02/04/2015
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Banka Now | News Online
काश बरसात से पहले कम हो जाए चिरैया का दर्द
-अमरपुर प्रखंड क्षेञ के चिरैया गांव की स्थित बारिश के मौसम हो जाती दयनीय
-शव दफनाने से लेकर चिता जलाने में करनी पडती भारी मशक्कत
बांका नाव- सरकार सडक निर्माण की बात जितनी करती हो, परंतु चिरैया गांव की स्थिति देखने के बाद उनकी हर बात बेमानी लगती है। चिरैया गांव की स्थिति बारिश के मौसम में काफी दयनीय हो जाती है। पांव रखने का भी रत्ती भर जगह मय्यसर नहीं होता है। इतन नहीं इस दरम्यान किसी की अगर इंतकाल हो जाए तो, उसे दफनाने व जलाने में नानी याद आ जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि शव को दफनाने के लिए चार से पांच दिन का लंबा इंतजार करना पडता है। दरअसल चिरैया व पास में ढिमरा गांव में आजादी के बाद से ही सडक का निर्माण नहीं हुआ है। गांव की आबादी अच्छी खासी है। परंतु इसकी सुधी लेने वाला जनप्रतिनिधि से लेकर कोई अधिकारी नजर नहीं आता है। ग्रामीणों का कहना है कि अबकी पुन" बरसात मुहाने पर है। अगर जल्द ही समस्या का निराकरण हो जाए, तो उनके गांव में खुशहाली आ जाएगी। नहीं तो प्रति वर्ष की तरह इस बार भी दलदल से जंग लड ना होगा।
बरसात में लोगों का छूट जाता आस पडोस से नाता
ग्रामीणों का कहना है कि बरसात आते ही आस पडोस से उनका नाता टू ट जाता है। कीचडमय गांव में बाहरी लोग आना मुनासिब नहीं समझते हैं, इतना ही नहीं लोग गांव के उपर टॉन भी कसते हैं। इधर, बारिश की वजह से बच्चों की शिक्षा-दीक्षा में भी अवरोध उत्पन्न हो जाता है। लिहाजा हर मुसीबत बारिश ले आती है।
कहते हैं ग्रामीण
ग्रामीण मो तजम्मुल हुसैन, पप्पू खान सहित दर्जनों ग्रामीण का कहना है कि बरसात से पहले गांव की हालत सुधर जाए यही अधिकारी से मांग है। अगर तय समय पर उनकी समस्या नहीं सुधरी तो सडक से आंदोलन शुरू किया जाएगा। इसके अलावा आने वाले चुनाव में जनप्रतिनिधियों को कडी फटकार झेलनी हो सकती है। इतना ही नहीं ग्रामीणों ने वोट बहिष्कार तक की बात कह डाली।
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