Aryan kapil

Aryan kapil न्यूज़ क्षेत्र

29/11/2025

आज की इस आधुनिकता के दौर में दो बीमारी एसी हैं जो हर दुसरे व्यक्ति में है..... शक्कर(Sugar) और रक्त चाप (Blood pressure/BP) और दोनों ही बीमारीयों का मुख्य कारण है तनाव( Stress)..... आज हम जिस आधुनिकता के जीवन (High-tech life style) में जी रहे हैं इसका बहुत बुरा प्रभाव हमारे स्वास्थ्य पर हो रहा है और खासतौर से युवा वर्ग (Youth) इसके शिकार हो रहे हैं......कम उम्र में हृदयघात(Cardiac areesst).......साफ साफ दर्शाता है कि हमने आधुनिकता के इस दौर में अपने आप को कहीं खो दिया है......हम किसी भी महाशक्ति के अस्तित्व को मानें या ना मानें... लेकिन स्वंय के अस्तित्व को हम नकार नहीं सकते हैं.....हम हैं क्यों हैं ये सवाल हमारे मन में हमेशा रहना चाहिए और इस सवाल का जवाब.... हमें हमारे चारों तरफ (Surroundings) में ही मिल जाता है......हमारा अस्तित्व ही हमारी पहचान है और इस पहचान को बनाए रखने की जिम्मेदारी(Responsibility) भी हमारी ही है.....जीवन सभी का संघर्षों से भरा हुआ है..... पृथ्वी लोक पर कोई भी पुर्ण रूप से सुखी नहीं है...... लेकिन छोटे से दुख या तकलीफ के आगे नतमस्तक हो जाना मानव जीवन की प्रवृत्ति नहीं है.....हम जो भी लक्ष्य लेकर चलते हैं चुनौतियों का आना स्वाभाविक है लेकिन उनसे निकल‌ने का रास्ता भी है...... कभी भी तनाव में नहीं आना है.... कोई ग़लत कदम जैसे जीवन लीला समाप्त कर लेना जैसे विचार मन में नहीं लाने हैं ...... इतिहास में एक गौरवगाथा उन्हीं की लिखी गई है जिन्होंने जीवन में संघर्ष रुपी पहाड़ को भी अपने आगे क्षुकने पर मजबुर कर दिया हो..... लोहे के टुकड़े को भी तलवार बनने के लिए आग में तपना पड़ता है.....एक छोटे से बीज को बड़ा वृक्ष बनने के लिए अपने दम पर धरती के गर्भ को चीर कर बाहर आना पड़ता है......अपने खान-पान पर विशेष ध्यान दो शुद्ध सात्विक भोजन...अपनी दिनचर्या में थोड़ा समय अपने स्वास्थ्य के लिए भी दो ... सुबह जल्दी उठकर व्यायाम करो....सुबह जल्दी उठना आपके स्वास्थ्य और संपत्ति दोनों के लिए लाभदायक है (Wake up early in the morning is good for health and wealth)......मन लगाकर अपनी शिक्षा पुर्ण करो कामयाबी जरूर मिलेगी..... व्यर्थ की चिंता में अपना स्वास्थ्य खराब मत करो ........ प्रकृति और मानवता का संरक्षण ही हमारा धर्म है (Save Nature and Huminity) 🙏

Congratulations   on the successful launch or the Chandrayaan3 mission!
15/07/2023

Congratulations on the successful launch or the Chandrayaan3 mission!

