12/09/2024
एक सुकून की तलाश मे ना जाने कितनी बेचैनियां पाल ली,
और लोग कहते है हम बडे हो गए हमने जिंदगी संभाल ली...।।
जब चलना नहीं आता था, तब कोई गिरने नहीं देता था..
और जब चलना सीख लिया तो, हर कोई गिराने में लगा है....!!
यही जीवन की सच्चाई है।
अगर आप किसी को नमस्कार यह सोचकर कर रहे हो,कि वो भी आपको करेगा ! तो वो नमस्कार व्यर्थ हैं,क्योंकि नमस्कार संस्कार की वजह से किया जाता हैं,अहंकार की वजह से नहीं !