी में उनका स्वागत किया कि ‘‘जनानखाने को युद्धभूमि में छोड़कर आप लोग जान बचाकर यहाँ तक कुशलता से पहुँच गये ?’’ खानखाना मस्तक नीचा करके बोले : ‘‘जहाँपनाह ! आप चाहे मुझे जितना भी शर्मिंदा कर लें, परंतु महाराणा प्रताप के रहते वहाँ महिलाओं को कोई खतरा नहीं है ।’’ तब तक खानखाना परिवार की महिलाएँ कुशलतापूर्वक वहाँ पहुँच गयीं ।

यह दृश्य देखकर अकबर गंभीर होकर खानखाना से कहने लगा : ‘‘राणा प्रताप ने आपकी बेगम व पुत्रवधू को यों ससम्मान पहुँचाकर आपकी ही नहीं, पूरे मुगल खानदान की इज्जत की रक्षा की है । महाराणा प्रताप की महानता के आगे मेरा मस्तक झुका जा रहा है । उनके जैसे उदार, धर्मात्मा योद्धा को कोई गुलाम नहीं बना सकता ।’’ (लोक कल्याण सेतु : फरवरी 2005)

Address

7-7/16, Sadhak Nivas Opp. Main Sohta, Near Post Office
Bhinmal
343030

Opening Hours

Monday 10am - 8pm
Tuesday 10am - 8pm
Wednesday 10am - 8pm
Thursday 10am - 8pm
Friday 10am - 8pm
Saturday 10am - 8pm
Sunday 10am - 2am

Telephone

+919010600128

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Mahadev Trading Co. posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Business

Send a message to Mahadev Trading Co.:

Share

Category

ERD MOBIE ACCESSORIES DATA CABLE POWER BANK CAR CHARGER EAR FONE MICRO CHARGER C-TYPE

ERD MOBILE ACCESSORIES DATA CABLE CHARGER POWER BANK ALL TIPE MOBILE ACCESSORIES