05/07/2023

*25 जिलों में भारी बारिश का रेड अलर्ट ,मौसम विभाग ने किया जारी।*

रामपुर, बरेली, पीलीभीत, बदायूं, शाहजहांपुर, फतेहपुर, बांदा, चित्रकूट, कौशांबी, प्रतापगढ़, अमेठी, अयोध्या, जौनपुर, प्रयागराज, वाराणसी, मिर्जापुर, बस्ती, गोंडा, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, गोरखपुर, गाजीपुर, चंदौली, सोनभद्र, महाराजगंज जिले भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।

इन 32 जिलों में मध्यम बारिश के आसार

सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, मुरादाबाद, अमरोहा, संभल, कासगंज, एटा, मैनपुरी, फर्रुखाबाद, इटावा, औरैया, जालौन, झांसी, ललितपुर, कानपुर नगर, कानपुर देहात, उन्नाव, लखनऊ, बाराबंकी, बहराइच, सीतापुर, हरदोई, लखीमरपुर, बहराइच, श्रावस्ती, रायबरेली, आजमगढ़, मऊ, देवरिया और बलिया में भी मध्यम बारिश के आसार बने हैं।

10/10/2022
24/04/2022

#अशोक_स्तंभ_का_असली_इतिहास_एवं_ब्राह्मणी_षडयंत्र_का_पर्दाफाश..!

"भारत देश में मंदिर यह लोगों के भावनाओं के साथ जुड़ा हुआ तथा उनके आस्था का विषय हैं । किसी भी मंदिर की महिमा नहीं होती , महिमा तो स्तंभों की होती हैं , क्योंकि स्तंभों पर ही पुरा मंदिर खड़ा होता हैं । चक्रवर्ती सम्राट अशोक ने बड़े-बड़े बौद्ध स्तूप बनवाएं , शिलालेख बनावाएं , संघाराम बनवाएं , बौद्ध गुफाएं एवं बौद्ध विहार बनवाएं किंतु आज की समय में इन सबका विकृत स्वरूप ही देखने मिलता हैं , बौद्ध स्तूप और स्तंभों को तोड़कर ही ब्राह्मण लोगों ने उसे शिवलिंग में तब्दील किया / बौद्ध गुफाओं को पांडव लेणी में तथा बौद्ध विहारों को मंदिरों में तब्दील किया , आज की समय में जितने भी मंदिरों के स्तंभ हैं , वह सभी बौद्ध काल के ही हैं , उनकी बनावट चक्रवर्ती सम्राट अशोक के काल और अन्य बौद्ध राजाओं के काल से मिलती हैं , भारत में चाहें मंदिर हो / चाहे देवालय हो , उन सभी स्तंभों को प्राचीन काल से अशोक स्तंभ (Ashoka pillar) कहने की‌ प्रथा थी , किंतु ब्राह्मणी इतिहासकारों ने चक्रवर्ती सम्राट अशोक का नाम गायब किया , और स्तंभों को रहने दिया , इतना ही नहीं , बल्कि चक्रवर्ती सम्राट अशोक ने जो बौद्ध धम्म चक्र बनवाएं थे , उसे भी सिर्फ अशोकचक्र कहने की ही प्रथा थी / आज भी लोग बड़े गर्व के साथ उसे अशोकचक्र ही कहते हैं , किंतु उस चक्र को भी काउंटर करने के लिए ब्राह्मण लोगों ने सुदर्शन चक्र की एक काल्पनिक (पौराणिक) कथा बनाईं , और लोगों पर वह थोप दी..! उसके बावजूद भी आज अशोकचक्र यह चक्र के साथ बिल्कुल वैसा ही हैं , किंतु स्तंभों के साथ ऐसा हुआ नहीं , स्तंभो के साथ जो अशोक हुआ करता था , वह आज नहीं हैं , वह ब्राह्मण लोगों ने बड़ी चालाकी एवं धोखे से गायब कर दिया ।

