Saini

Saini Saini is a caste who were historically warriors and landowners.

*एक गरीब बेटी की दास्तान*चौदह साल की मुनिया पड़ोस के घर से झाड़ू- पोंछा करके अपने घर आई। चारपाई पे लेटा उसका बाप गुस्से ...
08/10/2013

*एक गरीब बेटी की दास्तान*

चौदह साल की मुनिया पड़ोस के घर से झाड़ू- पोंछा करके अपने घर आई।
चारपाई पे लेटा उसका बाप गुस्से से आग- बबूला होके बोलाः
"रे करमजली! कहाँ मुँह काला करवा रही थी। एक घंटा देर से आ रही है।"
"बापू! वो उनके घर कूछ मेहमान आने वाले थे, तो पोंछा लगाने का काम आज
ज्यादा करना पड़ा। इसलिये देर हो गई।".
"अबे! भाग करमजली जाकर घर के काम अपने निपटा"
अभी मुनिया रूम मेँ ही आई की छोटे भाई ने नाश्ता माँगा। मुनिया के बताने पे कि नाश्ता नहीँ बना, भाई ने उसकी पीठ पे एक मुक्का तान के मार दिया।
"कमीनी मुझे खेलने जाना है भूख लगी है, जल्दी रोटी बना।"

दोपहर मेँ जब कोई नहीँ था तो मुनिया अकेले मेँ रो रही थी, पालतू कुत्ता शेरू उसके समीप आके जीभ से दुलार करने लगा। मुनिया शेरू से लिपट के रो पड़ी और बोलीः
"भगवान! किसी भी जन्म मेँ मुझे गरीब घर की बेटी मत बनाना,
अगर गरीब की बेटी बनाना तो माँ के साथ ही मुझे भी ऊपर बुलाना !"

Hme bhul kr sona to unki aadat bn gyi h.Kisi din hm so gaye to unhe nind se b nafrat ho jayegi
01/10/2013

Hme bhul kr sona to unki aadat bn gyi h.
Kisi din hm so gaye to unhe nind se b nafrat ho jayegi

