16/06/2024
वो पिता ही होता है,
जो अपने कंधों पर बैठाकर,
दिखाता है बच्चों को ये दुनिया।
बच्चों की फीस भरने को,
धन जुटाता है।
डोनेशन देने को,
कर्जा भी ले आता है।
कॉलेज में एडमिशन कराने,
बच्चों का होस्टल ढूँढने में,
बच्चों के साथ-साथ घूमता है।
वो पिता ही होता है,
जो फटी बनियान पहन कर भी,
बच्चों को नई जींस दिलाता है,
खुद खटाला फोन रखकर,
बच्चों को स्मार्ट फोन दिलाता है।
फोन पर एक आवाज सुनकर,
बच्चों के खाते में,
उधार लेकर भी पैसे डलाता है।
वो पिता ही होता है
जो बच्चों के प्रेम विवाह के निर्णय पर,
असहमति जताता है,
फिर खूब समझाता है
अंत में पूछता है,
"सब अच्छे से देख तो लिया है ना"
बेटी की विदाई पर,
दिल की गहराई से रोता है।
"मेरी बेटी का ध्यान रखना"
हाथ जोड़ कर दामाद को कहता है।
वो पिता ही होता है,
जो बिन बोले ही समझ जाता है
बच्चे की छोटी सी आहट से ही,
उसकी मौजूदगी को पहचान लेता है।
बच्चे की सिसकियों में,
आँख के आँसू पीकर
"कुछ नहीं हुआ, मैं हूँ ना"
कहकर विश्वास दिलाता है।
उनके इस विश्वास को मैंने,
अपना आत्मविश्वास बनाया।
तब जाकर मैंने दुनिया में
आज ये मुकाम है पाया।।