वर्तमान में जितने भी बौद्ध वास्तु एवं धरोहर हैं , उन सबका निर्माण स्तंभों का आधार लेकर ही किया था , यदि किसी प्रकार की इमारत खड़ी करनी हो , तो उसकी नींव मजबूत होनी चाहिए , क्योंकि एक अच्छी और मजबूत नींव ही इमारत को सदियों तक खड़ा रख सकती हैं , यह बात बौद्ध कारीगर अच्छी तरह से जानते थे , इसलिए उन्होंने स्तंभ इतने मजबूत बनाएं थे कि , आज हजारों सालों के बाद भी उनकी रचनाएं बिल्कुल वैसे ही हैं , जैसे उन्होंने बनाईं थीं , किंतु पुष्यमित्र शुंग के बाद ही बौद्ध विरासत एवं धरोहर को नष्ट किया गया , स्तंभों को बुरी तरह से तहस-नहस कर दिया , उपर का विहार गायब किया , जो स्तंभ टूटे थे , उन पर शिवलिंग को स्थापित किया , और जो टूटे नहीं थे , उसके ऊपरी हिस्से पर मंदिर को स्थापित किया , उसे मंदिर का रूप दे दिया , सदियों से लेकर अब तक ब्राह्मण लोगों ने बौद्ध विहारों को एवं अशोक स्तंभों को अलग-अलग तरीके से पेश किया हैं , यह सिलसिला अब भी जारी हैं ।

महाराष्ट्र में संतों का आंदोलन बहुत ही बड़ा और प्रचलित आंदोलन हुआ करता था , क्योंकि संतों ने अपने पुरखों की विरासत को आगे बढ़ाया था , उसे बचाके रखा था , संतों ने ब्राह्मण और ब्राह्मणवाद पर खुलकर प्रहार किया था । पंढरपुर का पांडुरंग यह बुद्ध ही हैं , यह ख़ोज भी सबसे पहले संतों ने ही की थीं , की हैं , समाज प्रबोधन के लिए संतों ने प्रवचन दिया , अभंग और गाथाओं का निर्माण किया , किंतु आज की तारीख में संतों के जो अभंग (गाथा) हैं , उनका स्वरूप भी ब्राह्मण लोगों ने बदल दिया है , उदाहरण के तौर पर बताना चाहता हूं कि , महाराष्ट्र में संत बहिणाबाई पाठक (कुलकर्णी) नाम की एक संत होकर गईं , उनका मराठी में एक प्रसिद्ध अभंग हैं , वह पुरा अभंग विस्तार से इस प्रकार हैं , संत बहिणा बाई कहती हैं कि , "संत कृपा झाली , इमारत फळा आली , ज्ञानदेवे रचिला पाया , उभारिले देवालया । नामा तयाचा किन्कर , तेणे विस्तरिले आवार । जनी जनार्दन एकनाथ , स्तम्भ (स्तंभ) दिला भागवत । तुका झालासे कळस , भजन करा सावकाश । बहिणा फडकती ध्वजा , तेणे रूप केले ओजा" । यह अभंग दिखने में भक्ति तथा वारकरी संप्रदाय की नींव किसने रखी ? इस पर दिखाई देता हैं , किंतु ऐसा नहीं हैं , संत बहिणाबाई यह ब्राह्मण वर्ण की थी , उन्होंने उस समय किस प्रकार का अभंग लिखा था ? उस पर सिर्फ इतिहासकार एवं अध्यात्मिक लोग ही प्रकाश डाल सकतें हैं , हो सकता हैं कि , उनके बाद ब्राह्मण लोगों ने इसे तोड़-मरोड़ कर पेश किया हो , संतों के बारे में कहां जायें तो सबसे पहले संत नामदेव महाराज ने ब्राह्मण लोगों के विरोध में तथा उनके पाखंड के खिलाफ आवाज उठाई थीं , इसलिए नामदेव रचिला पाया , तुका झालासे कळस..! ऐसा अभंग होना चाहिए था , किंतु ऐसा (अभंग) नहीं हैं , संत नामदेव महाराज से लेकर संत तुकाराम महाराज तक महाराष्ट्र के जितने भी मूलनिवासी-बहुजन संत हुए वह सभी क्रांतिकारी एवं विद्रोही संत थे , उन सभी संतों ने सबसे ज्यादा तथागत बुद्ध पर ही लिखा हैं , लेकिन उनका भी ब्राह्मणीकरण किया गया , जिसका उदाहरण ऊपरी अभंग हैं , इस अभंग का सिधा संबंध बौद्ध वास्तुओं से हैं , ज्ञानदेवे रचिला पाया , उभारिले देवालया । ज्ञानदेव महाराज यह ब्राह्मण थे , ब्राह्मण ने नींव रखीं ? और मंदिर का निर्माण किया ऐसा थोड़ी होता हैं , जनी जनार्दन एकनाथ , स्तम्भ (स्तंभ) दिला भागवत । एकनाथ महाराज भी ब्राह्मण थे , यहां पर जो पाया और जो स्तंभ (Pillar) यह शब्द आएं हैं , उन दोनों का अर्थ एक-समान हैं , इस अभंग में संतों ने जो उनके आंदोलन की नींव रखी थी , उन पर ब्राह्मण संतों का ही नियंत्रण (Control) दिखाया हैं , नियंत्रण रखनेवाले और और नियंत्रण दिखानेवाले दोनों भी ब्राह्मण..! यह सरासर ग़लत हैं , पाया और स्तंभ इन दोनों शब्दों का सिधा संबंध चक्रवर्ती सम्राट अशोक ने बनाएं हुए बौद्ध स्तंभों से हैं , वर्तमान में जितने भी देवालय (मंदिर) दिखाई देते हैं , उनका निचला हिस्सा बौद्धों का और उपरी ढांचा पोंगा पंडितों का यह कैसी घुसपैठ हैं ? यह कैसा चमत्कार हैं ? यह किस प्रकार का अतिक्रमण हैं ? दरअसल यह चमत्कार नहीं था , बल्कि एक सोची-समझी साजिश थी / साजिश हैं , आनेवाले समय में हम बुद्धिस्ट इंटरनैशनल नेटवर्क के माध्यम से इस अतिक्रमण के विरोध में अभियान चलायेंगे".
(भारत मुक्ति मोर्चा)
जय मूलनिवासी..

