24/08/2026
वो किसी की पत्नी है,
एक नन्हे से बच्चे की माँ है,
उसकी ज़िंदगी में पहले से एक मुकम्मल कहानी लिखी जा चुकी है…
फिर भी न जाने क्यों,
मेरा दिल उसी के नाम पर ठहर जाता है।
मैं जानता हूँ कि उसे चाहना आसान नहीं,
और उसे पाना शायद उससे भी मुश्किल है…
लेकिन दिल को कौन समझाए,
जिसे एक बार अपना मान लिया जाए,
उससे दूर रहने की वजहें भी कम पड़ जाती हैं।
मैं उसे सिर्फ़ अपनी आँखों से देखना नहीं चाहता,
मैं चाहता हूँ कि कभी उसकी सुबह मेरे नाम से शुरू हो,
उसकी थकी हुई शाम मेरे पास आकर सुकून पाए,
उसकी हँसी में मेरा हिस्सा हो,
और उसकी ख़ामोशी को समझने वाला भी मैं ही रहूँ।
मुझे मालूम है उसके साथ एक बच्चा भी जुड़ा है,
और उस मासूम की दुनिया को तोड़ना
मेरी मोहब्बत की मंज़िल कभी नहीं हो सकती।
अगर कभी वो मेरी ज़िंदगी में आए,
तो उसकी माँ होने के साथ-साथ
उस बच्चे की दुनिया का भी पूरा सम्मान होगा।
मैं उसे छीनना नहीं चाहता,
मैं बस इतना चाहता हूँ
कि अगर उसके दिल में भी मेरे लिए कोई जगह हो,
तो एक दिन वो खुद मेरे पास आने का फैसला करे।
क्योंकि मोहब्बत में ज़बरदस्ती नहीं,
दो दिलों की रज़ामंदी चाहिए…
मैं इंतज़ार कर सकता हूँ,
दर्द सह सकता हूँ,
अपनी चाहत को सालों तक सीने में रख सकता हूँ…
लेकिन उसके फैसले की इज़्ज़त किए बिना
उसे पाना भी मुझे मंज़ूर नहीं।
शायद दुनिया कहेगी—
“वो तुम्हारी नहीं है।”
मेरा दिल फिर भी यही कहेगा—
“मैंने उसे कभी अपना हक़ समझकर नहीं चाहा,
मैंने तो बस उसे अपनी ज़िंदगी की सबसे गहरी चाहत समझकर चाहा है।”
और अगर कभी किस्मत ने
हम दोनों के रास्ते एक कर दिए,
तो मैं उसे सिर्फ़ अपना प्यार नहीं दूँगा…
उसके अतीत का सम्मान,
उसके बच्चे की मासूमियत,
और उसके हर डर के लिए अपना कंधा भी दूँगा।
क्योंकि मैं उसे सिर्फ़ पाना नहीं चाहता…
मैं चाहता हूँ कि अगर कभी वो मेरी हो,
तो उसे मेरे साथ रहते हुए
कभी ये महसूस न हो कि उसने अपनी कोई दुनिया खोई है। ❤️