Bhaukal On Air

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12/08/2024

रुद्रपुर। हल्की बारिश के बाद खुला खुला नीला गगन।

सावन के गीतों पर किया डांस... गेम्स में जीते उपहार !कानपुर। बर्रा दो चंदन पार्क में हेमंत विहार सेक्टर ३ की महिलाओं ने ह...
12/08/2024

सावन के गीतों पर किया डांस... गेम्स में जीते उपहार !
कानपुर। बर्रा दो चंदन पार्क में हेमंत विहार सेक्टर ३ की महिलाओं ने हरियाली तीज उत्सव का आयोजन किया। जिसमें महिलाओं ने नृत्य,गायन, कजरी आज का आदि का प्रदर्शन किया। शीला सचान को तीज क्वीन का पुरस्कार मिला तथा श्वेता त्रिवेदी ने नृत्य में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। नीलम द्विवेदी, ममता यादव ने सावन के गीतों की प्रस्तुत की। इस अवसर पर अनीता तिवारी, निधि गुप्ता सोमा चटर्जी,अर्चना, नीतू त्रिपाठी, सरोज त्रिपाठी, प्रतिभा बाजपेयी, राजेश कुमारी, वंदना, कंचन त्रिपाठी आदि ने सहभागिता की । कार्यक्रम की संयोजक पूनम त्रिवेदी ने सभी को धन्यवाद दिया और सभी के द्वारा किए गए प्रदर्शन की सराहना की। सभी महिलाओं ने झूला झूल कर कजरी के गीत गाकर भगवान शिव और पार्वती की स्तुति की।

06/08/2024

रुद्रप्रयाग में हुई दुर्घटना में निलंबित परिवहन कर्मचारियों को बहाल करने की मांग को लेकर रुद्रपुर एआरटीओ कार्यालय में धरना देते कर्मचारी।

14/08/2023

राहुल गांधी की फ्लाइंग किस ने देश में बेरोजगारी,गरीबी,भुखमरी पर लगाम लगा दिया है।

14/01/2023

कोरोना, भारत जोड़ो यात्रा और सियासत
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- महेंद्र अवधेश

महामारी कोरोना के नये वैरिएंट ओमिक्रोन बीएफ-7 को लेकर देश भर में गहमा-गहमी का आलम है। पड़ोसी चीन समेत विश्व के हालात देखते हुए केंद्र के साथ-साथ राज्य सरकारों ने भी अतिरिक्त सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है। गुजरात में दो और ओडिशा में एक सैंपल में इस वैरिएंट के मिलने की पुष्टि हो चुकी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए विशेष अभियान चलाने की जरूरत पर बल देते हुए देशवासियों को आगाह किया है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस नये वैरिएंट का भारत पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। एम्स के पूर्व निदेशक डाॅ. रणदीप गुलेरिया के अनुसार, देश के 90 प्रतिशत से अधिक लोगों में हर्ड इम्युनिटी विकसित हो चुकी है, जिसके पीछे बड़े पैमाने पर हुए टीकाकरण का योगदान है। इसलिए ओमिक्रोन बीएफ-7 को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है।

वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा लगातार जारी है। यात्रा को व्यापक जन समर्थन भी मिल रहा है। इसी बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने राहुल गांधी को एक पत्र लिखकर देश के सियासी माहौल में गर्मी पैदा कर दी है। उन्होंने कांग्रेस को यात्रा के दौरान कोविड प्रोटोकाल का पालन या फिर यात्रा स्थगित कर देने की सलाह दी है। लेकिन, कांग्रेस ने मंडाविया की अपील-सलाह को भारतीय जनता पार्टी की एक सियासी चाल मानते हुए इसे यात्रा रोकने की साजिश करार दिया है।

अब सवाल यह है कि कोरोना के नये वैरिएंट को लेकर सतर्कता जरूरी है या कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा? हमारी प्राथमिकता आखिर क्या होनी चाहिए? दरअसल, देश के सामने आज जो परिस्थितियां हैं, उनका इशारा साफ है कि सतर्कता-प्रोटोकाल भी जरूरी है और कांग्रेस की यात्रा भी ऐसा इसलिए, क्योंकि कोरोना महामारी पिछली बार जितनी तबाही मचा चुकी है, वह किसी से छिपी नहीं है। साल 2020-21 का दौर देश के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हुआ। व्यापक पैमाने पर हमें जन-धनहानि उठानी पड़ी। लेकिन, अब वैसा कुछ न होने पाए, यह हम-सब की जिम्मेदारी है।