वाईफरकेशन  पर एक बड़ा हादसा टला           पीलीभीत के दो युवक इको मारुति वैन  गाड़ी सहित नहर में जा गिरी वन विभाग की टीम ...
24/04/2022

वाईफरकेशन पर एक बड़ा हादसा टला पीलीभीत के दो युवक इको मारुति वैन गाड़ी सहित नहर में जा गिरी वन विभाग की टीम ने बचाई जान।
वाईपर केशन हरदोई नहर ब्रांच में पीलीभीत काले मंदिर निवासी अमित कुमार वाहन चालक प्रदीप कुमार गर्मी में वाईफरकेशन घूमने आए थे गाड़ी चलाते समय गाड़ी अनियंत्रित हो गई और जाकर हरदोई नहर ब्रांच में गिर गई वाईपर केशन पीटीआर बैरियर पर खड़े बैरियर मैन राजू ने भागकर रस्सी के सहारे से गाड़ी में फंसे दोनों युवकों को निकालने की कोशिश शुरू कर दी मौके पर वन दरोगा सुरेंद्र गौतम फॉरेस्ट गार्ड ऋषि और वाचर संजय, भगवानदीन ने भी डूबते हुए युवकों को निकालने में मदद की फिलहाल दोनों युवकों की जान बच गई लेकिन गाड़ी पानी में पूरी तरह डूब गई।

14/04/2022

महामानव भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर जी" ने अपनी पूरी जिंदगी समाज के लिये लगा दी, आज पूरी दुनिया उन्हें गर्व से याद करती है, जिन परिस्तिथि में उन्होनें संघर्ष किया दूसरा कोई भी नहीं कर पाता। परम पूज्य बाबा साहेब अम्बेडकर को "शत शत नमन" करता हूं ।।

14 अप्रैल को आया था वो,
सारा समाज जब रहा था रो ,
हमारे समाज की आवाज बनकर हर जगह वो गया,
World Knowledge Day JAI BHIM NAMMO BUDDHA 💞💝🌺🌻🌼🌹

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