09/06/2026
दूसरों की बातों से दुखी होने वाला कभी सुखी नहीं रह सकता .....
संसार में जितने लोग हैं, उतनी ही उनकी धारणाएँ हैं।
यदि हम हर व्यक्ति की राय को अपने सुख-दुःख का आधार बना लेंगे, तो जीवन भर भटकते रहेंगे।
कोई हमें अच्छा कहेगा तो प्रसन्न हो जाएंगे,
कोई बुरा कहेगा तो दुःखी हो जाएंगे।
फिर हमारे जीवन का नियंत्रण हमारे हाथ में नहीं,
दूसरों के हाथ में हो गया।
आप कितना भी अच्छा कार्य कर लें, कोई न कोई उसमें कमी निकाल ही देगा।
आप कितने भी सुंदर वस्त्र पहन लें, कोई कह देगा कि यह रंग अच्छा नहीं है।
आप कितना भी अच्छा बोल लें, कोई कह देगा कि बात पसंद नहीं आई।
यदि हर बात पर मन विचलित होता रहेगा,
तो शांति कभी प्राप्त नहीं होगी।
साधक का जीवन लोगों की प्रशंसा या निंदा से नहीं,
बल्कि अपने आत्मबोध से संचालित होना चाहिए। जो व्यक्ति हर समय यह सोचता रहता है कि लोग मेरे बारे में क्या कहेंगे, वह स्वयं को कभी जान ही नहीं सकता।
संसार को बदलने का प्रयास मत करो, अपनी दृष्टि बदलो।
जैसे ही तुम अपने भीतर स्थिर होना सीख जाओगे,
लोगों के शब्द तुम्हें उतना प्रभावित नहीं करेंगे।
तब तुम्हारा आनंद किसी की स्वीकृति पर निर्भर नहीं रहेगा।
जो यह समझ लेता है कि मेरा मूल्य दूसरों की राय से नहीं, मेरे वास्तविक स्वरूप से निर्धारित होता है,
उसी दिन से उसका दुःख कम होने लगता है।
तब वह भीड़ के अनुसार नहीं, सत्य के अनुसार जीना प्रारंभ कर देता है।
_ सदगुरू श्री ऋतेश्वर जी महाराज"
#ऋतेश्वरजी महाराज