और, यात्रा इसलिए जरूरी है, क्योंकि पिछले कुछ समय से जनता के बीच एक विपरीत राजनीतिक संदेश यह पैठता जा रहा है कि देश में विपक्ष नाम की कोई चीज नहीं बची है। कहने का आशय यह कि महामारी हो या फिर किसी राजनीतिक दल का कार्यक्रम, सियासत हरगिज़ नहीं होनी चाहिए। किसी की ओर से नहीं।

14/01/2023

कुसूर किसका, झोला छाप डॉक्टर का या फिर आप का ?
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पलवल (हरियाणा) के गदपुरी थाना अंतर्गत गांव बघौला में एक गर्भवती महिला की मौत हो गई। वजह, खांसी-जुकाम से पीड़ित होने के कारण वह एक स्थानीय डाॅक्टर (कथित) के पास गई, जिसने उसे कोई इंजेक्शन लगा दिया। वहां से लौटते समय रास्ते में महिला की हालत बिगड़ गई और घर पहुंचते ही उसने दम तोड़ दिया। इस पर उसके पति ने उक्त डाॅक्टर के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी। महिला के पति का आरोप है कि डाॅक्टर झोला छाप है और उसने गलत इंजेक्शन लगा दिया।
अब सवाल यह है कि महिला की मौत का जिम्मेदार आखिर कौन है, कथित डाॅक्टर या फिर उसका पति? यह कोई नया अथवा अनोखा मामला नहीं है। ऐसी घटनाएं आएदिन देश भर से हमारे-आपके सामने आती हैं। लोग इलाज के लिए गांव-मोहल्ले में संचालित क्लीनिक के बिना किसी डिग्री वाले डाॅक्टर के पास जाते हैं, दवा लेते हैं, इंजेक्शन लगवाते हैं और लौट आते हैं। ठीक हो गए, तो वाह-वाह! वरना, इलाज करने वाला शख्स (कथित डाॅक्टर) सबकी नजर में गुनहगार, अपराधी और हत्यारा हो जाता है। तब कोई यह नहीं देखता कि इस भीषण महंगाई के जमाने में सौ-पचास रुपये लेकर इलाज करने वाला उक्त शख्स न जाने कितने मरीजों को राहत पहुंचा चुका है। समय-बेसमय, रात-बिरात, बेखटके आप जब ऐसे किसी डाॅक्टर के पास जा धमकते हैं, तब वह साक्षात देवदूत सरीखा नजर आता है। लेकिन, अगर कहीं मामला बिगड़ गया, तो वह फर्जी और झोला छाप साबित हो जाता है! आप आखिर क्यों जाते हैं, ऐसे झोला छाप अथवा कथित डाॅक्टर के पास? सरकारी या किसी मान्यता प्राप्त निजी अस्पताल क्यों नहीं जाते? यह गली-मोहल्ले के उन कथित डाॅक्टरों की पैरवी हरगिज नहीं है, बल्कि हमें इस बिंदु पर सोचने, विचार करने की जरूरत है कि क्या किसी सरकारी अथवा बड़े निजी अस्पतालों में इलाज के दौरान भूल-चूक नहीं होती? मरीज की जान नहीं जाती? इस बात पर अगर भरोसा न हो, तो साहिबाबाद के एक बड़े अस्पताल की घटना पर नजर डाल लीजिए, जहां एक बच्चे की नाक का ऑपरेशन हुआ, लेकिन उसकी आंख की रोशनी चली गई।