26/09/2013

किसी को भी अपने चेहरे पर झाइयां, दाग-धब्बे या किसी भी प्रकार के अनचाहे निशान अच्‍छे नहीं लगते। इस तरह की तमाम समस्याओं से छुटकारा पाने का एक बेहद आसान घरेलू उपाय भी है। आइये जानते हैं ऐसे ही उपायों बारे में:==
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त्वचा के दाग-धब्बों के लिए घरेलू नुस्खें:==
• चेहरे के काले दागों को मिटाने के लिए टमाटर के रस में रुई भिगोकर दागो पर मलें। या टमाटर में नींबू की दस-बारह बूंदे मिलाएं इस मिश्रण को चेहरे पर मलने से दाग-धब्बे दूर होते हैं।
• रोजाना सुबह एक गिलास टमाटर के रस में नमक, जीरा, कालीमिर्च मिलाकर पीएं तथा चेहरे पर नारियल पानी लगाएं।
• आलू उबाल कर छिलके छील लें और इसके छिलकों को चेहरे पर रगड़ें, मुंहासे ठीक हो जाएंगे।
• जायफल को घिसकर दस पीसी काली मिर्च व थोड़े कच्चे दूध में मिलाकर पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगाएं। दो घंटे बाद चेहरा धो लें।
• त्वचा पर जहां पर चकते हो उन पर नींबू का टुकड़ा रगड़े या नींबू में फिटकरी भरकर रगड़े। इससे चकते हल्के पड़ जाएंगे और त्वचा में निखार आएगा।
• मसूर की दाल और बरगद के पेड़ की नर्म पत्तियां पीसकर लेप करें अथवा दालचीनी पीसकर दूध की मलाई के साथ लगाएं।
• मुंहासों के दाग-धब्बे चेहरे पर ज्यादा हो तो दही को उबटन की तरह इस्तेमाल करें।
• सूखी हल्दी की गांठ को नींबू के रस में मिलाकर लगाने से भी दाग-धब्बे तेजी से मिटने लगते हैं।
• सूखी त्वचा के दाग-धब्बे मिटाने के लिए दूध में चंदन की लकड़ी घिसकर लगाएं।
• तैलीय त्वचा के दाग-धब्बे मिटाने के लिए चंदन का बूरा गुलाब जल में मिलाकर लगाएं। यह प्रयोग विशेष रूप से गर्मियों के लिए लाभकारी है।
• अक्सर पेट की खराबी से चेहरे पर दाग-धब्बे नजर आते हैं अत: दिन में कम से कम एक बार नींबू पानी पिएं, कुछ ही हफ्तों में चेहरा चमकने लगेगा।
• चाय के गुनगुने पानी से चेहरे को धोएं और उसके बाद बादाम रोगन से मालिश करें तो चेहरे के धब्बों और ऑखों के पास की कालिमा दूर होती है।
• सोयाबीन 12 घंटे भिगोयें फिर इसे पीस कर चेहरे पर एक दिन छोड़कर एक दिन लेप करे और आधे घंटे के बाद गुनगुने पानी से धोएं।
• एक चम्मच प्याज़ का रस, एक चम्मच मुल्तानी मिट्टी और एक चम्मच शहद इन सबका मिला कर चेहरे पर लगाये। चेहरे के दाग धब्बे दूर हो जायेंगे।
• आलू का रस और नींबू का रस सामान मात्रा में लेकर चेहरे पर लगाकर, आधा घंटे के बाद धोने से चेहरे के दाग धब्बे, झाइयां दूर हो जाती हैं।
• जायफल को बारीक़ पीसकर महीन कपडे से छान ले। इसमें गाय के कच्चे दूध को मिलाकर गाढा मिश्रण तैयार कर दिन में चार बार लगाने से दाग धब्बे, मुंहासे दूर हो जाते हैं।

08/09/2013
Mein Hosh Mein Thi To Phir Us Pe Mar Geyi Keise,?Ye Zeher Mere Lahoo Mein Utar Geya Keise,?>>>>>>>>>>>
21/08/2013

Mein Hosh Mein Thi To Phir Us Pe Mar Geyi Keise,?
Ye Zeher Mere Lahoo Mein Utar Geya Keise,?
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स्वतन्त्रता दिवस की शुभकामनाए
14/08/2013

स्वतन्त्रता दिवस की शुभकामनाए

‘आपणौ राजस्थान’‘आ धरती गौरा धौरां री, आ धरती मिठ्ठे बौरां री ॥ई धरती रो रुतबो ऊँचो, आ बात कवे कूंचो-कूंचो ॥’
14/08/2013

‘आपणौ राजस्थान’

‘आ धरती गौरा धौरां री, आ धरती मिठ्ठे बौरां री ॥
ई धरती रो रुतबो ऊँचो, आ बात कवे कूंचो-कूंचो ॥’

राजस्थान की लोक कथाओं में बहुत सी प्रेम कथाएँ प्रचलित है पर इन सबमे ढोला मारू प्रेम गाथा विशेष लोकप्रिय रही है इस गाथा क...
13/08/2013

राजस्थान की लोक कथाओं में बहुत सी प्रेम कथाएँ प्रचलित है पर इन सबमे ढोला मारू प्रेम गाथा विशेष लोकप्रिय रही है इस गाथा की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आठवीं सदी की इस घटना का नायक ढोला राजस्थान में आज भी एक-प्रेमी नायक के रूप में स्मरण किया जाता है और प्रत्येक पति-पत्नी की सुन्दर जोड़ी को ढोला-मारू की उपमा दी जाती है | यही नहीं आज भी लोक गीतों में स्त्रियाँ अपने प्रियतम को ढोला के नाम से ही संबोधित करती है,ढोला शब्द पति शब्द का प्रयायवाची ही बन चूका है |राजस्थान की ग्रामीण स्त्रियाँ आज भी विभिन्न मौकों पर ढोला-मारू के गीत बड़े चाव से गाती है |

