20/08/2026
🌐 जब भारतीय भाषाओं और तकनीक ने बनाई वैश्विक पहचान: एक प्रेरणादायी योगदान! 🇮🇳✨
जब मैंने अमेरिकन शिक्षा विभाग के डिजिटल संग्रह में योगदान दिया था।
1990 और 2000 के दशक में जब डिजिटल शिक्षा और ओपन एजुकेशनल रिसोर्सेज (OER) अपनी शुरुआती अवस्था में थे, तब अमेरिकी शिक्षा विभाग और सिरैक्यूज़ यूनिवर्सिटी द्वारा संचालित 'The Gateway to Educational Materials (GEM)' दुनिया की सबसे बड़ी पहलों में से एक थी।
इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की ओर से एक विशेष और दूरदर्शी भूमिका निभाई श्री विजय प्रभाकर नगरकर (तत्कालीन सहायक निदेशक - राजभाषा, BSNL, अहमदनगर) ने।
📌 मुख्य बिंदु और योगदान:
वैश्विक कंसोर्टियम सदस्यता: सिरैक्यूज़ यूनिवर्सिटी (USA) द्वारा उन्हें आधिकारिक रूप से अंतरराष्ट्रीय GEM Consortium Member के रूप में मान्यता दी गई।
भारतीय भाषाओं का मानकीकरण: उन्होंने भारतीय भाषाओं और भाषाई तकनीक से संबंधित डिजिटल शिक्षण सामग्रियों को अंतरराष्ट्रीय GEM मेटाडेटा मानकों के तहत वैश्विक स्तर पर कैटलॉग किया।
निःशुल्क और निष्पक्ष शिक्षा का संकल्प: 2004 में जब वैश्विक नीति में व्यावसायिक बदलाव का प्रस्ताव आया, तब उन्होंने दृढ़ता से अपने योगदान को केवल गैर-लाभकारी और विशुद्ध शैक्षिक उपयोग के लिए सुरक्षित रखने का निर्णय लिया।
व्यक्तिगत क्षमता और निष्ठा के बल पर भारतीय भाषाई संपदा को वैश्विक डिजिटल रिपॉजिटरी में दर्ज कराने का यह एक अनुकरणीय उदाहरण है। 📚💡
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