05/03/2026
दशरथ मांझी के जब पहाड़ तोड़ने का निर्णय लिया होगा तो ऐसा नहीं हुआ होगा कि जिस दिन से प्रण लिया उस दिन जितनी ऊर्जा उनकी बाजुओं में बाकी के हर दिन रही होगी..ऐसे कई मौके आए होंगे जब वो चोटिल हुए होंगे, ऐसे कई मौके आए होंगे जब उन्हें लगा होगा कि शायद वो इस पहाड़ को नहीं तोड़ पाएंगे, कई बार लोगों ने उन्हें पागल करार दिया होगा, कई बार उन्हें लगा होगा कि आखिर किसके लिए कर रहा हूँ मैं ये सब, कई बार वो खुदसे भी हारे होंगे..कभी उनकी छेनी ने साथ नहीं दिया होगा तो कभी हथौड़े ने..पर उन्होंने कभी हार नहीं मानी..बस अपने काम को करते रहे..
हार्दिक पांड्या क्रिकेट की दुनिया के दशरथ मांझी हैं..2024 के वर्ल्डकप के पहले का वो 2 साल का समय हार्दिक पांड्या ने कैसे गुजारा है ये बात उनसे बेहतर कोई नहीं जान सकता..अपने ही ग्राउंड पर कितनी बुरी तरह बुली किए गए ये बात किसी से नहीं छुपी..लोग उन्हें "सस्ता बेन स्टोक्स" कहकर बुलाते थे..लोग कहते थे कि हार्दिक पांड्या से आल राउंडर का टैग छीन लिया जाना चाहिए..हार्दिक पांड्या ने अगर 2024 के वर्ल्डकप में वो आखिरी ओवर नहीं डाला होता तो शायद आज तक लोग उन्हें ऐसे ही बुली करते नजर आते..
लेकिन उन्होंने जो बदलाव लाया है अपने भीतर, जैसी उन्होंने मेहनत करी है अपनी बोलिंग और बेटिंग पर वो सिर्फ तारीफ के काबिल नहीं है, बल्कि हर क्रिकेट प्रेमी उनकी उसी तरह पप्पी लेना चाहता है जैसे रोहित ने "ये मेरा आदमी है भाई" कहकर 2024 में लिया था..9 रन का ओवर था आज 19वाँ, जबकि पहली गेंद पर ही छक्का खा चुके थे हार्दिक..समझ रहें हैं आप की इस बंदे ने कहां से खींच कर ओवर को मात्र 9 रन का बनाया..
ये सच है कि शिवम दुबे ने आखिर के ओवर में 29 रन डिफेंड किए, पर आप ये समझिए कि बेथल असल में बुमराह के ओवर में रिस्क इसीलिए नहीं ले रहे थे क्योंकि वो जानते थे कि एक ओवर उन्हें कमजोर मिलेगा ही..और बेथल ने यहीं कैलकुलेशन में गलती कर दी, असल में उन्होंने हार्दिक को भी कमजोर आंक लिया..उन्हें लगा कि हार्दिक के ओवर में वो 15 से 18 रन निकाल लेंगे..पर बेथल नहीं जानते थे कि ये वो हार्दिक नहीं है जिसे आप "सस्ते बेन स्टोक्स" के रूप में जानते थे..ये दशरथ मांझी है व्हाइट बॉल क्रिकेट की दुनिया का..
अगर हार्दिक पिट जाते, और 20 या 24 रन बनाने को रह जाते तो शायद बेथल शिवम दुबे या अक्षर के ओवर में मैच को अंजाम तक पहुंचा देते..
जसप्रीत बुमराह के लिए लिखना इतना आसान नहीं है, उन्होंने जो किया है उस पर लिखना व्यर्थ है, क्योंकि वो यही काम करते आए हैं हमेशा से टीम के लिए..अभी कुछ दिन पहले एक बड़े भाई ने कहा कि "आज कल बुमराह को विकेट नहीं मिलते हैं, इसका करियर ढलान पर है"
मैंने उन्हें जवाब दिया कि "असल में बुमराह किसी रिकॉर्ड में अपना नाम नहीं चढ़वाना चाहते हैं कि उन्होंने कितने विकेट लिए, वो छोटी टीमों के खिलाफ उतना एफर्ट डालते ही नहीं हैं, क्योंकि वो जानते हैं कि उनका एक्शन अलग है, ऐसे में बेवजह उनका चोटिल हो जाना टीम के लिए कितना नुकसान दायक होगा, ये वो भी अच्छे से जानते हैं"
इसके बाद जब साउथ अफ्रीका के खिलाफ बुमराह ने 3 विकेट लिए, वो बड़े भाई मुझे फोन करके बोले कि "यार तूने सही कहा था.."
तो बुमराह गांधीं हैं इस क्रिकेट की दुनिया के, जितने शांत हैं, उनका प्रभाव उतना ही गहरा है इस दुनिया में..दिक्कत ये है कि आने वाली जनरेशन को हम कभी नहीं समझा सकेंगे कि बुमराह कौन थे या हार्दिक पांड्या क्या थे, हमारे पिता जी भी हमें नहीं समझा पाये कि सुनील गावस्कर सचिन से बेहतर थे, हम इस जनरेशन को नहीं समझा पा रहे हैं कि सचिन विराट का कोई कम्पेरिजन नहीं है...
पर ये सत्य कभी बदलेगा नहीं कि हार्दिक पांड्या व्हाइट बॉल क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ ऑल राउंडर हैं, और बुमराह विश्व क्रिकेट के सबसे बेहतरीन बॉलर..फिर बॉल व्हाइट हो या रेड..❣️