21/01/2026
कलयुग की यह घटना समाज को झकझोर देने वाली है। जब मासूमियत की उम्र में खेल-कूद और पढ़ाई होनी चाहिए, उसी उम्र में 9 साल की बच्ची का मां बनना मानवता पर गहरा प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। 11 साल का भाई और 9 साल की बहन, यह खबर सुनते ही हर संवेदनशील व्यक्ति का दिल कांप उठता है। यह सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे समाज की विफलता का संकेत है।
इस तरह की घटनाएं बताती हैं कि बच्चों की सुरक्षा, संस्कार और निगरानी को लेकर हम कहीं न कहीं चूक कर रहे हैं। मासूम बच्चों को न तो हालात की समझ होती है, न ही सही-गलत का ज्ञान। ऐसे में बड़ों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। यह समय है जब समाज को चुप रहने के बजाय आवाज उठानी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई और बच्चा इस दर्द से न गुजरे।
कानून, प्रशासन और समाज तीनों को मिलकर बच्चों की सुरक्षा केको न तो हालात की समझ होती है, न ही सही-गलत का ज्ञान। ऐसे में बड़ों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। यह समय है जब समाज को चुप रहने के बजाय आवाज उठानी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई और बच्चा इस दर्द से न गुजरे।
कानून, प्रशासन और समाज तीनों को मिलकर बच्चों की सुरक्षा के लिए सख्त कदम उठाने होंगे। साथ ही, बच्चों को सही शिक्षा, सुरक्षा और विश्वास का वातावरण देना अनिवार्य है। यह घटना हमें चेतावनी देती है कि अगर अभी नहीं संभले, तो आने वाला समय और भी भयावह हो सकता है।