दरअसल, सच्चाई यह है कि आजादी मिलने के 74 वर्षों बाद भी देश में चिकित्सा सुविधाओं का नितांत अभाव है। हर जिले-शहर में सरकारी अस्पताल हैं, लेकिन पर्याप्त डाॅक्टर नहीं हैं, दवाएं नहीं हैं, बिस्तर नहीं हैं। अगर उक्त सारी चीजें हैं भी, तो वहां मौजूद अमले में मरीजों की पीड़ा दूर करने का जज्बा नहीं है, नीयत नहीं है। निजी अस्पताल तो बदनाम हैं ही लूट के लिए, सरकारी उनसे एक कदम आगे हैं। कोई जांच-टेस्ट अस्पताल में आसानी से संभव नहीं है। हर जगह एक पूरा का पूरा गिरोह सक्रिय है, तरह-तरह से
मरीजों और उनके तीमारदारों का मानसिक-आर्थिक शोषण करने के लिए। बाहर से जांच और दवा खरीदी में कट-कमीशन लेना अमले ने अपना हक समझ रखा है।

----महेंद्र अवधेश

14/01/2023

नव वर्ष तुम्हारा स्वागत है!

उम्मीदों पर ही टिका हुआ है मानव मात्र का जीवन। अगर उम्मीद न हो, तो इस जीवन का भला क्या अर्थ? हम-आप जब हर सुबह सोकर उठते हैं, तो बीते दिन की नाकामी से उपजे नैराश्य को त्याग चुके होते हैं। यह सोचकर कि चलो, आज कुछ अच्छा होगा, हम बीते कल से कुछ बेहतर करेंगे। यही सोच व्यक्ति में एक नई ऊर्जा का संचार करती है। और, वही ऊर्जा उसे असाध्य को भी साधने के लिए प्रेरित करती है। नया साल और उसका पहला दिन भी एक नई सुबह है हम सबके लिए। बीते साल के 365 दिनों का हिसाब-किताब हमारे जेहन में रहता है कि हमने इस समयावधि में आखिर क्या खोया और क्या पाया? हमें क्या करना चाहिए था, जो हम नहीं कर सके और क्या नहीं करना चाहिए था, जो हम कर गुजरे। और, अब हमें क्या करना चाहिए, ताकि बीते साल हुई गलतियों की भरपाई संभव हो सके। नए साल की नई यानी पहली सुबह ही हम-आप से नए लक्ष्य निर्धारित कराती है। परिवार के प्रति, समाज के प्रति और देश के प्रति हमारी जिम्मेदारियों का बोध कराती है। नए सिरे से। इस नई सुबह का पहला सबक ही यही है कि जीवन अभी खत्म नहीं हुआ है, यात्रा पूर्ववत जारी है। इसलिए खुद को आने वाले हर पल के लिए तैयार रखो। अपने हौसले बुलंद रखो। अभी बहुत कुछ करना बाकी है। कामयाबी हर कदम पर तुम्हारी बाट जोह रही है, खुशियां तुम्हारे इंतजार में हैं। यह सत्य है कि जीवन क्षण भंगुर है, बावजूद इसके हम सब इसे एक नई ऊर्जा, नई ताकत और नई उम्मीदों के साथ जीते हैं। यही होना भी चाहिए, क्योंकि यही हमारे 'होने' को सार्थक बनाता है। तो आइए, इस नई सुबह में बीते हुए, गुजरे हुए को बिसार कर हम आगे की सुधि लेने के लिए अपना एक नया कदम बढ़ाएं, उस रास्ते पर, जहां आशंकाओं-अनिश्चितताओं के लिए कोई जगह न हो। जहां खुद को, परिवार को, समाज को और देश को निरंतर तरक्की-खुशहाली की ओर ले जाने की लालसा हो। कामना करें कि हमारे और इर्द-गिर्द मौजूद तमाम चेहरों पर विषाद की कोई लकीर न रहे। उम्मीदों की रोशनी हमारे कर्तव्य पथ को आलोकित करे। समाज में भाईचारा मजबूत रहे। नए साल और उसकी नई सुबह का असली 'सेलीब्रेशन' अपनी नजर में तो यही है। आपका क्या ख्याल है? हैप्पी न्यू ईयर!

----महेंद्र अवधेश

14/01/2023

जोशीमठ को लेकर सरकार घड़ियाली आंसू बहा रही है।

01/01/2023

ऋषभ पंत की हालत में अब सुधार। लगातार विशेषज्ञ डॉ कर रहे मानीटरिंग।।

22/11/2022

गुजरात मे चुनाव,जुमलों की बहार

12/11/2022

उत्तराखंड के लगभग हर जिले में शाम 7 बजकर 58 मिनट पर भूकंप के झटके। कोई नुकसान नहीं।

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