दैनिक जीवन में कंप्यूटर और दूसरे संबंधित (related) तकनीकों का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है और हम सभी के लिए आवश्यकता बन गया है। तकनीक का उपयोग करने के फायदे और नुकसान दोनों हैं, इसने हमारे जीवन को आसान बना दिया है लेकिन इसने हमें विभिन्न नए प्रकार के अपराधों से अवगत कराया है। साथ ही, भारत में डिजिटलीकरण (digitalization) के उदय के साथ, भारत में डिजिटल (Digital) लेनदेन में कई गुना वृद्धि हुई है और वित्त
ीय धोखाधड़ी (Financial Frauds) की संख्या में तेजी से उछाल आया है। साइबर खतरा इतना व्यापक हो चुका है कि ऐसा लगता है कि भविष्य के युद्ध जमीन, हवा या पानी में होने वाले पारंपरिक युद्धों की बजाय साइबरस्पेस (Cyberspace) में लड़े जाएँगे। साइबर जालसाज (Cyber Fraudsters) हर दिन आम जनता को निशाना बनाने के लिए नए-नए तरीके ईजाद (devise) करते हैं। जिससे पूरे देश में साइबर अपराध के कई हॉटस्पॉट (Hotspot) उभरकर सामने आ रहें हैं।
साइबर अपराध (Cyber Fraud) से निपटने के लिए जागरूकता (Awareness) और साइबर शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण कुंजी (Key) है; यह हमें साइबर अपराध का शिकार बनने के लिए अपनी और अपने परिवार की रक्षा करने में मदद करता है। सुरक्षित रहने के लिए सावधानी बरतना हमारा कर्तव्य है। साइबर अपराध जैसे वित्तीय धोखाधड़ी (Financial Fraud), सोशल मीडिया रिलेटेड क्राइम, harassment etc. ज्यादातर लोगौं को अपना शिकार बनाते हैं। इस प्रकार, सभी को साइबर स्वच्छता (cyber hygiene) के स्टेप्स (Steps) का पालन करना चाहिए और लेटेस्ट साइबर ट्रेंड्स (Latest Cyber Trends), टेक्नोलाँजी (Technology) के सुरक्षित (Safe) उपयोग आदि के बारे में जागरूक होना चाहिए।
सोशल मीडिया दूसरों के साथ संवाद (communicate) करने और सूचना प्रसारित करने का एक बहुत ही उपयोगी साधन (tool) हो सकता है। फिर भी इसका उपयोग सावधानी से करने की आवश्यकता है। क्योंकीं इंटरनेट पर कुछ भी पूर्णतया निजी (private) नहीं होता और एक बार कुछ ऑनलाइन हो गया तो इसके प्रसार (spread) को नियंत्रित (control) करना कठिन होता है। यह मान लेना कि साइबर अपराध है ही नहीं और ऐसी मानसिकता रखना कि आप साइबर अपराध के बारे सब कुछ जानते हैं, संभवत: यही दर्शाता है कि साइबर सुरक्षा के बारे अच्छी तरह नहीं जानते हैं। उनसे डरने या उन्हें अनदेखा करने के बजाय हमें साइबर हमलों के प्रति अपनी साइबर प्रतिरोध क्षमता (Cyber resilience) सुनिश्चित करनी चाहिए।
पीड़ित (victim) युवा एवं बुजुर्ग नागरिक, जिन्होंने इन साइबर जालसाजों (Cyber Fraudsters) के हाथों गाढ़ी कमाई खो दी होती है, उनके भारी नुकसान की गाथा सुनकर और इनकी दुर्दशा देखकर बहुत पीड़ा महसूस होती है। ये लोग भावनात्मक और आर्थिक दोनों रूप से पूरी तरह से टूट चुके होते हैं। हमारा उद्देश्य लोगों को उन अपराधों के बारे में जागरूक करना है, जो कि साइबरस्पेस (cyberspace) में हो रहे हैं, तथा लोगों को साइबर जागरूकता के साथ-साथ साइबर शिक्षित बनाना है। लोगों में अपराधियों द्वारा अपनाई जाने वाली चालबाजी (tactics) और दाँव-पेंच (modus operandi) की बेहतर समझ विकसित करना है। क्योंकी साइबर अपराधी लोगों को अपना शिकार बनाने के लिए उनमें उम्र (Age), लिंग (Gender) या आर्थिक पृष्ठभूमि (economic background) के आधार पर चुनाव नहीं करते और सभी को अपना शिकार बनाते हैं।