30/07/2013

कल मैं पुणे जाने वाली एक ट्रेन में स्लीपर कोच में बैठा हुआ था कि एक स्टेशन से एक 18-19 वर्षीय खूबसूरत लड़की चढ़ी जिसका मेरे सामने वाली बर्थ पर रिजर्वेशन था.. उसके पापा उसे छोड़ने आये थे ।
"डैडी आप जाइये अब, ट्रेन तो दस मिनट खड़ी रहेगी यहाँ दस मिनट का स्टॉपेज है ।" उसने पिता से कहा । "कोई बात नहीं बेटा, 10 मिनटऔर तेरे साथ
बिता लूँगा, अबपता नहीं कब आएगी तू ।"पिता ने जवाब दिया ।
लड़की शायद पुणे में अध्ययन कर रही होगी क्योंकि उम्र और वेशभूषा से विवाहित नहीं लग रही थी ।
ट्रेन चलने लगी तो उसने खिड़की से बाहर प्लेटफार्मपर खड़े पिता को हाथ हिलाकर बाय कहा ।
"बाय डैडी.... अरे ये क्या हुआ आपको ! अरे नहीं .. प्लीज।" पिता की आँखों में आंसू थे । ट्रेन अपनी रफ्तार पकडती जा रही थी और पिता रुमाल से आंसू
पोंछते हुए स्टेशन से बाहर जा रहे थे । लड़की ने फोन लगाया.. "हेलो मम्मी.. ये क्या है यार! जैसे ही ट्रेन स्टार्ट हुई डैडी तो रोने लग गये..
अब मैं नेक्स्ट टाइम कभी भी उनको सी-ऑफ के लिए नहीं कहूँगी.. भले अकेली आ जाउंगी ऑटो से.. अच्छा बाय.. पहुँचते ही कॉल करुँगी..
डैडी का खयाल रखना ओके ।"
मैं कुछ देर तक लड़की को सिर्फ इस आशा से देखता रहा कि पारदर्शी चश्मे से झांकती उन आँखों से मुझे अश्रुधारा दिख जाए पर मुझे निराशा ही हाथ
लगी.. उन आँखों में नमी भी ना थी । कुछ देर बाद लड़की ने फिर किसी को फोन लगाया- "हेलो जानू कैसे हो.... मैं ट्रेन में बैठ गई हूँ.. हाँ अभी चली है यहाँ से.. कल अर्ली-मोर्निंग पूना पहुँच जाउंगी.. लेने आ जाना.. लव यू टू यार, मैंने भी बहुत मिस किया तुम्हे.. बस कुछ घंटे और सब्र कर लो कल
तो पहुँच ही जाऊँगी ।"..
मैं मानता हूँ कि आज के युगमें बच्चों को उच्च शिक्षा हेतु बाहर भेजना आवश्यक है पर इस बात में भीकोई दो राय नहीं कि इसके कईदुष्परिणाम
भी हैं । मैं यह नहीं कह रहा कि बाहर पढने वाले हर लड़के
लड़कियां ऐंसे होते हैं । मैं सिर्फ उनकी बात कर रहा हूँ जो पाश्चात्य संस्कृति की इस हवा में अपने कदम बहकने से नहीं रोक पाए । आजकल तो भारतीय शहरों में लिव इन रिलेशनशिप भी आम बात हो गई है । लड़के लडकियाँ मजे से जोड़े बनाकर रह रहे हैं.. लोकलाज और जिम्मेदारी के अहसास
से दूर.. शादी विवाह की झंझटों से परे ! मकसद सिर्फ आनंद लेना और कुछ नहीं !! . .
आप लोगों की प्रतिक्रियाएं और विचार आमंत्रिt

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