04/10/2026
— डॉ. दीपक शरण
ज़िंदगी और दोस्ती
ज़िंदगी के सफ़र में बहुत लोग मिले,
कुछ वक़्त के साथ छूट गए,
कुछ याद बनकर रह गए,
और कुछ दोस्त ऐसे मिले—
जो ख़ामोशी भी पढ़ लेते हैं।
वक़्त बदलता रहा, रास्ते बदलते रहे,
मगर सच्ची दोस्ती का एहसास नहीं बदला।
क्योंकि कुछ रिश्ते साथ चलने के लिए नहीं,
दिल में हमेशा रहने के लिए बनते हैं।
— डॉ. दीपक शरण