23/10/2025
रात के तीन बज रहे थे…
पूरा शहर सो रहा था,
पर एक अस्पताल की Emergency में अब भी रोशनी जल रही थी।
वहीं एक डॉक्टर, थकी आँखों से बैठा था —
सुबह से अब तक कुछ खाया नहीं,
पैर दर्द से काँप रहे थे,
पर सामने एक बच्ची की साँसें अटक रही थीं।
डॉक्टर ने बस इतना कहा —
“भगवान, बस इसको बचा लो, बाकी मैं संभाल लूँगा…”
कुछ मिनट बाद मॉनिटर पर बीप... बीप... बीप...
और बच्ची फिर से मुस्कुराई 😊
डॉक्टर की आँखों में आँसू आ गए…
किसी ने ताली नहीं बजाई, कोई कैमरा नहीं था,
पर उस रात एक “हीरो” फिर से ज़िंदा था।अगर आपको स्वास्थ्य से जुड़ी सही जानकारी और डॉक्टरी मोटिवेशन पसंद है,
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